
आचार्य रामानंद मंडल
प्राथमिक शिक्षा मे
अंगिका बज्जिका/
नीट छात्र आंदोलन -२०२६/ मिथिला राज्य निर्माण के इतिहास
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प्राथमिक शिक्षा मे अंगिका बज्जिका
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी स्वयं अंगिका क्षेत्र के छतन।हुनकर मातृभाषा अंगिका हय।संवदिया के पत्रकार अक्षय आंनद सन्नी हुनका अंगिका के बारे मे समझा रहल छतन कि प्राथमिक शिक्षा मे क्षेत्रीय भाषा के रूप मे अंगिका मे न पढा के मैथिली अर्थात सोतिपुरा मैथिली भाषा में पढायल जाय।त अंगिका क्षेत्र के कैगो बच्चा सोतिपुरा मैथिली समझतै।नयी शिक्षा नीति में संविधान के अष्टम सूची में शामिल भाषा के आधार पर अनिवार्य शिक्षा देबे के बात न कैल गेल हय।नीति में क्षेत्रीय भाषा वा स्थानीय भाषा में शिक्षा देबे के बात कैल गेल हय। तैं मैथिली अनिवार्य न हय।तत्काल बिहार सरकार के अंग क्षेत्र में अंगिका आ बज्जि क्षेत्र मे बज्जिका मे पढाई की व्यवस्था करे के चाही। जैसे अंग आ बज्जि क्षेत्र के बच्चा के प्राथमिक शिक्षा मजबूत हो आ बच्चा के सार्वंगिक विकास हो सके। ज्ञात हो कि दक्षिणी मैथिली अंगिका, पश्चिमी मैथिली बज्जिका आ केन्द्रीय मैथिली सोतिपुरा मूल मैथिली के अलग-अलग शैली हय।जे एक दोसर से भाषायी दृष्टि से अलग अलग शैली हय। नेपाल के मधेश प्रदेश में बज्जिका आ मैथिली अलग-अलग भाषा के रुप मे दर्ज हय। नेपाली मिथिला में मैथिली आ बज्जिका के मतभेद के कारण मिथिला प्रदेश न बनके मधेश प्रदेश के निर्माण भेल।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के किन्हको झांसा मे आबे के आवश्यकता न हय। बिहार में अंगिका आ बज्जिका भाषा अकादमी बनाबे के आवश्यकता हय।
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नीट छात्र आंदोलन -२०२६
काक्रोच जनता पार्टी अराजनीतिक के संयोजक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में नीट छात्र आंदोलन -2026 के सफल कहल जा सकय हय।इ आंदोलन दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर कैल गेल। आंदोलन के शुरुआत सोनम वांगचुक के आमरण अनशन से शुरू भेल।अनशन काल मे स्वास्थ्य कारण से पुलिस अस्पताल मे भर्ती कैलक आ सरकार से वार्ता के बाद वांगचुक अपन अनशन समाप्त क देलन। अनशन मे जेएनयू के छात्र नेहा बोरा सेहो आमरण अनशन पर रहय। सरकार के कोनो अनुकूल कदम न उठाबे के कारण सामाजिक कार्यकर्ता मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी के सलाह पर बोरा अपन अनशन समाप्त क देलक।अइ बीच आंदोलन अपन उग्र रूप धैले रहय। आंदोलन राजधानी दिल्ली से राज्य आ जिला मुख्यालय तक फैल गेल। सामाजिक कार्यकर्ता से लेके राजनेता तक आंदोलन मे साथ देबे लागल। सामाजिक कार्यकर्ता प्रो योगेन्द्र यादव, मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे आ राजनेता विरोधी दल राहुल गांधी ,सासंद डिंपल यादव आदि तक आंदोलन मे संग देबे लागल। आंदोलन के संवेदनशीलता के देखैत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के व्यक्तव्य युवा के डिक्टेशन के न बल्कि डायलॉग के आवश्यकता हय। सरकार पर अइ वक्तव्य के असर पड़लैय। