विदेह ४४२ म अंक पर पाठकीय मन्तव्य
प्रणव कुमार झा
मोहन कुमार झा, अमरेश ठाकुर, डॉ
योगानन्द झा आ गजेंद्र ठाकुर के लेख नीक लागल। संतोष राय बटोही के कथा गैस
सिलिंडर मौजूदा समस्या पर प्रकाश दैत छैक, घरेलू हिंसा आ ओकरा पाछा आर्थिक
दवाव के उद्धरित करय छैक, मुदा प्लॉट में कनि कमी लागि रहल छैक। कहानी में
परिवेश कोनो गाम के देल गेल छैक मुदा ई बात गला से उतरय बला नै छैक जे कोनो
गाम के कोनो घर के चूल्हा गैस के कारण नै जरय! ताहि दूआरे प्लॉट कोनो क़स्बा
के रहबाक चाहि छल।
अशोक कुमार ठाकुर आ आचार्य रामानंद मंडल के कविता ध्यानाकर्षण केलक।
देश के वर्त्तमान स्थिति के परिप्रेक्ष्य में विदेह के पुरान अंक में छपल
एकटा खिस्सा लीक - लीक स्वाभाविक रूप से मोन पड़ल।
आशीष अनचिन्हार
प्रणव कुमार झा केर आलेख "डिजिटल दुनियाँ मे सायबर हाइजिन" बहुत नीक आलेख
अछि। वर्तमानमे लोक डिजिटल कचरासँ घेराएल अछि, ई आलेख पढ़ि पाठक ओहि
कचराकेँ साफ कऽ लेताह तऽ एहि लेखक सार्थकता मानू। संगहि साइबर फ्राडसँ
बचबाक सेहो युक्ति दैत अछि ई आलेख। उम्मेद अछि जे लेखक एहन आलेख लिखैत
रहताह। हिनक कविता "आदमी" तुकान्त रूपमे नीक छनि।
नव कवि अशोक कुमार ठाकुरक स्वागत छनि। मोहन कुमार झाक विदेहमे स्वागत छनि।
रामेश्वर प्रसाद मण्डल
(विदेह ऑडियो-वीडियोपर)
सभ गीत आर गजल एक पर एक कर्नप्रिय लगल। मन होइत रहल जे सूनिते रहि, लाजवाब
प्रस्तुति आ शानदार रचना। गजेन्द्र जी अहाँ केँ आ संगे सुर - संगीत भरैबला
केँ दिल सँ बेसी रास बधाइ। जय मिथिला! जय मैथिली!!
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