VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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प्रणव कुमार झा

मिथिला के विकास मे सहकारिता के मॉडल

 

मिथिलाक इतिहास केवल ओकर संस्कृति, मिथिला पेंटिंग, आम-लीची आ मखानक लेल नै, अपितु कखनो ओकर औद्योगिक सहभागिताक लेल सेहो जानल जाइत छल। 90क दशक सँ पूर्व, उत्तरी बिहारक एकटा बड़का हिस्सा चीनी मिल,पेपर मिल, सूत,  जूट उद्योग, अन्य लघु उद्योग आ कृषि आधारित प्रसंस्करण इकाई सभक एक्टिविटि सँ गूंजैत छल। मुदा, 90क दशकक बादक औद्योगिक सन्नाटा, पूँजी निवेश में कमी, आ कुप्रबंधनक कारणे मिथिलाक आर्थिक मेरुदंड टूटि गेल। बिहारक, आ विशेष कऽ मिथिलाक आर्थिक इतिहास मे 90क दशक एकटा एहन वाटरशेड (Water-shed) समय रहल, जतय सँ पूँजीक पलायन (Capital Flight) एकतरफा भऽ गेल। नीतीश कुमारक लंबा कार्यकालक बादो, जखन हम अन्य राज्यक तुलना करैत छी, तँ निवेशक मामला मे मिथिला बंजर बुझाइत अछि। 

कोनो भी क्षेत्रक विकास लेल निवेश अनिवार्य अछि, मुदा अपना ओतय स्थिति उलटा अछि। नै तँ कोनो पैघ सरकारी कारखाना आयल आ नै प्राइवेट प्लेयर सभ कोनो विशेष करामात देखौलक। विडंबना ई जे उच्च शिक्षा लेल गाम-गामक पाई दिल्ली, कोटा आ बंगलौर आदि शहर जा रहल अछि। एकटा निक इलाज लेल मिथिलाक लोग केँ अपन संचित पूँजी लऽ कऽ बाहर भागय पड़ैत छनि। अर्थशास्त्रक भाषा मे ई मल्टीप्लायर इफेक्ट (Multiplier Effect) केँ खत्म कऽ दय छैक। अपना ओतय जे पाई संयोजित होई अछि, ओकर एकटा पैघ राशिक उपभोग बाहर भऽ रहल अछि।

बहुत रास प्रवासी आ समाजसेवी समूह आ संस्था सभ राजनैतिक मूवमेंट, इन्वेस्टर मीट, डिजिटल ट्रेंड आ अन्य माध्यम सभ सँ पूँजीपति सभ केँ गोहारि लगा रहल छथि, मुदा कोनो खास सफलता हाथ नै लागल। एकर मुख्य कारण अछि  बुनियादी ढाँचाक अभाव आ परसेप्शन (छवि)क समस्या। एहन मे कखनो काल बाहरक पूँजीपति केँ जोहब मृगतृष्णा जकाँ बुझाइत अछि।

बिहार मे सहकारिता (Co-operative) क इतिहास बहुत सुखद नै रहल अछि। बहुत बेर ई राजनीति आ भ्रष्टाचारक भेंट चढ़ि गेल। मुदा, विफलता सँ सीख कऽ पुनः एहि मॉडल केँ आत्मसात करब सरकार या पूंजीपति द्वारा निवेश के एकटा  विकल्प भऽ सकय अछि।

सहकारिताक मूल मंत्र अछि एकता मे बल। जखन एकटा व्यक्ति उद्यमी बनैत अछि, तखन जोखिम ओकर अपना पर होइत अछि, मुदा जखन एकटा सहकारी समूह उद्यमी बनैत अछि, तखन जोखिम बँटैत अछि आ संसाधन बढ़ैत अछि।

