
प्रीति कुमारी
श्री जगदीश प्रसाद मंडल'क साहित्यके अनुदीत प्रसार : एक सिंहावलोकन
मैथिली भाषा मेँ प्रकाशित पोथीक संख्याँ १३७ टा जाहिमे लगधक १५६० सँ अधिक
रचना मात्रे २६ सालमे जिनकर भेल छन्हि,से वयोवृद्ध समाज सुधारक आ
साहित्यकार छथि - श्री जगदीश प्रसाद मंडल जी। मधुबनी जिलाक तमुरिया रेलवे
टीशन सँ ५ किमी० पश्चिमोत्तर आ एन. एच. चनौरागंज बजार सँ ७ किमी० दक्षिण
भाग अवस्थित एक सर्वहारा गाम - बेरमा (लखनौर अंचल) मेँ श्री मंडल जीके जन्म
५ जुलाई १९४७ ई० केँ भेल रहन्हि। अति पिछरल समाजक उपजाति धानुक ( चिरौंठ)
मध्यवित परिवारक श्री दलू मंडल पिता आ श्रीमती भकोवती देवी माय हिनक बाल
बियाह सामाजिक चलैन अनुसारे ५ वर्खक वयक्रममे श्रीमती रामसखी देवी सँ
सरोकारी परिबारमे करेलन्हि। बपटुअर जगदीश जीके आरम्भिक शिक्षा गामेमे सातम
साल वयसमे आरम्भ भेलनि। से ओ हिन्दी आ राजनीति शास्त्र अर्थात दू विषयमे
एम.ए. आ कानून केर पढ़ाय धरि केलनि। ओ अथक परिश्रम सँ तरकारी खेती करैत
गुजर बसर अपनौने आबि रहल छथि। सन् २००० ई० सँ पूर्व ओ कम्युनिस्ट पार्टी 'क
राजनीतिमे जिला स्तर पर सक्रिय रहैत ,किसानक समस्या निदान लेल संघर्षरत
रहलाह। ताहि दरमियान ओ अनेको बेर केश- मोकदमा सँ त्रस्त भ' जहलमे सेहो
कारावास काटलन्हि। पछाति ग्राम पंचायत चुनावमे मोहभंग भेलासन्ता अपन किछ
साहित्यकार मित्रगण सँ विचारि साहित्य सेवी बनि गेलाह अछि। से ओ कम समयमे
एक पैघ उपलब्धि हासिल कयलन्हि। हिनक" गामक ज़िन्दगी " कथा संग्रह पर 'टैगोर
साहित्य पुरस्कार ' आ पंगू उपन्यास केँ साहित्य अकादमी पुरस्कार (मैथिली
मूल) भेटलन्हि। लघुकथा,विहैन कथा,नाटक ,एकांकी, कविता, गीत विधा सहित बाल
साहित्य सृजनक काज राति - दिन करैत अहर्निस सेवाक बलेँ मैथिली मंच पर
उपस्थिति बनौने रहैत छथि। हिनका उपर केन्द्रीत पोथीक सूचि नम्हर होईत जा
रहल अछि।ई देखि मैथिली लेखकीय समाज आ पाठकवृंध बीच कोतूहल पैसि गेल छैक।
श्री मंडल जीके साहित्य पर किछु शोधकर्ता पीएचडी. उपाधि सेहो पौलन्हि अछि।
मुदा सामान्यता मैथिली पोथी बढ़ कम बेसाहल जेयबाक कारणेँ प्रसार नगण्य रहैत
छैक। प्रकाशक लग सँ संस्था, पुस्तकालय आ श्रीमन्त लोक समुच्यभरि बेसाहि
कोठी कनहा पर गरदा सँ शोभा बढेबा ले राखैत जकियाबैत छैक।अपवादमे पढ़लो
जाईछ,मुदा लेखक समाज छोड़ि आन नहिँ। एकटा उदाहरण देखल जाए ! हमर बाबूजीक
