विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह नूतन अंक
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२..जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल'- ओहिना नहि तमसाइत छथि शरदिन्दु चौधरी

 

जगदीश चन्द्र ठाकुर 'अनिल'

ओहिना नहि तमसाइत छथि शरदिन्दु चौधरी

आर्यावर्त बंद भ' गेलै.

नोकरी छुटि गेलनि.

दिल्ली, मुंबइ कि कोलकाता नहि भगलाह.

पटनेमे रहिक' जीविकोपार्जनक लक्ष्य बनौलनि,

शेखर प्रकाशनक केलनि स्थापना

आरम्भ केलनि मैथिलीक सेवा

पोथी प्रकाशन आ पोथी बिक्रयक काज

साहित्यकार लोकनिसँ छलाह  परिचित

सबहक सहयोगक रहनि भरोस  

किछु गोटे करबो केलखिन

निष्ठापूर्वक सहयोग

किछु गोटे छपा लेलखिन पोथी

द'क' किछु पाइ

गेलखिन से  घूरिक' फेर नहि एलखिन

नै  देलखिन शेष राशि

नै  ल' गेलखिन शेष किताब

किछु त ल' गेलखिन सभटा किताब

द'क' मात्र आश्वासन

शीघ्रे राशि पठयबाक

तकिते रहि गेलाह हुनक बाट

मासक मास आ सालक साल

एहेन स्थितिमे कहू त तामस कोना ने हेतनि !

एकटा सज्जन

हिनका पोथी  

देबे ने केलखिन

आ मंचपर बाजि देलखिन

जे फल्लाँजी एखन तक पोथीक दाम  नै देलनि

एहेन स्थितिमे कहू त तामस कोना ने हेतनि !

विशेषांक लेल एकटा संस्थाक काज केलनि

पारिश्रमिकक बदला पौलनि

दू सय अस्सी टाकाक चेक  

एहेन स्थितिमे कहू त तामस कोना ने हेतनि !

एकटा संस्था केलकनि

पुरस्कार  देबाक  घोषणा

कहलखिन अध्यक्ष

हुनका देबनि पुरस्कार त

माहुर खाक' मरि जायब हम

एहन स्थितिमे कहू त  तामस कोना ने हेतनि !

क्यो अप्पन  रचनाक प्रशंसा

छद्म नामसँ करथि स्वयं

क्यो अप्पन पोथीसँ बेसी  

महत्वपूर्ण नामहि कें  बूझथि

एहन स्थितिमे  कहू त तामस कोना ने हेतनि !

पत्रकारिता- धर्मक पालन नै करता क्यो  

सम्पादकीयमे फोटो लेकिन रह्य अबस्से

शुद्ध-शुद्ध लिखबा केर बदला

करथि गोलैसी

पुरस्कार लुझबा केर खातिर  

वेकल रहथि क्यो

एहन स्थितिमे कहू त  तामस  कोना ने हेतनि !

क्यो जीविते अपना नामपर

चलाबथि पुरस्कार

क्यो रचना नहि छपलापर

भ जाथि

मारि करबाक लेल तैयार

कियो अपन अपकर्मके

मानथि सदाचार

एहन स्थितिमे कहू त  तामस  कोना ने हेतनि !

मिथिला आ मैथिलीक बाटपर काँट बहुत अछि

से के बूझत ! से के देखत ! कहिया देखत !

बहुत बात अछि शेष बढ़ाबय रक्त चाप जे

ओहिना नहि तमसाइत छथि शरदिन्दु चौधरी !

-संपर्क-8789616115

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