प्रणव कुमार झा
लोकतंत्रक माने आ मतलब
अमेरिकी राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन लोकतंत्रक परिभाषा दैत कहने छलाह जे, "लोकतंत्र जनताक, जनता लेल आ जनताक द्वारा कएल जाए वाला शासन थिक।" मुदा, हम अक्सर अपन आसपास एहन अनेक लोककें देखैत छी जे लोकतंत्रकें बहुत बेसी महत्व नहि दैत छथि आ एकरा सहज रूप में लैत एकर आलोचना करैत छथि, तथा एकरा शासनक एकटा निकम्मा पद्धति घोषित कऽ दैत छथि। एहन लोक प्रायः राजशाही, सामंतवाद आ तानाशाही शासनक महिमामंडन करैत भेटैत छथि। हम स्वयं कें भाग्यशाली बुझैत छी जे हमर जन्म एकटा लोकतांत्रिक व्यवस्थाक अंतर्गत भेल, आ संगहि हम एहि समझकें विकसित कऽ पेलौहु अछि जे तमाम त्रुटि आ कमिक बावजूद लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रशासनक लेल सब सँ उपयुक्त माध्यम थिक। गांधी जी के सुराज, तिलक के स्वराज आ भगत सिंह आ साथी सभक समाजवाद के अवधारणा के नेहरू, अंबेडकर, राजेंद्र प्रसाद, पटेल आदि महान विद्वान नेता सभ एक सूत्र मे गूँथी कय लोकतान्त्रिक ढाँचा तैयार केलाह आ संविधान द्वारा स्थापित केलाह। यद्यपि, हमर समझ सँ एकटा छद्म लोकतंत्र (Pseudo-democracy) कखनो-कखनो कोनो राजतंत्र सँ सेहो बदतर सिद्ध भऽ जाइत अछि। ताहि दुआरे एकटा नागरिक के रूप मे लोकतान्त्रिक व्यवस्था के वृहत्त समझ आवश्यक अछि।
देशक नागरिक सभक लेल लोकतांत्रिक व्यवस्थाक मर्म बुझब, ओकरा में उत्कृष्ट भागीदारी देब आ ओकरा सशक्त बनेबाक लेल आवश्यक अछि। एकरा लेल ई अनिवार्य अछि जे बहुसंख्यक जनसंख्या में एकर नीक समझ विकसित कएल जाए। एहि उद्देश्य सँ अपन शिक्षा व्यवस्था में माध्यमिक स्तर पर प्रयास कएल गेल अछि, आ तही दुआरे ई आवश्यक अछि जे देशक प्रत्येक नागरिक दसवीं-बारहवीं धरि अपन पढ़ाई निश्चित रूप सँ पूरा करथि। मुदा, पहिल दुर्भाग्य तँ ई अछि जे आजुक समय में सेहो देशक (विशेष कऽ बिहार सन उत्तर भारतक राज्य मे) एकटा बड़का आबादी दसवीं धरि पढ़ि नहि पाबि रहल अछि; जे पढ़य अछि हुनका शिक्षक नीक जकाँ पढ़ा नहि रहल छथि; आ ओहि पर सँ आफत ई जे किछु समय सँ पठन-पाठनक सामग्री (पाठ्यक्रम) में हेर-फेर शुरू कऽ देल गेल अछि।