
डा. किशन कारीगर
हमरा त जोगार अछि (हास्य कथा)
भागेसर हौ भागेसर कतह छौ हौ? हमरा त कोनो भांजे नै लाइग रहल जे ई कतए
निपत्ता भेल यै आ की पोखरी महार लक कोनो मजरेटी जमा बैसल यै? कहू त मंदिर
लहक आश्रमक पछबरिया टाट पछुआ हावा बिर्रो मे उधिया रहलै. कए टा बन्हन सेहो
टूटल छै कोन ठीक देहो पर नै धांई दिस खसि पड़ै. कनि अई टाट के हेट क दैतैह
से नै? काज राज बेर एक नंबर कोरिअठबा अछि की आ कतौ स कोनो नीक चढ़ौआ अबै त
से भोकसै मे एकदम बिहाइर की. एकरा एक्को रति चिंता छै जे अई टूटलाहा आश्रम
मे बाबा केना रहतै? ई गेल केम्हर आब भाँज लगबै टा परत.
ताबे हम्मे बाबा के अवाज़ देली की हो बाबा केहेन समाचार छहो हो. बाबा
बोललकै झटक बिहाइर मे हमर जान अवग्रह भेल अछि आ कारीगर तोरा समाचार सुझाई
दै छह. ई ने जे बाबा आश्रम के टाट फरक ठीक कए के मजगूत क दिया त कहीं
भागेसर जेंका छिरहारा खेलाई लै एलह यै. हम्मर कहलियै हो बाबा मीडिया वला
आदमी के त समाचार चाहबे करी ने. भागेसर पंडा जे डाइलोक बंचै छह जे बाबा के
हमही सेब के रखने छियैन्ह की आ नै त बाबा त बुझहू गेले घर छथि. हमरे जोगार
दुआरे हिनकर आश्रम बांचल छैन्ह एकबेर लोक सबके सनका देबै त बाबा आश्रम अई
झटक बिर्रो मे सोहा करबा देबै की.
त ओकरा कैले ने आश्रम ठीक ठाक करै लै बोलै छहो?
बाबा बोले लगलै समाचार फमाचार बाद मे हेतै पहिने भागेसर के भांज कहअ. एक्कर
एहेन लहास जे जोगारी विद्या लगा हमर आश्रम उजारत? केम्हर ओछि ओ चलब त हमरा
देखा दै तै. हम्मे बोलली हो बाबा पंडा जी त पोखरी महार लक मजरेटी जमेने छौ
की. चलहो ने ओम्हरे दिस त गप क फैरछा लिहो. बाबा बोललकै त चलह देरी कथिक?
हम आ बाबा महार दिस बिदा भेली. ओते देखली जे मजरेटी जमल रहै. भागेसर पंडा
मिथिला मैथिली पर गप बिकने रहै जे मैथिली के हमहीं सबटा बंचा के रखने छि
की. बाबा बुते की किछो कएल भेलैन्ह. हमर जोगारी विद्या त मैथिलीक सांस
छियै. जेकरा भेटल से जीअत आ ज जोगारक भांज नै लगलै त उ बाप बाप क अपटी खेत
मे गेले घर बुझहू. ई गप सुनि चेला चटिया गिरोहक लोक सब खूब थोपरी बजा
होहकारा करैत रहै.
भागेसर के गप सुनि बाबा बजलै हौ भागेसर हमर आश्रम उजरल जाइए से तोरा ठीके
नै कएल होइत छह आ अई ठाम चेला चटिया सब लक गपास्टिंग छोड़ै मे लागल छह?
तोरा एक्को रति लाज धाख छह कीने? भागेसर पंडा हां हां के हँसैत बजलै यौ
बाबा जोगार वला के कथि लाज धाख. काज टा हेबाक चाही कोनो तरहे दाउ टा
सुतरबाक चाही. हम चाहब त तुरंते अहाँ के आश्रम ठीक ठाक तंदुरस्त रिपेयर करा
देब किए त हमरा जोगार अछि? अखने रामेसर आ मुनेसर के कहबै जे बाबा बड्ड
सिद्धस्त छथिन्ह. गाया जी प्रयाग हरिद्वार सहने साधना कए एतुका मठ मे आएल
छथिन्ह त देखियौ तुरंते अहां के आश्रम रिपेयर भऽ जाएत की. किछो खर्चा पानी
करबै तहन ने. ताबे हम भागेसर से पूइछ देलियै जे हो पंडा जी बाबा के आश्रम
उजारबहो केना क सेहो बोल्हो ने.
