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VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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लाल देव कामत

कलंक : एक पोथी चर्चा

कलंक 'मैथिली कथा संग्रह ' श्रीमान जगदीश प्रसाद मंडल जीके १३३म् कृति थीकैन। पल्लवी प्रकाशन - निर्मली सँ प्रकाशित ऐहि मैथिली भाषा केर पोथीमे पृष्ठ सँ० ९६ टा अछि,जाहिक दाम २९९ टाका छैक। सन २०२६ ई० मे सद्यप्रकाशित ऐ पोथीमे कुल १० गोट नव कथा संग्रहित कयल गेल छैक, जकरा आई एस बी एन. ९७८- ९३- ४८८६५- ७५- ५ नं० भेटल छैक। नीक गत्तामे सुलेख छपाय केर संगहि पृष्ठ सँ० ८८ सँ ९५ धरि कथाकार श्री मंडल जीक रचना संसार मादे विवरण आ हुनकर रचना संदर्भमे अनुवाद ओ चयनित पाठके ६७ पोथीक सुचि देल गेल य। पछिला कभर पर श्री जगदीश बाबू'क रंगील हाफ फोटो सहित संक्षिप्त परिचय आ साहित्य लेखनक जनतब देल गेल छै। प्रस्तुत पोथीक पहिल पाठमे 'बहिनक सिनेह' शिर्षक बढ़ मनलगू आ आधुनिक समयक समाजिक विषय पर रचना कयल गेल छैक। हुनक एहि १०६३ म् कथामे शव्द संख्याँ १७४६ टा य, जे ६ जनवरी २०२६ केँ ई खिस्सा लिखलनि हेन। लगधक १८ वर्षीय जुवती कुन्ती चारि भाय - बहिनमे सबसँ छोट वयशके छथिन,जे ऐ कथाक मुख्य पात्र रहल छथिन। वयक्रम सत्रह साल जाहि दिन पार करैत अठारहम् सालमे प्रविष्ट करैत छैक,हुनका सम्पूर्ण रातिक भोरहरबा धरि एक विचार मोनमे उधकैत रहैत छै। आओर स्वगत नियार - भास अनुसारे दोकान सँ सामग्री बेसाहि गामेक दोसर टोलमे अपन जेठकी बहिन श्यामा ओतय बेरूका पहर झोरा लेने पहिले बेर जाईछ। हुनकर श्यामा १८ वरख वयस पुरतहि अपन कालेजक साथी मनोज जी संग प्रेम बियाह कय परा गेल छलैन। से कन्या पक्षक हंसेरी वर पक्षके ओतय झगरा करय पहुँच गेल छलैक। तेँ आब छ: सालक बेटी राधा आ चारि सालके बेटा मनोहर भेलोसन्ता क्योपक्ष अबरजात आओर साहभाह नै रखने छलैक। पैघ बहिनक प्रति अम्बोहि सिनेह जगैत छोट बहिन आई कुटुम्ब परिवारमे धियापुता लेल पढ़ाय - लिखायके उपस्कर आ नव वस्त्र झोरामे लैत ४ वजे जुमैत छै। बहिनबेटी सँ संवाद स्थापित कय आ ओसाराक कुर्सी पर दूनू सहोदर बहिन कनेक काल मूकवार्ता फेर अन्तरवार्ता करैछ। जन्मदाता माय - बाप ले बेटी समय पर बिरान भऽ जाईछ, मुदा एतय तँ विरानों सँ ओइकात बाली बात छलैक। ई तँ उचिते थीक जे १८ साल पुरैत बालिका बालिग कहाबैछ आ कानूनन सरकारो विवाह बावत पुरे स्वतंत्रता देने छै। बहिन केँ बुझाबैत कहैत य ; तोँ अनुचित नहिं केने छें। हम सम्बन्ध जोड़नाई केँ अपन मर्जी सँ समर्थन करैत छियौक। ताहि दिनमे तँ ओ स्वत: नेबालिक रहथि। ऐ कथामे एक शिक्षित आ तन्दुरूस्त बेटी मोनमाफिक अपन वियाह स्वयं करैके नव संदेश प्रसारित करैत अछि।
