कल्पना झा

मैथिली साहित्यमे श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'एवं हुनक परिवारक योगदान-1

"श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार'क विराट व्यक्तित्वक चित्रण करबा मे हमर लेखनी सक्षम भऽ सकत की? हमरा मे ओ पात्रता अछि की? हमर कलम न्याय कऽ सकत एहि स्वनामधन्य व्यक्तित्वक चित्रण करैत?" हमरा मोन मे इएह प्रश्न सभ घूमए लागल, जखन आशीष अनचिन्हार हमरा सोझाँ प्रस्ताव रखलनि एहि सुच्चा 'मिथिला विभूति'क जीवन-यात्रा पर लिखबाक लेल।
ऊहापोह बला स्थिति बनि गेल जेना। एक दिस अपन लेखनीक क्षमता पर 'डाउट' दोसर दिस ई अवसर भेटबाक 'गौरव' सेहो। एहि 'अवसर'क लाभ उठबैत, पूर्वजक प्रति भाव कुसुमाञ्जलि अर्पित करैत अपन जनम सफल कऽ सकैत छी हम; से सोचि यथाशक्ति किछु लिखबाक सहास कऽ रहल छी अन्ततः।
नेआर तऽ केलहुँ जे लिखब हम 'विद्यालंकार' जीक जीवन-यात्रा पर। हुनकर कएल काज सभ पर। हुनकर उपलब्धि पर। मुदा असमंजस मे छी जे शुरुआत कतए सँ करी हम। मतलब स्वतन्त्रता सेनानी श्रीकान्त ठाकुरक चर्चा करी पहिले आ कि पत्रकार श्रीकान्त ठाकुरक खिस्सा सँ शुरुआत कएल जाए। पत्रकारो एहन-ओहन नहि,'धाकड़' पत्रकार। एहन पत्रकार जनिका सोझाँ तत्कालीन मुख्यमंत्री संग आरो बड़का बड़का कद्दावर नेता सभ नतमस्तक रहैत छलाह। मुख्यमंत्री अपन कुर्सी पर सँ उठि कऽ ठाढ़ भऽ जाइत छलाह आ हुनका बैसबाक आग्रह करैत छलाह। एहन हस्ती छलाह 'विद्यालंकार' जी। सम्पादक, लेखक, मैथिली भाषाक प्रचार प्रसार मे सक्रियता, हिन्दीक सेवक, भाषा साहित्य संबंधी अन्यान्य बहुत काज कएल छनि, जकर चर्चा विस्तार सँ हेबाक चाही। भाषा पर पकड़, राजनीति पर पत्रकार रूप मे दबदबा, सामाजिक, सांस्कृतिक गतिविधि मे सक्रियता, विशाल वटवृक्ष जकाँ शाखा, उपशाखा युक्त पसरल 'विद्यालंकार' जीक व्यक्तित्वक बहुत रास आयाम छनि। बेरा-बेरी सभ आयाम पर चर्चा हेतैक। मुदा शुरुआत करैत छी ओहि 'स्ट्रीट डॉग' बला प्रसंग सँ।
मुदा ओहि सँ पहिने 'विद्यालंकार' जीक व्यक्तित्वक जादू केहन छलनि, से कने चर्चा कइए लैत छी। बिहारक तत्कालीन मुख्यमंत्री पर्यन्त हुनकर सम्मान मे कुर्सी पर सँ उठि जाइत छलथिन, पैर छूबि गोड़ लागैत छलथिन। एहन मुख्यमंत्री मे स्व० कर्पूरी ठाकुर आ स्व० जगन्नाथ मिश्रक नाम उल्लेखनीय अछि। आँखिक देखल प्रसंग सुनौलनि अछि श्री घनश्याम ठाकुर जी मैथिली अकादमी संबंधी एकटा फेसबुक पोस्ट पर अपन प्रतिक्रिया दैत। पोस्ट छलनि आदरणीय भीमनाथ झा जीक। मैथिली अकादमी पर 'तालाबंदी' चर्चा मे छलए एम्हरे चारि-पाँच मास पहिने। मैथिली अकादमीक चर्चा हुअए आ अकादमीक पहिल अध्यक्ष श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' जीक चर्चा नहि होइत, से कोना भऽ सकैत छलए। सएह अकादमीक संग विद्यालंकार जी चर्चा मे छलाह 'तालाबंदी' प्रकरण मे। ई तऽ सर्वविदित अछिए जे सभ सँ बेसी काज हिनकहि अध्यक्षता मे भेल छलए मैथिली अकादमी मे। श्री घनश्याम ठाकुर जीक वक्तव्य हुनकहि शब्द मे देखल जाए- "विद्यालंकार जीक व्यक्तित्व एहन छल जे स्व० कर्पूरी ठाकुरक मुख्यमंत्रीक समय मे ओ अकादमी मे पूर्णकालिक निदेशक नियुक्ति हेतु मुख्यमंत्री सँ भेंट करए गेल छलाह। संग मे हमहूँ छलहुँ। मुख्यमंत्री जी हुनका पाएर छूबि प्रणाम कएलथिन आ अपन कुर्सी पर बैसबाक निवेदन कएलथिन, जे ओ स्वाभाविक रूप सँ अस्वीकार कऽ देलथिन। जाधरि ओ मुख्यमंत्री सँ बात कएलनि ताधरि मुख्यमंत्री अपन कुर्सी पर नहि बैसलाह आ हुनक बगल मे ठाढ़ भऽ हिनक बात सुनलनि। वापसी काल मुख्यमंत्री स्वयं कार धरि आबि अरियाति अपना हाथें कारक गेट खोलि पूर्ववत पाएर छूबि प्रणाम कऽ विदा कएलनि आ सप्ताहाभ्यन्तरे वांछित कार्य भ' गेलैक।"