फेबु० पर पाँच हजार पढ़ल - लिखल लोक मित्रगण बनल छथि। आरो सहृदयता पूर्वक
फ्रेण्ड रिक्वेस्ट पठौने छन्हि। एकटा 'ठुठ गाछ ' मैथिली उपन्यास श्री जगदीश
बाबूक पाँच बेर पुनः पुनः प्रकाशन भेलैक। एक बेर ई-पोथी सेहो इन्टरनेट पर
देला सँ ताहि पोथीक हिन्दीमे भावानुवाद 'शेष जीवन' नामसँ हमर बाबूजी श्री
लाल देव कामत कयलन्हि। ओ हिन्दी पोथी लेखकगण आ पढाकू आगंतुक लोकनिक बीच
'नरहिया' के लोकार्पण "सगर राति दीप जरय" कार्यक्रमके अवसर पर बाँटल गेल।
पछाति किछु शुभेच्छुगण केँ सेहो हस्तगत कयल गेलन्हि ,एहि आग्रहके संग जे
मैथिलीमे टो - टा केँ पढ़ैत होयब तेँ हिन्दीमे हरहराकय मनलगू विषय जेकाँ
पढ़ल जाए। एकटा जिज्ञासावस एक सबाल फेसबुक सोशल मीडिया पर पोस्ट कयलन्हि -:
शेष जीवन पोथीके मुख्य पात्र श्री रामकृष्ण बाबू कोन गामक रहनिहार थिकाह?
ताहि प्रश्नक उतारा कियो नहिं देने रहनि; फेर सप्ताह दिन पर दू मासधरि
रीपोस्ट करैत अकक्षा गेलाह, मुदा रामपुर आकि कृष्णपुर किछुटा नहिं लिखलन्हि
कियोभी कहबैका साहित्यकार लोकनि आ पाठकगण। तै माने ईहो भऽ सकैत छैक,जे
जगदीश प्रसाद मंडल जीके मैथिली साहित्य आन्दोलन सँ किछु लोक नाराज(क्षुब्ध)
रहैत छथि। ओना ओ सपरिवार मैथिली आन्दोलनी जेकाँ मैथिली साहित्य सेवामे एहिक
नून - रोटी(सोहारी) मेँ तल्लीन रहैत अछि। श्री मंडल जीक साहित्य आब एकल
रचनाकारक सीमा पार कऽ आलोचना, अनुवाद आ नव पाठकीय समुदायक विषय बनि रहल
अछि।
आधुनिक साहित्यकार श्री गजेन्द्र ठाकुर जीक लिखल बायोग्राफी जे श्री जगदीश
प्रसाद मंडल जीके जीवन पर छन्हि, तकर हिन्दीमे प्रथमत: अनुवादक भेलाह अछि
श्री रामेश्वर प्रसाद मंडल जी। ओहिकें पढ़ि अंग्रेजीमे राम अशिष सिंहजी
अनुवाद कयलन्हि। श्री रामेश्वर बाबू 'पंगू' उपन्यास 'क हिन्दीमे सेहो
अनुवाद कार्य कयलन्हि ,ताहिक अंग्रेज़ी भाषा मेँ राम अशिष सिंहजी क्रिपलेड
नोवेल 'ट्रांसलेशन' कयलनि अछि। आ संस्कृत भाषा मेँ डॉ० बीरेंद्र कुमार
चन्द्रसखी जी। चन्दसखी जी हुनक मैथिली पोथी कें हिन्दीमे अनुवाद 'जीवन की
विजय ' नामे आ सुचिता नाम सँ सेहो भाषान्तर कयलनि अछि। गजेन्द्र ठाकुर जी
'जगदीश प्रसाद मंडल मैथिली वरिटर ,दोसर इहोज आफ एक्सटेंशन ,फेर दोसर
फ्लोवेर ब्लूमिंग आन ए विथर्ड ट्री,फेर दोसर अंग्रेजी पोथी - स्ट्रागल्र्स
आफ लाइफ अनुवाद काज कयलनि। जगदीश प्रसाद मंडल जीके पुत्र डॉ० उमेश मंडल जी
