
लाल देव कामत
जगैत जीवन : पोथी समीक्षा /शहिदे आजम भगत सिंहक तीनटा पत्र : अंतिम पत्र कोन मानल जाए?/ अतिशय आह्लादित थिकहुँ/ पाठकीय प्रतिक्रिया : भागिन - मैथिली उपन्यास (कोसी कातक संघर्षमय गाथा)/ पाठकीय प्रतिक्रिया : भागिन - मैथिली उपन्यास (कोसी कातक संघर्षमय गाथा)
१
जगैत जीवन : पोथी समीक्षा
गाम- समाजमे व्याप्त रूढ़ि, शोषण आ सामन्ती व्यवहार केर विरूद्ध एकतारे ३५
सालपूर्व धरि संघर्ष करैत आबि रहलाह ,वर्ष २००० ई० सँ साहित्य सृजनमे सतत्
लागल रहला श्री जगदीश प्रसाद मंडल जीके सामाजिक खिस्सा संग्रह 'जगैत जीवन'
पाठकके धियान अपन कथाक सौन्दर्य दिश घीचैत य। पल्लवी प्रकाशन निर्मली सँ
सद्यप्रकाशित मैथिलीमे ११४ पृष्ठक पोथी ,जाहिक दाम २९९ टाका छै ; मेँ १०
गोट पाठ मिज्झर कयल गेल छैक। ऐ पोथीक' पहिल पाठमे शव्द सँख्याँ १८९० य आ ई
श्री मंडल जीके १०७३म् कथा "त्रिवेणी स्नान" छी। जीतन आ सोहन कक्काक बीच
विमर्श ललीतपुर गामक लोकक बीच भ' रहलैक हेन। गामक लोक बीच सूर्यग्रहणके पाप
केँ धोय लेल उध चढ़ल छैक। पैंचो - उधार आ कर्जा लैत लोक त्रिवेणी स्नान करय
ट्रैन सँ ५ दिनमे गाम सँ बहरेतैक। एक - एक व्यक्ति पर ३-४ सय टाका खर्चा
बैठतैक। तीन हजार टाकामे सुदामा दादीके खस्सी बिकाएल छै ,से गौर किनय चाहैत
छै। आ कहियो पुण्य करय तीर्थंवर्थ लेल कतौह नहिं गेल य ,से रतुपार बाली
भौजी हलहौर चढ़बैत छै। बहुतों लोक गहना - जेबर बन्हक राखि आ गीरधारी लाल सँ
सुदि पर महाजनी उठबैत य। चन्द गहण आ सूर्य ग्रहण प्राकृतिक नियम छी, जकरा
लोक डोम सँ छूयेबाक विषय बूझैत रहैछ। जीतनके मोन डोलल छै,ओ अनुभवी सोहन कका
सँ बुझि धार्मिक यात्रा करत। एहि तरहेँ कथा आगू बढ़बैत श्री मंडल जी कथाक
माध्यम खुलस्ता रूपेँ लिखैत छथि-"भगवानक चर्चा भेल भजन आओर नाम गायन भेल
कीर्तन। मनुखक शरीर मन आ चेतनाक समन्वय भेला सँ योगस्थली कहाबैछ - त्रिवेणी
संगम। वास्तविकता टटोला पर अन्त:करणमे तत्वज्ञान जगैत छै आ बाह्यदर्शन
भ्रमण - परिश्रम आ टका खर्च कयलासन्ता आनन्द होइ छै। सेहो बात तँ लोकक बीच
छैहे।"
मरैत जीवन कथामे साँझु पहरकेँ गुरु कक्का ओहिठाम फोँच कका पहुँच कय
वार्तालाप मंगलाक दशा मादे करैत रहैत छैक, ताहि घरि नियारल अनुसारे रमानन्द
जाए ,अपन मोनक जिज्ञासा व्यक्त करय छैक। गामक मानल हरबाह मंगल जे कोनू
कोढ़ि बरद होई वा फरकाह तकरा बशमे करैत गिरहथ केर खेतमे जोतय आ मजुरी लैत ,
सालाना सेहो किछ कैँचा पाबैक। आब दूनू बेटा- पूतौह भिन्न छै। पत्नी दू साल
सँ बेराम रहैछ। कोटा केर गहुँम चाउर सँ पखबरो नहिं बुतात चलै छै। तेँ
भीखमँगनी करय पर समाजमे उतरि गेल य। तत्काले दू टाका गुरुकका सेहोओकरा
भीखमे दैत छै । भीखके आखरि निदान कहल गेल हेन।
जगैत जीवन एहि पोथीक' केन्द्रीय कथा थीक। महेश'क तीन पिढ़ि आम गाछीक
ओगरबाही सातकठा कलमके करैत आबि रहल छै। दादा स्व० राम अधिन , बाप किशुन लाल
आ ओ अपने आई आमक मचान पर बैस मनन करैत छैक। ओगरबाहीक हिस्सा अदौ सँ कलमी
आममे चारिमे एक फल, शरही (बीजू) तीनमे एक दरे होय छै। छोटफल बथुआ प्रभेद
चारिमे एकटा आ बड़का फल फैजली,सजमनिया,सापसीन इत्यादि तीन गोटमे एकटा देल
वा लेल जाइछ। अमैया छुट्टीमे विद्यार्थी जीवनक' किछु भाग आमक बगानमे बितैत
छै। से महेश अपन कांपी- कलम आ किताब मचान पर आनि गाछीकेँ हिआसय छै। आठटा
कलमीमे दूटा कलकतिया, दूटा बम्बई, एक- एकटा कृष्ण भोग,सफेता - मालदह ,फैजली
छै। सातगो शरही आमक गाछमे फरी लुधकल छै। जम,कटहर , मौह ,शिशो, आ गम्हायर
