VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह

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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका — First Maithili Fortnightly eJournal

विदेह नूतन अंक
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प्रीति कुमारी

अस्वजन आ दोगरमिया व्यवस्थाके दुरूपयोग 'क दुष्प्रभाव

हालहिमे मैथिलीक ३५ गोट नाटक'क मंचन दिल्लीमे भेलासन्ता गीनीज बुकमे नामीत श्री महेन्द्र मलंगिया जी चर्चित भेलाह अछि। ओ कविशेखराचार्य ज्योतिरीश्वर जीके वर्णरत्नाकर पोथीक भावानुवाद कय प्रवन्ध संग्रह लेल साहित्य अकादमी सँ २०२५ ई०मे पुरस्कृत भेल छथि। ताहि वर्ण रत्नाकर पोथीमे मिथिला'क चारि वर्णके अनेको उपजातिक चर्चा छन्हि। मातृभाषा मैथिलीमे आ मैथिली साहित्यमे सबसँ पुरान रचना ' वर्ण रत्नाकर ' केँ मानल ओ जानल जाइछ। से सवर्ण समाजके मुख्य कर्ण कायस्थ , मैथिल ब्राह्मण तथा राजपूत जातिमे वंशावलीक आधार पर पंजीकरण केर महौत देल गेल रहनि। राजपूत समाजमे ई मिथक कालान्तरमे अधिकतर टुटैत चलि गेल । मुदा ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थमे विशेष कय वियाहक योग्य जोड़ीक तलाश ओ मिलानमे पंजीप्रथा वेश मान्यतामे रहल अछि। एहि काजक निमित्त जे पंजियार लोकनि भेलाह,हुनका राज दरभंगा सँ आर्थिक बुतात आ आन तरहक संरक्षण भेटल हेबाक तथ्य सम्पादक आशिष अनचिन्हार जीक सद्यप्रकाशित पोथी "सेतु षाम" आ पूर्वमे छपल वृहत् पोथी ' प्रीति कारण सेतु बान्हल ' मेँ अनेकों लेखक दिशसँ तर्क देल गेल अछि। सबाल ई उठैत छै- वर्ण रत्नाकरके ओहि तीन जाइतिक अतिरिक्त जे मूलनिवासी सभ रहथिन आ तिनकर एखनो संततिक उपस्थिति व्यापक पैमाना पर गाम समाजमे छैक, हुनका वंश खानदान केर पाँच पिढ़ि पूर्वक इतिहास दुर्लभ छैक। से अभिलेखनक प्रभार आखिर किनका देल गेल रहनि! आ जौं कियो गोटे एहिक जिम्मेदारी नहिं लेलनि तँ तत्काल शासकीय व्यवस्था एहि ज्वलंत प्रश्नके अनुत्तरित कियाक बनौने रहलाह ? ओना सब वर्ग - जातीक श्रीमंत ( मातबर) लोक अपना पण्डा ओतय गया जी, हरिद्वार, जग्गनाथपुरी , देवघर आ सिमरिया गंगाकात जाए १८म् शताब्दीमे सूचिबद्ध करौने रहथि।
एखनो शादी - वियाह सँ पूर्व कर्ण काइथ समाजमे सिध्यान्त लिखल जाईछ आ उत्सब पूर्वक बिनु दुल्हा-दुल्हन केर ई एक तरहक वरतुहारी - घरदेखी सन विध होईछ। एहिमे परपितामह केर मातृक सँ नीचा धरिक वंश कुर्सीनामा बावत सम्बन्ध दुरस्थ राखल जाईछ। समगोत्रीय वियाहकेँ निषेध कयल गेल छैक। बूजूर्ग लोकक अनुसारे किछ मुस्लिम समाजमे सेहो एहिक अपवाद रूपेँ भेल करई । वर्तमान मुस्लिम महाजमे ममियौत, मसियौत आ पितियौत भाय - बहिनक बीच निकाहके (शादी)अंजुमन कमेटी'क सामाजिक मान्यता रहल छैक। वशर्ते एहिमे लड़िकोरी दूध बारल जाईत छै, अर्थात् बालपनमे कियो बच्चा - बच्चीया अपन फूआ, खाला आ चाची जीके स्तनपान नहिं केयने होए। राजपूत समाजमे ललनाक कमीके कारणेँ बालकक वियाह जवानमे कमसम,अधवेसू अवस्थामे जाकय होय। जाती बंधन राजपूत (क्षत्रिय) आ कायस्थ समाजमे रहितो अन्तर्जातीय वियाह धरल्ले सँ हुअय लागल छै। आ से हिन्दू धर्म - मजहब केर आड़ि तोइर अनेको प्रेम विवाह केँ सामाजिक - राजनीतिक मान्यता देल जा रहल अछि। भारतीय संविधान अनुसारे देहात सँ बेसी शहरमे एहिक प्रचलन तीव्र गतिये बढ़ल अछि। समाजशास्त्रीय अध्ययन आ विश्लेषणमे पाबैत छी; भारतीय संविधानके दायरामे आबि अनेकों प्रौढ़ जुबक - जुबती स्वजातीय वियाह सँ इत्तर अदालती वियाह निवंधन कराबैत विजातीय सम्वन्धके खूब बढ़ावा दैत अछ। वैज्ञानिक अनुसंधान सँ वर्णशंकर वियाहकेँ अधिक शुद्ध मानैत अछि।