देखल जाय तँ भारतक विकसित राज्य आ बिहार (विशेषकर मिथिला) क बीचक जे आर्थिक खाई अछि, ओकर एकटा कारण संसाधनक सामूहिकता (Collective Pooling of Resources) क अभाव रहल अछि। जखन हम गुजरातक दुघ्ध उत्पादक समिति, महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप, महाराष्ट्रक चीनी सहकारी मिल वा कॉपरेटिव बैंक, पंजाबक कृषि कॉपरेटिव सोसायटि, तमिलनाडु के सहकारी समिति, कर्नाटक के यशस्विनी सहकारी बीमा योजना  वा केरल के कुटुंबश्री  केँ देखैत छी, तँ स्पष्ट होइत अछि जे ओहि राज्यक आम आदमी अपन छोट-छोट पूँजी केँ एकठाम कऽ कऽ ओकरा पैघ निवेश मे बदलबाक कला सीखि लेलक। एकर विपरीत, बिहार मे लोक के पूँजी बिखरल रहि गेल आ अंततः पलायनक शिकार भऽ गेल। बिहार मे सहकारिताक ढाँचा तँ अछि, मुदा ओ सरकारी बैसाखी पर टिकि गेल। राजनीति आ अफसरशाहीक हस्तक्षेप एकरा आम आदमीक आंदोलन नै बनय देलक। हम बिहारक पिछड़बाक पाछू पूँजीक विखंडन (Capital Fragmentation) देखैत छी। बिहारक किसान लग जे जमीन अछि, ओ एतेक छोट-छोट टुकड़ा मे अछि जे ओतय आधुनिक खेती (Commercial Farming) घाटाक सौदा भऽ जाइत छैक। जखन कि पंजाब मे सहकारी स्तर पर मशीनरी साझा कयल जाइत अछि। विकसित राज्यक आम आदमी को-ऑपरेटिव बैंक सँ सहजहि ऋण लैत अछि, जखन कि बिहारक आम आदमी आईयो साहुकार वा बैंकक जटिल प्रक्रिया मे फँसल भेटय अछि। वैल्यू एडिशनक अभाव - हम मखान, आम, लीची, मकै आदि जेहो कृषि उत्पाद उपजबैत छी, ओकर अधिकांश के प्रोसेसिंग आईओ बाहर भऽ रहल अछि। सहकारिताक अभाव मे सभ मात्र कच्चा माल क आपूर्तिकर्ता बनि कऽ रहि गेल।

जखन हम नव-नव दिल्ली आयल रही, तँ शहरी चकाचौंधक बीच हमर नजरि किछ एहन अनौपचारिक आर्थिक ढाँचा पर पड़ल जेकर आधार पारस्परिक सहयोग छल। हम देखलहुँ जे प्रवासी मैथिल लोकनि अपन सीमित संसाधन केँ स्वयं सहायता समूह (SHG) क माध्यम सँ कै तरहें प्रबंधित करैत छथि। एकर मुख्य रूप सँ दू टा स्वरूप देखलहुँ - कमिटी आ सोसायटी।

कमिटी - एकटा वित्तीय नीलामी (Auction Model): कमिटीक मूल कांसेप्ट बुझू जेना एकटा लघु पूँजी बाजार (Capital Market) होय। एतय सदस्य लोकनि पाई जमा करैत छथि आ फेर ओहि जमा राशि पर बोली (Bidding) लगैत अछि। जे सदस्य सब सँ बेसी रिटर्न दऽ कऽ पाई उठबैत छथि, ओ पूँजी हुनकर भऽ जाइत अछि आ बाद मे ओहि रिटर्न केँ सब मेम्बर मे बाँटि देल जाइत अछि। ई एक तरहक एग्रेसिव सेविंग थिक जे झटपट पूँजीक आवश्यकता केँ पूरा करैत अछि।