सेहो हुनक पोथी खूब काज कयने छथि। यथा -: पंच देब १-१०० खंड कथा संकलन कय
पोथी रुपेँ पाठक बीच आनने छथि। हुनका मादे मुक्त पुरुष ' शोध आलेख
लेखन,हैण्डबुक सँ फेसबुक धरि - विचारशील गद्यांश , समस्या सँ समाधान धरि ,
निर्विकल्प, अभ्यंतर,जतय ने जाए कवि- ओतय जाए अनुभवी छैन। जगदीश प्रसाद
मंडल जीके काव्य संसार मादे उमेशजी 'स्वास्ति सूत' आ अ० विश्लेषण 'चौपेतल
चेहरा ,कियो करय आप ले- माय ले ने बाप ले पोथी गढ़ने छथि। हालहिमे
"पयस्विनी विमर्श " आ झुकाउक परीक्षण सेहो समक्ष आनलनि अछि। रामेश्वर बाबू
श्रीमंडल जीके मैथिली साहित्य केँ "एक चुटकी खुशी" पोथीक अंग्रेजी आ
हिन्दीमे अनुवाद काज कयलनि अछि। संगहि ओ माधव हम परिणाम निराशा केँ सेहो
लोकार्पण मझौरा (राजनगर) मेदि०२७-६- २०२६ कें करौलाह अछि। अंतिमक्षण मैथिली
पैथीक हिंदी रुपान्तर श्री गोसाई मंडल जी सेहो कयलाह अछि। बड़ी बहन नामे
हिन्दीमे श्री नवरत्न कुमार बेगानी जी कयलाह अछि। श्रीमती मुन्नी कामत जी
सेहो हिन्दी भाषान्तर 'जीवन की प्रतिस्पर्धा , अवधेश पटेल जीके द्वारा
'नियति और पुरुषार्थ, अच्छेलाल शास्त्री - त्रिकालदर्शी, जगदानंद झा मनु -
जीवन दान,गगन कुमार - अन्तर्मन की पीड़ा , डॉ० शुभ कुमार वर्णवाल - जीवन
मरण पोथी सं आग अयलाह अछि। श्री झौली पासवान - साहित्यकारक विवेक, कुंवर जी
- जिनगीक मोड़ पर, शुश्री पल्लवी मंडल - आमोंका बाग हिन्दी अनुवाद पोथीक
संग अपन परिचय बढबैत अनुवाद कार्यमे सहभागी बनल अछि। जगदीश प्रसाद जीके आरो
मैथिली पोथीक' हिन्दी समेत आन भाषामे अनुवाद कार्य जोड़ पकड़ि रहलैन अछि।
हुनका साहित्य में किश्तमे सेहो फराक - फराक मैथिली पोथी रूपेँ निम्नांकित
विद्वान काज कयलनि अछि।
एक सय एकैश कथाक चयन कय पोथी रूपें डॉ० रविन्द्र कुमार चौधरी जी ,१५ चयनित
कथा - प्रो० जनक लाल मंडल , दीपवत्तिका ( आभा प्रभा) - डॉ० योगानंद झा ,
सरोकार - प्रो० नारायण प्रसाद सिंह, जगदीश प्रसाद मंडल के बीछल कथा - प्रो०
राम सेवक सिंह , कथामे बसल जीवन- डॉ० विजय शंकर पंडित, मनुख बनल रहबाक
जिद्द - डॉ० रीना कुमारी जीके पोथी पाठक बीच अयला सँ विस्तार भेलैक अछि।
हिना लेखनी समाजक यथार्थक संग - संग परिवर्तनक आकांक्षाकेँ सेहो सशक्त स्वर
प्रदान करैछ। ८०म् जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाक संग बधाय दैत छीयैन हम।
श्री जगदीश प्रसाद मंडल'क साहित्यके अनुदीत प्रसार : एक सिंहावलोकन