वर्ष 2019 धरि एनसीईआरटी क नौमी कक्षाक नागरिकशास्त्रक पोथी में एकटा पूरा अध्याय लोकतंत्रक अर्थ आ महत्व बुझबाक लेल, तथा एकर लाभ आ कमी पर चर्चा करबाक लेल समर्पित छल। मुदा, वर्ष 2020 में कोविडक महामारीक बीच एहि अध्याय कें पाठ्यक्रम सँ हटा देल गेल। ओहि समय कन्हैया कुमार आ योगेंद्र यादव सन बुद्धिजीवी नेता सभ एकरा विरुद्ध आवाज उठौने छलाह, मुदा महामारीक विभीषिकाक बीच ओहि शोरक कोनो विशेष प्रभाव नहि पड़ल। एकर परिणाम ई भेल जे आबय वाला वर्ष सभ में समाजशास्त्रक संग-संग विज्ञानक सेहो अनेक महत्वपूर्ण प्रसंग पाठ्यक्रम सँ गायब होबय लागल। खैर, ई तँ एकटा स्वतंत्र विषय थिक, मुदा एहि आलेखक मुख्य उद्देश्य लोकतंत्रक माने आ मतलब पर किछु मौलिक विमर्श करब अछि।
आधुनिक विश्वमे लोकतंत्र सभसँ लोकप्रिय शासन-व्यवस्था मानल जाइत अछि। लगभग प्रत्येक देश अपनाकेँ लोकतांत्रिक कहल करैत अछि। मुदा प्रश्न ई अछि जे वास्तविक लोकतंत्र की होइत अछि? की खाली चुनाव करा देलासँ कोनो राज्य लोकतांत्रिक भऽ जाइत अछि? की जनता द्वारा चुनल सरकार स्वतः लोकतांत्रिक सरकार बनि जाइत अछि? एहि प्रश्नसभक उत्तर खोजब आवश्यक अछि, कारण लोकतंत्र खाली एक राजनीतिक शब्द नहि, बल्कि नागरिक अधिकार, समानता, न्याय, भागीदारी आ उत्तरदायित्वक व्यापक व्यवस्था अछि।
लोकतंत्र शब्द यूनानी भाषाक शब्दसभ ‘डेमोस’ (जनता) आ ‘क्राटोस’ (शासन) सँ बनल अछि, जकर शाब्दिक अर्थ भेल ‘जनताक शासन’। मुदा आधुनिक राजनीतिक विज्ञानमे लोकतंत्रक अर्थ खाली एतबे नहि अछि। लोकतंत्रक वास्तविक सार ई अछि जे राज्यक अंतिम शक्ति जनता लग रहैत अछि आ सरकार जनता प्रति उत्तरदायी रहैत अछि।
लोकतंत्रक एकमात्र सर्वमान्य परिभाषा देब कठिन अछि। अब्राहम लिंकन के परिभाषा लोकतंत्रक मूल भावना व्यक्त करैत अछि, मुदा आधुनिक लोकतंत्रक जटिल संस्थागत पक्षकेँ पूर्ण रूपेँ नहि समेटैत अछि। राजनीतिक वैज्ञानिकसभक अनुसार लोकतंत्र ओ शासन-व्यवस्था अछि जाहिमे शासकसभ जनता द्वारा चुनल जाइत अछि। चुनाव नियमित, स्वतंत्र आ निष्पक्ष होइत अछि। नागरिकसभकेँ समान राजनीतिक अधिकार प्राप्त होइत अछि। सरकार कानूनक अधीन रहैत अछि। मौलिक अधिकार आ स्वतंत्रताक संरक्षण होइत अछि। जनता सरकारकेँ बदलि सकैत अछि। एहि आधार पर लोकतंत्रकेँ खाली चुनावक प्रक्रिया नहि, बल्कि संस्थागत, संवैधानिक आ नैतिक व्यवस्था मानल जाइत अछि। लोकतंत्रमे वास्तविक शक्ति ओहि प्रतिनिधिसभ लग रहबाक चाही जे जनता द्वारा चुनल गेल छथि। जँ सेना, राजपरिवार, धार्मिक समूह, पूंजीपति समूह अथवा बाहरी शक्ति सरकारक ऊपर अंतिम नियंत्रण रखैत हो, तँ ओ व्यवस्था लोकतांत्रिक नहि मानल जा सकय अछि। ई सिद्धांत एहि बात पर बल दैत अछि जे राज्यक नीतिगत निर्णय जनता द्वारा अधिकृत संस्थासभ करथि।