सोसायटी - कल्याणकारी ऋण (Welfare Credit Model): कमिटीक विपरीत सोसायटीक दर्शन (Philosophy) बेसी उदार आ दीर्घकालिक छैक। एतय मासिक बचत केँ एकटा संचित कोष बनायल जाइत अछि। जखन कोनो सदस्य केँ आवश्यकता होइत छनि, तँ हुनका बहुत कम ब्याज आ फ्लेक्सिबल इंस्टालमेंट (लचील किश्त) पर ऋण देल जाइत अछि। हमरा याद अछि, मामाक एकटा जरूरी काज मे हुनकर ससुर जी कमिटी सँ पाई लै कऽ हुनकर सहायता कयने छलाह। आ ओहिना, बाद मे जखन घर बनेबाक लेल जमीन किनबाक बात भेल, तँ सोसायटी सँ भेटल ऋण हुनका लेल एकटा पैघ संबल बनल छल। ई मॉडल अनौपचारिक रूप से दिल्ली सहित विभिन्न मेट्रो शहर के अनेकों कालोनी मे बसल मैथिल सबहक बीच खूब प्रचलिल भेल अछि आ हुनकर जीवन के विभिन्न क्षण मे हुनकर संबल बानि रहल अछि। कतेको एहन सोसायटी औपचारिक रूप सेहो लेने अछि जेना रंगकर्मी शुभ नारायण झा के सोसायटी उत्तम नगर दिल्ली मे।

नीक बात ई छैक जे आई ई मॉडल दिल्लीक कालोनी सभ स सँ निकल कऽ हमर-अहाँक गाम-घर धरि पहुँचि गेल अछि। अनेकों गाम मे आब एहन अनौपचारिक सेल्फ हेल्प ग्रुप सक्रिय अछि, जे बैंकक जटिलता सँ दूर मिथिलाक लोक केँ आर्थिक संबल दऽ रहल अछि। एखन धरि ई सोसायटी सभ आपत्ति-विपत्ति आ लगन-तिहार (consumption loans) धरि सीमित रहल अछि। मुदा हमरा लगैत अछि जे आब समय आबि गेल अछि जखन एहि पूँजी केँ उत्पादक निवेश (Productive Investment) मे बदलयक चाही। एहन समूह सब मात्र कर्ज दै वाला संस्था नै, अपितु लघु उद्योगक लेल पूँजी भागीदार (Seed Capital Partner) बनय। संगहि एकरा सभ के आर बेसी व्यवस्थित आ पारदर्शी बनाओल जाय ताकि गामक पैसा गामक विकास मे काज आबय।जँ गामक ई साख-सोसायटी सभ मजबूत होइत अछि, तँ कदाचित एहन समय आबि सकय अछि जे आत्मनिर्भर मिथिलाक लेल लोक सभ केँ कोनो पैघ वित्तीय संस्थानक बाट नै जोहय पड़त।

आधुनिक अर्थशास्त्र मे को-ऑपरेटिव मॉडल तँ बहुत अछि, मुदा हम गाम-घरक अनौपचारिक सहकारिता के दु टा टिपिकल उदाहरण एतय देबय चाहय छी।

1. धरोहर क पुनरुद्धार: जनेऊ निर्माण आ डिजिटल मार्केटिंग - मिथिलाक गामक महिला सभक हाथ मे ओ हुनर अछि जेकर कोनो मोल नै। जनेऊ मात्र एकटा सूत्र नै, अपितु संस्कृति संस्कारक प्रतीक थिक। मुदा आजुक समय मे कम लाभ आ पलायनक कारणे ई कला दम तोड़ि रहल अछि। आ साधारण धागा के रेडीमेड जनेऊ बिकाइ के प्रचालन बढ़ल अछि। कै बेर हमरो कै ठाम विदाई मे ई रेडीमेड लो क्वालिटी जनेऊ से पाला पड़ल अछि।  मानि लिअ गामक एकटा अनुभवी दादी (जे जनेऊ निर्माणक विशेषज्ञ छथि) केँ केंद्र मे राखि 10 टा महिला एकठा होइत छथि। सभ कियो 2-2 हजार टका जमा कऽ 20 हजारक एकटा सीड कैपिटल (Seed Capital) तैयार करैत छथि। दादी ओहि महिला सभ केँ जनेऊक प्रीमियम क्वालिटी तैयार करबक प्रशिक्षण दैत छथि। ओहि टोला-मोहल्लाक कोनो टेक-सेवी नवयुवक (जेना लाल बौआ) एहि उद्यम केँ एकटा ब्रांड दैत छथि। लोगो, सोशल मीडिया पेज, आ अमेज़न-फ्लिपकार्ट सन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म सँ जोड़ि एकरा ग्लोबल मार्केट मे पहुँचा दैत छथि। परिणाम: विलुप्त होइत कला क बचाव, उत्तम गुणवत्ताक जनेऊक उपलब्धता आ गामक महिला सभक लेल घरहि बैसल स्वावलंबन के बाट फुजय अछि।