_ प्रीति कुमारी - बीए. बीएड०
मैथिली भाषा मेँ प्रकाशित पोथीक संख्याँ १३७ टा जाहिमे लगधक १५६० सँ अधिक
रचना मात्रे २६ सालमे जिनकर भेल छन्हि,से वयोवृद्ध समाज सुधारक आ
साहित्यकार छथि - श्री जगदीश प्रसाद मंडल जी। मधुबनी जिलाक तमुरिया रेलवे
टीशन सँ ५ किमी० पश्चिमोत्तर आ एन. एच. चनौरागंज बजार सँ ७ किमी० दक्षिण
भाग अवस्थित एक सर्वहारा गाम - बेरमा (लखनौर अंचल) मेँ श्री मंडल जीके जन्म
५ जुलाई १९४७ ई० केँ भेल रहन्हि। अति पिछरल समाजक उपजाति धानुक ( चिरौंठ)
मध्यवित परिवारक श्री दलू मंडल पिता आ श्रीमती भकोवती देवी माय हिनक बाल
बियाह सामाजिक चलैन अनुसारे ५ वर्खक वयक्रममे श्रीमती रामसखी देवी सँ
सरोकारी परिबारमे करेलन्हि। बपटुअर जगदीश जीके आरम्भिक शिक्षा गामेमे सातम
साल वयसमे आरम्भ भेलनि। से ओ हिन्दी आ राजनीति शास्त्र अर्थात दू विषयमे
एम.ए. आ कानून केर पढ़ाय धरि केलनि। ओ अथक परिश्रम सँ तरकारी खेती करैत
गुजर बसर अपनौने आबि रहल छथि। सन् २००० ई० सँ पूर्व ओ कम्युनिस्ट पार्टी 'क
राजनीतिमे जिला स्तर पर सक्रिय रहैत ,किसानक समस्या निदान लेल संघर्षरत
रहलाह। ताहि दरमियान ओ अनेको बेर केश- मोकदमा सँ त्रस्त भ' जहलमे सेहो
कारावास काटलन्हि। पछाति ग्राम पंचायत चुनावमे मोहभंग भेलासन्ता अपन किछ
साहित्यकार मित्रगण सँ विचारि साहित्य सेवी बनि गेलाह अछि। से ओ कम समयमे
एक पैघ उपलब्धि हासिल कयलन्हि। हिनक" गामक ज़िन्दगी " कथा संग्रह पर 'टैगोर
साहित्य पुरस्कार ' आ पंगू उपन्यास केँ साहित्य अकादमी पुरस्कार (मैथिली
मूल) भेटलन्हि। लघुकथा,विहैन कथा,नाटक ,एकांकी, कविता, गीत विधा सहित बाल
साहित्य सृजनक काज राति - दिन करैत अहर्निस सेवाक बलेँ मैथिली मंच पर
उपस्थिति बनौने रहैत छथि। हिनका उपर केन्द्रीत पोथीक सूचि नम्हर होईत जा
रहल अछि।ई देखि मैथिली लेखकीय समाज आ पाठकवृंध बीच कोतूहल पैसि गेल छैक।
श्री मंडल जीके साहित्य पर किछु शोधकर्ता पीएचडी. उपाधि सेहो पौलन्हि अछि।
मुदा सामान्यता मैथिली पोथी बढ़ कम बेसाहल जेयबाक कारणेँ प्रसार नगण्य रहैत
छैक। प्रकाशक लग सँ संस्था, पुस्तकालय आ श्रीमन्त लोक समुच्यभरि बेसाहि
कोठी कनहा पर गरदा सँ शोभा बढेबा ले राखैत जकियाबैत छैक।अपवादमे पढ़लो
जाईछ,मुदा लेखक समाज छोड़ि आन नहिँ। एकटा उदाहरण देखल जाए ! हमर बाबूजीक
