
आशीष अनचिन्हार
२ टा गजल
१
पानिमे पानि परसल जाइए
आगिमे आगि बाँटल जाइए
शब्दपर शब्द लीखल जाइए
अर्थ बस अर्थ छूटल जाइए
भेल कोंढ़ीक चर्चा रातिमे
भोरमे फूल लोढ़ल जाइए
छै अपन ढेप माटिक मोल नै
आनकेँ सोन बूझल जाइए
बेरपर आसमे चुप रहैए
बेरपर ढोल पीटल जाइए
सभ पाँतिमे 212-2122-212 मात्राक्रम अछि।
२
सत्ता के मातल नेता एलै दुआर हे
दुखमे ई झड़कल जनता फोड़ल कपार हे
रचनामे साधु छै जीवनमे किछु आर हे
एहनकेँ माने बुझियौ बड़का छिनार हे
नोरे छै कोसी कमला गंगा किनार हे
नोरेमे घोरल गेलै सिंदुर पिठार हे
आँगनमे रेखा पड़तै भेलै विचार हे
अपने के केलक पहिने अपने शिकार हे
मुद्दा तँ लीखै तेना जेना सरकार हे
सरकारक आगू भेलै बंदे बकार हे
सभ पाँतिमे 22-22-22-22-22-22 मात्राक्रम अछि। दू अलग-अलग लघुकेँ दीर्घ
मानबाक छूट लेल गेल अछि। ई बहरे मीर अछि। ई गजल लोकधुनपर आधारित अछि।
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