ऐहि पोथीक केन्द्रीय कथा छी -'कलंक' ,ऐ शिर्षक केँ पर्यायवाची शब्द "बदनामी" सेहो राखल जा सकैत छल। मुदा साम्यवादी विचारधारा'क कथाकार श्री मंडल जी कथाकेँ सामाजिक व्यवस्था अनुरूप गढलैन हेन। मध्य मिथिलाक लेखे पूर्णियाक मेरीगंज पूबरिया मिथिलांचल छी ,जतय कथा नायक पात्र राम अधिन जीके पुत्र १५ साल सँ शिक्षक पेशामे बांझल रहैत छैन। एतेक साल सँ गाम आपस नहिं एनिहार कमासुत बेटा लग पुर्णियाँ जाकय मासदिन ओ रहैत छथि,मुदा ओतुका ने कोनू प्रमुख स्थानक दर्शन कऽ सकलैक आ नै जड़ौर कपड़ा कीन सकलैथ। कातिक मासमे अपना गामक सहृदय अपेक्षित सुमित भाय जीक पत्नीके मरणक मो० पर खबेर सँ ओ अशांत देखाईत छै। तेँ ओतुका सुधांशुजी - लक्ष्मीनारायण सिंह, कुमार सहाएब, कुमार गंगानंद सिंह आ फणिश्वरनाथ रेणुजी'क डीह देखबाक अभिलाषा छोड़ि भोरका रेलगाड़ी सँ यात्रा करैत छथि। मोनमे इयह गुनधुन चलैत रहैत छैन जे, पछिला ४० साल सँ सुमीत भैया सँ लगिचक अपेक्षियार्थे चलैत निमहैत आबि रहल य से डेढ़-दू मास सँ रूग्ण हुनक धर्मपत्नी'क देहान्त सँ अतिशोकमे रहैत नीजगाम पहुंच कऽ सांत्वना देमय पहिले हुनके दुआरि पर जाए ; तखन अपना गृहि अबैत अबैत छैक। सोगाएल सुमित भाइक संग कुटुम स्वजन सब ओतय बैसल देखाईत छैन। सरबेटा अर्थात् मृतक दिदिके भातिजा मुखाग्नि देने रहनि। कारण अपन दूनू बेटा मलेशिया देशमे रहैत छैन। परिस्थितिवश ककरो बगैर कोनू काज बिथुत नहिं होईछ,से एहि बहुआयामी कथामे संदेश देल गेल छई। संगहि कर्ताक गाड़ामे उतरी आ कर्मकांड तथा मृत्यु भोज आदि विडम्बना सँ कथा मुक्त छै। तकर अन्त:करण ई भ' सकैत छै जहन साम्यवादी जनक कालमार्क्स केर एकलौती छोट बेटी मुइल तँ ओकर फ्राके सँ कफ़न मान्य कयल गेल छलैक। कोनू आडम्बर सँ बचैक लेल साफ डेग उठाबैत कथाके सारांश रूपेँ सुमित जीके मुहेँ वक्तव्य दैत देखाओल गेल य। ओ राम अधिन जीकेँ कहैत छैन - "अपना आँखिक समक्ष पत्नी क' पारघाट लागि गेल तँ कलंक सँ बाँचि गेलहुँ।" अविश्वस सँ विश्वास 'तेसर कथा' साकारात्मक अछि। ऐहिमे साठि वर्षीय हृदय लाल भायक पुष्टगर देह दिन- दिन हलल जाईत देखि सत्रीगण लोकनि बूझथि जे रातिकेँ हुनका चुरीन- जीन आ भुत लागैत छैन, तँ रघुनाथ लग ओ स्वयं बाजैत छैक- बेटा पूतौह हमरा दूनू व्यक्तिके ऋषि परम्परा अनुसारे सोगाय नहिं देत!
ऐनूलक सलगा पाठमे लक्ष्मीपुर गामक एसकरूआ ८५ वरखक लुखिया दादी माघक जाड़ा कोना खेपतीह। मधेपुर दिसनके ऐनुल सलगा बनबैत आ बेचैत रहय से ऐ बेर नहिं देखाईछ। मंगल काका हुनका शितलहरीमे अपना ओहिठाम शरण दै ले लऽ जाए चाहैत छै।ओ ईहो बाजैत छै ऐनुल बुढ़ भेला,हमरा ५ गो सलगा निशानी देने गेलाह। एकटा ओढ़ियो लेब आ जाड़ा सेहो खेपब। मानवतावादी संदेश देवामे मंडल जी समर्थ भेल छथि। अपन गाम,जिनगीक धार सुखि गेल,अप्पन वंश , विचारहीन,राँइ- बाँइ समाज आओर किसानी छोड़ए पड़त कथा पाठककेँ उपरा उपरी आ रोचक लागत।
जगदीश प्रसाद मंडल जी ऐबेर ५ जुलाइ केँ ८० वरखक जन्मदिन मनेताह, हार्दिक कामना आ बधाय दैत छीयैन हम!

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