
बद्रीनाथ राय अमात्य
विवाहक बीमा/ श्मशान रत्न/ बादरायण सम्बन्ध
आइ सकाले निन टूटल।आँखि मिरते उठलहुँ देखलहुँ जे खबरीलाल भैया सामने ठाढ़
छथि।हम अपन मनके आश्वस्त करैत मनके बुझेलहुँ जे खबरीलाल भैया निश्चितरूपेण
कोनो खास भफाएल खबर अनने छथि।देखलियनि जे खबरीलाल भैया मुँह नाक आऔर गुदा
मार्गसँ भाफ छोड़ैत छथि।हमरा ओ सिताहल नढ़िया जकाँ व्यस्त आऔर डेराएल
बुझेला।हाथमे कोनो अखबार छलनि।हम खबरीलाल भैयासँ खबर सुनबाक लेल उताहुल
छलहुँ।हम प्रणाम करैत कहलियनि--भैया कोनो खास खबर सुनाएब की?ओ दौड़ले आएल
छला, हुनक दम फुलैत छलनि। ओ गुदा मार्गसँ खाँसी करैत कहला---हौ काल्हि
मिथिलामे बिहारि उठल छलैक,जे कने मने सत्य मिथिलामे बाँचल छलैक से सब
सत्यके बिहारि उधियाक' नेने चलि गेलैक।हम कहलियनि भैया बिहारि उठलासँ
नोकसान संङे नफा सेहो होइत छैक। खबरीलाल भैया सिखाओल बसहा बरद सन मुड़ी
डोलबैत बजला---हाँ लाभ भेलैक अछि बिहारिमे बहुत रास कवि कवियित्री गायक
गायिका उधियाक' आबि गेलैए। सबहक जन्म ब्रह्माक मुखसँ भेल छैक, मुदा ई नञि
जानि ब्रह्माक मुँहमे गर्भाधान कोना भेलैक?ब्रम्हाक मुखमे मैथुन कोनो
दंतकथा गढ़निहार महाने लोक केने हेता।ई गर्भाधानक मुहुर्त सेहो कोनो नीक
मुहुर्तकार मुहुर्त देखि निकालने हेता।आजुक अखबारमे तोरो सारि सुपनेखियाक
नाम छपल छैक।ओ कवियित्री छथि से बुझल छल मुदा पढ़लो लिखल छथि से नञि बुझल
छल।ओना मैथिलीमे कविता लिखबाक लेल अक्षरवोध आवश्यक नञि छैक,कवियित्री बनबाक
लेल पीन पयोधर ,पुष्ट यौवन, उन्नत नितम्ब आऔर सौन्दर्य चाहीसे
तऽ प्रकृतिसँ पौनहिं छथि।हौ तोहर सारि सुपनेखियाके बेंट लागल छनि की नञि?हम
कहलियनि--भैया बेंट लागल छनि मुदा बेंट छुटछुटाह ढ़ील छनि।खबरीलाल भैया
प्रशन्न होइत बजला--बस!बस!बुझि गेलियैक। बेंट छुटछुटाह ढ़ील रहलापर बिना
पढ़ने लिखने केओ कवियित्री बनि सकैत अछि मुदा ई सुविधा मिथिले मात्रमे
छैक।एहेन परिस्थितिमे लोक कवियित्री नञि बनत तखन आऔर विकल्पे की छैक?हौ
एकटा नीक मजगूत पच्चर ठोकबा देबहुन से नञि होइत छऽ?हम कहलियनि भैया बेंट
अहूँके नञि लागल अछि,बेंट हुनको छुटछुटाह आऔर ढ़िले छनि।कवि अहूँ
छी,कवियित्री ओहो छथि।पढ़ल लिखल अहूँ नञि छी,पढ़ल लिखल ओहो नञि छथि।भोज
देखि अहूँ पसरि जाइत छी ,भोज लेल ओहो देह पसारि दैत छथिन ।अहाँक कविता
हुनको नीक लगैत छनि,हुनकर कविता अहूँके नीक लगैत अछि।अहूँ अपान वायुसँ मंच
