
अशोक कुमार ठाकुर
रीत भेल कतेक नीच यौ
देखू दुनियाँ के रीत भेल कतेक नीच यौ।
हमरा कनिको निको नई लगईया मीत यौ।।
बेटिक बाप हाथ जोड़ी कानई।
बेटाक बाप बातों नई मानई।।
बाप भ बापक मरम नई जानई।
धिया पिया के करम नई जानई।।
बेटा-बाप के मुँह बड़ फरिच यौ,
जेना जीर में रहई छै,मरिच यौ।
देखू दुनियाँ के रीत भेल कतेक नीच यौ।
हमरा कनिको निको नई लगईया मीत यौ।।
पीपड़ पूजई बेटी हर सोमवारी,
सब सखी मिल क गाबई नचारी।
माय बाबू के दुलारी बुझे लचारी,
कोना क हटतई दहेजक बीमारी।।
बेटा के होई छै आब कालाबाजारी।।
धिया कहे बाबुल के घर बड़ा नीक यौ,
हमरा विवाह में जेतई कोना बिक यौ।
भ रहल छै दुनु तरफ खीचम खीच यौ।।
जेना आव ब्याह नई होई छै,युद्ध शीत यौ,
देखू दुनियाँ के रीत भेल कतेक नीच यौ।
हमरा कनिको निको नई लगईया मीत यौ।।
वाह रे वाह केहन एलई जवाना,
बर-बधु खोजई छै आब जनाना।
बात भ जाई छै तय सोलहो आना,
बुढिया फुईस बात लै भ जाई छै मना।
नूईस भईर बात लै भ जाई छै माना।।
हमरा ऊठी जाई यै अही लै खीष यौ।
जेना हमरा मारई यै माथा में टीश यौ।।
देखू दुनियाँ के रीत भेल कतेक नीच यौ।
हमरा कनिको निको नई लगईया मीत यौ।।
बाबु जी गुजरि गेला बिना देखले जमाई ,
अंगना में कानई छै दाई-माई संग भाई।
विधना के लिखल बिधि मिटलो ने जाई,
समाजक कुरीति देख कऽ गेलऊ डराई।
दहेज के लेल बेटाक बाप बनल कसाई।
जेना लागई छै अंहार चारू दिस यौ,
आब अमृतो लगईया हमरा विष यौ।
देखू दुनियाँ के रीत भेल कतेक नीच यौ।
हमरा कनिको निको नई लगईया मीत यौ।।
नाम:अशोक कुमार ठाकुर (नाई/हजाम); ग्राम+पोस्ट:-करमौली,
जिला:-मधुबनी(बिहार); मोबाइल नंबर:-9576207983,जनसेवा:-एस.डी.आर.एफ. मे
कार्यरत सिपाही
[ई-
विदेह'क लेल एक नव रचनाकारके आगमन: मैथिली साहित्यक एक सच्चा सिपाही जे
वास्तविकमे सिपाही पद पर एस.डी.आर. एफ. विभागमे कार्यरत छथि। ओ अपन दू गोट
मौलिक नव अप्रकाशित रचना अवलोकनार्थ पठेलाह अछि -:
'मां' शिर्षक कविता आओर रीत भेल कतेक नीच यौ। अपने पाठक केँ ई सौष्ठव रचना
नीक लागत से हमरा दृढ़ विशवास जगैत य। ई युवा पीढ़ीक मैथिली सेबक " मैथिली
पिछले दलित साहित्य..’' सँ जुटल रहैत छथि। जे अपन दू प्रकाशित रचना 'मैथिली
लोक गीत ' साभार अपूर्वा जुलाई - सितम्बर २०२५ आओर दिसम्बर अंक हैं छनि ।
संगहि किए हिन्दी साहित्य लेल सेहो हिनक रचना नीक गरहैनमे भेल छैन। हिनका
मोनमे एकटा कचोट रहनि जे पूर्वमे " देसील बयना" केँ प्रकाश नार्थ पठौने
रहथि ,मुदा ओ रदिभंगाके एक स्वनामधन्य रचनाकारके नामे ऊपर देखलनि। तेँ पुनः
कतौह दोसर खेप सँ छपय लेल पठेबा सँ परहेज भऽ गेलाह। ओना रचना'क चोरी तँ
मातृभाषा मैथिली लेखन क्षेत्रमे कहियैकाल सुनबामे अबैत रहल य। तेँ श्री
ठाकुरजी (नाई समाज) आब अपन रचना ई- विदेह कें नियमित प्रकाशनार्थ पठेताह से
वार्तालाप भेल हेन। हिनक संक्षिप्त परिचय अपने लोकनिक बीच दऽ रहल छी -:
मधुबनी जिलाक खजौली थाना अन्तर्गत करमौली गामक स्व० पिता राज कुमार ठाकुर
जीक बालक - अशोक कुमार ठाकुर केर जन्म दि० १५-२-१९८६ ई० केँ भेलनि,जे
स्नातक (कला) इतिहास प्रतिष्ठा कयने धरि छथि।
-लाल देव कामत (साहित्य सेवी)]
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