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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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अशोक कुमार ठाकुर

कारगिलक अमर वीर/संघर्षक अमर ज्योति/माछी खोजय घाव,दुश्मन खोजय दाँव।/ लोकनायक राजा सल्हेश स्तवन


कारगिलक अमर वीर

हिमगिरिक चोटी गर्जि उठल,
भारतक रणध्वज फहरायल।
शौर्य, त्याग आ बलिदानसँ,
दुश्मनक साहस थरथरायल॥

बर्फक शय्यामे सुतल जवान,
सीनामे ज्वालामुखि जलैत।
"जय भारत"क उद्घोष करैत,
मृत्युसँ आँखि मिला लड़ैत॥

गोली, बम आ अग्निवर्षा,
कखनो पग नहि डोलल।
मातृभूमिक रक्षाक खातिर,
प्राणक दीप स्वयं खोलल॥

तिरंगाक सम्मान बचाबय,
रक्तक गंग बहा देलनि।
कारगिलक प्रत्येक शिलापर,
वीरताक गाथा लिखि देलनि॥

माय कहलक—"जा बेटा निर्भय,
देशक मान बढ़ाबह।"
वीर सपूत हँसैत विदा भेल,
प्राण दऽ कऽ वचन निभाबह॥

शत्रु बुझलक भारत सोइत,
ई ओकर भ्रम टूटि गेल।
एक-एक रणबाँकुराक समक्ष,
अहंकार सभ चूरि भेल॥

आउ नमन करिऐ ओ वीरकेँ,
जिनकर अमर बलिदान।
जिनक कृपासँ सुरक्षित अछि,
हमर भारत, हमर सम्मान॥

जय जवान! जय भारत!
जय कारगिल विजय दिवस!


संघर्षक अमर ज्योति

भोरक संग सपना लऽ निकलल,
आँखिमे नव आस।
ज्ञानक दीप जराबय लेल,
हृदयमे अटल विश्वास॥

नहि छल हाथमे कोनो शस्त्र,
नहि छल मनमे द्वेष।
न्याय,शिक्षा आ उज्ज्वल भविष्य,
एतबे छल संदेश॥

भीड़क शोरमे एकाएक,
मौन भऽ गेल स्वर।
मायक कोरामे नोर बरसल,
कानल सगरो घर॥

बापक माथ झुकि गेल चुपचाप,
टूटल मनक आधार।
भाइ-बहिनक रिक्त नयनमे,
उठल करुण पुकार॥

अहाँक अधूरा सपना सभ,
आब नहि मरि पायत।
प्रत्येक विद्यार्थीक साहसमे,
अहाँक स्वर गुँजायत॥

शिक्षाक मंदिर पावन रहय,
रहय न्यायक मान।
युवाक सपना सुरक्षित रहय,
एतबे देशक शान॥

नहि रहू वैर, नहि रहू क्रोध,
बढ़ू प्रेमक बाट।
संवादे सँ दूर होअय,
सभ मतभेदक घाट॥

धरती माँ अहाँकेँ अपन,
अँकवारिमे सुतौलनि।
सत्य,साहस आ संघर्षक,
दीप अमर जरौलनि॥

युग-युग धरि स्मरण रहत,
अहाँक निष्कलुष प्रीति।
एकटा संघर्षक बेटी,
बनि गेल प्रेरणागीति॥

"शिक्षा,न्याय आ संघर्षक बाट पर अमर जीवन समर्पित।
करनिहार एकटा साहसी बेटीक पावन स्मृतिमे॥


माछी खोजय घाव,दुश्मन खोजय दाँव।

माछी खोजय घाव सदा,
दुश्मन खोजय दाँव।
कमजोरी जँ देखलक कतौ,
दिय लगैत अछि ताव॥

घरमे जखन फूटि पड़य,
टूटय प्रेमक तार।
ओही बाटे दुश्मन घुसय,
करय खुशीक संहार॥

एकतामे बल बसैत छै,
बाँटबामे अपमान।
जतय मिलि कऽ लोक रहैत,
ततय बढ़ैत सम्मान॥

नफरतक बीया नहि रोपू,
रोपू प्रेमक फूल।
क्रोध आ ईर्ष्या छोड़ि कऽ,
बनू विवेकक मूल॥

माछी जकाँ नहि बनू ककरो,
घावे-घाव निहारि।
मरहम बनि कऽ पीड़ा हरू,
मिठगर बाति उचारि॥

जीवनक ई सीख अमर छै,
राखू सदा ध्यान।
माछी खोजय घाव, मुदा
सज्जन खोजय समाधान॥


लोकनायक राजा सल्हेश स्तवन

॥ मंगल-दोहा ॥

मिथिलाक पुण्य धरणिपर, उज्ज्वल अहाँक नाम।
लोकनायक सल्हेश प्रभु, स्वीकारू प्रणाम॥

॥ चौपाई ॥

जय जय मिथिल-मुकुट-मणि देवा।
जन-जनक विश्वासक सेवा॥

सत्य-धर्मक दृढ़ रखवारा।
दीन-दुखीक परम सहारा॥

वन-उपवन आ नदी-पोखरि।
राखल सभक मान सदा भरि॥

निर्बलक बनि दृढ़ आधार।
कएल न्यायक सतत प्रचार॥

लोभ-मोहसँ दूर सदिखन।
जन-हित लेल समर्पित जीवन॥

जाति-पाँतिक भेद नसौलनि।
समताक दीप निरन्तर जारौलनि॥

प्रेम, दया, क्षमा आ सेवा।
एहने छल अहाँक सद्भावा॥

शौर्यक ज्योति प्रखर प्रज्वलित।
अहाँक यश अछि चिर उज्ज्वलित॥

लोक-गीत आ लोकक गाथा।
अहाँहि सँ पबैत अछि माथा॥

गाम-गाम उत्सव मनाबय।
बाल-वृद्ध गुणगान सुनाबय॥

मिथिल-भूमि धन्य कहाबय।
अहाँक यश संसार गाबय॥

॥ दोहा ॥

न्याय, दया, समभाव सँ, उज्ज्वल कयल समाज।
युग-युग जीवित रहत,छथि लोकनायक महाराज॥

॥ विनय ॥

चरण-कमलमे शीश नवाबी।
भक्ति-भावसँ वंदन करबी॥

मिथिल-भूमि पर कृपा बरसाउ।
सभक जीवन मंगल बनाउ॥

सत्य-धर्मक राहि देखाउ।
प्रेमक दीप निरन्तर जाराउ॥

॥ समापन-दोहा ॥

मिथिल-मानक दीप छी, जन-जनक विश्वास।
सल्हेशक अमर यश रहय, धरती आ आकाश॥



-अशोक कुमार ठाकुर; ग्राम–करमौली, पोस्ट–करमौली, थाना–खजौली, जिला–मधुबनी (बिहार); मोबाइल नंबर:8709568993, जनसेवा:एस.डी.आर.एफ. मे कार्यरत सिपाही।

 

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