प्रणव कुमार झा
जलक क्रंदन - रैंक १२०
पग-पग पोखैर आर माछ, मखान,
कहाई अछि इ मिथिलाक शान।
मुदा ई कहैत मन भरि जाइ अछि,
माटि दूषित जल से आई थरथराइ अछि।
122 देशक जल-स्वच्छता सूचकांक,
भारतक स्थान देखू, हे प्रभु, हे राम!
एक सौ बीसम नंबर पर ठाढ़ छी,
विषाक्त जल पीबय लेल लाचार छी।
इंदौरक देखू ओ भीषण तबाही,
जकर स्वच्छताक छल सर्वे गवाही।
ऊपरसँ चकमक, भीतर सँ सड़ल अछि,
पाइप में गंदा नाला आबि मिलल अछि।
भगीरथपुरा में मातम पसरि गेल,
कतेको मायक कोरा उजरि गेल ।
कॉलरा-इकोलाई नल सँ बहै छल,
सभ सँ स्वच्छ शहर सिसकी भरै छल!
पलवलक देखू ओ क्रूर विभीषिका,
पंद्रह दिन में पंद्रह टा अर्थी उठलका।
छौ बच्चा लीवरक दर्दसँ मरि गेल,
सरकारी पानि गामक काल बनि गेल।
सैम्पल फेल भेलै, कोलीफॉर्म भेटलै,
अपन व्यवस्थाक पोल आब खुजि गेलै।
गंगा-यमुना कऽ जे पूजैत अछि समाज,
किए गिरेलक ओकरा पर एहन गाज ।
बी.ओ.डी बढ़लै, ऑक्सीजन गेलै घटि,
औद्योगिक कचड़ा सँ नदीक छाती गेलै फटि।
दिनेश मिश्रक कोशी आ अनुपम मिश्रक तालाब,
आइ सभ सँ माँगि रहल अछि जवाब।
कत्तय गेल ओ अहार-पाइनक सुंदर व्यवस्था?
कोना बढ़ल समाज मे जलाशय अतिक्रमणक प्रथा !
अपनहि लोभ अपन सभ्यता कऽ खाय अछि।
चापाकल सँ जल संगे आर्सेनिक अबै अछि।
हड्डी गलावय लेल फ्लोराइडक सचार,
गाम सँ शहर धरि कैंसरक अछि हाहाकार।
तैयो सुतल अछि अपन इ बहीर सरकार।
लोकसभ के ऐ बात से किए होई सरोकार !
जौं करोड़ो करय स्वच्छ जलक तलाश
त अहिं काहू ई केहन अछि विकास !
पैसा सँ नै मिटतै स्वच्छ जलक प्यास।
चेतु हे जेन-जी अहिं से अछि आस।
पोखैरक सोझाँ कऽ आब रोकू अतिक्रमण,
नदीक संवर्धन बनय अपने सभक प्रण।
जँ आइ नै जागब तँ काल्हि पछताएब,
बिना स्वछ जलक बुझू सब किछु गमाएब।
-प्रणव
कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली
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