आब चर्चा 'स्ट्रीट डॉग' बला प्रसंगक। पटना निवासी होएब हमरा लेल सौभाग्यशाली सिद्ध भेल। जैं विवाहोपरान्त पटना स्थायी निवास रहल हमर, तैं श्री भवन आ विद्यालंकार भवन, मतलब नैहर-सासुर दुनू पक्षक 'मन्दिर' सन पवित्र घर आ ओहि घरक लोक सभ सँ कनेक्टेड रहलहुँ, आ छीहे अद्यतन। हमर पतिदेव श्री त्रिवेणी कुमार झा आ हुनकर नाना श्रीकान्त ठाकुरक 'ब्लड ग्रुप' एक्कहि। एक बेर खूनक आवश्यकता पड़ने खून सेहो देने छलथिन नानाजी केँ ई। से नाति लेल बड़का गौरवक बात रहलनि, जे ओहन महान हस्तीक 'नस' मे हिनकर देल शोणित दौड़ि रहल छलनि। नानाजी स्वस्थ भेलथिन तऽ हृदय सँ जे आशीर्वाद देलथिन तकर वर्णने की कएल जाए; कोना कएल जाए। ओह! हम भसिआएल जा रहल छी...भावना मे बहैत... गप्प करबाक छलए ओहि स्ट्रीट डॉगक, जे ओहिना 'कौरा' दैत-दैत पोसा गेल छलनि। जेना कि अपना मिथिला मे एकटा परम्परा रहल अछि, भोजनक अन्तिम कौर कुकुर लेल छोड़ल जेबाक। हमरा देखल अछि नानीगाम जाइ तऽ नानाजी भोजन पर सँ उठैत काल, थारीक अन्तिम कौर हाथ मे उठेने अंगनाक 'दुरखा' (गली) लग लऽ कऽ जाइथ आ कुकुर दौड़ल आबि जाइन, ओ कौर खाए लेल। सएह, ताही परम्पराक निर्वाह पटनाक बोरिंग रोड चौराहा पर अवस्थित विद्यालंकार भवन मे सेहो कएल जा रहल छलए। नित्य कुकुरक कौर निकालैत, दैत एकटा स्ट्रीट डॉग तेना पोसा गेलनि जे बाद मे सौख सँ ओकरा दूध-भात, दूध-रोटी देबए लगलीह घरक धिया (हिनकर मौसी)। हुनका कने विशेष ममता ओहि स्ट्रीट डॉग पर। सभ बच्चाक स्वभाव सभ रंग होइते छै ने....सएह 'विद्यालंकार' जीक छओ गोट पुत्री आ दू गोट पुत्र मे उर्मिला नामक पुत्री विशेष सिनेह देखौलनि ओहि स्ट्रीट डॉग पर। ओकरा नित्य दूध-भात, दूध-रोटी आगाँ मे पड़ए लगलैक। संग दैत छलथिन सभदिन 'विद्यालंकार भवन' मे रहनिहार मामा जी। 'कौरा'क अतिरिक्त दुनू मामा-भगिनी ओहि स्ट्रीट डॉग के प्रेम सँ दिनक भोजन मे दूध-भात आ राति कऽ दूध-रोटी देबए लगलथिन। एक दिन दूध-भात देलथिन तऽ मुहो नै लगौलकनि ओ कुकुर। आ राति मे दूध-रोटी प्रेम सँ खा लेलकनि। पहिल बेर तऽ नै, मुदा पंद्रहम दिन जखन इएह प्रक्रिया दोहरौलक ओ धर्मात्मा कुकुर तखन गौर करैत गेलाह जे ई सभ एकादशी तिथि कऽ भात नहि खाइत अछि। एकादशी करैत अछि बुझाइए। पूर्व जन्मक कोनो भारी 'चूक'क कारणें एकरा 'श्वान-योनि' भेटलैक प्रायः। कुकुरक स्वामी भक्ति तऽ सर्वविदित अछिए। आ ई तऽ धर्मात्मे कुकुर छलाह, स्वामी भक्तिक एहन उदाहरण प्रस्तुत केलनि जे घरक लोक डेराइए गेल। एक बेर चोरक टीम घुसल विद्यालंकार भवन मे, पछुलका गेट सँ। से ई स्वामी भक्त कुकुर तेहन छड़पान छड़पलनि; चोरक गरदनिए धऽ लेलकनि। बाप-बाप कऽ कऽ पड़ाइत गेल। प्रात भेने पैर पकड़ि कऽ माफी माँगैत गेल। भगवान जानथि ई एकादशीक नियम पालन कएनिहार धर्मात्मा कुकुर श्रीकान्त ठाकुर 'विद्यालंकार' जीक पूर्व-जन्मक आत्मीय छलनि, सेवक छलनि आ कि हितैषी छलनि। ओहुना सभ बात मनुक्ख के बुझबा जोग होइतो कहाँ छै। छै कि नहि?
संपादकीय सूचना- विद्यालंकारजीसँ पहिने विदेहपर व्यासजीक कृतित्वपर कल्पनाजी लीखि रहल छथि एवं आब विद्यालंकारजीपर भऽ रहल अछि। पाठक व्यासजीपर प्रकाशित एखन धरिक सभ खंड निच्चा केर लिंकपर जा कऽ पढ़ि सकै छथि-
मैथिली साहित्यमे उपेन्द्र नाथ झा 'व्यास' एवं हुनक परिवारक योगदान-1
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