महकबै छी ,हुनको अपान वायुसँ मंच महैंक उठैत छैक।अहाँके ओ देहे लागल हेती,
हमर सारि सुपनेखियाक संङे अपनेक जोड़ी खूब जमत।गुण संस्कार सबटा मिलते
अछि,विचार सेहो मिलत।अपने जँ हमर सारि सुपनेखियाके सम्हारि लेब तऽ सोना
छिहे हमर सारि सुपनेखियाक यौवन आगिमे तपलाक बाद किमती कुन्दन सेहो बनि
जाएब।बीस हुनक उमिर छनि, चालीस अपनेक अछि। उमेरमे कनेक अन्तर अवश्य अछि
मुदा बीस चालीसमे स अक्षरक बढ़ियाँ मिलान छै,सात सकारे सासुर होइत छैक सेहो
भेटि जाएत।हमर बात सुनिते खबरीलाल भैयाक मन जे विवाहक लेल माहुर रहैत छलनि
से प्रशन्नतासँ महोर भऽ गेलनि आऔर प्रशन्न होइत हमरा हाथ मे किछु पाइ
पारितोषिक रुपमे दैत बजला---घटकके मिथिलामे किछु देबाक प्रथा छैक से हम
पूरा केलहुँ।हौ लेकिन तुँ आयोजक आऔर समीक्षके जँका ज्ञानक दरिद्र निर्लज्ज
आऔर महा दूष्ट छऽ।तोरेपर हमरा शंका बनल अछि।देखिहऽ बनलो बात बिगारि जुनि
दिहऽ।हौ तोरो चालि चलन चरित्र नीक नञि छऽ।हमरा सङे विवाह भेलाक बाद ओ तोहर
सारि नञि,बादरायण सम्बन्धे भावज हेथुन। एहि बादरायण सम्बन्धक मिथिलामे
महत्वपूर्ण महिमा छैक।मैथिली एकादमीक भ्रष्टाचारक मूलमे इएह बादरायण
सम्बन्ध व्याप्त छैक,ई बादरायण सम्बन्ध मैथिली एकादमीमे पूर्णरूपेण पुष्पित
पल्लवित छैक ।एहि ।बादरायण सम्बन्धे हमरो तोरोमे भैयारी अछिए,बादरायण
सम्बन्धे सढ़ुवारे सेहो रहत।भैयारीमे हम जेठ छिहे सढ़ुवारेमे तुँ जेठ
भेलह।हौ सुनै छिऐ हुनक विवाह भेल छलनि।हम कहलियनि --भैया विवाह भेल छलनि
मुदा दुनु परानीमे नञि पटैत छनि।एतवा सुनितँहि खबरीलाल भैयाक मुँह मीठा
गेलनि आऔर विद्वतापूर्ण शैलीमे व्याख्यान दैत बजला--बस!बस!बात बुझलियैक।
दुनू परानीमे रिस्ता कमजोर आऔर रस्ता अलगे अलगे हेतेन,दुन परानीक सम्बन्धमे
परान आऔर अनुबन्ध नञि हेतेन। तखन मरल रिस्ता कतेक काल चलत?हम कहलियनि भैया
अपने अग्रचेती छी,चिन्ता जुनि करि, अपने सङे अवश्य पटतेन।पटेबाक कला होइत
छैक,डोल बाल्टी आऔर लोटासँ सेहो पटाओल जा सकैत छैक। ओना ओहो बेलना चलबैमे
बिहारि छथि,ओना एकटा सामाजिक सोच चीरकालसँ चलि अबैत छैक जे कवि कवियित्रीक
बीच वैचारिक धरातल समतल नञि होइत छैक। अहुँक मनमे विहार करबाक लेल बिहारि
उठल अछि बेलनाक मारि खेलाक बाद शान्त सेहो भऽ जाएत।ओ गहनाक बहुत भूखलि छथि
से सोना चानी हो तऽ अतिउत्तम अन्यथा लोहोक अवश्य गढ़ा लेब।खबरीलाल भैया