चारू आरि पर इमारती लकड़ी मोटाएल छै। काठ काटैक पुश्तैनी काज बरहीक जातीय
गुण हेबाक कारणेँ सेहो अखियास ओकरा रहैछ। परम्परागत औजारमे आरी,रूखान,
बैसला, छैनी,हथौरी (मरिया) सेहो ओकरा घरमे छै। जातीये वृत्ति अनुसारे घरपर
हंसुआ - कुट्टीकटामे धार ले कमरसाढ़ि चलै छै। भाथी सँ लोहाक हाँसु - खुरपी,
टेंगारी,कुल्हरि ,छैनी, खंती, भाला-बरछी, चकू-सरौता, दबिया -तलबार आदि
बनेबाक पुश्तैनी लुरि अबडेरने य। आब हर बरद सँ खेती नहियें जेकाँ होईछ,मुदा
कोदारि सँ कचिकेँ खेती-बाड़ी चलिये रहलैक हेन। कृषि काजक वाद आब मोन दोसर
दिस सोच बौआइत गेलैक। जोलहा धुनियां'क बिनल वस्त्र सेहो बिचारमे सन्हियाइत
छै। ग्रामीण शिल्पकार -दस्तकारके बनाओल समानक जगह अब गामो देहातमे फैशनेबल
शहरी कल- कारखानाक निर्मित वस्तुजात लेने छै , से घर-घर पसरल छै। एतय लोकल
फोर वोकलके पुनः सृजयके संदेश देल गेल छैक।तेँ बांसके छिट्टा पथिया, चंगेरा
डलिया आ कुम्हारगिरी सँ मांटिक बासन यथा, फुच्ची,घैला तौला डाबा कोही आ
काठक बनल बेलना चक्की, पिढ़िया,सरबा ढकना ,करीण, ढ़ेकी ,हथरा , मलसी घरेलू
सामान कमैत गेलैक अछि। परिवेश बदलने नव पिढ़िक लोक किलोग्राम बैटखारा सँ
पूर्वक चलैन कच्चीसेर, पक्कीसेर, पांच शेरक पसेरी,बारह शेरक धारा आदि -आदि
पौराणिक उपकरण उजागर एहि कथामे भेने रहस्य सँ विज्ञ होइत अछि। साबिक
जमानामे सिंचाई करीण सँ होय से आब पम्पिनसेट आ विद्युत मोटर सँ पटबन होईछ।
गामक प्रवन्धन सँ उबि अर्थशास्त्रक विद्यार्थी महेश अपन बाबूजी सँ कहि
दिल्ली शहर ममियौत भाय लग जाइए। ओतय सहयोग भेटैत छैक आ रघुनंदन कारोबारी लग
नोकड़ी सेहो धरा दैत छै। दू साल ओहि उद्योगमे रहि स्वचालित मशीनके मर्म
बुझि- गमि आपस गाम अबैत य। बृध्द बाबू सँ विमर्श करैत य जे जोतसीम कुल १२
कठा खेत बेचि गामेमे उद्योग लगा आनो बेरोजगार केँ काज देत। जीवनमे समृद्धि
लेल आश्वासन भेटलैन। भारतके आत्मा गाममे बसैत छै आ भारत गामक देश छी।
कोलकातामे नोकरी करैत बीए.पास हरे कृष्णक मोनमे सुखक' प्रति द्वन्द्व मचल
छै। ३३ करोड़ वा ५६ करोड़ जीव-जंतुमे मनुखेयोनि चेतनशील प्राणी कहबैछ। गारी
सँ दुःख आ प्रशंसा सँ सुखक अनुभुति करैत नशाक प्रयोगके दुखक कारण सेहो
बुझैत दयाराम बाबा मोन पड़ैत छै। फगुआक आठदिन पूर्व गाम पहुँच कय एक बेगमे
बजार सँ देहक सब वस्त्र आ किछु भोजन- विन्यास बेसाहि तेसरका दिनभने दयाराम
बाबाकेँ अर्पित करैत कुशलक्षेम जानैत छै। बाबा सँ सार्थक जीवन'क भाँज बुझि
गेल जे श्रमसँ सुफल होई छै।
तपस्या कथामे गुलाबपुरके समृद्ध किसान परिबारक राधाकृष्ण बीए.आनर्सक
विद्यार्थी छथि। सही अर्थमे तपस्या की थीक ,से बुझय पढ़ुआ काका लग जाईत छै।
ओतय आरो पाँच व्यक्ति वार्तालाप करैत रहैत छै। भीतरी अनुशासनक माने भेल
अपने आपकेँ जानव आ बाहरी अनुशासन - तपस्या भेल। व्यवहार कुशल रही। पतंजलि
सेहो कहने अछि " योगाश्चित्रवृत्तिनिरोध:।" पाठ छठम धर्मक बदलैत स्वरूप मेँ
समय काल परिस्थिति परिवर्तनशील थीक। से पोखैर,इनार मिथिलाक गामेगाम अधिक
स़ंख्याँमे देकर गेलैक हेन। रौदी'क समय दू दर्जन पोखैर सिपौल- सहरसा ,
मधुबनी -दरिभंगा जिलामे तँ संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं जी खुनौने रहथि। श्याम आ
सोहन दूनू मीत अपना रामपुर गाममे सेहो भजनलालकेँ पोखैर खुनबैत आ ताहिमे
जाइठिक स्थापना विधिवत करैत देखने छैक। मुदा आब ओ मानल धर्मकाज नहिं रहल
वरण् माछ मखान उपजाबैक किसानक साधन भऽ गेल छै। आबक लोक चापाकल ,टँकी सँ
