
राजदेव मंडल
संबोधन
संबोधन हमरा नचबैत अछि
कखनो इएह हमरा बचबैत अछि
अहाँक केना करब संबोधन
कखनो बनै छी हित
कखनो बनै छी दुसमन ।
अहाँ हरपल बदलै छी संबध
तहिना हमहूँ बदलै छी संबोधन
जॅं अहाँ निरन्तर बदलैते रहबै संबध
आ हम बदलैते रहबै संबोधन
तॅं एक दिन संबोधनक बन मे
हम हेरा जाएब
आ अहाँ कालक चक्कीमे पेरा जाएब ।
-राजदेव मंडल, Mob-9199592920, mandalraj151960@gmail.com
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