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आधि रात में अपन भावना से युवा आ छात्र के अवगत करैलन।असर केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान पर सेहो पड़लैय आ प्रधान पद से त्यागपत्र दे देलन। आंदोलनकारी के प्रमुख मांग पूरा भेल आ आंदोलनकारी आंदोलन समाप्ति के घोषणा कैलन। केन्द्रीय शिक्षा मंत्री के पदभार प्रह्लाद जोशी के सौपल गेल।आब छात्र आ युवा के सरकार के अगला कदम पर नजर राखे के आवश्यकता हय त सरकार के छात्र आंदोलन के मर्म के समझे के आवश्यकता हय जे युवा आ छात्र सरकार के कोनो अगला कदम से मर्माहत न होय। तत्काल नीट छात्र आंदोलन साबित क देलक कि भारत मे लोकतंत्र जीवित हय।इ भारतीय लोकतंत्र के जीत हय।
*ऐ आन्दोलनमे ६२ टा हत्याक प्रयासक आरोपी, २२९ टा आर्म्स एक्ट, १९६१ मे आरोपी, ६१टा बलात्कारक आरोपी आ ६ टा बाल यौन शोषण (POCSO) मे आरोपी रहथि [स्रोत दिल्ली पुलिस]; तेँ अखन कोनो निर्णयपर पहुँचब सम्भव नै अछि।– सम्पादक
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मिथिला राज्य निर्माण के इतिहास
मिथिला नरेश रामेश्वर सिंह १९१०ई मे अलग मिथिला राज्य के परिकल्पना कैले रहतन।अइ के साकार करे के लेल मैथिल महासभा के गठन कैलन। मैथिल महासभा के सदस्य केवल आ केवल मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थ ही हो सकैत रहतन एकर विरोध भेल रहय कि कोनो मिथिलावासी हो सकय हय।परंच राजा रामेश्वर सिंह के स्पष्ट विचार रहय कि मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थ ही शुच्चा मैथिल हय। हालांकि सामाजिक , सांस्कृतिक आ भाषायी संस्था के रूप में गठन कैल गेल रहय। परंच संगठन के उद्देश्य मैथिल ब्राह्मण आ कर्ण कायस्थ के विकास आ संरक्षण रहय आ अही उद्देश्य के प्रतिपूर्ति के लेल अलग मिथिला राज्य के लेल काज कैल गेल रहय।आब राजा रामेश्वर सिंह के सपना साकार करे के लेल अलग मिथिला राज्य के लेल अभियान चलायल जा रहल हय।
परंच आब राजा के विचार से अलग राज्य के निर्माण न हो सकय छै।आब आम लोग के विचार आ समर्थन से अलग राज्य के निर्माण हो सकय छै। पड़ोसी देश नेपाल मे मिथिला राज्य न बनके मधेश प्रदेश के निर्माण भेलय।तहिना भारत मे सेहो अलग राज्य के निर्माण हो सकय छै। चाहे वो मिथिला राज्य बनय ।वर्तमान मे भारत मे कोनो राज्य पौराणिक राज्य के नाम पर न हय। जौं भगवान राम के राज्य के नाम पर वर्तमान प्रदेश के नाम न हय। जौं कि भारत जे मगध साम्राज्य के नाम पर जानल जाइ छै।आइ मगध नाम पर मगध जिला तक न हय। प्रजातांत्रिक देश में कोनो राजतंत्रीय राज के नाम पर कोनो राज्य के नाम रखनाइ प्रजातांत्रिक विचार के अवमूल्यन हय।आइ विचार करे के आवश्यकता हय कि आइ मैथिल महासभा आ राजावादी विचार समयोचित हय!
-आचार्य रामानंद मंडल पश्चिमी मैथिली बज्जिका साहित्यकार सीतामढ़ी।
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