पेयजल प्रवन्धन कयने अछि। से वस्तुत: धर्मक बदलैत स्वरूप'क दृष्टांत कथामे
छै। एकमात्र स्त्री पात्र शान्तिक भुमिका चाह पियैतकाल आयल छैक।
चेकप कथा ग्रामीण परिवेशक सोझमतिया लोकक विचार केँ प्रकाशमे आनैछ। खरबोनी
गाममे स्वास्थ्य शिविर महामारी विषय पर ५ सरकारी डाक्टर आ १० नर्श आ
कम्पाउन्डर केर टीम जनजागृति लेल अपन सरकारी रूटिन अनुसारे बताबैत छै।
सहदेव बुढ़ माय दमयंती - बाबू हरे कृष्ण ककाकेँ चेकप करबय दरिभंगा ल'
जेबामे सक्षम होइछ। डाक्टर के कथन सँ धरि कारणी प्रशन्न रहैछ। तम्बाकूल
वर्जित आ व्रत ले उपास करनाई सँ मनाही भेल छै। रोगक आगमन भ' गेल रहैछ।
पाठ ८ इज़्ज़त बचाकऽ केना जीब ? कथामे ब्रह्मपुरके रघुबीर कका , रामपुर
बाली भौजी ,श्याम बौआ ,अररियाबाली भौजी, दुलारपुर बाली काकी पोती सुशीलके
समक्ष वार्ता चलि रहल छै। नशाके एसमोग्लर करैत पोताक कारणेँ अपन आचरणके बैल
नहिं देता।
ओगरबाहि 'कथा'मे मनमोहन गामक अनुप लालक बाबा जूगुतलाल पोस्टमास्टर बनल छैक।
अनुपलालक' पूर्वज मध्यप्रदेश सँ आबि मिथिलामे बसलाह । पूर्वजके १० बिगहा सँ
आब ३० बिगहा खेत बना लेलनि हेन। जूगूत लालक बेटा मलेटरीमे मेजर बनलैक ।
जूगूत लालकेँ तीन बेटी आ एकेटा बेटा य - पूहूपलाल। बीएसएफ. अनुपलालक पूर्वज
हिम्मतलाल रहथि। श्याम लाल केँ अपना घरक ओगरबाही देलनि, अदालत सँ तकर कागत
बनेबाक पकिया गप्प ठेस बान्हल जाईछ।
आखरि कथा 'पंचदेब' म चर्चित गाम किसानपुरमे पंचकोसी क्षेत्र स्तर पर पचासो
बरख सँ दुर्गापूजा आयोजित होय छै। ओतयके गरीब घरक रहैत ध्यानचंद बीए पास
करैते हाईस्कूलक शिक्षक बनि जाईछ। जेठ मासक गोटपंगरा पकैत आमफलक आनन्द लैत
य। अपना घरमे पंचदेवोपासनाक' अदौ सँ व्यबहार पर मोन ठमकैत आगूक जिज्ञासा
खूबे जगै छैक। मिथिलामे विद्यापति सेहो ऐ के चर्च कयने रहथि ,से किनको सँ
विशेष रूपेँ जानबाक गुनधुनमे रहैत छथि। ता कियो अनठिया लोक डेढ़िया पर
घरबारीकेँ पुकार लगबैत छै। दोसरे हाक पर बहराईत अनभुआर अपरिचित केँ भुजल
चुरा आ जल सँ सुआगत करैत अपन जिज्ञासा विषयकें सेहो शांत करैत छैक। कुर्सी
पर बैसि जीवानंद आगन्तुक अतिथि पंचदेव क' भूमिका बतबैत फरिछाएल गपृप कलकैन।
आंखि कान नाक जीह्वा आ त्वचा अपने शरीरमे पंचदेवों दर्शन'क परिचिति बूझू।
एहि प्रकारे कथाकार जगदीश जीक कथा समाजमे नव संदेश संचार करैत छैक। ग्रामीण
क्षेत्रक बीच हिनक कथा बढ़ चाउ सँ सुनील आ पढ़ल जाईछ।
२
शहिदे आजम भगत सिंहक तीनटा पत्र : अंतिम पत्र कोन मानल जाए?
मित्रसभ, समय आबि गेल अछि जे समयक 'किताब' आ समयक 'हिसाब' दुनूक आधार पर ई
तय कयल जाए ,जे शहीद भगत सिंहक अंतिम पत्र कोन रहय। पछिला १२ वर्षसँ वरिष्ठ
पत्रकारसभक बीच ई ज्वलंत प्रश्न बनल रहल अछि ,जे हुनकर अंतिम पत्र कोनकेँ
मानल जाए।
तारीख आ इतिहासक आधार पर भगत सिंह जीक तीनटा पत्र उपलब्ध अछि। तेसर पत्र
उर्दूमे अछि, जे लगधक अप्रचारित रहल, आ फाँसीसँ एक दिन पहिने लिखल गेल छल।
दोसर पत्र अंग्रेजीमे अछि, जे फाँसीसँ तीन दिन पहिने लिखल गेल आ सभसँ बेसी
प्रसिद्ध भेल अछि। पहिल पत्र हिंदी लिपिमे अछि, जे फाँसीसँ बीस दिन पहिने
लिखल गेल रहय, मुदा ओहो बहुत कम प्रकाशित भेल। संभवतः एहि कारणसँ ई यक्ष
प्रश्न एखन धरि बनल रहल अछि।
ई तीनू पत्र आब मात्र इतिहासक दस्तावेज नहि रहल, बरण् एहन जीवंत विचार बनि
गेल य जे आइयो समाजमे प्रेरणा दैत छै।
(१) छोट भाइ कुलतार सिंहक नाम पत्र-:
३ मार्च १९३१, सेंट्रल जेल, लाहौर
प्रिय कुलतार!
