
बद्रीनाथ राय अमात्य
५ टा बीहनि कथा
१
ज्ञानपीठ पुरस्कारसँ पुरस्कृत हमर बरद
हमर भाषाविद बरद अपन नीक दायित्वक निर्वहन करैत अछी।पुरस्कार पेबाक सक्षम
पात्र रहितहुँ पुरस्कारक लोभी नञि अछि मुदा हम ओकर नीक दायित्वक निर्वहनसँ
प्रशन्न भऽ सालमे दू बेर सुकराति दिन भरपेट्टा कुट्टी भुस्सा सानी आऔर
हरियर घास खुआ पुरस्कार रुपमे नव गर्दामी जौड़ बदैल ओकरा सम्मानित करैत
छियैक। ओहो अपन दायित्वक निर्वहन करैत हमर खुवेलाक तदनुकूल गोबर दैत अछि।हम
ई बरद बरदक हाटसँ किनक' अनने छी।बरद पोसिनदार कहने छल जे हमर बरद बहुतो बेर
ज्ञानपीठ पुरस्कार पौने अछि।मुदा हमरा अपन कृत्यपर पश्चाताप होइत अछि जे हम
ज्ञानपीठ पुरस्कारसँ पुरस्कृत अपन बरद के छोट साधारण पुरस्कारसँ पुरस्कृत
करैत छियैक। हमरा अधिकार क्षेत्र मे रहितैक तऽ हमहूँ अपन बरदके ज्ञानपीठ
पुरस्कारसँ पुरस्कृत करितियैक।हम विवश छी मुदा हम ओहि साँढ़ गायके के धनवाद
दैत छियैक जाहि गाय साँढ़क मधुर आऔर सफल मिलनसँ हमर बरदक जन्म भेल छैक।ओना
ई बरदक जाइते बहुत वुधियार विद्वान भाषाविद होइत अछि। ई बरदक जाइत मराठी
बिहारी उड़िया तेलुगु बंगाली सब हरवाहक भाषा बुझैत अछि।हमरो अपन मैथिल बरद
विद्वान वुद्धिमान वुधियार बुझना जाइए कारण कीनक' अनने छी अपन बरद अछि,हम
पुरस्कृत करिते रहबै कारण हमहूँ तऽ हरवाहे छी।
२
हमर सासुरमे हमर सारि मीनाक्षी चन्द्रवदनीके हमरा रिझेबाक लेल हमर सेवामे
प्रस्तुत काएल गेल।ओ अपने सनक मीठ शर्बत हमर सेवामे प्रस्तुत करैत मनमे
प्रेमक राग भरने अनुराग सहित कहलनि--एहिवेर जँ अपनेलोकनि हमर मनोनुकूल
विद्वान वीर्यवान कमौआ वुद्धिमान वऽरसँ हमर विवाह नञि करेलहुँ तऽ हम
कवियित्री बनि जाएब।आब बहुत बेसी बिहारि बसात बर्दास्त नञि होइए। एहि
वसन्ती वयसमे विवाह नञि भेल तऽ हम कृष्णाभिसारिका बनि वयस बिता लेब,बाल
कुमारिये रहि जाएब मुदा विवाह नञि करब।धिक्-धिक् धिक्कार अहाँक पौरुषके।हम
कहलियनि --अपने बेरबेर हमर पौरुषक परीक्षण केनहिं छी,तेकरा बादो अपनेके हमर
पौरुषपर शंका बनल अछि?सब दिन अपने शुक्लाभिसारिका सन हमर शयन कक्षक शोभा
बढ़बैत आएलि छी, हमहूँ अपन प्रेम अपन शुक्लाभिसारिका सन परसैत आएल छी।हम
अपनेक प्रणय निवेदनके सब दिनसँ सम्मान करैत मान रखैत रहलहुँ अछि।धिक्कार
अपनेक एहि कृतघ्न यौवनके!!ओ अपन बातक व्यंग्य वाण सम्हारि हमरापर प्रहार
करैत बजलथि--छी!अहूँ कोनो आदमीयें छी!हम अहाँसँ आब नञि बाजब। हम हुनक