2. सहकारी खेती: छोट जोतक पैघ समाधान - मिथिला मे जमीनक टुकड़ा-टुकड़ा (Fragmentation) होनाइ खेतीक घाटाक सब सँ पैघ कारण मे से अछि। जँ 10 टा किसान मिलि कऽ अपन-अपन एक-एक बीघा जमीन केँ एकठाम कऽ लेथि, तँ तस्वीर बदलि सकैत अछि। कार्यप्रणाली (The Cooperative Approach): 10 बीघाक बिखरल खेत 4-5 टा पैघ प्लॉट मे बदलि जाइत। एतय अब मैकेनाइजेशन (टैक्टर आ आधुनिक मशीनक प्रयोग) संभव अछि। सभ सदस्य 50-50 हजार टका जोड़ि कऽ 5 लाखक कोष बना सकय छथि, जाहि सँ उत्तम खाद, बीया, आ आधुनिक औजार किनय मे सुविधा होइत छैक। कोनो सदस्य खेतक देखरेख मे माहिर छथि, तँ केओ संसाधन प्रबंधन मे, आ केओ मार्केटिंग (बाजार दर) क जानकारी राखय मे। लागत मे कमी आ उत्पादन मे वृद्धि। ई प्रोफेशनल फार्मिंग छोट किसानक आमदनी केँ लाभप्रद रूप से बढ़ा सकैत अछि।

ई दुनू उदाहरण ई डेमोंस्ट्रेट करैत अछि जे जँ कौशल केँ सहकारिता आ तकनीकक साथ भेटि जाय, तँ गामक अर्थतंत्र केँ बाहरी बैसाखीक के बिना भी आगा बढ़ायल जा सकय अछि।

शिक्षण-प्रशिक्षण आ स्वास्थ्य सेवा जेहन बुनियादी क्षेत्र मे सेहो सहकारिता आ सामूहिक प्रयास सँ लोकक जीवन बेहतर भऽ सकैत अछि। अर्थशास्त्रक दृष्टिकोण सँ देखल जाय तँ एहि क्षेत्र मे Human Capital Investment (मानव पूँजी मे निवेश) क असीम संभावना अछि।

3. शिक्षण-प्रशिक्षण: ज्ञान-कोष सँ डिजिटल साक्षरता धरि - गाम मे मेधाक कमी नै अछि, मुदा गाइडेंस आ रिसोर्सक अभाव मे अक्सर बहुत बच्चा सभ पाछू रहि जाइत अछि।

सहकारी मॉडल: सामूहिक कोचिंग सेंटर - मानि लिअ, गामक लोक सभ मिलि कऽ एकटा शिक्षा कोष बनबैत छथि। गामक कोनो खाली घर वा दालान केँ कम्युनिटी लर्निंग सेंटर बनायल जाइत अछि। सभ कियो किछ राशि जमा कऽ 5-6 टा टैबलेट (Tablet), एकटा प्रोजेक्टर, आ निक इंटरनेट कनेक्शन लगबैत छथि। जे बच्चा अलग-अलग किताब वा गैजेट नै किनि सकैत छलाह, ओ आब सामूहिक रूप सँ स्मार्ट क्लासक लाभ उठा सकय छथि। गामक जे नवतुरिया लोकनि जे बाहर पढ़ि रहल छथि वा नौकरी कऽ रहल छथि, ओ छुट्टी मे एला पर ओहि सेंटर मे गेस्ट लेक्चर दैत छथि। ओ ऑनलाइन माध्यम सँ गामक बच्चा केँ नव स्किल सीखे मे  वा प्रतियोगी परीक्षाक तैयारी करबै मे गाइड क सकय छथि। एहि सँ बच्चा केँ महग कोचिंग लेबाक जरूरत नै पड़त, आ गामक किछ शिक्षित युवक-युवती केँ ओतहि रोजगार भेटत। बेगूसराय के मोहनपुर गाँव के सरकारी विद्यालय मे ई मॉडल सफलतापूर्वक चलि रहल अछि।