पंडा जी बोललकै धू जी महराज अहूँ के मैथिली साहित्यक कोनो जोगारी भांज भूत
नै बूझल यै. बाबा के आश्रम उजारब त हमरा लै दस मिनट के काज. अखने कैन्सर
मनेजर के चिलम सोंटा के माथा हाथ दऽ कान फूइक देबै जे बाबा एक नंबर बैलगोबन
छै की काशी मथुरा कतौ ने गेल छै. देखियौ फेर मिनटे नै बाबा आश्रम सोहा भऽ
जेतै की ने. ई गप सुनि बाबा आहां हां करैत बोललकै हौ कारीगर तहूं की फसाद
करा उपद्रवी करअ अलग यै. बड्ड मोशकिल स भागेसर के सुढ़येलियौं सेहो तूं
ओकरा भंगठा के छोइर देलहक. हम्मे कहलियै हो बाबा एहेन बात नै हइ क अभिए हम
पंडा जी के समझबै छियै
हम्मे भागेसर जी से बोलली यौ पंडा जी अहाँ त मिथिला मैथिलीक प्रसिद्ध लोक
छि. अहाँ आ अहाँक जोगार टेक्नोलॉजी त मैथिली साहित्यक धार छियै. बाबा की
किछो साहित्य दिया बुझै छै. एतना बात सुइन भागेसर फूइल के तुम्मा हो गेल आ
बोललक जे यौ किशन जी यैह गप कनी बाबा के बुझहा दियौ आ नै त अखनिए हम जोगारी
विद्या स बाबक आश्रम दलमलित कए देबै की. बाबा बोललकै हौ भागेसर तोहर त दसो
टा किताब नै बिकाइत छह आ ने दर्शक पाठक मैथिली किताब साहित्य आयोजन मे रूची
लै छै त फेर तों प्रसिद्ध केना छहक आ केकरा सबहक बीच?
भागेसर हां हां करैत बजलै यौ बाबा हमरा त जोगार अछि. अहाँ आ कारीगर जी दुनू
गोटे एकदम ख़त्म आगमी छी की अहाँ सब ई जोगारी भांज भूज नै बुझहै छियै तैं
ने मैथिली मंच स बारल छि? त बाबा कहलकै हौ भागेसर की भवडाह करै मे लागल छह.
साफ साफ मैथिली जोगार दिआ कहक त हमरा सब संगे पब्लिको बुझतै. भागेसर बजलै
की यौ किशन जी पानो तानो खुआएब की खाली जोगारी खिस्सा टा सुनै लै बैसल छी?
हम्मे कहलियै हइए अखनतियै पान लगबेने आ रहलियौ. दू टा जर्दा पान आ बाबा लै
मीठा पान लेने एली. तीनू गोटे पान खा लेली.
पान खा के पंडा जी बोलैत रहै यौ बाबा पूरा मिथिला मैथिली जोगारे बले टिकल
छै. आ जोगारी विद्या स सब अप्पन दाउ सुतारै मे बेहाल भेल हो हो करै जाइए
की. लोकार्पण जोगार/ पोथी प्रकाशन जोगार/ आयोजनी जोगार /मानकी जोगार/नाटक
जोगार/ संयुक्त तत्वावधान वला जोगार/विद्यापति समारोह /महोत्सव फेस्टीवल
जोगार. मैथिली मे त जोगारे जोगार . सब अप्पन सेटिंग गेटिंग क मैथिली मे अजर
अमर हुअ चाहैए. मैथिलीक जोगार त आब देखार चिन्हार भऽ सौंसे जगजिआर भेल छै
की. जोगार आ गिरोह जेकरा सुतैइर गेल से त वरिष्ठ
साहित्यकार/महाकवि/प्रसिद्ध नाटककार/लिविंग लिजेंड की की ने भ जाइए.
साहित्य अकादमी पुरूस्कार/ मैथिली भोजपुरी अकादमी/समिति/लेखक संघ/मैसाम/सगर
राइत दीप जोगार सुतारै दुआरे त मैथिली वला सब त कोन कोन खेल ने खेलाई जाइए?
हम्मे पुछलियै यौ पंडा जी मैथिली साहित्य/आयोजन/ समारोह सब त मिथिलाक लोक
समाज/गाम घर/शाहर बजार/ सामूहिक मंच स त जुज़लै ने यै. खाली परदेश टा मे
होहकारा भऽ रहलै. आ झूठो सब अप्पन जोगार अनरूपे डंका पीटै जाइए जे हम
मैथिली लै ई क देलियै त उ क देलियै? भागेसर होलिका यैह होहकारा त मैथिली
वला सबहक मुख्य जोगार छियै. दे जेहेन जोगारी से तेहेन भैरगर
आयोजनी/साहित्यकार/प्रसिद्ध कथिदिन सब भ जाइए.
पब्लिक सबहक कोनो एचैचमेंट नै सब अपनामने आ गिरोह बले मैथिली मे कथिदिन सब
भ जाइ जाइए. की हो बाबा सबटा गप सुनि रहलहौं की खाली हं हं टा करै छी. बाबा
आ हम कहलियै नै नै ध्यान स सबटा गप सुनि रहल जे मैथिली वला सब बिन करनी
धरनी के एते धुधआईए किएक? भागेसर हां हां क बजलै हमरा त जोगार अछि.
- डा. किशन कारीगर, मूल नाम- डा. कृष्ण कुमार राय)
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