
सुरेन्द्र लाभ
दुगोट कनिका नाटक [नवकी पुतहु/ रटन्त विद्या]
१.
नवकी पुतहु
पात्र:
१. साउस, हाथमे झाड़ू लेने, कने खिसियाएल।
२. पुतहु , पूरा श्रृंगार कएने, हाथमे बडका मोबाइल।
(पुतहु कैमरा सामने नीकसँ मुुस्कियाइत ।)
पुतहु - (मधुर स्वरमे)नमस्ते, प्रणाम ! देखू, आइ हम अपन सासुमा के लेल कतेक
प्रेमसँ खीर बना रहल छी। हमरा लेल त' हमर सासुमा साक्षात अन्नपूर्णा
छथि...।
(ओही समय पाछूसँ साउस झाड़ू लेने प्रवेश करैत छै)
साउस -गे कनिया! ई की क' रहल छे? भोरसँ चुल्हिमे आगि नै जरलौ , आ’ एतए
‘खीर-खीर’ की बकैत छें? जो, पहिने गाइके कुट्टी काटि क' ला!
पुतहु- (कैमरा दिस देखैत,मुुस्किआइत, मुदा दाँत पर दाँत बैसबैत, मद्धिम
स्वरमे)मम्मी जी, दू मिनट रुकू ने! रील बना रहल छी ... इज्जतके सवाल अछि!
साउस - (कैमरा दिस तकैत) गे इज्जत त' तखने रहतौ ने, जखन पेटमे दाना जएतौ! ई
मोबाइल देख-देख क' की दाँत निपोरैत छें? दिनभरि सुतल रहैत छें, आ अखन चलले
हिरोइन बनए !
पुतहु - (वीडियो बंद करैत, खिसियाइत)धत्त! सभ वीडियो बिगाड़ि देलियै।
फॉलोअर्स सभ की कहत? अहाँ के त' किछुओ बुझाइते नै अछि!
साउस - हमरा की बुझाएत? हमरा त' बस ई बुझल अछि जे एहि टिक-टक आ रीलके
चक्करमे घरक टिक-टिक बढ़ि गेल अछि! चल, आब असलियतमे भंसा घरमे जा’ क' बर्तन
मांज, नै त' रीलक संगे-संग तोहर हील सेहो टूटतौ!
पुतहु - धुर जो । माँ जी अहाँ पुरना साउस छी ।नवका बात किच्छो नै बुझै छी ।
साउस - ह गे नवका बात बुझएवाली हमर नवकी पुतहु ।पहिने भगै छे की नै एत्त’ स
।
(पुतहु मुँह फुला क' कैमरा उठा क' भगैत अछि, साउस झाड़ू लेने पाछू दौड़ैत
अछि। हास्य साउण्ड । )
(नाटक समाप्त)
२.
रटन्त विद्या
पात्र:
१. मास्टर साहेब: कठोर शिक्षक, सिस्टमक प्रतिनिधि।
२. सोनू: संवेदनशील, जिज्ञासु विद्यार्थी।
3. अन्य विद्यार्थीसब
(स्थान- विद्यालयक कक्षा )
(मास्टर साहेब ब्लैकबोर्ड पर “H₂O” लिखैत छथि)
मास्टर साहेब-सोनू! ई की अछि?
सोनू- सर… पाइन…
मास्टर साहेब-पूरा बाजू!
सोनू-H₂O…
मास्टर साहेब- जोरसँ बाजू ! जइसँ याद भ' जाए!
सोनू: (कने ऊँच स्वरमे)H₂O…
मास्टर साहेब- अहिना रटू! परीक्षामे इहे लिखब!
(सोनू किछु क्षण चुप रहैत अछि, आँखिमे हल्का नमी)
सोनू- सर… एकटा बात पूछु?
मास्टर साहेब- जल्दी बाजू!
सोनू- जँ हम पियासल रहब… त' H₂O पीयब कि पानि?
(कक्षामे सन्नाटा)
मास्टर साहेब- फालतू सवाल नै पूछू!
सोनू- (आवाज कपैत)सर… हम समझए चाहैत छी…किताब हमरा शब्द सिखबैत अछि,मुदा
जीवन हमरा अर्थ बुझबैत अछि…
(सोनू बैग उठा लैत अछि)
सोनू- परीक्षामे हम पास भ' जाएब सर…मुदा जीवनमे… शायद फेल…
(सोनू धीरे-धीरे बाहर चलि जाइत अछि)
(मास्टर साहेब चुप… ब्लैकबोर्ड पर “H₂O” के तकैत रहि जाइत छथि)
(धीरे-धीरे ओ डस्टर सँ “H₂O” मेटबैत छथि… मुदा हाथ रुकि जाइत छै)
मास्टर साहेब: (बहुत घीरे, टूटल स्वरमे)हम पानि पढ़ा रहल छी…कि बच्चाक
प्यास मारि रहल छी…?
(नाटक समाप्त)
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