
राम शंकर झा"मैथिल"
झिझिया
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सीता बहिना -२
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां..!
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां
कर जोड़ि करैय छी निहोरा
हमसभ धीया-पुता हमसभ नेनाह भुटका
आस लगेलिय जें दिनराति
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सीता बहिना -२
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां..!
अन्हि तअ जगत कें कल्याणी
अन्हि अम्बे काली कमला रुद्राणी
सबकें कष्ट हरियौ हे मैया महरानी
अन्हि कें भरोसे मैया
नौवो दिन पुजा करबैय नौवो राति
खेलबैय जें झिझिया
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सीता बहिना -२
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां..!
मिथिला कें धरती सँ निकललहुँ
हे अन्हि मिथिला कें धिया
अन्हि सभकें मनोरथ पुरा केलहुँ
अन्हि सभकें ह्रदय कें जुरबियौ
डैइन नेना-जोगिन सँ रक्षा करबैय
अन्हि कें चरण मे सभ समांग
देलकै पेटकुनियाँ
हे हमर सीता बहिना
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सीता बहिना -२
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां
नाचि नाचि झूमि झूमि मैया कें रिझेबै
अन्हि सभ कें गोदी भरलहूँ
अन्हि सभ कें सेनुरक लाज रखबैय
अन्हा जगत मे केकरा नहि तारलहुँ
अन्हा कें छोड़ि जेबैय किनका शरण मे
अन्हि कें शक्ति सँ बमकैत महादेव
अन्हि कें भक्ति सँ चमकाए दिनकर
दीनानाथ
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सीता बहिना -२
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां..!
अन्हा कें छोड़ि कें सुनत मनक बतिया
हमसभ भेलहूँ कपूत
सखियां..!
बाबु जनक कें छोड़ि आन्हा बसलहुँ
ठाकुर जी कें सङ्ग अवध नगरिया
अन्हि कें बाट जोहैत बितल उमरिया
झरि झरि आँखि सँ नोर बहाय दिन रतिया
अन्हा छोड़ि किनका आंचर सँ पोछबै
तयौ खेलबैय हमसभ झिझिया
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सीता बहिना -२
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां..!
नहि अछि ज्ञान नहि अछि ध्यान
कोन विधि करब अन्हा कें गुणगान
क्षमा करब हे दुर्गा -दुर्गतिनाशनी
आजु जगदम्बा अंगना खेलबै झिझिया
आबु आबु हे सीता बहिना -२
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां..!
आबु आबु हे सियाजी कें सखियां..!!
-राम शंकर झा"मैथिल", उघरा, दरभंगा, Mo -7970778787, Mail -
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