व्यंगवाणसँ विद्ध भेल डेराइते कहलियनि--आमदनी रहैत तऽ अवश्य आदमी
रहितहुँ,मुदा अहाँ हमर मानिनी छी,अहाँक मान रखबाक लेल रुसलापर अहाँके अवश्य
मनाएब।अपनेक कामना पूर्ण हुअए से शुभकामनाक संङ आशीर्वाद सेहो अछि,ओना
कवियित्री बनब से नीक बात मुदा विवाहक आ पुरस्कारक लोभमे मैथिलीक मंच महकबै
बाली कवियित्री नञि बनी सएह नीक। कवियित्रीए बनब तऽ महादेवी वर्मा
बनि,सुभद्रा कुमारी चौहान बनी।वीरांगना बनब तऽ लक्ष्मीबाई बनि।अहाँ
श्वेतवर्णी वनिता छी,अहाँक लेल बहुतो विकल्प खुजल छैक।
३
हमर महिंसलेट कनिञा ओभर वेट रहितहुँ कवियित्री छथि।मित्र कहलनि---अहाँक कवियित्री कनिञाक कविता लेखनमे बहुत अशुद्धि रहैत छनि।मित्रक ई बात हमरा नञि नीक लागल। हमहूँ जरल मनसँ मित्रके कहिए देलियनि जे मित्रता रखबाक अछि तऽ प्रशंसक बनू।हमरा ई बात बुझले अछि जे मन अशुद्ध भेलापर ओ कवियित्री भेलि छथि,तखन अशुद्ध मनसँ शुद्ध कविता कोना लिखती?मित्र कहलनि जे हम हुनका पुरस्कृत हेबाक लेल पुरस्कृत हेबाक योग किछु नीक नीक कविता लिखि दियनि की?हम कहलियनि -- अहुँ तऽ अधजरुआ बीड़िये छी जेकरा पीलाक बाद पैरसँ मसैलक' मिझाओल जाइत छैक तथापि अपनेक स्वागत अछि,एहिमे पुछबाक की प्रयोजन?मित्र पुन: पुछि बैसला--हमरा की भेटत?हम हुनक शंकाक समाधान करैत कहलियनि जे ओ अपनेक भावज छथि, अपने जे चाहबै सएह भेटत,अस्सल पुरस्कार तऽ अहींके भेटत। मित्र प्रशन्न होइत कहला-- हाँ ओ भावज अवश्य छथि मुदा हम अपनेसँ सात सालक जेठ छी।
४
हमर कनिञाके लेखिका बनबाक भूत
लागल छनि आऔर हमरो कवि बनबाक।ओ अपनाके हमाज सेविका बुझैत छथि जे अपन अपान
वायु त्यागब समाज सेवा बुझैत छथि।ओ मिथिलाक विभिन्न सम्मानित मंचपर अपन
अपान वायु त्यागि मंचके मँहका समाजक सेवा करैत छथि।ओ अपन सौन्दर्यसँ
स्त्रैन मैथिल साहित्यकार समीक्षके हृदयपर अपन अखण्ड साम्राज्य स्थापित
केने छथि।हमर भूत हमर कनिञा स्वामी सुधारक यंत्र बेलनासँ कखनो काल झारि दैत
छथि मुदा हम हुनक भूत झारैसँ असमर्थ रहै छी कारण हम आब यौवनक वैभवसँ
सम्पन्न नञि,विपन्न छी मुदा हमर कनिञाक यौवनक वैभव एखनो बाँचल छनि,जहिना ओ
साहित्य आऔर शब्दपर अत्याचार करै छथि तहिना हमरो लाचार बुझि हमरापर खूब
अत्याचार करै छथि।एखनो ओ षोडसी सनक खतरनाक यौवनक खन्जर रखने छथि।हम हुनक
धरगर खन्जरसँ सदिखन डेराएल अस्त व्यस्त त्रस्त रहै छी,हुनकामे ठठब हमर
बूत्ताक बाहरक बात अछि। ओ रससँ भरल छथि ताँइ हमरासँ हरदम रुसले रहै छथि।ओ
