
प्रीति कुमारी
सम्मान'क सम्मान
एक सरकारी लटकल सम्मान'क घोषणा बढ़ बिलम्ब सँ भेल अछि। एहि सम्मान वा
पुरस्कार संबंधित हो-हंगामा केर अंदेशा सँ किछ समय ले ऐनवक्त पर
अनावश्यक रूप सँ घोषणा बढाओल गेला सँ मैथिली भाषा मेँ पोथीके चयन पर
उहापोह मचल छल। ताहि बीच साहित्य अकादमी पुरस्कार सँ पृथक सम्मान सँ
बिहार'क समान्य लोकमे अतिशय प्रशन्नता पसरल रहय।
सम्मानक दौड़मे सन् २०२६ के पद्मश्री सम्मान पाबि चारिगोट विभूति
बिहारके मान बढबैत अपन विशिष्ट साधना सँ आई राष्ट्रीय फलक पर विशिष्ट
छाप छोड़लनि । गणतंत्र दिवसके पूर्व संध्या पर केन्द्र सरकार एहिक
घोषणा कऽ क्षेत्रीय मानसिकता'क बिहार बासिक बीच कला, विज्ञान आ
संस्कृतिक क्षेत्रमे एक खुशी पसारलनि। पहिल स्वर्गीय विश्व वन्धु पटनाक
(दानापुर) शाहपुर'क रहबासीकेँ मरणोपरांत ९५ वरखक आयुमे कला बावत
सम्मानित कयने छलैन। पुरस्कारक घोषणा सँ पूर्वहि २०२५ के मार्चमे हुनक
निधन भेल रहनि। लोकनृत्य 'डोमकच' केँ ग्रामीण आँगन सँ बहार कय ओ
अन्तर्राष्ट्रीय मंच धरि पहुंचौने रहथि। लगधक ६००० सँ अधिक मंच पर हुनक
प्रस्तुति हेबाक वाद्य कलाप्रेमी सुधी पाठकजन अपना मानस पटलमे ई खबेर
सहेजने छथि। कमला पूजा षटचक्र अग्नि नृत्य नव विधाक ओ सृजनकर्ता भेलाह।
सन् १९५९ ई०मे ओ पटना 'सुरंगन' नामक अकादमी केर स्थापना कय सहस्त्रों
युवा केँ एहि लोककला सँ नि:शुल्क प्रशिक्षण दैत कीर्तिमान बनौने छलाह।
दोसर
श्री भरत सिंह भारती - लोक गायन क्षेत्रमे लगधक १००० सँ अधिक भोजपुरी
गीतक रचना कय , ताहिके स्वर देलनि। ई महान् व्यक्तित्व १९६२ ई०सँ
आकाशवाणी - पटनामे जुटि लोक संगीतक शुद्धता बनौलनि अछि। ओ तबला-
डुग्गी,मजीरा , हैरमुनियम आ बौसली वाद्यके माध्यम लोक गायनकेँ
शास्त्रीय रुपेँ चोटिपर पहुँचेलनि अछि। हिनका पूर्वमे संगीत नाटक
अकादमी " अमृत पुरस्कार" सँ सेहो सम्मानीत केयने रहनि । तेसर छथि- डॉ
० गोपाल जी त्रिवेदी -: विज्ञान आ इंजीनियरिंग क्षेत्रसँ जे प्रसिद्ध
कृषि वैज्ञानिक आ राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय 'क
पूर्व कुलपति रहि चुकल छथि। ई मुजफ्फरपुर गायघाटके रहबासी थिकाह जे
कैनोपी मैनेजमैंट द्वारा लीची बगानक कायाकल्प लेल तकनीक विकसित कैलाह
अछि। संगहि किसानके मखान ,सिंहार आ जाड़ा मासक मकई खेतीमे दूगुणा लाभ
कोना होय, ताहि ले अभूतपूर्व काज कयलन्हि अछि।
डॉ० श्याम सुंदर माखड़िया -: चिकित्सा क्षेत्रमे विशेष कय कालाजार
बोखार उन्मूलन लेल समर्पित रहल छथि। सन् १९९४ मे कालाजार रिसर्च