अचानक बाजि उठला--ओ सुन्दरता आ यौवनक भार सम्हारिये नञि पबैत छथि, डेग हरदम
डगमगाइत छनि ,पैर हरदम भरियाएले रहैत छनि, तखन आभूषणक भार कोना सम्हारि
लेती?। हौ कोनो साहित्यिक मंचपर साहित्यिक सुवास होइत छैक से आइ धरि कोनो
मैथिलीक मंचपर नञि देखलियैक। हौ तोहर सारि सुपनेखियाके लाज नञि होइत छनि। ओ
अभिव्यक्तिक नामपर अपन अपान वायु छोड़ि मंचके मँहका दैत छथिन।हम कहलियनि
भैया-सावधान! ओ वुधियार वेदज्ञ विद्वानक बेटी मैथिली मंचक शोभा छथि। हुनक
सौन्दर्यक समक्ष व्याकरण,छन्द विधान चिन्हविचार साहित्यिक मर्यादा सब
महत्वहीन छैक, एहन अनसोहाँत ओछ बात बजलापर विवाहो नञि हाएत।खबरीलाल भैया जे
अपन विवाहक मन मोदक खाइत छला से डरे डेराइत पश्चाताप करैत सावधान होइत साँप
सन पल्टी मारैत बजला--नञि नञि!हम हुनक प्रशंसक छियनि। हे ई बात हुनका नञि
कहिहक ओ साक्षात सरस्वतीक अवतार लक्ष्मी छथि। हुनका हमर घर एलापर हमर भूत
भविष्य वर्तमान सबटा सुधरि जाएत,हुनको सूतल सोहाग जागि जेतेन।हम कहलियनि
भैया अपनेक भूत भविष्य कतेक सुधरत से भविष्ये कहत मुदा अहाँ अवश्य सुधरि
जाएब से हमरा दृढ़ विश्वास अछि ,ओ अहाँके नीकसँ सुधारि सकैत छथि।हमर
विचारसँ विवाहक बीमा अवश्य करबा लेब कारण हुनक वैचारिक ताप बहुत तेज
छनि।हुनका लेल सम्बन्धक अनुबन्ध महत्वहीन होइत छैक।सम्बन्ध विच्छेद भेलापर
बीमा कम्पनीसँ दाम्पत्य जीवनके दाम भेटैत रहत।खबरीलाल भैया हमर कानमे
कनफुसकी करैत निर्लज्जतापूर्वक पूछलनि --हौ किछु दहेजो भेटत की नञि?हम
कहलियनि--दहेज सेहो चाही?दहेजक नाम सुनिते हुनक दग्ध देह हरिया गेलनि आऔर
अपन रुसल ईष्टके सुमिरैत बजला---भेटैत तऽ नीके होइत ओना हम दहेजक विरोधी
साहित्यकार छी। हौ हम गृहस्थ छी, छुटछुटाह बेंट बला कुड़हरि कोदारि हम नञि
चलबैत छी,हमरा धप धप गोर श्वेतवर्णी वाला अन्हार घरके इजोत करै बाली कनिञा
चाही छल से भेटिए गेल।हम कहलियनि --भैया अहाँके लाजबन्तीक जड़ि पीसक' पिबाक
चाही, अहाँ हमरे सन निर्लज्ज छी।ओना एखन मिथिलामे निर्लज्जता किछु खास
कुलीन लोकक आभूषण मानल जाइत छैक आओर एहि आभूषणसँ अपने सेहो आभूषित
छी।खबरीलाल भैया चाँइ सन चहुदिश चकुवाइत बजला--विवाह जल्दीए नीक दिन देखि
भऽ जेबाक चाही। हम कहलियनि भैया निर्लज्जता नैतिकताक सीमाके अपने पार केनहि
छी, मर्यादाके कोठी कनहापर राखिये देलियैक, एहिसँ बेसी आब कतेक नीक दिन