फेबु० पर पाँच हजार पढ़ल - लिखल लोक मित्रगण बनल छथि। आरो सहृदयता पूर्वक
फ्रेण्ड रिक्वेस्ट पठौने छन्हि। एकटा 'ठुठ गाछ ' मैथिली उपन्यास श्री जगदीश
बाबूक पाँच बेर पुनः पुनः प्रकाशन भेलैक। एक बेर ई-पोथी सेहो इन्टरनेट पर
देला सँ ताहि पोथीक हिन्दीमे भावानुवाद 'शेष जीवन' नामसँ हमर बाबूजी श्री
लाल देव कामत कयलन्हि। ओ हिन्दी पोथी लेखकगण आ पढाकू आगंतुक लोकनिक बीच
'नरहिया' के लोकार्पण "सगर राति दीप जरय" कार्यक्रमके अवसर पर बाँटल गेल।
पछाति किछु शुभेच्छुगण केँ सेहो हस्तगत कयल गेलन्हि ,एहि आग्रहके संग जे
मैथिलीमे टो - टा केँ पढ़ैत होयब तेँ हिन्दीमे हरहराकय मनलगू विषय जेकाँ
पढ़ल जाए। एकटा जिज्ञासावस एक सबाल फेसबुक सोशल मीडिया पर पोस्ट कयलन्हि -:
शेष जीवन पोथीके मुख्य पात्र श्री रामकृष्ण बाबू कोन गामक रहनिहार थिकाह?
ताहि प्रश्नक उतारा कियो नहिं देने रहनि; फेर सप्ताह दिन पर दू मासधरि
रीपोस्ट करैत अकक्षा गेलाह, मुदा रामपुर आकि कृष्णपुर किछुटा नहिं लिखलन्हि
कियोभी कहबैका साहित्यकार लोकनि आ पाठकगण। तै माने ईहो भऽ सकैत छैक,जे
जगदीश प्रसाद मंडल जीके मैथिली साहित्य आन्दोलन सँ किछु लोक नाराज(क्षुब्ध)
रहैत छथि। ओना ओ सपरिवार मैथिली आन्दोलनी जेकाँ मैथिली साहित्य सेवामे एहिक
नून - रोटी(सोहारी) मेँ तल्लीन रहैत अछि। श्री मंडल जीक साहित्य आब एकल
रचनाकारक सीमा पार कऽ आलोचना, अनुवाद आ नव पाठकीय समुदायक विषय बनि रहल
अछि।
आधुनिक साहित्यकार श्री गजेन्द्र ठाकुर जीक लिखल बायोग्राफी जे श्री जगदीश
प्रसाद मंडल जीके जीवन पर छन्हि, तकर हिन्दीमे प्रथमत: अनुवादक भेलाह अछि
श्री रामेश्वर प्रसाद मंडल जी। ओहिकें पढ़ि अंग्रेजीमे राम अशिष सिंहजी
अनुवाद कयलन्हि। श्री रामेश्वर बाबू 'पंगू' उपन्यास 'क हिन्दीमे सेहो
अनुवाद कार्य कयलन्हि ,ताहिक अंग्रेज़ी भाषा मेँ राम अशिष सिंहजी क्रिपलेड
नोवेल 'ट्रांसलेशन' कयलनि अछि। आ संस्कृत भाषा मेँ डॉ० बीरेंद्र कुमार
चन्द्रसखी जी। चन्दसखी जी हुनक मैथिली पोथी कें हिन्दीमे अनुवाद 'जीवन की
विजय ' नामे आ सुचिता नाम सँ सेहो भाषान्तर कयलनि अछि। गजेन्द्र ठाकुर जी
'जगदीश प्रसाद मंडल मैथिली वरिटर ,दोसर इहोज आफ एक्सटेंशन ,फेर दोसर
फ्लोवेर ब्लूमिंग आन ए विथर्ड ट्री,फेर दोसर अंग्रेजी पोथी - स्ट्रागल्र्स
आफ लाइफ अनुवाद काज कयलनि। जगदीश प्रसाद मंडल जीके पुत्र डॉ० उमेश मंडल जी