आइ तोरा आँखिमे नोर देखि हमरा बहुत दुःख भेल। तोहर बातमे बहुत पीड़ा छल।
तोहर नोर हमरा सँ सहल नहि जाइत अछि।
बरखुरदार, हिम्मतसँ पढ़ाइ करैत रहियह। अपन स्वास्थ्यक ध्यान राखिहय। साहस
बनौने रहिहय। आरो की कही—
हुनका हरदम ई चिंता रहैत छनि जे अत्याचारक नव तरीका की होयत,आ हमरा ई
उत्सुकता अछि जे देखी, अत्याचारक सीमा कतय धरि अछि।संसारसँ किएक नाराज रही?
भाग्य पर किएक दोष दी? जँ समूचा संसार विरोधी होअ, तँ आउ, ओकर सामना करी।
हम एहि सभा मे किछुए क्षणक मेहमान छी,प्रभातक दीप जेकाँ आब बुझाएबला छी।
हमर विचारक बिजली सदिखन हवामे रहत,ई माटिक शरीर नश्वर अछि, रहए वा नहि रहए।
आब विदा। खुश रहू, हे देशवासी! हम तँ अपन यात्रा पर निकलि रहल छी।
हिम्मतसँ रहिहय।
नमस्ते।
अहाँक भाय,
_भगत सिंह
(२) भगत सिंह, सुखदेव आ राजगुरुक संयुक्त पत्र
२0 मार्च १९३१
पंजाबक गवर्नरक नाम
सेवार्थ,
महामहिम गवर्नर,
पंजाब, लाहौर।
महोदय!
सादर निवेदन अछि जे अहाँक ध्यान निम्न विषय दिस आकृष्ट करय चाहैत छी।
विशेष लाहौर षड्यंत्र केस अध्यादेशक अधीन गठित ब्रिटिश न्यायाधिकरण द्वारा
७ अक्टूबर १९३0 केँ हमरा सभ केँ मृत्युदंड देल गेल। हमरा सभ पर मुख्य आरोप
ई छल जे हम ब्रिटेनक सम्राट किंग जॉर्ज पंचमक विरुद्ध युद्ध शुरह कयने छी।
हम स्पष्ट रूपसँ कहय चाहैत छी जे ई संघर्ष ता धरि जारी रहत, जा धरि
मुट्ठीभर शोषक भारतीय मेहनतकश जनता आ देशक प्राकृतिक सम्पदाक शोषण करैत
रहताह। चाहे ओ विशुद्ध ब्रिटिश पूँजीपति होथि, ब्रिटिश आ भारतीय पूँजीपति
सभक संयुक्त समूह होथि अथवा केवल भारतीय पूँजीपति—शोषणक स्वरूप बदलि सकैत
अछि, मुदा संघर्ष समाप्त नहि होयत।
ई लड़ाय विभिन्न समयमे अनेको रूप धारण कऽ सकैत अछि। कखनो खुला आन्दोलनक
रूपमे, कखनो गुप्त संघर्षक रूपमे, आ आवश्यकता पड़ला पर जीवन-मरणक निर्णायक
संग्रामक रूप सेहो लऽ सकैत अछि।
हमर ई बलिदान संघर्षक ओहि श्रृंखलाक एक छोट कड़ी मात्र अछि, जाहिमे श्री
यतिन दासक अनुपम बलिदान, कामरेड भगवती चरण वोहराक महान आ दुःखद बलिदान तथा
अमर क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजादक गौरवपूर्ण शहादत अमर भऽ चुकल अहि।
जहाँ धरि हमर भाग्यक प्रश्न अछि, जँ अहाँ हमरा सभ केँ मृत्युदंड देबाक
निर्णय कऽ लेने छी, तँ निश्चित रूपसँ ओहि निर्णय पर अमल सेहो करब। शक्ति
अहाँक हाथमे अछि, आ संसारमे प्रायः शक्तिकेँ न्याय मानल जाइत अछि। हमर पूरा
मुकदमा सेहो एहि बातक प्रमाण रहल अछि।
हम केवल ई स्मरण कराबय चाहैत छी जे अहाँक न्यायालय स्वयं कहने अछि जे हम
युद्ध केने छी। ताहि कारणसँ हम युद्ध-बंदी छी।
अतः हमरासभक संग युद्ध-बंदीक समान व्यवहार होयबाक चाही।
हमर विनम्र निवेदन अछि जे हमरा सभ केँ फाँसी देबाक स्थान पर सैनिकक' गोलीसँ
मृत्युदंड देल जाए। यदि न्यायालयक निर्णय वास्तवमे सत्य अछि, तँ ओकर पालन
सेहो ओहिना होयबाक चाही।
अतः अहाँसँ आग्रह अछि जे सैन्य विभाग केँ आदेश देल जाए जे ओ सैनिक टुकड़ी
पठाकऽ हमर मृत्युदंड गोली चलाकऽ पूरा करए।
अहाँक प्रार्थी,
भगत सिंह
सुखदेव
राजगुरु
(३) जेलक साथीसभक नाम
२२मार्च १९३१
प्रिय साथीसभ!