हाएत?रहलै विवाह मोरै बला बात से कोनो पूज्य दूष्ट देवता दैत्य किन्नर
गंधर्व सेहो अपनेक विवाह नञि मोइर सकैत छथि।अहाँ सब शास्त्रक शास्त्रज्ञ
वेदज्ञ छिहे, अठारहो पुराण धंङले अछि, बहुते नारी देहके सेहो धंङनहि छी
,ज्योतिषाचार्य सेहो छिहे।आचरण और चरण दूषित अछि से सहजें झपा जेतैक।कने
हमरापर कृपा करि, अपने अपन मसियौतके कहि हमरा पुरस्कार दियाउ। एतवा सुनिते
खबरीलाल भैया तामसे तरैङ गेला आऔर सिंह गर्जन करैत अपन अस्सल स्वरुप देखबैत
अपन परिचय दैत बजला --विवाह भेलाक बाद पहिले हम दून्नू परानी पुरस्कार
लेब।हम लोङिया मिरचाइ मे मधुर मिलाक' कहलियनि--भैया अपनेक माथपर माया नाचि
रहल अछि।अपने हमर सारि सुपनेखियाक आकर्षण पाशमे पूर्णरूपेण बनहा गेल छी।
अपने नारी देहक नीक आऔर पैघ विमर्शकार रहितो खूब मन मोदक खाइत छी।कतऽ गेल
अपनेक दिव्य दृष्टि?अपनेक दृष्टि दृष्टिकोण दुनू दूषित अछि। जेकरा अपने अपन
दिव्य दृष्टि कहैत छियैक ओ असलमे दूष्ट दृष्टिकोण अछि। सढ़ुआरेमे सँरहा
पाड़ा सनक कनारि नञि होमक चाही।जखन अपनेक जन्म ब्रह्माक मुँहसँ भेल अछि तखन
व्यवहार विचार किएक एतेक ओछ अछि?एहिवेर खबरीलाल भैया असमंजस मे पड़ला आऔर
गंभीर चिन्तन करैत बजला---हौ ब्रह्माक मुँहसँ जन्मै बला बात एकटा रहस्य
छैक, से हमहूँ आइधरि नञि बुझलियैक। ई एकटा ओझरी छैक, हमहूँ आजीवन एहि
ओझरीमे ओझराएल रहि गेलहुँ।आँखिपर सबदिन अहंकारक पट्टी लागल रहि गेल जे हम
ब्रह्माक मुखसँ जन्मल छी ,ई ओझरी मनुख नञि बनए देलक।इएह झुठक अहंकार अध्ययन
करबासँ सेहो वंचित रखलक। अही झुठक कारण मैथिली साहित्यक उद्धार नञि भेलैक
मुदा सबटा पाप प्रपंच उघार अवश्य भेलैक।असलमे मंदिर ,मंच, धार्मिक
अनुष्ठान,आऔर समाजमे उच्च स्थान आरक्षित करबाक अवैध विशेषाधिकार लेबाक लेल
गढ़ल गेल झूठ छैक।अही सब झुठक कारण समाजमे घृणाक पात्र भेल छी, लोक
पोकिटमार बुझैत अछि, केओ हमरा बातपर विश्वास नञि करैत अछि।सब कामना कात
लागल रहि जाइए, सब इच्छा सेहो अभावपर आबिक' अटैक जाइत अछि।लोक उपहास करैत
परनाम सेहो अपन पछुआर देखाक' करइए।सौंसे दुनियाके पैरपर झुकेबाक वास्ते जे
हमर पूर्वज सार्थक प्रयास केलनि सेहो निरर्थक भेल अछि,आब हम पूज्य नञि रहि
गेल छी ।सबदिन हमर सोच रुढ़िवादी रहि गेल, मैथिलीए अछर कटुवा दागल साँढ़
साहित्यकार सनक कहियो प्रगतिशील समतामूलक सोच नञि रखलहुँ।सब दिन फुसिञाहिक