स्वतंत्र आ निष्पक्ष चुनाव – लोकतन्त्र मे खाली चुनावक आयोजन पर्याप्त नहि अछि। चुनाव एहन होबाक चाही जाहिमे विभिन्न राजनीतिक विकल्प उपलब्ध होय। मतदाता बिना भयक मतदान कऽ सकथि। उम्मीदवारसभ समान अवसर प्राप्त करथि। प्रशासन निष्पक्ष रहय। परिणाम जनता केर वास्तविक इच्छाकेँ प्रतिबिंबित करय। जँ विपक्षकेँ चुनाव लड़बाक अवसर नहि भेटय अथवा चुनावमे व्यापक धाँधली होय, तँ लोकतंत्रक आधार कमजोर भऽ जाइत अछि। लोकतंत्रक एकटा महत्वपूर्ण सिद्धांत अछि जे प्रत्येक वयस्क नागरिक, चाहे ओ धनीक हो वा गरीब, मन्सा होय वा मौगी, जाति, धर्म अथवा भाषाक आधार पर भेदभाव बिना मतदानक अधिकार रखय। भारतमे 18 वर्ष अथवा ताहिसँ अधिक आयुक प्रत्येक नागरिककेँ मतदानक अधिकार प्राप्त अछि। ई विश्वक सभसँ व्यापक लोकतांत्रिक व्यवस्थासभमे सँ एक मानल जाइत अछि। लोकतंत्रमे नागरिकसभकेँ खाली मतदानक अधिकार नहि, बल्कि चुनाव लड़बाक, राजनीतिक दल बनाबय, विचार व्यक्त करय आ सार्वजनिक जीवनमे भाग लेबाक अवसर सेहो रहबाक चाही। समान राजनीतिक अवसर लोकतंत्रकेँ खाली औपचारिक नहि, बल्कि सहभागी व्यवस्था बनबैत अछि।
लोकतंत्रमे सरकार स्वयं कानूनसँ ऊपर नहि होइत अछि। संविधान सर्वोच्च मानल जाइत अछि आ शासकसभकेँ सेहो संवैधानिक सीमा भीतर रहि कऽ कार्य करबाक होइत अछि। कानूनक शासनक अर्थ अछि जे सब नागरिक कानूनक समक्ष समान होय। स्वतंत्र न्यायपालिका होय। संवैधानिक प्रक्रिया अनुसार शासन होय। ई व्यवस्था नागरिक स्वतंत्रताक सुरक्षा करैत अछि।
लोकतंत्र खाली बहुमतक शासन नहि अछि। अल्पसंख्यकक अधिकार, अभिव्यक्ति स्वतंत्रता, प्रेस स्वतंत्रता, संगठनक स्वतंत्रता आ धार्मिक स्वतंत्रताक संरक्षण लोकतंत्रक अनिवार्य तत्व अछि। जँ सरकार आलोचनाकेँ दबाबय, मीडिया पर नियंत्रण करय अथवा असहमतिक आवाजकेँ दमन करय, तँ लोकतंत्र कमजोर भऽ जाइत अछि। लोकतांत्रिक सरकार जनताकेँ उत्तर देबाक लेल बाध्य होइत अछि। संसद, विधानमंडल, न्यायपालिका, मीडिया, नागरिक समाज आ सूचना अधिकार जेकाँ संस्थासभ सरकारक कार्यपर निगरानी रखैत अछि।
लोकतंत्र बनाम दिखावटी लोकतंत्र: इतिहासमे बहुत रास देश एहन रहल अछि जतय चुनाव तऽ भेल, मुदा वास्तविक सत्ता सीमित समूहक हाथमे रहल। एहि कारण लोकतंत्र आ दिखावटी लोकतंत्रमे अंतर करब आवश्यक अछि।