जीवित रहबाक इच्छा स्वाभाविक रूपसँ हमरा भीतर सेहो अछि। हम एहि बातकेँ
नुकाबय नहि चाहैत छी। मुदा हम एकटा शर्त पर जीवित रहि सकैत छी—हम कैदी
बनिकऽ अथवा बन्धनमे पड़िकऽ जीवित नहि रहब।
आइ हमर नाम हिन्दुस्तानी क्रांतिक प्रतीक बनि चुकल अछि। क्रांतिकारी दलक
आदर्श आ बलिदानसभ हमरा एतेक ऊँच स्थान पर पहुँचा देने अछि जे जीवित रहला पर
सेहो हम एहि सँ बेसी सम्मान प्राप्त नहि कऽ सकैत रही।
आइ जनता हमर कमजोरी सभ सँ अनजान अछि। यदि हम फाँसी सँ बचि जाएब, तँ ओ
कमजोरी सभ लोकक सामने आबि जाएत, आ क्रांतिक प्रतीकक रूपमे हमर छवि मद्धिम
पड़ि जाएत, सम्भव अछि जे पूर्ण रूपेँ मेटा जाए।
मुदा यदि हम हँसैत-हँसैत निर्भीकतासँ फाँसी पर चढ़ब, तँ हिन्दुस्तानक
मातासभ अपन पुत्रकेँ भगत सिंह जकाँ बनबाक कामना करतीह। तखन देशक
स्वतंत्रताक लेल बलिदान देबय बला लोकक संख्या एतेक बढ़ि जाएत जे
साम्राज्यवादक समस्त दुष्ट शक्तिसभ सेहो एहि क्रांतिकेँ रोकि नहि सकत।
हँ, एकटा विचार आइयो हमर मनमे अबैत अछि। देश आ मानवताक लेल ,जे किछु करबाक
अभिलाषा हमर हृदयमे छल, तकर हजारहम् भाग सेहो हम पूरा नहि कऽ सकलहुँ हेन।
यदि हम स्वतंत्र आ जीवित रहि सकैतहुँ, तँ सम्भवतः ओहि अधूरा सपना सभकेँ
पूरा करबाक अवसर भेटैत।
एहि एकटा बातकेँ छोड़ि हमरा मनमे फाँसी सँ बचबाक कोनो लालच नहि रहि गेल
अछि।
हम सोचैत छी—हमरा सँ बेसी सौभाग्यशाली आर केओ होएत? आइ-कालि हमरा अपना ऊपर
बहुत गर्व होइत अछि। आब तँ हम अत्यन्त आतुरतासँ अपन अंतिम परीक्षा अर्थात्
शहादतक क्षणक प्रतीक्षा कऽ रहल छी। हमर एकमात्र लालषा अछि, जे ओ शुभ घड़ी
यथा शीघ्र आबए।
अहाँक साथी,
भगत सिंह
(नोट-: हेमंत जी'क हिन्दी सँ मैथिली भावानुवाद कयलहुँ अछि)
३
अतिशय आह्लादित थिकहुँ
वेदव्यास शिखर सम्मान भेटला संँ आयोजन समिति'क प्रति अभिभूत छी हम। गत
बुधवार दि० २९-७ २०२६ ई० केँ गुरू पूर्णिमा'क शुभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम
'महर्षि वेदव्यास ' आ लोकदेव भीमा कैवर्त जीक नामे आन सालक तरहेँ एहूबेर
जिला मुख्यालय - सुपौलमे भव्य समारोह भेल रहय। पूर्व घोषित सूचना पत्रक
अनुसारे चोटिक विद्वान लोकनिक समक्ष हमरा "व्यास शिखर सम्मान" मिथिला
संस्कृति अनुसारे देल गेल हेन। विगत साल ई सम्मान अतिपिछड़ा वर्ग राज्य
आयोग'क पूर्व सदस्य श्री सूर्य नारायण कामतजी - अधिवक्ता केँ देल गेल रहनि।
विधिवत् कार्यक्रमके संयोजक ओ अध्यक्ष प्रो०(डॉ०) रामचन्द्र प्र० मंडल जी
(पूर्व पीजी हेड, मधेपुरा विश्वविद्यालय)अंग वस्त्र 'व्यास मुरेठा' आ पुष्प
माला'क संगहि भगवान् वेदव्यास मेमोन्टो दऽ कऽ पुरस्कृत कयलाह हय। एहि विशेष
कार्यक्रमके उदघाटनकर्ता डॉ० (प्रो०) राजाराम प्रसाद जी- पूर्व प्रति
कुलपति पटना विश्वविद्यालय सँ हुनक दू गोट मैथिली भाषा मेँ साहित्य पोथी
अपने कर कमल सँ हमरा प्रदान कयलन्हि, ताहि लेल विशेष साधुवाद छन्हि हुनका।
मैथिली 'लोक साहित्यक विस्तृत इतिहास ' प्रथम खंड सन् २०१९ मे, दोसर खंड
वर्ष २०२३ मे ३५२ पृष्ठक आ २०२४ ई०मे तेसर खंड २२४ पृष्ठ क ' पोथी अभिषेक
प्रकाशन लहेरियासराय जि०- दरिभंगा सँ ,आ मुद्रण सरस्वती प्रेस - सिसोधिया
प्लेस , गोरखनाथ कम्पाउन्ड बोरिंग केनाल रोड- पटना द्वारा भेल अछि। ई
कालजयी ग्रन्थ अस्तित्वमे अयला सँ अनेक शोधकर्ता आ गवेषणात्मक अध्ययन करैत
