
कुमार मनोज कश्यप
लघुकथा:गिरगिट
ओ हमर विभाग मे नवे आयल छल। स्वभाविक छलै जे एहि ठामक माहौल, कार्यक प्रकृति, उच्चाधिकारी के मनोभाव आदि सs ओ भिज्ञ नहिं रहबाक कारणे सभ फाईल हमरा सs पुछिये कs करैत छल। हमरो ओकर मदति करबा मे हार्दिक आनंद भेटै। ओहि दिन पेंडिंग फाईल सभ पर बॉस सs चर्चा करैत रही। एकटा फाईल पढ़ैत बॉस ओकर प्रशंसा करैत बजला - 'वाह! शरणबाबू! आहाँ जल्दिये काज पर अपन पकड़ बना लेलहुँ। बढ़िया परीक्षण आ अपन सुझाव!!! ......उत्तम! कीप इट ऑन।' सुनि कs ओकर छाती गर्व सs फुलि गेलै - 'सर! ई अपनेक सक्षम मार्गदर्शन आ प्रेरणा के परिणाम छै। हम एहि विषयक सभ टा नियम आ समय-समय पर निर्गत दिशा-निर्देश सभ के अध्ययन कs फाईल पर अपन मंतव्य लिखलहुँ। अपने के नीक लागल ई हमरा लेल प्रेरणास्रोत अछि सर।' बॉस दोसर फाईल खोलि पढ़ब शुरू केलनि। पढ़ैत-पढ़ैत माथ परहक रेखा जगजियार हुअs लगलनि - 'एहि फाईल मे आहाँ की कहs चाहैत छियै से हम नहिं बुझि पाबि रहल छी?' कहैत ओ फाईल ओकरा दिस स्पष्टीकरण हेतु ठेल देलनि। ओ ओहि फाईल के हमरा दिस ठेलैत बाजल - 'सर! हम सिन्हा साहेब सs पुछिये कs लिखने रही।' कहि कs ओ हमर मुँह निहारs लागल।
हम काठ बनि गेल रही ..... नीक हमर आ अधलाह तोहर!
-कुमार मनोज कश्यप, निदेशक, भारत सरकार; संपर्क : सी-11, टावर-4, टाइप-5, किदवई नगर पूर्व (दिल्ली हाट के सामने), नई दिल्ली-110023 ; # 9810811850 ; ईमेल: writetokmanoj@gmail.com
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