वास्तविक लोकतंत्रमे सत्ता बदलि सकैत अछि। विपक्ष सक्रिय रहैत अछि। नागरिक स्वतंत्रताक सम्मान होइत अछि। सरकारक आलोचना संभव होइत अछि। दिखावटी लोकतंत्रमे चुनाव नियंत्रित होइत अछि। विपक्ष कमजोर अथवा प्रतिबंधित रहैत अछि। मीडिया स्वतंत्र नहि रहैत अछि। सत्ता परिवर्तन कठिन भऽ जाइत अछि। अतः लोकतंत्रक मूल्यांकन खाली चुनावक आधार पर नहि, बल्कि समग्र राजनीतिक वातावरणक आधार पर करबाक चाही। लोकतंत्र खाली सरकार चुनबाक प्रक्रिया नहि, बल्कि जीवन जीबाक एकटा सामाजिक-राजनीतिक संस्कृति सेहो अछि। एहि संस्कृति मे संवाद, सहिष्णुता, असहमतिक सम्मान, समानता आ सहभागिताक भावना सम्मिलित रहैत अछि। एकटा परिवार, विद्यालय, संस्था अथवा समाज सेहो लोकतांत्रिक व्यवहार अपनाबि सकैत अछि जखन निर्णय प्रक्रिया मे सबहक मत सुनल जाए, सम्मानपूर्वक चर्चा हो आ शक्ति एक व्यक्ति मे केंद्रित नहि रहय।
पाकिस्तानमे, जनरल परवेज मुशर्रफ़ अक्टूबर 1999 मे सैनिक तख्तापलटक नेतृत्व केलक। ओ लोकतान्त्रिक रूपसँ चुनल गेल सरकारकेँ हटा देलक आ अपनाकेँ देशक 'मुख्य कार्यकारी' घोषित कऽ लेलक। बादमे ओ अपन पदनाम बदलिकऽ 'राष्ट्रपति' कऽ लेलक आ 2002 मे एकटा छलपूर्ण जनमत संग्रह (Referendum) करा कऽ अपना कार्यकाल 5 साल लेल बढ़ा लेलक। पाकिस्तानी मीडिया, मानवाधिकार संगठन आ लोकतांत्रिक कार्यकर्ता सभ आरोप लगैलक जे जनमत संग्रहमे पैघ पैघ धांधली आ धोखाधड़ी भेल छल।
अगस्त 2002 मे ओ 'लीगल फ्रेमवर्क आर्डर' जारी केलक जकरा तहत पाकिस्तानक संविधानकेँ बदलल गेल। एहि आर्डरक अनुसार राष्ट्रपति राष्ट्रीय आ प्रांतीय असेंबलीकेँ भंग कऽ सकइत छल। मंत्रिपरिषद्क काम-काज पर एकटा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद क नजरि रहैत छल, जइमे बेसी सैनिक अधिकारी छलाह। एहि कानूनक पास भेलाक बाद राष्ट्रीय आ प्रांतीय असेंबली सभक लेल चुनाव कयल गेल। एहि प्रकारें पाकिस्तानमे चुनाव सेहो भेल आ चुनल गेल प्रतिनिधि सभकेँ कुछु अधिकार सेहो भेटल। मुदा अंतिम निर्णय लेबाक असली शक्ति सेनाक अधिकारी सभ आ जनरल मुशर्रफ़क हाथमे छल, जकरा जनता नहि चुन्ने छल। ई स्थिति तानाशाही आ राजशाही बला शासनमे देखल जाइत अछि। ओतय दिखावाक लेल चुनल गेल संसद आ सरकार तँ होइत अछि, मुदा असली शक्ति ओहि लोकक हाथमे होइत अछि जकरा जनता नहि चुन्ने अछि।
चीनमे, संसद (क्वानगुओ रेनमिन दाइबियाओ दाहुई - National People's Congress) लेल हरेक 5 वर्षमे नियमित रूपसँ अप्रत्यक्ष चुनाव होइत अछि। एहि संसद लग देशक राष्ट्रपति चुनबाक अधिकार होइत अछि। एहिमे पूरे चीनसँ लगभग 3000 सदस्य (वर्तमान 14म संसदमे 2,977 सदस्य) आबैत छथि। किछु सदस्यक चुनाव चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) सेहो करैत अछि। चुनाव लड़बाक लेल कोनो उम्मीदवारकेँ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) सँ मंजूरी लेब अनिवार्य होइत अछि। वर्ष 2022-23 मे भेल सभ सँ हालक चुनावमे खाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी या ओकर सहयोगी छोट-छोट 8 टा स्वीकृत पार्टिक सदस्य सभकेँ आ निर्दलीय उम्मीदवार सभकेँ (जे पार्टीक प्रति वफादार छथि) चुनाव लड़बाक अनुमति भेटल। तइँ चीनमे सरकार सदिखन कम्युनिस्ट पार्टीए के बनिइत अछि।