यौवनक वैभवसँ विपन्न नञि,पूर्णरूपेण सम्पन्न आऔर वैज्ञानिक सोच रखनिहारि
छथि।शाड़ीमे समेटल रहब आब ओ अनुचित बुझै छथि आब ओ सलबारपर उतरि आएल
छथि,स्कर्ट आऔर फराक धरि पहुचैमे बेसी विलम्ब नञि हेतेन। वस्त्र ओ अंग
झाँपक लेल नञि,स्वाद आऔर स्वार्थानुकूल पहिरैत छथि।जहिना हमर शब्द
साहित्यिक सृजनमे नोरसँ भीजल रहैत अछि तहिना हुनक शब्द विलासिताक तेलमे तरल
।ओ वैज्ञानिक सोचक संङ समतामूलक साहित्यिक सोच सेहो रखैत छथि।हुनक कहब छनि
जे कोनो खगता बेगरताक आपूर्ति जेना कोहुना कत्तहुसँ करबाक चाही।ओ कोनो तरहक
आदानप्रदानमे बहुत बेसी विश्वास रखैत छथि।आनन्द लेब आऔर देब हुनक जीवनक मूल
मंत्र छनि।जहिना हुनक साहित्यिक स्वर पुरुषक प्रखर विरोधसँ शुरु होइत
छनि;तहिना हमर स्वर हुनक व्यवहार विचार आऔर हुनक बनाओल विधेयकक विरोधसँ। हम
युगल जोड़ी वैचारिक विधान सभामे एक दोसराके विरोध आऔर विपक्षमे बैसैत
छी।हमरा घरमे हमर सासुरक सरकार चलैत अछि। हमर परोसमे रहनिहार किछू पोसल
पत्तलचट्टा पत्रकार सरकार चलबैमे हमर साउस ससुरकेँ पूर्ण सहयोग समर्थन दैत
छनि।हमर साउस ससुर केन्द्रीय सत्तामे रहि दुर रहितहुँ दूर्भाष सनक
दुर्विक्षण यंत्रसँ हमरा घरक सरकार चलबैत छथि।जहिना बिहारक भूतपूर्व
मुख्यमंत्री स्व जगन्नाथ मिश्र अपन सत्ताके सुरक्षित संरक्षित आऔर अक्षुण्य
रखबाक लेल एकटा तांत्रिकके कहलापर 108 खस्सीक खूनसँ नहाएल छला तहिना हमर
कनिञा हमर नोरसँ नहाइत छथि,जहिना जगन्नाथ मिश्र चाहैत छला जे
शोषित,वंचित,उपेक्षित बिना विरोध केने मरनासन्न सूतल रहय तहिना हमर कनिञा
चाहैत छथि।हुनक विचार श्रीमान लालू प्रसाद मुख्यमंत्रीजीसँ सेहो मिलैत
छनि।हुनक कहब छनि जे पढ़ु लिखु जुनि, मूर्ख बनि हमर ध्वजा वाहक बनल रहू ।जँ
पढ़बाक इच्छा अछि त' हमरा पढ़ु, हमर यौवन ,हमर विचार आऔर हमर खगता बेगरताके
पढ़ु।हम गुमनामी के अन्हारमे भूखले विहार करै छी, मुदा हमर कनिञा खूब चमकै
दमकै आओर छमकै छथि।हमर गृहस्थीक गाड़ी, गृहमंत्रालय आऔर सरकार भगवानक भरोसे
चलैत अछि।हमर कनिञाक लिखल कवितासँ बेसी हुनक यौवनमे बेसी अधिक धार छनि।ओ
गर्धप स्वरमे गबितो छथि,हुनक गायनसँ समय गति,हवा बसात सूरुज चान आऔर
प्रकृति किछु अपान वायु सुघि आनन्दित रहनिहार युवकक दृष्टिकोणसँ थम्हि जाइत
छैक मुदा हमरा हुनक गायन वासनाक भूखसँ भूखलि चिचियाइत पिलिया कुक्कुड़ सन
बुझना जाइत अछि।ओ कुचेष्टासँ प्रतिष्ठा प्राप्त करैमे व्यवहार कुशल
छथि।हुनक घिनाएल चरित्रसँ बेसी हुनक चेहरा अधिक चर्चित आऔर लोकप्रिय