विद्यार्थी'क अतिरिक्त सुविज्ञ पाठककेँ ज्ञानमे अभिवृद्धि अवश्ये होयत।
हमरा आरो किछु लोक साहित्य पढबाक काज अधूरा रहि गेल छल,ई पोथी प्राप्ति सँ
तृप्त छी। सम्पूर्ण अद्यावधि मनन कयला उपरान्त पाठकीय प्रतिक्रिया सेहो
देब। पूर्व प्राचार्य प्रो० साहेब जीके १० गोट मैथिली भाषा मेँ प्रकाशित
पोथी तथा हुनक धर्मपत्नी पूर्व प्राचार्य श्रीमती लालपरी देवी जीकेँ सेहो
अदहा दर्जन मैथिली भाषा मेँ प्रकाशित पोथी छन्हि। दम्पत्ति द्वय के आरो
पोथी प्रकाश्य कृति छन्हि। लेखन काजके तपस्या बुझयमे लागल रहैत छथि,से हम
प्रशंसा करैत छियैन। सधन्यवाद!(२) पुस्तक चर्चा
शहनाई रिसोर्ट - पिपरा मार्ग ,सुपौल (बिहार) म वेदव्यास गुरु पूर्णिमा 'क
सुअवसर पर शिक्षक श्री सचिदानंद कुमार कृत हिन्दी 'कविता' संग्रह पोथीके
लोकार्पण समारोह पूर्वक सुसंपन्न भेल रहय। सन् २०२४ ई० मे आनन्द प्रकाशन -
कोलकाता सँ बहराएल एहि पोथी केँ आई एस बी एन ९७८-९३-८८८५८-५२-६ नं० भेटल
छैक, जाहिक दाम २२५ टाका य। गांउ - विशनपुर पो०- लाउढ़ थाना + जिला सुपौलमे
दि० ७-६- १९६९ केँ माय स्व० गंगादेवी आ बाबू श्री कृष्ण देव मंडल जीके घर
कवि, कथाकार आ उपन्यासकार श्री सच्चिदानन्द जीक जन्म भेल रहनि। से ई
पुस्तिका अपन श्रद्धेय माता - पिता कें समर्पित कयने छथि। ओ नालन्दा खुला
विश्वविद्यालय सँ स्नातकोत्तर कयने छथि। वर्तमानमे सुपौल नगर परिषद केर
वार्ड नं० २६ जयप्रकाश नगरमे रहैत छथि। हिनक लेखन कार्य अष्टम् वर्गक
छात्र अवस्थहि सँ आरंभ भेल छैन। हिनक साहित्यिक रचना पढ़बाक कदाचित जौं
अवसर भेटत तँ पाठककेँ हम अपन प्रतिक्रिया सेहो देबैन। सधन्यवाद!
४
पाठकीय प्रतिक्रिया : भागिन - मैथिली उपन्यास
(कोसी कातक संघर्षमय गाथा)
नवोदित उपन्यासकार श्री कुंवर जी कृत पल्लवी प्रकाशन निर्मली सँ २०२६ ई०मे
सद्यप्रकाशित "भगीन" मैथिलीमे साहित्यक १०९ पृष्ठक पोथी 'क दाम २०० टाका
छैक। एहिकेँ आई एस बी एन ९७८-९३-४८८६५-५१-९ भेटल छैक। मधुबनी जिलान्तर्गत
राजनगर प्रखंडक मझौरा गाममे दि० १५-१० १९८५ मे लेखक कुवर जीके जन्म भेल
रहनि । ओ एम.काॅम.मारबाड़ी काॅलेज दरिभंगा सँ कयने छथि। सम्प्रति बिहार
सरकार, पंचायती राज विभागमे सेवारत छथि। पूर्वमे हुनक हिन्दी उपन्यास
'जिन्दगी के मोड़ पर ' सराहल गेल य। दि० २७-६-२०२६ केँ आयोजित 'सगर राति
दीप जरय ' त्रिमासिक मैथिली कथा विमर्श कार्यक्रमके सुअवसर पर अपन पैतृक
गामक दियादेक पव्लिक कन्वेन्ट स्कूलमे प्रस्तुत पोथीक लोकार्पण श्री जगदीश
प्रसाद मंडल जीके कर कमल सँ भेल हेन। पोथीक' आवरण पृष्ठ सज्जा ए .आई .सँ
आकर्षक बनल छैक,आ पछिला कभर पर संक्षिप्त परिचय लेखकके उपर छपल छन्हि। ओ
पाठक सँ मो० पर प्रतिक्रिया चाहैत छथि। भागीन नातेदारकेँ अपना लग बसौनाई
मिथिलामे अदौ सँ बढ़ दियेमान बूझल जाइत रहल अछि।
५० वर्ख पूर्व श्री गंगेश गुंजन जीक उपन्यास जे छपल रहनि- तँ ओहिमे सब
परावके पाठ शिर्षक पृथक रूपेँ लेल गेल रहय। तहिना उपन्यासकार श्री उदय शंकर
झा'क पतीत 'मैथिली पोथीमे ' सब पराउके अलगे-अलग पाठ शिर्षक लेल गेल छन्हि।
अहिना नवोदित लेखक कुंवर जीके प्रस्तुत सामाजिक उपन्यासमे पृथक-पृथक पाठ
पाठककेँ द्रष्टव्य हेतनि। यथा-: भगिनमानपुर, नवटोलक प्रलय, नवटोल सँ
भागिनमानपुर , बाधक शीतल छांह आ भगिनक दोस्ती , होलीमे माछक पुछरी, अधजरल