मैक्सिकोमे, 1930 मे आजाद भेलाक बाद हर 6 वर्षमे राष्ट्रपतिक चुनाव होइत अछि। एतय कखनो सैनिक शासन या तानाशाह नहि अयलै। मुदा सन 2000 ई. तक हर चुनाव खाली पीआरआई (PRI -इंस्टीट्यूशनल रिवोल्यूशनरी पार्टी) नामक पार्टीये जीतइत रहल। विपक्षी दल चुनाव लड़ैत छल, मुदा ओ कखनो जीत नहि पबैत छल। पीआरआई चुनाव जीतबाक लेल सब तरहक अनैतिक हथकंडा अपनाबैत छल। सरकारी दफ्तरमे काम करयबला सभ लोक लेल पार्टीक बैठकमे एनाय अनिवार्य छल। सरकारी स्कूलक शिक्षक सभ अभिभावक पर पीआरआईकेँ वोट देबाक दबाब बनबैत छलाह। मीडिया विपक्षी दलक आलोचना तँ करैत छल मुदा हुनकर गतिविधि आ नीतिकेँ नजरअंदाज करैत छल। कखनो-कखनो अंतिम समयमे पोलिंग बूथ बदलि देल जाइत छल जइसँ लोक वोट नहि दऽ पाबैत छलाह। पीआरआई अपन उम्मीदवारक चुनाव प्रचार पर बहुत बेसी पैसा खर्च करैत छल मैक्सिकोक पुरान पीआरआई के तरहे वेनेजुएलामे सत्तारूढ़ पार्टी अपन सत्ता बचेबाक लेल विपक्षी नेता सभ कें अयोग्य घोषित करब, मीडिया पर पूर्ण नियंत्रण आ चुनाव आयोगक दुरुपयोग करबाक लेल जानल जाइत अछि। जुलाई 2024क चुनावमे व्यापक धांधलीक आरोपक बावजूद निकोलस मादुरो कें पुनः विजेता घोषित कएल गेल, जाहिसँ विपक्ष आ अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एकरा अलोकतांत्रिक मानैत अछि।
रूसमे सेहो दिखावा लेल बहुदलीय व्यवस्था अछि आ नियमित चुनाव होइत अछि। मुदा व्यवहारमे, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन आ हुनकर पार्टी 'यूनाइटेड रशिया' क पूरा तंत्र पर कब्जा अछि। विपक्षी नेता सभ कें जेल भेज देल जाइत अछि या चुनाव लड़बा सँ रोकल जाइत अछि। मार्च 2024 क चुनावमे पुतिन कें 87% सँ बेसी वोट क साथ फेर सँ चुनल गेल, जाहिमे कोनो वास्तविक विपक्ष कें ठाढ़ हेबाक अनुमति नहि छल।
की अपने सभ एहि चुनाव सभकेँ लोकतांत्रिक चुनाव कहि सकैत छी? एहि उदाहरण सभसँ लगैत अछि जे अपने सभ एहन नहि कहि सकैत छी। एतय लोक लग वास्तवमे कोनो विकल्प नहि अछि। चीनमे लोककेँ शासक दल या ओकर द्वारा मंजूर उम्मीदवारकेँ ही वोट देबय पड़े अछि। की एकरा असली चुनाव कहल जाए? मैक्सिकोमे विकल्प तँ छल मुदा सत्ताधारी दलकेँ हटाबएब असंभव छल, भले लोक ओकर खिलाफ किएक नहि होथि। ओतय निष्पक्ष चुनाव नहि छल। लोकतंत्र निष्पक्ष आ स्वतंत्र चुनाव पर आधारित होबाक चाही, ताकि सत्तामे बैसल लोकक लेल जीत-हारक समान अवसर हो। लोकतंत्रक मूल आधार राजनैतिक समानता अछि। एकरासँ लोकतंत्रक तेसर विशेषता सामने आबैत अछि।
