प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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२.३.शरदिन्दु चौधरी जी केर साक्षात्कार जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' द्वारा

 

मैथिली आ मिथिलाक लेल निर्भीक, स्वाभिमानी, जागरूक, ज्ञानी आ दृष्टि-संपन्न पत्रकार चाही - शरदिन्दु चौधरी

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : भाषा आन्दोलन एवं राज्य आन्दोलन केर दिशा की छै?

शरदिन्दु चौधरी :  माटिपर काज कहाँ भ' रहल अछि ! काज छै, गाम-गाममे मैथिलीक प्रति लोककें जागरूक बनेबाक,मैथिली पढ़बाक आ पढयबाक लेल उचित व्यवस्था करब, पाठ्य पुस्तकक प्रकाशन आ लोक लग ओकर उपलब्धता सुनिश्चित करब त लोक दिल्ली जाक' फोटो खिचयबामे लागि जाइत अछि, आन्दोलनक नामपर अपनाकें प्रदर्शित करबामे  लागि जाइत अछि। जन सामान्यसँ कोनो सरोकार नहि,ए सीमे बैसिक' सर्वहारा आ जन सामान्यक बात करैत लोक अपन व्यवसाय चलबैत अछि। मिथिलामे पान दोकानबला, चाह दोकानबलासभ मैथिलीमे नहि गप करैत अछि, कतहु साइन बोर्ड मैथिलीमे नहि अछि, के देखतै?

अधिकांश मैथिल मैथिली भाषाक प्रयोग छोड़ि चुकल छथि, ने पढैत छथि,ने लिखैत छथि मात्र भाषण दैत छथि- हुनक परिवारमे देखू, हुनक साहचर्यमे रहिक' देखू मैथिल समाजकें मार्गदर्शन करबाक लेल मैथिली पत्रकारिताकें समृद्ध होयब आवश्यक अछि। मैथिलकें, मिथिलाकें आ मैथिलीकें अपन अस्मिताक रक्षा करैत अपन भूभागकें सुसंपन्न बनयबाक लेल पत्रकारिताक धारकें, स्वरकें तेज करहि पड़तैक आ ताहि लेल निर्भीक,स्वाभिमानी, जागरूक,ग्यानी आ दृष्टि-संपन्न पत्रकार चाही, पत्रकारिता समाजकें प्रभावित करयबला सशक्त माध्यम  अछि, पत्रकारिताक काज होइछ समाजकें साकांक्ष राखब आ नीक बाटपर ल' जयबामे मार्गदर्शन करब, त्याज्य अथवा खराब काजक निन्दा करब आ नीक काज करबाक लेल प्रोत्साहित करब, समाजमे पसरल ईर्ष्या,द्वेष,साप्रदायिकता,भेद-भाव,जातीयता आदिक चातुर्यपूर्ण ढंगसँ विरोध करैत समाजमे सौहार्द बनौने रहब, शिक्षा, स्वास्थ्य आ समाजोपयोगी सभ सुविधा बहाल रहय ताहि हेतु तथा जनोपयोगी विषयक संचालन,देख-रेख ठीकसँ भ' रहल अछि कि नहि ताहिपर नजरि रखैत ओहि विषयक प्रति जनमानसकें आकृष्ट करब। मैथिलीमे सशक्त दसोटा पत्रकार तैयार होथि त मैथिली आ  मिथिलाक  कल्याण  भ' सकैत अछि

 

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : मैथिलीमे पुरस्कारक राजनीतिपर अपनेक कि कहब अछि?

शरदिन्दु चौधरी :  राजनीतिए पुरस्कारक माध्यम बनि गेल अछि। पोथीपर पुरस्कार नहि देल जाइत अछि। जिनकर पोथी नीक छनि, हुनको रानीतिएक मजबूरीसँ पुरस्कार भेटैत छनि। पहिने तय भ' जाइ छै जे पुरस्कार किनका देबाक अछि, शेष प्रक्रियाक औपचारिकता मात्र होइत अछि। एकटा पैघ विद्वान सम्पादकीयमे लिखैत छथि जे मैथिलीक सभसँ पैघ  पुरस्कार कीनल जाइत अछि, अगिला बेर हुनका पुरस्कार द' देल जाइत छनि, ओ खुशीसँ ल' लैत छथि आ चुप भ' जाइत छथि

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : की पुरस्कार प्रदान करब अथवा स्वीकार करब अपराध थिक?

शरदिन्दु चौधरी :  हमर अभिप्राय अछि पोथीपर पुरस्कारक निर्णय हो, व्यक्तिपर नहि, चयन प्रक्रिया स्वस्थ हो से लोककें लगबाक चाही,जूरीमे उपयुक्त लोक रहथि आ हुनकापर कोनो दबाब नहि होनि।

रचनाकर्मक उत्कृष्टता सुनिश्चित करबाक बदला साहित्यकार लोकनि पुरस्कार लुझबाक लेल गोल-गोलैसीमे लागि जाइत छथि आ उपकृत करबाक लेल पुरस्कार देल जाइत अछि,से अनुचित अछि।

संस्था सभ सेहो एहि खेलमे शामिल भ' गेल अछि, 'अहाँ हमरा अपन संस्थामे सम्मानित करू, हम अहाँकें अपना संस्थामे सम्मानित करब' यैह खेल चलि रहल अछि, ई उचित नहि अछि।  

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : मैथिलीमे वर्तमान व्यंग्य कोम्हर जा रहल अछि?