सेंटरके स्थापना कऽ लगधक २०,००० सँ बेसी मरीजक मुफ्त इलाज कयलन्हि अछि।
सन् २०२५ ई० के मैथिली भाषा मेँ मूल पुरस्कार 'क घोषणा समय सँ होयमे
कतेको कारण सँ थकमकाएल छल , से आब फरीछ रुपेँ नाम घोषित भेल अछि। ई
पुरस्कार ऐ बेर साहित्योत्सब समारोह , नव दिल्लीमे ३१ मार्च २६ केँ
डॉ०(प्रो०) महेंद्र झा जी'क संस्मरण पोथी' धात्री पात सन गाम' केँ देल
जायत। आनबेर जेकाँ मैथिली साहित्य पोथी पर आपत्तिजनक बहस होय छल ,से
अपवाद छोड़ि कोनू कोन सँ अनघोल नहिं भेल अछि। से एक सकारात्मक सोच सँ
लेखकीय समाज आ आन्दोलनीक बीच बेस समन्वय बुझिमे आयल अछि। तेँ सम्मान क'
सम्मान करब परम आवश्यक बुझाइत छैक। ई सम्मान हुनका कोसी क्षेत्रक
ग्रामीण संस्कृति, परंपरा आ जिजीविषाके मार्मिक चित्रणके लेल भेट रहलनि
अछि। एहि सम्मानमे एक लाख टाका नगद, एक तामक पट्टिका आ शाॅल पुरस्कार
रुपेँ देल जेतन्हि। डॉ० झाजीक विषयमे संक्षिप्त जनतब साहित्य सेवी श्री
लालदेव कामत जीके आलेख पढि भेल रहय , जे मैथिलीक त्रिमासिक पत्रिका "
कोसी संदेश " अंक - २४ संयुक्तांक जन०- जून २०२५ मे प्रकाशित भेल रहैक।
एहि पत्रिका केँ आई एस एस एन. २३९५- २२५३ भेटल छैक।
डॉ० महेंद्र झा जी'क जनम ६ जन० १९४७ ई० मे सुपौलक सटले भेलाही गाममे
मैथिल ब्राह्मण परिवारमे भेल छन्हि । ई चिन्हार गाम हमर दिदि श्रीमती
सुन्नैर देवीके सासुर आओर श्रीमती लक्ष्मी देवी काकी केर नैहर छी। लगधक
८० वर्षीय लेखक श्री महेन्द्र बाबू विगत कोरोना कालीन समयमे अपन बेटी -
जमाय लग राँचीमे रहि 'धात्री पात सन गाम ' मैथिली भाषा मेँ प्रेरक
संस्मरण लिखलन्हि। सन् २०२१ ई०मे प्रकाशित एहि पोथीकेँ साहित्य अकादमीक
तीनू जुरी महोदय पुरस्कार लेल चयन केलथि। ऐ पोथीक संगहि हुनक पड़ोसी
आ अभिन्न मित्र प्रो० सुभाष चन्द्र यादव जीके पोथी सेहो पाईनलमे रहैक ।
श्री यादव जी मैथिली जगतमे प्रख्यात कथाकार रहल छथि। कोसी कछेरके
समाजशास्त्रीय अध्ययन श्री महेन्द्र जीके हुनक पिताजी सँ भेलनि, निधन
पछाति १५ जून १९७० केर वाद पित्ती आगू बतबैत रहलनि। सुपौल , सहरसा ,
तेलंगाना आ झारखंडमे हिनका साहित्यिक अवदान लेल अनेकों पुरस्कार भेटल
छन्हि। श्री झाजीक मैथिली साहित्यके कतेको विधामे प्रेरणादायक अनेकों
पोथी छपल छन्हि। धर्मपत्नी'क गुजरलाक वादो मातृभाषा लेल अहर्निश सेबक
बनल देखाईत छथि। सम्मान'क सम्मान वहुविधावादी सशक्त हस्ताक्षर श्री
महेन्द्र के लेल मंगल कामना करैत छियैन , जे ओ शतकजीवी होथि!
- प्रीति कुमार,ी बी.ए., बीएड.
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