जिम्बाब्वेकेँ 1980 मे अल्पसंख्यक गोरा सभक शासनसँ मुक्ति भेटल। स्वतंत्रता संघर्षक नेतृत्व करबाक बला पार्टी जानु-पीएफ (ZANU-PF) तखनेसँ देश पर शासन कऽ रहल छल। एकर नेता राबर्ट मुगाबे आजादीक बादसँ देशक राष्ट्रपति छलाह। ओ बहुत लोकप्रिय छलाह मुदा चुनावमे गलत तरीका सेहो अपनाबैत छलाह। आजादीक बादसँ हुनकर सरकार कतेको बेर संविधान बदलिकऽ राष्ट्रपतिक अधिकार बढ़ा देलक आ हुनकर जवाबदेहीकेँ कम कऽ देलक। विपक्षी दलक कार्यकर्ता सभकेँ परेशान कयल जाइत छल आ ओकर बैठकमे बाधा डालल जाइत छल। सरकार विरोधी प्रदर्शन आ आन्दोलनकेँ गैर-कानूनी घोषित कऽ देल गेल छल। राष्ट्रपति आलोचना करबाक अधिकारकेँ सीमित कऽ देल गेल छल। टेलीविजन आ रेडियो पर सरकारी नियंत्रण छल आ ओतय खाली सत्ताधारी दलक बात देखाओल जाइत छल। किछू स्वतंत्र अखबार छल मुदा सरकार ओहि पत्रकार सभकेँ परेशान करैत छल जे सरकारक खिलाफ लिखैत छल। सरकार अदालतक ओहि फैसला सभकेँ सेहो नजरअंदाज करैत छल जे ओकर खिलाफ जाइत छल आ जज सभ पर दबाब बनबैत छल। अंततः 2017 मे मुगाबेकेँ पदसँ हटाओल गेल।
जिम्बाब्वेक उदाहरण देखबैत अछि जे शासकक लोकप्रिय हेबाक भरि लोकतंत्रक लेल पर्याप्त नहि अछि। लोकप्रिय नेता सेहो तानाशाह बनि सकइत छथि। यदि हम सभ लोकतंत्रकेँ परखब चाहैत छी, तँ चुनाव देखब आवश्यक अछि। मुदा ओतबे आवश्यक अछि ई देखाब जे चुनावसँ पहने आ बादक स्थिति की अछि? चुनावसँ पहने राजनैतिक गतिविधि लेल पर्याप्त अवसर हेबाक चाही, विपक्षी दलकेँ सम्मान भेटबाक चाही आ नागरिककेँ बुनियादी अधिकार भेटबाक चाही। लोककेँ सोचबाक, अपन राय रखबाक, संगठन बनबैत आ विरोध करबाक स्वतंत्रता हेबाक चाही। कानूनक नजरिमे सभ बराबर हेबाक चाही। एहि अधिकारक रक्षा एकटा स्वतंत्र न्यायपालिका द्वारा हेबाक चाही जकर आदेश सभ लोक मानैत होथि। तहिना, चुनावक बाद सरकार चलेबाक सेहो किछु नियम होइत अछि। एकटा लोकतांत्रिक सरकार खाली एहि लेल जे ओ चुनाव जीतल अछि, मनमानी नहि कऽ सकइत अछि। ओकरा विभिन्न समूह सभकेँ देल गेल आश्वासनक आदर करय पड़त अछि। हर पैघ निर्णय व्यापक विमर्शक बादे लेल जा सकैत अछि। हर अधिकारीक अपन अधिकार आ जिम्मेदारी होइत अछि जे संविधान आ कानून द्वारा तय होइत अछि। ओ जनता आ संविधानक प्रति जवाबदेह होइत छथि। एहि सँ हमरा सभकेँ लोकतंत्रक चारिम आ अंतिम विशेषता भेटैत अछि: एकटा लोकतांत्रिक सरकार संवैधानिक कानून आ नागरिक अधिकार द्वारा तय कयल गेल सीमाक भीतर काम करैत अछि।
