विदेह ४४१ म अंक पर पाठकीय मन्तव्य
मानेश्वर मनुज
तेलुगु काव्य: काठक घोड़ा [मूल तेलुगु'कोय्या गुर्रम'] मूल तेलुगु:
नग्नमुनि (मानेपल्लि हृषीकेशवराव) मैथिली अनुवाद: मानेश्वर मनुज [खण्ड ३]
अहाँक कविताक व्याख्या बेसी नीक अछि। अपूर्व। ई एकटा क्लासिक व्याख्या अछि।
रमेश कुमार राय
बहुत नीक रचना सभ।
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