सेहो हुनक पोथी खूब काज कयने छथि। यथा -: पंच देब १-१०० खंड कथा संकलन कय
पोथी रुपेँ पाठक बीच आनने छथि। हुनका मादे मुक्त पुरुष ' शोध आलेख
लेखन,हैण्डबुक सँ फेसबुक धरि - विचारशील गद्यांश , समस्या सँ समाधान धरि ,
निर्विकल्प, अभ्यंतर,जतय ने जाए कवि- ओतय जाए अनुभवी छैन। जगदीश प्रसाद
मंडल जीके काव्य संसार मादे उमेशजी 'स्वास्ति सूत' आ अ० विश्लेषण 'चौपेतल
चेहरा ,कियो करय आप ले- माय ले ने बाप ले पोथी गढ़ने छथि। हालहिमे
"पयस्विनी विमर्श " आ झुकाउक परीक्षण सेहो समक्ष आनलनि अछि। रामेश्वर बाबू
श्रीमंडल जीके मैथिली साहित्य केँ "एक चुटकी खुशी" पोथीक अंग्रेजी आ
हिन्दीमे अनुवाद काज कयलनि अछि। संगहि ओ माधव हम परिणाम निराशा केँ सेहो
लोकार्पण मझौरा (राजनगर) मेदि०२७-६- २०२६ कें करौलाह अछि। अंतिमक्षण मैथिली
पैथीक हिंदी रुपान्तर श्री गोसाई मंडल जी सेहो कयलाह अछि। बड़ी बहन नामे
हिन्दीमे श्री नवरत्न कुमार बेगानी जी कयलाह अछि। श्रीमती मुन्नी कामत जी
सेहो हिन्दी भाषान्तर 'जीवन की प्रतिस्पर्धा , अवधेश पटेल जीके द्वारा
'नियति और पुरुषार्थ, अच्छेलाल शास्त्री - त्रिकालदर्शी, जगदानंद झा मनु -
जीवन दान,गगन कुमार - अन्तर्मन की पीड़ा , डॉ० शुभ कुमार वर्णवाल - जीवन
मरण पोथी सं आग अयलाह अछि। श्री झौली पासवान - साहित्यकारक विवेक, कुंवर जी
- जिनगीक मोड़ पर, शुश्री पल्लवी मंडल - आमोंका बाग हिन्दी अनुवाद पोथीक
संग अपन परिचय बढबैत अनुवाद कार्यमे सहभागी बनल अछि। जगदीश प्रसाद जीके आरो
मैथिली पोथीक' हिन्दी समेत आन भाषामे अनुवाद कार्य जोड़ पकड़ि रहलैन अछि।
हुनका साहित्य में किश्तमे सेहो फराक - फराक मैथिली पोथी रूपेँ निम्नांकित
विद्वान काज कयलनि अछि।
एक सय एकैश कथाक चयन कय पोथी रूपें डॉ० रविन्द्र कुमार चौधरी जी ,१५ चयनित
कथा - प्रो० जनक लाल मंडल , दीपवत्तिका ( आभा प्रभा) - डॉ० योगानंद झा ,
सरोकार - प्रो० नारायण प्रसाद सिंह, जगदीश प्रसाद मंडल के बीछल कथा - प्रो०
राम सेवक सिंह , कथामे बसल जीवन- डॉ० विजय शंकर पंडित, मनुख बनल रहबाक
जिद्द - डॉ० रीना कुमारी जीके पोथी पाठक बीच अयला सँ विस्तार भेलैक अछि।
हिना लेखनी समाजक यथार्थक संग - संग परिवर्तनक आकांक्षाकेँ सेहो सशक्त स्वर
प्रदान करैछ। ८०म् जन्मदिन पर हार्दिक शुभकामनाक संग बधाय दैत छीयैन हम।
- प्रीति कुमारी, बी.ए.,
बीएड.
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।