VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका — First Maithili Fortnightly eJournal

विदेह नूतन अंक
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प्रमोद झा 'गोकुल'
नेहक डोर


बारहवींक रिजल्ट निकलिते धिया -पुतासे लयके गार्जियन धरिक मनोमस्तिस्कमे खुशीक लहरि दौड़ि गेलैक ‌‌।सबहक ठोर पर एक्केटा बात जे फल्लाँक एडमीशन ओइ कालेजमे भै रहल छैक ते चिल्लाँक ऐमे।
देवनक बेटी सेहो नीक नम्मरसे पास भेल छै।चंसगैर ते ओ छौंड़ी छलैहे,तैपरसे ऐबेरका मेहनैत आर रंग भरि देलकै।सौंसे जबारमे चर्चाक विषय बनि गेल छै देवनक बेटी नेहा । आखिर चर्चा ओकर हौक कोना नइं,प्रदेश भरिमे पहील स्थान जे पौलकैये! ताहूमे विज्ञान सनक कठिनगर विषयमे सेहो सबसे औवल नम्मर भेटल छै ओकरा। तेँ सबहक मूहँसे प्रसंशाक दू आखर निकलिए जाइछै ओकरालेल।
एहि खुशीक बेलामे देवनक मूहँ पर चिंताक स्याह छाया दिनानुदिन आर गाढ़ भेल जारहल छै।ओ आब की करत? नेहाक एडमीशन कोनाके कतय करौत?तेजगैरते ओ बच्चेसे छलैहे,तैपरसे ऐबेरका परीक्षामे आर कमाल कय देलकै।किछते सोचय परबे करतै।ओहिना ते नइं छोड़ि देबै।फेर ओ अपने मनमे प्रश्न केलक जे छौंड़ियेसे पुछै छियै।आखिर ओकर की विचार छै?
गुनधुन करैत कखन ओ अपन दलान पर पहुंँच गेल से अपनो नइं बूझि पौलक ‌। भान तखन भेलै जखन सामने आबिके पत्नी ओकरासे आँखि नचबैत जिज्ञासा केलकै -
कतयसे एना बेसुध भेल आबि रहल छी?
-आँइ ! नइं हँ , कने चल गेल छलियै दूध अनैले। परंच आइ दोकाने बन्द छै!
-अनेरे फूसि किएक बजैत छी?
-एहिमे फूसि बजैक कोन बात भेलै?
-यैह जे हमरोसे मोनक बात नुका रहल छी! हम नइं बुझै छियै जे अहांक मोनमे एखन की चलि रहल अछि?
-हँ , से बात ते छै!मुदा हम अहाँके की कहू? माथा काज करब बन्द कय देलक।देखै नइं छियै जे लोकक बच्चा डागदरी आ इंजिनियरिङक तैयारीमे लागि गेलैये आ हम एहन अभागल छी जे अपन बेटीके नीक कालेजोमे नामांकन करबैले दिन तकै छी! आब अहीं कहू जे हम की करू?नेहियाक मोनमे किछ करै बनैक लेल हिलकोर नइं,उठैत हेतैक? नमहर साँस छोड़ैत देवन बाजल।
-हूँ किछते करैये पड़तै!
- सैहते पुछै छी जे हम की करू?
-डागदरी इंजियरी पढ़ेबै,से ते उपाय नइं अछि! हँ , तखन कोनो कालेजमे नाम धरि अवस्से लिखा दियौ!
-अंतमे ते हेतै सैह,मुदा छौंड़ी छै चंसगैर!
-से की करबै? गरीबक मनोरथ कोनो मनोरथ होइ छै! भेलैते कहुना इए बीए कराके बियाह करा देबै ‌। जेतै अपन सासुर। एक छुट्टि!