खेल पाग पाग खेलाइत चोर छिनार उचक्काके महिमामंडित करैत रहि गेलहुँ ।नामेके
पढ़ुआ भैया काका कहबैत रहि गेलहुँ।पढ़ल लिखल कतेक छी से हमरा अपनो बूझल
अछिए।हमहूँ पश्चाताप करैत समस्यासँ संतप्त खबरीलाल भैयाके सान्त्वना दैत
कहलियनि---भैया अपनेके अभाव अछि, अभावक अधिक अनुभव अछि,कंचन कामिनी आऔर
कनिञाके अभावक विलक्षण अनुभव सेहो अछि,मुदा अहंकारक विष तऽ बहुते
अछि।दूष्टक प्रपितामह सेहो छिहे।हम जे किछु आऔर कहतियनि से ताहिसँ पहिले
खबरीलाल भैया उताहुल होइत बिच्चहिमे बाजि उठला--हे आब ई उलहन उपराग छोड़ऽ
आऔर अपन सारि सुपनेखियाके शुभ शुभक' आशीर्वाद दहुन जाहिसँ हमरो किछु कल्याण
आ शुभ हुअए आऔर विवाहक बाद मुँह देखना सेहो द दिहौन।हमहू हुनकर चौकापर
छक्का मारैत कहिये देलियनि ---भैया एहिमे शुभ हेबाक कोनो आश नञि अछि,अशुभ
की सब हाएत से अपने अपन दिव्य दृष्टिसँ देखि लियऽ,रहलै मुँह देखना देबाक से
हमरा हुनक इतिहास बुझले अछि, भूगोल देखले अछि, तखन हम की मुँह देखना
देबनि?हमर बात सुनि खबरीलाल भैया आसमानसँ खसला आऔर असमान्य स्थितिमे आबि
गेला,कौहुना अपनाके सम्हारैत बजला---तखन एहि रिस्ताके हम सुनिश्चित
बुझियैक?हम कहलियनि--ब्रह्म रेख बुझल जाए मुदा हमर सारि सुपनेखियाके
चित्रपट देखबाक अभ्यास छनि से सप्ताहमे चारि दिन देखबहि पड़त आऔर हुनका
बातमे उत्तर प्रति उत्तर करबाक कोनो प्रयोजन नञि। सहजतासँ हुनक बात मानहि
पड़त, अन्यथा उतराधिकारीक जन्म नञि हाएत।एहिवेर खबरीलाल भैया हरियाएल मनसँ
आनन्दित होइत बजला----से हम चित्र पट शयनकक्षमे शयनासनके समक्षे लगा
देबनि।हम कहलियनि-- भैया चित्रपट अपने लगा देबनि से बुझलियैक मुदा चाउमीन
चाट आऔर चाहक चटका हुनका सेहो लागल छनि,से की घरमे संभव हेतैक?ई सब लेल
शहरे नीक होइत छैक। एखुनका शहरक चित्रपटमे चित्त पट्ट हेबाक कला नीकसँ
सिखाओल जाइत छैक। ओना हमर सारि सुपनेखिया चितपट कलामे दक्षताक उपलब्धि केने
छथि ,एहि कलाक ओ नीक निपुणा नारी छथि।ओ चित्त पट्टसँ चिता पर चढ़ेबाक
कलाधरि जनैत छथि।जाहिसँ अपनेक स्वर्गारोहणक मार्ग सेहो प्रशस्त हाएत आऔर
अपनेक चीरकालीन पुरस्कारक अभिलाषा श्मशान रत्न सेहो भेटि जाएत।
-बद्रीनाथ राय अमात्य, ग्राम पोस्ट करमौली, भाया कलुआही, जिला मधुबनी बिहार ,फोन 6205190859
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