सपना आ रीनाक साहस, लौफा हाटमे मीत नानाक उद्धार, भागिनक लंका दहन , बैजूक
यात्रा आ मौसम बाबाक ज्ञान, जागेश्वर बाबाक कुट्टी आ नंदनीक पुनर्मिलन ,
भागीनक दर्द, स्नेहक डोरस जीवनक आश ,जीवन दवाखाना , प्रेमक अंतिम
विदाय,प्रेमक कर्ज। मुदा आब हरसठे एहन तरहक चलैन नहिं छैक, लेखन काज प्रायः
उपन्यासकार हिन्दी'क तर्ज पर पाठ क्र० १-२-३........... दर्शाबैत छथि।
ग्रामीण परिवेश'क कथा कहैत ई उपन्यास सामाजिक जीवनके चित्रण करैत नव संदेश
दैत छैक, नव सृजन करैत छैक। नायक लालू केँ जीवनक तीत - मीठ अनुभव एहि
उपन्यासक मुख्य कथानक थीक। उपन्यासकार कुवर जीक बोधगम्य शैलीमे गद्य लेखन
काज ऐ तरहक होय छैन,जे पाठककेँ भूमिका पढ़ैत काल अभरत। यथा-: भागीनक बीज
हमरा मनमे बहुत पहिने सँ छल। गाम - समाजमे हम अनेक बेर देखने छी जे बहिनक
बच्चाकेँ मम्हरमे राखल जाइत अछि। कहबा लेल ओकरा पढ़ेबाक ,पालबाक, सहारा
देबाक आ भविष्य बनेबाक बात होइत अछि। कतेक घरमे ई बात सचमुच नेह आ करुणाक
संग निभाओल सेहो जाइत अछि। एहन उदाहरण सभ हमरा समाजक मानवीय पक्षकेँ उज्जवल
करैत अछि। मुदा ऐ सम्बन्धक दोसर चेहरा सेहो अछि। किछु ठाम बच्चाकेँ मम्हर म
राखि कऽ ओकर श्रम सँ घर चलाओल जाइत अछि । ओकर पढ़ाई पाछु छुटि जाइत अछि,
बालपन घास, महिष, खेत ,दलान ,वर्तन ,घरक छोट - बड़ काज आ अपमानक बीच खपि
जाइत अछि। समाज ओहि बच्चाकेँ 'भागिन' कहि सम्मानक भाषा दैत अछि,मुदा ओकर
वास्तविक जीवनमे सम्मानक स्थान परिश्रम आ उपेक्षा सँ भरल रहैत अछि। ऐ तरहक
विरोधाभास हमरा भीतर बहुत दिन सँ टीस दैत रहल। 'भागिन' ओहि टीसक कथा अछि।
...…! कथा प्रसंगमे अनेको शव्द मैथिलीक अछैत हिन्दी - उर्दू क' प्रयोग भेला
सँ मातृभाषा मलीन भेल छैक। प्रायः सब पन्नामे प्रकाशक मुद्रण त्रुटि रखने
छैक ,जे सुधी पाठककेँ अबुझ आ बोझिल बुझाइत छै। आश करब संशोधित संस्करण
बहराय जाहि सँ समीक्षक आ ग्राहककेँ कठिनता नहिं होय। उपन्यासक पुरुष
पात्रमे भोला ,बैजू, रामलखन, फुसीया आ रामसुख ,मौसम बाबा आ हुनक बाबाजी
मित्रक तथा स्त्री पात्रमे नंदनी ,रमौलवाली, रीना , कल्पना ओ पुष्पाक नाम
मुख्य रूपेँ उजागर भेल य। लालूक बालपन किशोरावास्था आ नवयुवक वयस अनुन -
विशनुन सुवादक चलैत रहलैक। जीवन उतार - चढ़ाबक सांगोपांग वर्णन एहि पोथीमे
पढि पाठक रसास्वादन करताह/ करतीह। कुवर जीक आगू कथा पोथी , कविता आ दोसरो
विधामे नव पोथी आओर से विश्वास जगैत अछि।
५
पाठकीय प्रतिक्रिया : भागिन - मैथिली उपन्यास
(कोसी कातक संघर्षमय गाथा)
नवोदित उपन्यासकार श्री कुवर जी कृत पल्लवी प्रकाशन निर्मली सँ २०२६ ई०मे
सद्यप्रकाशित "भागीन" मैथिलीमे साहित्यक १०९ पृष्ठक पोथी 'क दाम २०० टाका
छैक। एहिकेँ आई एस बी एन ९७८-९३-४८८६५-५१-९ भेटल छैक। मधुबनी जिलान्तर्गत
राजनगर प्रखंडक मझौरा गाममे दि० १५-१० १९८५ मे लेखक कुवर जीके जन्म भेल
रहनि । ओ एम.काॅम.मारबाड़ी काॅलेज दरिभंगा सँ कयने छथि। सम्प्रति बिहार
सरकार, पंचायती राज विभागमे सेवारत छथि। पूर्वमे हुनक हिन्दी उपन्यास
'जिन्दगी के मोड़ पर ' सराहल गेल य। दि० २७-६-२०२६ केँ आयोजित 'सगर राति
दीप जरय ' त्रिमासिक मैथिली कथा विमर्श कार्यक्रमके सुअवसर पर अपन पैतृक
गामक दियादेक पव्लिक कन्वेन्ट स्कूलमे प्रस्तुत पोथीक लोकार्पण श्री जगदीश