4. हेल्थकेयर: आरोग्य सोसायटी आ टेली-मेडिसिन - गाम मे स्वास्थ्य सेवाक सब सँ पैघ समस्या छैक समय पर सही परामर्श नै भेटब आ इमरजेंसी मे टकाक अभाव।

सहकारी मॉडल: - आरोग्य निधि (Health Fund): लग-पास के गामक परिवार मिलि कऽ अपन एकटा हेल्थ को-ऑपरेटिव बना सकय छथि। प्रत्येक परिवार प्रति मास एकटा निश्चित सब्स्क्रिप्शन राशि एकटा साझा कोष मे जमा करैत अछि। सैंकड़ों परिवार एक संगे होइत अछि तँ ओ बारगेनिंग पवार के प्रभाव से कोनो अस्पताल वा पैथोलॉजी लैब सँ कन्सेशनल रेट (छूट) लेल करार कऽ सकैत छथि। ओहि सोसायटीक कार्ड देखला पर सदस्य केँ सस्त इलाज भेट सकय अछि। सोसायटी अपन कोष सँ गाम मे एकटा छोट सन डिजिटल डिस्पेंसरी खोलि सकय अछि। ओतय एकटा प्रशिक्षित नर्स/कंपाउंडर राखल जा सकय अछि जे आधुनिक मशीन सँ बीपी, शुगर आ ईसीजी कऽ सकैत छथि। इंटरनेटक माध्यम सँ प्रशिक्षित डॉक्टर सँ वीडियो कंसल्टेशन कयल जा सकय अछि। सोसायटीक साझा कोष सँ एकटा ऑटो एम्बुलेंस राखल जा सकैत अछि, जे राति-बिराति मे भी कोनो मरीज केँ अस्पताल पहुँचा सकय।

एहि दुनू मॉडल मे सब सँ बेसी महत्व छैक प्रिवेंटिव (निवारक) सोचक। जँ शिक्षण आ स्वास्थ्य मे सहकारिता अनैत छी, तँ गामक डिस्पोजेबल इनकम (बचत भेल पैसा) बढ़ि जेतैक, कियाक तँ बीमारी आ शिक्षा पर होमय वाला अनाप-शनाप खर्च कम भऽ जेतैक। नारायणा हृदयालय (देवी शेट्टी जीक मॉडल) सहकारिता आ वॉल्यूम क एकटा अद्भुत मेल थिक। हम एकरा इकोनॉमीज ऑफ स्केलक एकटा उत्कृष्ट उदाहरण मानैत छी। एकर मूल मंत्र अछि - सबहक अंशदान, गरीबक कल्याण। नारायणा हृदयालय (Narayana Health) स्वयं कोनो सहकारी संस्था (Cooperative Society) नै अछि, अपितु ई एकटा For-profit कॉर्पोरेट अस्पताल श्रृंखला थिक। मुदा ओ कर्नाटक सरकार संग मिलि सहकारी वित्तपोषण (Cooperative Funding) क ई ताकत देखौलक जे जँ गरीब लोक अपन छोट-छोट सहकारी अंशदान केँ एकठाम कऽ लैत छथि, तँ ओ महग कॉर्पोरेट अस्पताल सँ सेहो निक सेवा लऽ सकैत छथि।

एहन नै छैक जे बिहार मे सहकारी संस्था सभ सक्रिय नै छैक। औपचारिक आ अनऔपचारिक रूप से हजारो संस्था सभ वर्तमान मे कागज पर व  वास्तविक रूपे सक्रिय छैक। जौं पंडौल कोपरेटिव मिल एकर स्याह पक्ष छैक त सुधा एकर उज्जर पक्ष छैक। बिहार सरकारक सहकारिता विभाग आ भारत सरकारक सहकारिता मंत्रालयक हालिया रिपोर्ट के अनुसार बिहार मे औपचारिक सहकारिता समूह के किछ आंकड़ा निंम्न देल गेल अछि :