शरदिन्दु चौधरी :  व्यंग्य त आबे लिखा रहल अछि, पहिने त व्यंग्यक नामपर एकटा ख़ास वर्गक खिधांसमात्र लिखाइत छल। एमहर सक्रियता कम भेल अछि।बटुक भाइ नहि रहलाह,ओहो किछु सालसँ सक्रिय नहि छलाह, मन्त्रेश्वर बाबू, वैद्यनाथ 'विमल', वीरेंद्र नारायण झा आ हमरो सक्रियता कम भेल अछि एमहर नवकृष्ण ऐहिक, राज कुमार मिश्र छथि, हिनका लोकनिसँ बेसी आशा कयल जा सकैत अछि 

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : मैथिलीमे अकादमीए नै, संस्था,पत्रिका सभपर सेहो बारि देबाक राजनीति छै, एहिपर अपनेक की कहब अछि?

शरदिन्दु चौधरी :  सभ ठाम 'ग्रुप' बनि गेल छै। मैथिली आ मिथिलाक कल्याण लक्ष्य रह्तै तखने अनियमितता दूर भ' सकैत अछि, अहू लेल सक्षम पत्रकारिताक आवश्यकता अछि। 

 

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : मैथिलीमे प्रकाशनक स्थितिपर अपनेक की विचार अछि?

शरदिन्दु चौधरी :   प्रकाशन त बहुत भ' रहल अछि,किन्तु सार्थक प्रकाशन बीस प्रतिशत मात्र अछि। भाषाक विकास लेल विद्यार्थी आ मैथिली पाठ्यक्रमक अनुरूप पोथी छापल जयबाक चाही। मैथिली पाथ्यक्रमक पोथी विद्यार्थी वर्गकें उपलब्ध नहि भ' रहल छनि। साहित्यकार आ प्रकाशक दुनूक दायित्व छनि जे पाठकक संख्या निरंतर बढय, से  सोचथि। लेखनक क्षेत्रमे अयबाक लेल सभसँ पहिल शर्त अछि भाषाक ज्ञान आ शब्द सामर्थ्य, शुद्ध आ प्रांजल भाषा त लेखनक लेल आवश्यक अछिये। मैथिलीक दुर्भाग्य अछि जे जिनका शब्दक ज्ञान नहि छनि,सेहो महान साहित्यकारक  कोटिमे आबिक' बैसि जाइत छथि आ हुनक चारण भ' ' ज्ञानी लोक ओत' उपस्थित रहैत छथि। एकटा लेखक जखन गुट बना सकैत छथि, गुट बदलि सकैत छथि, पाइ खर्च क' ', पैरवी क'' पुरस्कार-सम्मान पाबि सकैत छथि त कनेक मेहनति क'' अपन शब्दकें सम्मान नहि द' सकैत छथि? शब्द सामर्थ्यक धनीक साहित्यकारक संख्या आंगुरपर गन'बला अछि तखन एतेक रास प्रकाशन कोन काजक?

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : शेखर प्रकाशन की सभ केलक आ वर्तमानमे की सभ क' रहल अछि?

शरदिन्दु चौधरी :  शेखर प्रकाशन प्रकाशक आ मुद्रक दुनू रूपमे काज करैत आयल अछि, 52  टा महत्वपूर्ण पोथी अपना दमपर छपलक, आधा-आधी खर्चपर लगभग तीन दर्जन पोथी छपने अछि।

एकर महत्व भाषा संस्थान,मैसूर,साहित्य अकादमी,दिल्ली आ मैथिली अकादमी, पटना जनैत अछि। प्रतियोगी परीक्षा सभमे मैथिली विषयक संग सफल भेनिहार विद्यार्थी लोकनि जनैत छथि। 

साहित्यसँ इतर क्षेत्रमे उल्लेखनीय योगदान हेतु उपयुक्त व्यक्तिकें पुरस्कारक रूपमे एगारह हजार टाका,शाल आ प्रशस्ति पत्र देल जाइत छनि। वर्ष 2004सँ 2008 धरि आ 2019 तथा 2022 मे अनुसंधान एवं ज्ञानवर्धक गैर-साहित्यिक आलेख हेतुमिथिलाक आर्थिक स्थिति आ सुधारपर आलेख हेतु,        

पत्रकारिता हेतु, मिथिलाक जैविक सम्पदा माछ,मखान,पान आदिक प्रोसेसिंग आदि विषयपर सैकड़ो आलेख हेतु, मैथिलीक विद्यार्थीकें प्रतियोगी परीक्षाक तैयारी हेतु उपयुक्त पोथीक लेखन हेतु आ टीवी पत्रकारितामे प्रशंसनीय विश्लेष्णात्मक प्रस्तुतिकरण हेतु क्रमशः श्री पंचानन मिश्र, नरेन्द्र झा,राम भरोस कापड़ि'भ्रमर',विद्यानाथ झा,रमण कुमार झा और स्नेहा झाकें ई पुरस्कार देल गेलनि अछि।

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : अपनेक घरमे मैथिलीक की स्थिति अछि?

शरदिन्दु चौधरी :  हमर सभ धिया-पुता मैथिली बजैत अछि, मैथिली विषय राखि क्यो पढैत से पढ़ाइए ठीकसँ नहि होइत छलै।

जगदीश चंद्र ठाकुर 'अनिल' : राज्य सरकार द्वारा पत्रकार लोकनि लेल जे पेंशन योजना स्वीकृत भेलै तकर लाभ अपनेकें किए नहि प्राप्त भेल?

शरदिन्दु चौधरी :  हम जखन बुझलिऐ आ आवेदन प्रस्तुत करितहुँ त कहलक समय समाप्त भ' गेलै।

                      

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