छनि।हुनक कहब छनि जे कोनो भूखके जेना कहुना शान्त करक चाही।हुनका कुक्कुड़
समाज स्वजातीय बुझि बेर -बेर विभिन्न विशेष विधान बनाक' पुरस्कृतो केलकनि
अछि।एकटा हम छी जे सरकार आऔर कनिञा द्वारा एखनो बारल ,उपेक्षित आऔर
बहिस्कृत छी कारण हम रुपैया हीन आऔर रुप हीन छी।
५
मृगनयनी चन्द्रवदनी चम्पावती चम्पै रंङक आकर्षक परिधान पहिरि अपन अमृत सदृश यौवन लए अपन देवताक प्रतीक्षामे प्रतीक्षारत छलि।हुनक अंग सौष्ठव उन्नत नितम्ब पुष्ट पयोधर प्रेमक प्यासल प्रकृतिके प्यास बढ़ा रहल छल।बरियाती एबाक दीर्घकालीन प्रतीक्षा समाप्त भेल। मीनाक्षी चंचल चन्द्रवदनी चम्पावतीक देह पारिजात पुष्प सन गमकि रहल छल जे वातावरणमे मादकता घोरि रहल छल। अतिथि सतकारक सुन्दर पारम्परिक परम्परा परम्परानुसार पूर्ण होमय लागल ।बिच्चहिमे चम्पावती जे कूटल कारी मिरचाइ सन करुगर छलि वऽरसँ ज्ञानक गंगा बहबैत बाजि उठली---अहाँक वौद्धिक आऔर पौरुषक परीक्षण विधि -विधानपूर्वक सजल सजाओल शयन कक्षमे सेजपर काएल जाएत।ई बात सुनितहिं उपस्थित कोमलांगी स्त्रीगण लाजे कठुआ गेली आऔर पुरुषवर्ग सेहो लजा गेला मुदा धीर स्थिर वीरांगना चन्द्रवदनी चम्पावती अपन हार्दिक इच्छाके इच्छानुकूल परिणाम तक पहुँचेबाक लेल तैयार अड़ले छलि।जाहि किछु स्त्रीगण पुरुषके ई बात कठाइन सन लगलनि ओ अपन अपन घऽरक रास्ता धेलनि आऔर किछु धैर्य धारण केनिहारि स्त्रीगण पुरुष एहि कौतुहलपूर्ण दृश्यके देखबाक लेल तैयार बैसले छला। हुनकालोकनीक हृदयक स्पन्दन गति बढ़ि गेल छलनि।उपस्थित लोकमे परस्पर विरोधी विचारक आदानप्रदान होमय लागल।बहुत विद्वान विदूषि लोकनि परम्परा परिवर्तनक पक्षमे अपन अपन विचार व्यक्त केलनि ,बहुते लोक विपक्षमे सेहो छला ।निष्पक्ष किनको नञि देखल गेल।विरोधी विचारक आदानप्रदानमे विशेष नवविवाहिता आऔर अविवाहिता नवयौवना वनिता छली। किनको विरोधक वा समर्थनक स्वर प्रखर, किनको स्वर दबल छलनि।केओ विरोधक स्वरमे बाजि उठली---एकरा की कहल जेबाक चाही?पौरुषक परीक्षण वा विवाहसँ पूर्व पियास मिझेबाक कुत्सित प्रयास?मुदा विद्वान वुद्धिमान वऽर जे विकसित समाजक वैज्ञानिक सोच रखनिहार विशेष जाति वर्गक छला ओ आलिंगनमे आवद्ध होमक लेल उताहुल उद्यत अपन पौरुषक परीक्षणक आऔर प्रदर्शन कए प्रमाण पत्र प्राप्त करबाक लेल पूर्ण प्रयासरत छलाहे।हुनको पौरुषक परीक्षण देबाक लेल अनुकूल अंगमे उत्तेजना आबि गेल छलनि।