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आँकड़ा

विवरण

बिहार मे कुल निबंधित सहकारी समिति

27,387

एहि मे PACS सँ ल कए बुनकर, मत्स्य, आ आवास समिति सभ शामिल अछि।

उत्तर बिहार (मिथिला) मे सक्रिय समिति

12,000 - 14,000

उत्तर बिहार मे कृषि आ डेयरीक प्रधानताक कारणे एतय सक्रियता दक्षिण बिहारक तुलना मे बेसी अछि।

कुल PACS (पूरा बिहार)

8,463

ई बिहारक ग्रामीण अर्थव्यवस्थाक मेरुदंड अछि, जे प्रत्येक पंचायत स्तर पर काज करैत अछि।

नवनिर्मित बहुउद्देशीय (M-PACS/डेयरी)

4,418 (नवंबर 2025 तक)

केंद्र सरकारक "सहकार सँ समृद्धि" योजनाक तहत ई नव समितिक गठन कएल गेल अछि।

कंप्यूटरीकृत PACS (ERP आधारित)

4,460

पारदर्शिता अनबाक लेल PACS क डिजिटल होनाइ एकटा पैघ उपलब्धि अछि।

 

अतीतक पाठ: विफलता आ सुधार - हरिमोहन झाक एकटा प्रसिद्ध कथा अछि - ब्रहमाक श्राप। जेकर निचोड़ ई अछि जे मिथिला के लोक होइत त छैथ कुशाग्र बुद्धि मुदा हुनक विफलता के जड़ि मे रहय अछि हुनक साथ भऽ नै रहनाय आपसी अविश्वास आ द्वेष के भाव। मिथिला आ उत्तर बिहार मे सहकारिताक विफलताक मुख्य कारण राजनीतिक हस्तक्षेप, आपसी अविश्वास आ द्वेष के भावना आ पेशेवर प्रबंधन (Professional Management) क अभाव रहल अछि।कतेको सहकारी समितिक बोर्ड मे राजनीतिक नियुक्ति भेल, जकरा कारणे ओ संस्थाक आर्थिक स्थिति सँ बेसी अपन आ राजनैतिक लाभ-हानिक चिंता करए लागलि। सफलताक लेल सहकारिता केँ राजनीति आ आपसी द्वेष भाव आ अलगाववादी मानसिकता सँ मुक्त राखब अनिवार्य अछि। सहकारी समितिकें प्रोफेशनल लीडरशिप आ तकनीकी विशेषज्ञक देखरेख मे चलय पड़त। सहकारिता नै खाली औद्योगिक पतन कें रोकि सकैत अछि, अपितु एहि क्षेत्र कें एकटा सस्टेनेबल इकोनॉमिक हब बनय सकैत अछि।

90 क दशक सँ जे पूँजी बाहर गेल, ओकर भरपाई कोनो सरकार एक्के दिन मे नै कऽ सकत। मुदा सहकारिताक माध्यम सँ हम अपन आर्थिक भाग्य अपन हाथ मे लय सकैत छी। जनेऊ बनबै वाली दादी सँ लऽ कऽ मखान उपजबय वाला किसान धरि, जखन सभ कियो सहकारी सूत्र मे बंधि जएताह, तखन मिथिला केँ निवेश लेल कोनो पूँजीपतिक बाट जोहय के आवश्यकता नै पड़त। हमर मानब अछि जे मिथिलाक विकासक मार्ग पूंजीवाद सँ बेसी सहकारिताक बाट सँ होइत आगा बढि सकय अछि। बस आवश्यकता अछि जे लोक व्यक्तिगत लाभ सँ आगा बढ़ि सामूहिक समृद्धि क आधारशिला राखथि। बिहारक भविष्य एहि बात पर निर्भर करैत अछि जे हम अपन व्यक्तिगत मेधा (Individual Intelligence) केँ सामूहिक पूँजी (Collective Capital) मे केना बदलय छी। बिहार लग लेबर अछि, लैंड अछि, आ लिक्विडिटी (पूँजी) सेहो अछि, बस कमी अछि तँ एकटा सहकारी संकल्पक।

 

 

 

-प्रणव कुमार झा, राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड, नई दिल्ली


 

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