प्रसाद मंडल जीके कर कमल सँ भेल हेन। पोथीक' आवरण पृष्ठ सज्जा ए .आई .सँ
आकर्षक बनल छैक,आ पछिला कभर पर संक्षिप्त परिचय लेखकके उपर छपल छन्हि। ओ
पाठक सँ मो० पर प्रतिक्रिया चाहैत छथि। भागीन नातेदारकेँ अपना लग बसौनाई
मिथिलामे अदौ सँ बढ़ दियेमान बूझल जाइत रहल अछि।
५० वर्ख पूर्व श्री गंगेश गुंजन जीक उपन्यास जे छपल रहनि- तँ ओहिमे सब
परावके पाठ शिर्षक पृथक रूपेँ देल गेल रहय। तहिना उपन्यासकार श्री उदय शंकर
झा'क पतीत 'मैथिली पोथीमे ' सब पराउके अलगे-अलग पाठ शिर्षक देल गेल छन्हि।
अहिना नवोदित लेखक कुवर जीक प्रस्तुत सामाजिक उपन्यासमे पृथक-पृथक पाठ
पाठककेँ द्रष्टव्य हेतनि। यथा-: भगिनमानपुर, नवटोलक प्रलय, नवटोल सँ
भागिनमानपुर , बाधक शीतल छांह आ भगिनक दोस्ती , होलीमे माछक पुछरी, अधजरल
सपना आ रीनाक साहस, लौफा हाटमे मीत नानाक उद्धार, भागिनक लंका दहन , बैजूक
यात्रा आ मौसम बाबाक ज्ञान, जागेश्वर बाबाक कुट्टी आ नंदनीक पुनर्मिलन ,
भागीनक दर्द, स्नेहक डोरस जीवनक आश ,जीवन दवाखाना , प्रेमक अंतिम
विदाय,प्रेमक कर्ज। मुदा आब हरसठे एहन तरहक चलैन नहिं छैक, लेखन काज प्रायः
उपन्यासकार हिन्दी'क तर्ज पर पाठ क्र० १-२-३........... दर्शाबैत छथि।
ग्रामीण परिवेश'क कथा कहैत ई उपन्यास सामाजिक जीवनके चित्रण करैत नव संदेश
दैत छैक, नव सृजन करैत छैक। नायक लालू केँ जीवनक तीत - मीठ अनुभव एहि
उपन्यासक मुख्य कथानक थीक। उपन्यासकार कुवर जीक बोधगम्य शैलीमे गद्य लेखन
काज ऐ तरहक होय छैन,जे पाठककेँ भूमिका पढ़ैत काल अभरत। यथा-: भागीनक बीज
हमरा मनमे बहुत पहिने सँ छल। गाम - समाजमे हम अनेक बेर देखने छी जे बहिनक
बच्चाकेँ मम्हरमे राखल जाइत अछि। कहबा लेल ओकरा पढ़ेबाक ,पालबाक, सहारा
देबाक आ भविष्य बनेबाक बात होइत अछि। कतेक घरमे ई बात सचमुच नेह आ करुणाक
संग निभाओल सेहो जाइत अछि। एहन उदाहरण सभ हमरा समाजक मानवीय पक्षकेँ उज्जवल
करैत अछि। मुदा ऐ सम्बन्धक दोसर चेहरा सेहो अछि। किछु ठाम बच्चाकेँ मम्हर म
राखि कऽ ओकर श्रम सँ घर चलाओल जाइत अछि । ओकर पढ़ाई पाछु छुटि जाइत अछि,
बालपन घास, महिष, खेत , दलान , वर्तन ,घरक छोट - बड़ काज आ अपमानक बीच खपि
जाइत अछि। समाज ओहि बच्चाकेँ 'भागिन' कहि सम्मानक भाषा दैत अछि,मुदा ओकर
वास्तविक जीवनमे सम्मानक स्थान परिश्रम आ उपेक्षा सँ भरल रहैत अछि। ऐ तरहक
विरोधाभास हमरा भीतर बहुत दिन सँ टीस दैत रहल। 'भागिन' ओहि टीसक कथा अछि।
...…! कथा प्रसंगमे अनेको शव्द मैथिलीक अछैत हिन्दी - उर्दू क' प्रयोग भेला
सँ मातृभाषा मलीन भेल छैक। प्रायः सब पन्नामे प्रकाशक मुद्रण त्रुटि रखने
छैक ,जे सुधी पाठककेँ अबुझ आ बोझिल बुझाइत छै। आश करब संशोधित संस्करण
बहराय जाहि सँ समीक्षक आ ग्राहककेँ कठिनता नहिं होय। उपन्यासक पुरुष
पात्रमे भोला ,बैजू, रामलखन, फुसीया आ रामसुख ,मौसम बाबा आ हुनक बाबाजी
मित्रक तथा स्त्री पात्रमे नंदनी , रमौलवाली, रीना , कल्पना ओ पुष्पाक नाम
मुख्य रूपेँ उजागर भेल य। लालूक बालपन किशोरावास्था आ नवयुवक वयस अनुन -
विशनुन सुवादक चलैत रहलैक। जीवन उतार - चढ़ाबक सांगोपांग वर्णन एहि पोथीमे
पढि पाठक रसास्वादन करताह/ करतीह। कुवर जीक आगू कथा पोथी , कविता आ दोसरो
विधामे नव पोथी आओत से विश्वास जगैत अछि।
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।