चन्द्रवदनी बिल्ब स्तनी चम्पावती हुनक आङुर पकड़ि आदर आऔर सम्मानपूर्वक अपन शयन कक्षमे प्रवेश केलनि जे हुनक अध्ययन कक्ष सेहो छलनि।वर महोदय सेहो कुचेष्टासँ प्रतिष्ठा प्राप्त करबाक प्रयास केलनि मुदा पूर्णरूपेण विफल रहला।ओ मारक मारिसँ मर्माहत छला मुदा मारक मर्म नञि बुझैत छला। आधुनिकताक बजारमे बेमोल बिकाइवाली वनिता चन्द्रमुखी चम्पावतीके शयन कक्षमे बहुत बेसी बिलम्ब भेलनि।बाहर बैसल लोकके बुझना गेलनि जे आब ई पियासल युगलजोड़ी प्रशव भेलाक बादे बहरेता ।बहुते औगताएल लोक सब अपन अपन घऽर गेला, बहुते लोक एखनो विवाहक अगिला विधि विधान व्यवहार देखबाक लेल बैसले छला।चंचल चम्पावती जे चन्द्रमासँ इजोरिया छिनिक' अनने छली से आभा हुनक मुखमंडलपर एखनो कक्षसँ बाहर बहरेलाक बादो विद्यमान छलनि।बाहर बहराइते चम्पावतीक अपन अनुजा एवं सखि बहिनपा आऔर बाहर बैसल लोक वरपर विभिन्न प्रकारक कटाक्ष आऔर व्यंगवाणक वर्षा केलनि ।शयनकक्षमे घटित संभावित विभिन्न विषयपर विमर्श होमय लागल चम्पावतीक सौन्दर्य ,रुप शज्या ,केस विन्यास ,वस्त्रावरण विन्यास, मुखमंण्डल पूर्ववत यथावत छलनि। ओ एक दोसराके ज्ञान गंगमे नहेलाक बाद कक्षसँ बहराइत वऽसँ बजली---अपने दोसर ठाम दोसर परीक्षणक तैयारी करी। हमर शुभकामना रहत जे अपने दोसर परीक्षणमे दोसर ठाम सफल रही।अपने अभियन्ता थिकहुँ ,अभियांत्रिकी वेदक वेदज्ञ छी मुदा यौवन अभियांत्रिकी वेदक किछुओ ज्ञान नञि अछि। अपने वेदना नञि बुझैत छी, संवेदनहीन छी।आब अपने एखने बिना बिलम्ब केने अपने अपन सम्मानक रक्षा लेल एहिठामसँ अविलम्ब जाउ।चम्पावती वरके ठेलैत पुन: बजली--अपने अपनाके अपमानित होइसँ बचाउ।अभियन्ता वर अपन आदर्श के बचेबाक लेल आदर्श चालिमे बाहर बहरेला।हिनका दूरा दिस पहुचैसँ पहिले गीतहारि महिला मंडली आऔर दर्शक द्वारा दूरापर ई शुभ घड़ीक अशुभ घटनाक बात विस्तार पौलक। बथानमे बैसल वरक बाप आऔर बरद वुद्धि भोजन भट्ट भोजनानन्द बरियातीक बीच एहि विशेष विषयपर विमर्श होमय लागल।ई घटना वरक बाप आऔर बरियातीके बज्रपात सन बुझना गेलनि।वरक बापके बड़के बेटाक विवाहमे ई बज्र खसब किछु अनहोनी सन बुझना गेलनि।दहेज प्रथाक विरोध आऔर समर्थनमे घमर्थन होमय लागल।पेट पिजौने आएल बरियाती लोकनि जठराग्निक अग्निमे भोजनमे विलम्ब भेलाक कारणे जरैत छला।चम्पावतीक बापके बजाओल गेलनि।वरक बाप आऔर बरियाती लोकनि कन्या पक्षके समक्ष कलजोरि सास्टांग बहु विधि बेर बेर विनती केलनि।यथावत कल जोरने बरक बाप आऔर बरियाती लोकनि कन्याक बापके डेगक अनुशरण करैत डेराइत अंगना एला।