
लाल
देव कामत
लगाबू कोनो जोगार : एक अवलोकन

मधुबनी , लक्ष्मी सागर - भौआरामे श्रीमती आशा देवी - माय आ बाबु श्री
लखनदेव साह जीके घर १ मई १९७९ ई० केँ जेष्ट बालक संजय गुप्ता'क जन्म भेल
रहनि। बचपन सँ नीक शिक्षा - दीक्षा पाबि ओ बीए,एल एल बी,आ प्रभाकर धरि
पढि-लिख वकालत करय लागलाह। ग्राम कचहरीमे न्याय मित्र पद पर अद्यतन कार्यरत
छथि। हिनक अनुज भाय अजय कुमार गुप्ता सेहो +2 उच्च विद्यालय नौआबाखर (हटनी)
मे संगीतके शिक्षक बनल छथि। श्री गुप्ता जी हटनीए निवासी श्री अजीत आजाद
जीके नवारम्भ प्रकाशन - मधुबनी सँ सन् २००० मेँ ४८ पृष्ठक मैथिली पुस्तिका
छपेलनि । एहि पोथी 'लगाबू कोनो जोगार ' केर दाम सय टाका छैक , जाहिके आई एस
बी एन ९७८-८१- ९४५३६४-९-९ भेटल छैक। ई एक मैथिली गीत संग्रह थीक। एहिक
सुन्दर छपाय आर. के. ऑफसेट प्रोसेस नवीन शाहदरा, दिल्ली सँ भेल अछि। एहि
पोथी केँ पाठक गंगा स्वर सागर , हारमुनियम मेकर , कोतवाली चौक , दुर्गा भवन
सँ पूभर लक्ष्मी सागर,भौआरा सँ प्राप्त कय सकैत छथि। पोथीक प्रति उद्गार
व्यक्त करैत अधिवक्ता श्री वीरेंद्र झा जी लिखैत छथि " धीया - पुता सँ ल'
क' वृध्दजनक रुचि अनुरूप गीत सभ अछि। 'सारिक इंतजार ' बेसी चहटगर अछि।
प्राय: सब रस एहिमे भेटत । " ऐ पोथीमे संजय कुमार गुप्ता जीक छिरीयाएल गीत
कऽ स़जोगिके राखयमे हुनक धर्मपत्नी सीमा देवी आ पुत्र द्वय आर्यन ओ आदित्य
केर प्रति रचनाकार श्री गुप्ता जी धन्यवाद ज्ञापन कयलाह अछि। पोथी प्रकाशित
करय ले बेर - बेर उत्साहवर्धन कयनिहार अग्रज वीरेंद्र झा जीक प्रति आभार
व्यक्त कयने छथि। मैथिली गीत - संगीत बिहार आ नेपाल'क मिथिला प्रक्षेत्रक
समृद्ध सांस्कृतिक विरासत थीक,जे अपन भाव पूर्ण धुन- तर्ज़ आ लोक परंपराके
लेल प्रसिद्ध छैक। मिथिला'क पाबनि- तिहारके सुअवसर पर मीठकंठ सँ गायल गीत
अत्यन्त मनमोहक सुनयमे लगैत छैक। श्री संजयजी गीतनाद आ गान बजानके लव्ध
प्रतिष्ठित उर्जावान गीतकार छथि।
हिनक पहिल परियास सद्य: प्रकाशित पोथीमे अधिकांश गीत लघु अछि आ लोकगीत
कोटिक अछि। गीतक जहन चर्चा होईछ तँ अनेको सुनल गीत यथा,लगनी - वटगबनी,
कीर्तन - भजन, विनय- वन्दना, , प्रार्थना, सामा चकेबाक गीत, जटा जटीन गान,
स्वागत गीत, समदाउन, भाव-भगैत, महराय आ श्रवणगीत गाथा केर मिथिलामे अदौकाल
सँ चलैनसारि आबि रहलैक अछि। मुदा कूतूहलके बात इ जे भक्ति पक्षके अपील गीत
सेहो ईष्टदेव सँ गुहार लगेबाक ऐ पोथीमे पृष्ठ सं० १७ पर दृष्टांत रुपेँ
देखल गेल अछि। यथा -:
..... ससुर हमर कान के चौपट
सासु हमर छै आँखि के निपट
हे ओइ पर सोचू
कतका घरो छै अन्हार
बाबा लगबू ने जोगार ..........