लोकतंत्रक विपक्षमे कुछु मुख्य तर्क निकसि कऽ अबैत अछि, जकरा हम सभ अक्सर सुनैत छी: 1. लोकतंत्रमे नेता बदलइत रहैत छथि, जइसँ अस्थिरता पैदा होइत अछि। 2. ई खाली राजनैतिक प्रतिस्पर्धा आ सत्ताक खेल अछि, जतय नैतिकताक लेल कोनो जगह नहि अछि। 3. एतेक लोकसँ चर्चा करय पड़इत अछि जे फैसला लेबामे देरी भऽ जाइत अछि। 4. निर्वाचित नेता सभकेँ लोकक आवश्यकताक सही जानकारी नहि होबाक कारण खराब फैसला सभ भऽ जाइत अछि। 5. चुनावी मुकाबला खर्चीला होबाक कारण भ्रष्टाचार बढ़ैत अछि। 6. सामान्य लोककेँ नीक-बेजायकऽ स्पष्ट समझि नहि होबाक कारण ओ गलत प्रतिनिधि चुनि लैत छथि।
निश्चित रूपसँ लोकतंत्र कोनो जादूक छड़ी नहि अछि जे सभ समस्याकेँ एक क्षणमे ख़त्म कऽ देत। एकरासँ दुनियासँ गरीबी ख़त्म नहि भेल अछि। मुदा ई शासनक अन्य रूपक तुलनामे तथापि नीक अछि। आउ एकर पक्षक तर्क सभकेँ देखी।
चीन आ भारतक अकालक तुलना: सन 1958सँ 1961क दौरान चीनमे भेल भयावह अकाल विश्व इतिहासक सबसँ पैघ अकाल मानल जाइत अछि। ओहि अकालमे लगभग 3 करोड़ लोक भूखसँ मुइलाह। ओहि समय भारतक आर्थिक स्थिति चीनसँ कोनो बहुत नीक नहि छल। मुदा भारतमे अकालक ओहन भयानक परिणाम नहि भेल।
अर्थशास्त्री सभक माननाय अछि जे ई दुनू देशक सरकारी नीतिक अंतरक कारण भेल। भारतमे लोकतांत्रिक व्यवस्था, बहुदलीय चुनाव आ स्वतंत्र मीडियाक उपस्थिति छल। तइँ भारत सरकार खाद्य सुरक्षा आ राहत कार्य लेल सतर्क छल आ तुरंत काम केलक। चीनमे एक-दलीय कम्युनिस्ट शासन छल। ओतय नै विपक्षी दल छल, नै सरकारक आलोचना करबाक स्वतंत्रता आ नै स्वतंत्र मीडिया। यदि चीनमे सेहो स्वतंत्र मीडिया आ विपक्षी दल होइत, तँ एतेक लोक भूखसँ नहि मरितैक।
ई उदाहरण लोकतंत्रक सबसँ पैघ गुणकेँ देखबैत अछि। गैर-लोकतांत्रिक सरकार लोकक जरूरत पर ध्यान दैयो सकैत अछि आ नहिओ, ई सभ शासकक इच्छा पर निर्भर करैत अछि। मुदा लोकतंत्रमे शासक लेल जनताक प्रति जवाबदेह हेनाई अनिवार्य अछि।
लोकतांत्रिक सरकार शासनक एक बेहतर रूप अछि किएक तँ ई बेसी जवाबदेह होइत अछि। लोकतंत्र व्यापक विमर्श, बहस आ चर्चा पर आधारित होइत अछि। कोनो निर्णय लेबासँ पहने बहुत रास लोक, बैठक आ कमिटीक माध्यमसँ विचार करैत छथि। यदि बहुत रास लोक मिलि कऽ कोनो निर्णय लइत छथि, तँ गलतिक गुंजाइश बहुत कम भऽ जाइत अछि। यद्यपि एहिमे समय बेसी लगैत अछि, मुदा पैघ आ महत्वपूर्ण मुद्दा पर सोच-विचार कऽ कऽ निर्णय लेबासँ गैर-जिम्मेदाराना फैसला सभसँ बचल जा सकैत अछि।