चम्पावतीक बाप पूर्णरुपेण आश्वस्त छला। हुनका पूर्ण विश्वास छलनि जे हमर बेटी वुधियारि छथि ओ बिगडल बातके बिगड़ैत बिगड़ैत बना लेती।चम्पावती निर्द्वन्द अभय मुद्रामे कुर्सीपर बैसलि छलि मुदा मुखमंडल आक्रामक अवश्य छलनि, वरक बाप अचानक आबि चम्पावतीके कलजोरि अपन पागक रक्षा लेल पैर छुबि प्रणाम करबाक मुद्रामे झुकला कि हुनक माथमे पहिरल पाग खसलनि। पागके खसैसँ पहिले चम्पावती पागके लौकि लेलनि आऔर अपन पैर छिपैत पागके वरक बापक हाथमे दैत बजली---अपने अछोप छी, हम अपनेसँ छुआ जाएब,अपने हमरासँ दूर रही।अपने हमरा खस्सी बकरीक व्यवसायी सन कठोर कसाय बुझना जाइत छी। वरक बापके आँखिसँ नोर टपकि गेलनि आऔर कातर भावसँ हाथ जोरि बजला----जहिना हमर खसैत पागके रक्षा केलहुँ अछि तहिना हमर खसैत पागके रक्षा एकबेर आऔर काएल जाए ,हम आजीवन अपनेक ऋणी रहब।बिच्चहिमे अभियन्ता वर महोदय बापक समक्ष आबि मूक बनि मूर्तिवत ठाढ़ भेला।हमर वयससँ अपनेक बेटाक वयस बेसीये छनि मुदा हिनकामे एखनो बहुते बचपना बाँचल छनि।अपनेक बेटा अपनेक लाल छथि मुदा ज्ञानसँ लल्ल छथि। अपनेक बेटा अपनेक लेल जतबे सुयोग्य छथि,ओतबे हमरा लेल अयोग्य छथि।ई हमर जाँचक आँचमे नञि थम्हि सकला।ई अपन स्वाभिमानक सत्यानाश केने छथि।अपनेक पुत्र स्वामी रामदेव बाबासँ चमचासन अवश्य सिखने छथि मुदा परम सत्य रामके नञि जनैत छथि। ई चमचासनसँ नोकरी पाबि अपन फाटल तकदीर आऔर भूत भविष्य सीने छथि।अपनेके अपन पुत्र आज्ञाकारी आऔर संस्कारी बुझना जाइत छथि मुदा हिनक चरित्रक प्रत्येक पृष्ठ बहुते कारी छनि।हिनक कौमार्य कामाग्णिक आगिमे जरि गेल छनि।अपनेक बेटा पाइ लेल बाप बदलि सकैत छथि,अपनेक बेटा अभियन्ता संङ पंजीकृत सरकारी अपराधी आऔर भ्रष्ट सेहो छथ।अपनेक पैरमे एखनो बेमाए फाटल अछि मुदा हिनक चारु आंङुरमे चारि भरिक सोनाक अंगुठी आऔर गलामे पाँच भरिक सोनाक चैन, ई कोना किनलनि?हम एखनो अपन कौमार्य अखण्ड रखने छी मुदा अपने पुत्रक कौमार्य खण्ड खण्ड भेल छनि।ई काम कला आऔर रति संग्रामक योद्धा छथि।अपनेक बेटा लिंगोत्थानके अपन पौरुष बुझै छथि।हिनक दृष्टि आऔर दृष्टिकोण दुन्नू दूषित छनि।विवाहसँ पूर्व एहि तरहक प्रयास कखनो प्रशंसनीय नञि अछि। अपनेक लाल ज्ञानक कंगाल आऔर हमरा लेल संङहि सम्पूर्ण नारी जातिक लेल काल छथि।ई एखने शयन कक्षमे कुचेष्टासँ अपन श्रेष्ठता सिद्ध कए प्रतिष्ठा प्राप्त करबाक बहुते प्रयास केलनि अछि मुदा हिनक निशाना खाली गेलनि।