पिछरल,अधिक पिछरल आ दलित समाजमे समगोत्रीय वियाहक अदौ सँ चलैन आबि रहलैक अछि। अखनो बिहार आ नेपाल'क मैथिल ब्राह्मण तथा कर्ण कायस्थमे अन्तरगोत्रीय वियाहक मर्यादा कायम छैक आ ताहिक निर्वहनमे सामाजिक जातियता प्रतिष्ठाक पाग नहिं खसय देबाक संकल्प मजगूत छैक। एहि पंजी प्रथा पर विस्तार सँ भाषाशास्त्री आ ई- विदेह 'पाक्षिक' केर सम्पादक श्री गजेन्द्र ठाकुर जी लिखकय एहिकेँ धरोहर रूपेँ ई - पुस्तकालयमे सजौने छथि। एहि तथ्यके मादे साहित्यकार ओ मैथिली वेब पत्रकारिताक इतिहास लेखक आशिष अनचिन्हार जी कहैत छथि - पंजीक विश्व इन्टरनेट पर आनयमे गजेन्द्र ठाकुर जीकेँ श्री नागेंद्र कुमार झा आओर पंजीकार विद्यानंद झा पूर्ण सहयोग कयने छन्हि । डिजिटल युगक महौतके समय रहैत समझय - सुंदर बालाके प्रथम परियास सँ आई आधुनिक कालमे मैथिली सन् २०००ई० मे याहू व्लाग पर आयल, आब ई- विदेह पर सुलभ भेल छै। २१म् शदीके वादक जे आबैबाला समय होएत ,ताहामे पंजीप्रथा इतिहास विषय रूपेँ मात्रे
जानल जायत, कारण विगत १८ म् आओर १९म् शताब्दी धरि सय सालमे एक वंशके पांचम पीढ़ि क्रमिक रूपेँ अवतरीत होईत रहल। कियाक तँ आजादी सँ पूर्व १५-१६ साल सँ कमे उमेरमे वियाह - शादी'क चलैन समाजमे छल। से २० वीं शदीमे चारि पिढ़ि मात्रे हुअय लागल । कारण सरकारी स्तर पर वियाहक लेल उचित उम्र वालक लेल २१ वर्ष आ वालिकाक १८ वर्ष सँ कम उमेरक वियाह कानूनन अपराध मानल गेल । वर्तमान अवधिमे पढ़ल- लिखल युवक - युवती अपना मने वियाह ३०-३५ सालक भेलान्तरे प्रौढ़ अवस्थामे करैत अछि। तेँ २१ म् शताव्दीमे एक सर्वे मोताबिक मात्र तीन पीढ़ि जनमैत अछि। आगू इयह प्रवृत्ति रहल तँ , हम दू - हमर दू संतान बाला नारा मिटैत मात्र एक बच्चाक आकांक्षा मोनमे रहला सँ जनसंख्याँ नियन्त्रण स्वत: होइत जाएत। एहनो समय भविष्यमे विकराल रूपेँ आओत जे एक अदद शिशु लेल तमाशा ठाढ़ होयत आ कोनू नेनाकेँ देखि पर्यटक जेकाँ दम्पति कैमरा सँ तस्वीर खींच अपना घरक शोभा बढ़ाओत। नगरिय व्यवस्थामे वृद्धजन अपनाकेँ असहाय बूझि नोकर - चाकर भरोसे जीवन काटि रहलाह। अपन बेटा - पूतौह विदेशमे प्रवासी वा नागरिकता लैय छैक। बहुतों पुत्र अपन जन्मदाता (माय बाबू ) केँ वृद्धाश्रममे राख देने छै। इयह एक सोच केर कारणेँ नव युवा दम्पति बिलम्ब सँ सन्तान चाहैत ,मात्रे एक बच्चेक लालन-पालन केँ पहाड़ सन बोझ बुझि सिकरैत सनवंधके छोट करैत जा रहलैक अछि। हिन्दू समाजक अपेक्षा मुसलमान समाजमे अधिक बच्चाकेँ जन्म देबाक एक सामाजिक प्रथा बनि गेल छैक,जे पृथ्वी पर मानवक अकाल नहिं हुअ देत। परँच ओहू ठाम नव सोच पनैप रहलैक अछि आ एक साजीश केर तहत वैश्विक जनसंख्याँ नियन्त्रणक काज जाहि तरहेँ चलि रहल अछि से भविष्यमे जन्मदर बहुत कम रहि जायत। एखन खगता ऐ बातक छैक मिथिलाक आदि पंजी 'जीनोम मैटिंग ' आ " दूषण पंजीक " संरक्षण होय, जाहि सँ भविष्यमे एकटा सामाजिक मार्गदर्शकक रुपमे एहिक गणना होइत रहत। आओर मातृपक्ष ओ पितृपक्ष पुरखाक वंशावली आधार पर त्रिप्रवर आ पँचप्रवर अन्तर्गत मिथिलाक ह्रास होय सँ बाँचत । ओना एहेन गहिंरगर तितम्हा सँ मिथिलांचलक अधिकांश जाति बाँचल रहल आ वैज्ञानिक प्रणाली सँ जीवन खेपैत सबकेँ ताहि पथपर डेग बढाबय लेल अनुशरण करबाक सोझ डगर धरा देने होथि।
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स्रोत-: १ ,प्रीति कारण सेतु बान्हल,वर्ष २०२४ आई एस एस न ९७८-९३-३४०-०९५६-९
२, सेतु षाम प्रकाशन वर्ष २०२६ आई एस एस एन ९७८-९३-५७१७- ३५८-२
३, मारगेन स्टेनली संस्थाक सर्वेक्षण प्रकाशित दि१ पर. २०२५ लोकमत अखबार।
 

- प्रीति कुमारी, बी.ए., बीएड.

 

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