लोकतंत्र निर्णय लेबाक गुणवत्ता केँ बढ़ाबैत अछि। कोनो भी समाजमे लोकक बीच विचार आ हितक मतभेद भेनाई स्वाभाविक अछि। भारत सन देशमे, जतय भाषाई, धार्मिक आ सामाजिक विविधता बहुत बेसी अछि, ओतय मतभेद आउर गहिर होइत अछि। गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थासँ एहि मतभेदकेँ ताकतक बल पर दबाओल जा सकैत अछि, मुदा ओकरासँ समाजमे असंतोष आ नाराजगी बढ़ैत अछि। लोकतंत्र एक मात्र एहन शांतिपूर्ण माध्यम अछि जतय कोनो स्थायी विजेता या स्थायी पराजित नहि होइत अछि। सभ लोक एक दोसरक साथ मिलि-जुलि कऽ रहि सकइत छथि।
लोकतंत्र मतभेद आ संघर्ष सभकेँ सुलझेबाक सबसँ नीक तरीका देइत अछि। भले ही लोकतंत्र नीक फैसला नहि लऽ पाबय या अस्थिर रहे, मुदा ई नागरिक सभकेँ जे सम्मान देइत अछि, ओ कोनो आउर व्यवस्था नहि दऽ सकैत अछि। लोकतंत्र राजनैतिक समानता पर आधारित अछि। एतय गरीब आ धनिक, अनपढ़ आ पढ़ल-लिखल सभक दर्जा एक समान होइत अछि। लोक खाली शासकक प्रजा नहि छथि, बल्कि ओ स्वयं अपन भाग्यक शासक छथि। यदि ओ गल्ती करैत छथि, तँ ओकर जिम्मेदारी सेहो हुनकरे होइत अछि।
लोकतंत्र नागरिकक गरिमा आ सम्मान केँ बढ़ाबैत अछि। गलती सुधारक अवसर: अंतमे, लोकतंत्रक एकटा पैघ लाभ ई अछि जे ई अपना भीतर गलतिकेँ सुधारबाक अवसर देइत अछि। जैना जे हम सभ देखलहुँ, एहन कोनो शासन व्यवस्था नहि अछि जतय गल्ती नहि होए। मुदा लोकतंत्रमे गलतिकेँ बहुत दिन धरि नुका कऽ नहि राखल जा सकैत। ओकरा पर सार्वजनिक चर्चा होइत अछि आ सरकारकेँ अपन फैसला बदल पड़इत अछि। यदि सरकार फैसला नहि बदलैत अछि, तँ चुनावमे जनता शासककेँ बदलि दैत अछि। गैर-लोकतांत्रिक व्यवस्थामे ई संभव नहि अछि।
यदि एहि आदर्श पैमानासँ देखब, तँ दुनियामे कतहु पूर्ण लोकतंत्र नहि भेटत। मुदा ई आदर्श अपना सभकेँ सदिखन ई याद दियाबैत अछि जे अपना सभकेँ अपन लोकतंत्रकेँ आउर मजबूत आ समृद्ध बनेबाक अछि। लोकतंत्रक भविष्य केवल शासकक कार्य पर नहि, बल्कि नागरिकक सक्रिय भागीदारी आ सचेत प्रयास पर निर्भर करैत अछि। इहे लोकतंत्रकेँ राजशाही या तानाशाहीसँ या सामंतवाद से अलग आ श्रेष्ठ बनबइत अछि।
संदर्भ : NCERT. Democratic Politics-I (Class IX) [2019]
-प्रणव कुमार झा, ग्राम-गोरापुर, जिला बेगूसराय [संप्रति- राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली]
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