
लाल देव कामत
पाठकीयता 'हमर ई मोन कहैए'
शक्ति- शिवक भक्ति गीत आ सखि हे आँचर फुलय वसन्त २०२४ मे मैथिली कविता
संग्रह संगहि प्रेरणा - पुँज 'मैथिली सूक्ति संग्रह ' केर वाद अई बेर सँ
पहिले अर्थात २०२५ मेँ पद्य विधामे मैथिली कविता संग्रह "हमर ई मोन कहैए"
कविवर श्री उदय शंकर झा जीक नवारम्भ प्रकाशन - मधुबनी सँ बहराएल छन्हि। ओना
गद्य विधामे श्री झाजी सेहो तीव्र गतिये कलम चलौलनि अछि। आँखिक देखल ,कानक
सुनल 'मैथिली कथा आख्यान आओर संयोग २०२५ ई० मेँ मैथिली उपन्यास
, तथा २०२६ मे सेहो पतीत, आँचर तर आओर संयोग पोथी प्रकाशित भेलनि अछि। सन्
२०२० ई० सँ पूर्व छात्र जीवनमे कविता रचैत रहथि, आब काव्य केर संग - संग
उपन्यास विधामे आगू बढ़ि रहलाह अछि। ताहि पर पोथी पढ़ि कहियो समीक्षा करब।
एखन सद्यप्रकाशित मैथिलीमे ६४ पृष्ठक पुस्तिका, जाहिमे उदय जीक ६३ गोट
कविताक संग्रह कयल गेल छैक ; तकरा आई एस बी एन ९७८- ९३ - ४९८६७ - ५४- ३ नं०
भेटल छैक। से ताहि प्रस्तुत पुस्तिका'क दाम २०० टाका य आ आभरण (कभरक) मुख्य
पृष्ठ सज्जा दिल आ साहित्यिक वैश्विक चित्राबलीक रंगील गता तँ आकर्षित
करैते छैक। पछिला कभर पर लेखक परिचय आ छविक संग कविजीक धर्मपत्नी श्रीमती
रेणु झाजीक हाफ फोटो सेहो ग्राहक केँ लौकत। एहि बहुआयामी रचनाक समर्पण अपना
गामक काली पूजा समिति केँ कयलन्हि अछि। मुदा पोथी संदर्भमे प्रकाशीय आमुख
लिखय सँ नवारम्भके कर्ताधर्ता आ आशुकवि श्री अजीत आजाद जी परहेज कयने छथि।
पाठककेँ हिनक कविता पढ़ैत सब रस सँ सराबोर आ ओज नीक लागत। कविता पढैत -
सुनैत अतिशय आनन्दक लाभ भेटत।
पहिल कविता'क शिर्षक - बेटा ,बापक दर्पण मेँ जे हुनक रचनाक पाँति शुरु
भेलैक हेन,से द्रष्टव्य अछि -: कोनो बाप लेल बेटा की?
बेटा तखन बुझैए ।
जखन आबि एहि दुनियाँमे
ओ अपने बाप बनैए।। ...........
एहि कविताक भाव आगू बाल मनोविज्ञान तरहेँ रचल छै ,जाहिसँ क्रमिक रूपेँ
बच्चा सँ किशोर आ किशोर सँ युवा होईत कोन - कोन मन:स्थिति सँ एक प्रोढ
व्यक्ति गुजरैत अछि; आ तकर तार्किक रूपें स्वयं अपन मुल्यांकन करैछ। कोनू
शिशु कें देखि एक वयस्क व्यक्तिक अभिलाषा आ मनोदशा कोन तरहेँ औनाईत छैक से
एक अन्त:करणक झलक सँ स्वयं बिहुंस पड़ैछ।
गौरव कविता गौरव बोध कराबैत मानवीय भीतुरका जे द्वन्द चलैत रहैछ ,अपनाकें
सबसँ उपर आ दोसरकेंँ हीन बुझैत छैक; से जीवनक आखरि क्षणमे कोना मोन स्वत:
विमर्श करैत छैक तकर मनोविश्लेषण ऐ कवितामे एक झलक पाठक देख लैत अछि।
जीवन - वृतांत पाठमे पाठककेँ संदेश भेटैछ अपने मोन गछत एहि भलाजुग संसारमे
कियो अपनाकेँ कम नहिं बुझैत य। से निष्पक्षता सँ आकलन करबाक संदेश देल गेल
छैक। समस्या जनित एक कविता 'ककरा पर के आश करत' पाठमे कविक चिन्ता समीचीन
छै। हुनक रचल मौलिकता पर समाज सोचथि -:
ककरा पर के आश करत।
ककरा पर के विश्वास करत।।
सभ अपनेमे अछि ओझरायल।
सोझरेबामे छै सभ बाझल ।।
एक आखरि पाठ शिर्षक " बुध्दिमान" कविता'क माध्यम सँ कविजी समष्टिक समुदाय
केँ चौथापनमे जे अध्यात्मिक झुकाउ हेबाक चाही से अपन ज्ञान बँटैत ,अपन
अनुभव सँ लाभ लेबाक खगता देखेलनि अछि -:
बुध्दि देने भगवान छथि।
कर्मक ओ प्रधान छथि।।
विचरण लेल ओ प्राण छथि।
परखय लेल देने ज्ञान छथि।।
सज्जन लेल सम्मान छथि।
दुर्जन हेतु कृपाण छथि।।
रखने हाथ कमान छथि।
बुझथि से भगवान छथि।।
................!
पिकिपिडियासीमे कुल १४,३५३ लेखकक संग्रहित नाम छैक,जाहिमे सँ बेसीतर कविता
रचैत मैथिली साहित्य केर अक्षय भंडार केँ भरलनि अछि। किनको कविता सँ हिनक
कविताक तुलना करब अर्थात दब-उनार कहब हमरा शक्य नहिं होयत। मैथिली कविता
माध्यम सँ कवि उदय शंकर जी साहित्य सेवा कऽ रहलाह अछि,से स्तुत्य प्रयासके
हम प्रशंसा करैत छियैन।
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