भोला लगबू ने जोगार
ऐ पोथीक रचना मंचीय गेयात्मक छैक, जे एकांकी ,प्रहसन, नाटकक एक दृश्य सँ
दोसर दृश्यके मध्य प्रस्तुत कयलापर दर्शक आ स्रोताक बीच एक सेतु केर काज
करैत रहत। जहन प्रयोग आनो ठाम नर्तकी वा बिपटा अपन हास्य गीत प्रस्तुत कय
खुब थपरी पबैत छथि। गीत- संगीत मानव जीवनमे मनोरंजन लेल एक आवश्यक विषय
बुझाइत छै। एहिक तरंग सँ रोगीक काया निर्मल होयमे सहायक होईछ। निश्तुकी
रूपेँ कहि सकैत छी " गायब आ कानब ,खायब जेकाँ सबकेँ रूचैत अछ। मुदा रचना तँ
कियो - कियो रचि सकैत छै। गीत मंजरी, राग परिचय, पारंपरिक लोक गीत श्री
गुप्ता जीक घरेलू वातावरणमे पिढ़ि दर पिढि सँ रचल -बसल छन्हि। हिनक पूर्वज
राजदरबार - दरभंगा सँ सम्वध्द रहथि। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह बहादुर
हिनक पूर्वज केँ गान - बजान विद्यामेँ प्रवीण होय लेल विदेश सँ उस्ताज १५
दिन लेल मंगौने रहनि।
ओहि समय गीतक वैश्विक पहचान दियेबाक लेल प्रतियोगिता कराओल जाए। ताहिमे
माँगैन खवाश सन पहुंचल कलाकार मेडल जीतैथ। समाजमे आब निर्गुण गीतक पारखी
लोक कम छैक। बेसीतर लोक ' लगबू कोनो जोगार ' तरहक गीतक लय ,भास ,तान आ धुन
पर इतराईत रहैछ। संजय जीके गीतक वानगी गाम-घरमे सामाजिक ताना-बानाके विपरीत
कोनू झगरा - झंझट , ममिला - फसाद, बुझारत- तसफीहा होय सँ देखल जाइछ। पंचायत
स्तरीय ग्राम कचहरीमे निपटारा लेल एक अपील करैत पहिल गीत सृजन करैत पाँति
देलनि अछि -:
......... मानो भेटत , शानो भेटत
न्यायक संग सम्मानो भेटत
भाई - भतिजा संग
स्नेह - प्रेमक परमानो भेटत
सब सँ सुन्दर ग्राम कचहरी।
वर्तमानमे मिथिलाके श्रधालू जन तीर्थ - वर्थ लेल अनेको ठामक बाहरके जतरा
करैछ,ओतुका स्थानीय लोक; एतयधरि जे दोकानदारो गारि सँ बात करैत छैक। से
अजगूत लागत जे ओ लोकनि अपनाकेँ मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जीके
भैयारी बूझि हँसी-चौल करैत छैक। आ मिथिलांचल केर लोक तँ जनक नन्दनी (सीता)
जानकी'क सहोदर भाय छथिये। एक पाँति "पाहुन लेने चलू" शिर्षक सँ उद्धृत अछि
-:
एक बात कहू अहाँ चोरे न भेली
भोरे - भोरे अहाँ एहिठाम अयली
जिया सीयाके चोरौली यौ
पाहुन लेने चलू
मिथिला के गारि उपहार यौ
पाहुन लेने चलु।
एकटा प्रसंगक चर्चा कय शेष पाठक केँ मनन लेल छोड़ैत छी। एक ' बेटी वरदान
छै' शिर्षक रचनामे पाँति गरहल गेल छैक ,जे बेटीक महिमा आ हुनक निर्माण धरती
पर भगवानक' सद्कृपा छी। जेनाकि -:
लक्ष्मी छै बेटी
सरस्वती छै बेटी
वेदो मे कयल गेल बखान छै
धरती पर बेटी वरदान छै।
भार्या बहिन जननी
इ हे बनली
हिनके पर टिकल जहान छै
हिनका कोटि-कोटि प्रणाम छै
- लाल देव कामत , नौआबाखर (मधुबनी)
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