अपनेक बेटा अभियन्ता अवश्य छथि मुदा यौवनक अभियांत्रिकीसँ अनभिज्ञ अनुभवहीन छथि।चन्द्रवदनी चम्पावतीक ई बात वरक बापके टटाएल बसिया रोटी सन उसट्ठ बुझना गेलनि तथापि बातके बुढ़ बरद जकाँ वेदान्ती सन बिना दाँतके चिबौने गेला।चम्पावती अपन विद्वतापूर्ण विचार आऔर वौद्धिकताक तेज तरुआरिसँ वरक बापके छकरिक' राखि देलनि।बात बिगड़ैत देखि वरक बाप एकबेर फेर विद्वतापूर्ण प्रपंच रचैत बजला----अपने पुत्रवधुक रुपमे नञि हमर गृहलक्ष्मीक रुप मे हमरा घरमे अपने निवास करियौ से हमर आग्रह। चम्पावती वरक बापक बातके कटैत बजली---ई कोना संभव हाएत अपनेक बेटा चरित्रहीन छथि, ई चरित्रहीनता हिनकामे वंशानुगत छनि।अपनेक पुत्र अपने सन परुष हृदयहीन छथि।ई चरित्रहीनताक अभियोग पूज्य मुदा दूष्ट देवता लोकनिपर सेहो लागल छनि जे शान्ति आऔर प्रेमक पाठ पढ़ै छला। हम अपनेके अंगीकार केलहुँ मुदा अपनेक चरित्रहीन भ्रष्ट बेटा अंगीकार करबाक योग नञि छथि,तथापि ई विष हम पीब लेब।नारी आदिकालसँ अपमान उपेक्षाक विष पिबैत आबि रहल अछि। हम नारी आऔर गरीबक बेटी छी, हम विष पिबाक लेल वाध्य छी। हम अपनेक बिगड़ल बेटाके सुधारबाक दायित्व लेब मुदा हमरो बापके पागक रक्षा होमक चाही।दहेजक रुपमे नगद लेल गेल टका एखनहि अविलम्ब वापिस होमक चाही।हमर बापके हमर विवाहमे बिगहा भरि जमीन बिका गेलनि अछि। ई हमरा लेल कलंकक टीका भेल से हमरापर नञि लागक चाही।हमर अपनेक चरित्रहीन पपियाह बेटाके स्वीकारब हमर कमजोरी नञि बुझब, हमरो गोट चारिटा सरकारी सेवा हेतु चिट्ठी आएल अछि। एखन आऔर चिट्ठी आबि सकैत अछि। कोन ठाम कोन पदपर योगदान काएल जाए से हम विचाराधीन रखने छी।हम अपन पिताक श्रेष्ठ संतान छी।हमरो अपन माए बाप छोट भाइ के प्रति किछु दायित्व बनैत अछि।हम अपन दायित्वक निर्वहन पूर्णरुपेण तत्परतापूर्वक करब ।हम दस बर्षधरि अपन काएल आयके अपना हिसाबे अपन दायित्वक निर्वहनमे करब।वरक बाप नगद लेल गेल टका वापिस करबाक स्वीकृति देलनि आऔर पुतौहपर लगै वला सब सामाजिक प्रतिबन्ध हटबैत सब अनुबन्धके स्वीकृति देलनि।बरियातीमे वरक बापक किछु विरोधी सेहो आएल छला ओ एहि आगिमे घी ढ़ारि अपन हाथ सेंकबाक प्रयास केलनि मुदा नञि चललनि।विवाहक लंम्बित प्रक्रिया विधि विधानपूर्वक पूर्ण होमय लागल। वरक बापक दग्ध आत्मा शीतल आऔर शान्त भेलनि।
-बद्रीनाथ राय अमात्य, ग्राम
पोस्ट करमौली, भाया कलुआही, जिला मधुबनी बिहार ,फोन 6205190859
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।