नेहा माय बापक वार्तालाप सुनि रहल छलि ,मुदा किछ बजबाक साहस नइं जुटा पौलक। ओ जनैत छलि अपन बापक गरीबीक खिस्सा! कोन धरानी ओकरा ट्यूसनक फीस आ फढ़ाइ लिखाइक खर्चा भेटैत छलैक ।संगहिं ओकरा इहो बूझल छैक जे ओकर बाप हिम्मत टूटय नहिं देतैक । एहि खातिर ओ अपनाके कठिन से कठिन परिस्थितिमे धकेल सकैत अछि। तखन की करत ओ? चुप रहि जायत?? नइं , ओ चुप नइं बैसत!ओकरा मुखर होमय पड़तैक । कहूँ बाबू भावावेशमे किछ कय लेता तखन? बाप रे! अनर्थ भै जेतैक।यैहने हम डाक्टर इंजिनियर नइं भै सकैत छी। कारण जे ई विद्या सब विशेष अर्थ साध्य होइत छैक, आ ने हम विज्ञाने राखि सकैत छी। एहूमे अर्थेक प्रयोजन छैक ‌‌।दोसर बात कोनो नीक कालेजमे हम एडमीशनो नै लय सकैत छी, कारण जे कोनो नीक संस्था छै से सबटा गाँवसे दूर शहरेमे छै ‌।
बाबूक मानस पटल पर यैह सब बात अबैत हेतैन ,तेँ एना चिंतित रहैत छथि। निर्णय हमरे लिय पड़त। सोचैत सोचैत ओकर आँखि कखन मुना गेलै से ओ अपनो नइं बूझि सकल।आँखि खुजलैते सामनेमे माय बापके ठाढ़ देखलक। सकुचैत अपन अस्तव्यस्त कपड़ा सम्हारैत उठिके ठाढ़ि भै गेलि। प्रश्नसूचक नजैरसंं बाप दिस तकलक ते देवन सकपकाके ओकरहिसँ पूछि बैसलै -
-किछु होइ छह तोरा नेह!
- न्न !
-तखन एना असमयमे सूतल छलह!
- ओहिना,कने आंखि लागि गेल !
-अच्छा , नै कोनो बात! एकटा गप ते कहह जे कतौ नाम लिखेबहक कि नइं?
-हँ अहाँ सबहक जेना,जत, जे विचार हुए! एक्के साँसमे बाजलि नेहा ‌
- तोरो ते किछ विचार हेतह! देवन पत्नी दिस तकैत बजलाह।
-हमर विचार,आचार आ सदाचार कहीं छी बाबू! हम सपनोमे अहाँक विचारके लाचार होइत नइं देखि सकैत छी! तेँ हमर नामांकन कोनो कालेजमे करा दियऽ ,हम पढ़ि लेब!संगहिं अहाँक मोनक अनुरूप किछु बनिके सेहो देखादेब!! दृढ़ होइत बाजलि नेहा।
- से बड्ड बेस! मुदादेवनक कंठ भर्रा गेलै।
-मुदा तुदा किछ नइं ‌,अहाँ जे कहय चाहैत छी से हम बुझैत छियै बाबू! यैह ने जे सबके मनोरथ होइ छै से हमरो हैत! ओइ मनोरथक पाँखिके फरफरयबाक लेल अर्थक उर्जा चाहियैक से हमरा लग नै अछि! परंच हमरा लग अहूसँ मजबूत उर्जा अहाँ दुनूक नेहक डोर अछि। जकरा पकड़ि अहाँक नेहा कठिन सँ कठिन परिस्थितिक सामना कय सकैत अछि। इंजीनियर आ डाक्टरेटा बनब जीवनक ध्येय नहिं होइत छैक।आरो किछ एहि समाज आ देशके चाहियैक,जे दृढ़ लगन आ कठिन परीश्रमसे संभव भै सकै छै।अहा़ँ दुनूक स्नेहिल मुस्कानक तागत पाबि हम सपना पूरा कयके रहब ‌। बस्स खाली अपन नेहक डोर अपन नेहासे जोड़ने रहू! एकरा एखन नइं टूटय दियौ बाबू!
देवन बेटीक विचार सुनिके स्तब्ध भै गेल।आँखिसँ प्रेमाश्रु झर झर बहय लगलै आ नेहाक माय सेहो अपन आँचरक खूट मूहँमे ठूसिके हिचकय लागलि।

-प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (बिहार), फोन-9871779851
 

 

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