VIDEHA ISSN 2229-547X  ·  First Maithili Fortnightly eJournal  ·  Since 2000  ·  www.videha.co.in
विदेह — प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका
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विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

विदेह

Videha

प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका — First Maithili Fortnightly eJournal

विदेह नूतन अंक
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प्रमोद झा 'गोकुल'
पिरीतो(लघु एकांकी नाटिका)


दृश्य प्रथम

समय संध्याकालक। १४ १५ सालक छौंड़ा छौंड़ी सब हाथमे तिरंगा झंडा लेने जोर जोर सँ ' छात्र एकता जिंदाबाद! सीबीएसई मुर्दाबाद!! पेपर लीक बन्द करो! हम बच्चों को न्याय दो! न्याय दो!! इत्यादि नारा लगबैत मंच पर प्रवेश करैत अछि आ पुनः नारा लगबैत नेपथ्य में चल जाइत अछि। स्वर मुखरतर होइत मद्धिम भै जाइत छैक।रामबरन रिक्साक पैडिल पर पैडिल दैत घंटी टुन टूनबैत अपन झुग्गी बला घर पर अबैत अछि आ जोर जोर से रिक्साक घंटी टुनटुनब ' लगैत अछि।घंटीक आवाज सुनि घरवाली रानी आ बेटा मगन बाहर अबैत छैक।
रिक्साके एक कातमे ठाढ़ कय मधूरक पैकेट बेटाक हाथमे दैत निर्देशात्मक स्वरमे बजैत अछि -

रामबरन-रौ मगना छेँ रौ! मगनाऽऽऽ !!!
मगन --तोरे लग ते ठाढ़ छिअ हौ बाबू! देखबो नै करै छहक?
रामबरन - बुरिवसन्त नैहतन रे! तेँ चोर जकाँ पाछाँमे किए खड़ा छेँ?आगाँ आ ने!
मगन - हैया एलियह,कहह आब जे कहबाक छह!
रामबरन -ले ई महावीजीक परसादी छियौ! दुनू भाइ बहीन बाँटि खोटिके खालिहेँ आ हमरो दुनू बेकतीके बचौते दीहेँ ।
रानी -(ऐँठैत)कथीक खुशीमे महावीरजीके लड़ू भोग लगौलकैये से?
रामबरन -पिरितियाक परीच्छा नीक नहैंत खुशी खुशी समापत भ' गेलै तेँ कबूलने छलियै!
रानी -बड दिब केलकै। महावीरजी कहुना नीक नहैंत पास करा देथून छौंड़ीके।दिन राति एकठाँड़ क' देने छलै छौंड़ी पढ़ैक खातिर।
रामबरन -अच्छे ते ई कहौ जे प्रीतो छै कतऽ ? ओकरा नै देखै छियै!
रानी- ( माथ पर हाथ रखैत चिंतामे) जैन नै की भ' गेलैए छनमे छौंड़ीके? अखने फोन पर किओ किछ कहलकैए ओकरा कि तखनसे मुरघोस लगौने बैठल छै। कतबो किछ पुछलिये ते कुछो बोलबे नै करै छै।तनी इहे जा के पुछौ ने मगना बाबू !
रामबरन -अच्छे चलौ देखै छियै।
( सब बिदा होइत अछि। आगाँ आगाँ रामबरन तकर पाछाँ रानी आ ओकर पाछाँ मगन। झुग्गीमे जयवाक लेल मंच पर चकभौर लगबैत
मगन सँ कड़क आवाज मे रामवरन पूछैत छैक)-
रामबरन - कहूँ तूँ ते कुछ्छो नै ने कहलहीहे रौ मगना!!!
मगन - हम कुछ्छो नै कहलियैहे दिदियाके हौ बाबू!
रामबरन - (उच्चस्वर मे) तहन की भेलैहे जे एना केने छै?
मगन - से ओकरेसँ पूछि लहक! (किछ सोचि) साइत परीक्षामे कुछ्छो भेलैहे !
रामबरन -(अकचकैत) परिच्छामे की भेलै रौ? (पुनः अकानैत) हँ आइ मार्किटमे धियापुताक भाड़ी जुलूस देखने छलियै। सब जोर जोर से नारा लगबै छलै -सीबीएसई मुर्दाबाद! छात्र एकता जिन्दाबाद!! ( माथ पर वल दैत) आर किदन किदन ते कहै छलै •••••• हँ मोन पड़ल 'पेपर लिक लिक बन्न करो! चोरों को सजा दो!! आरो किदन किदन बोलै छलै।
मगन - एकर मतलब दिदियाक पेपर केन्सिल भ' गेलै!
रामबरन -शुभ शुभ बोल तहूँ !
मगन -तखन दिदियेसे पूछि लहक!
रामबरन - चलै जल्दी ! बात तखने फरीछ हेतै।
यवनिका पतन

दृश्य द्वितीय

स्थान -झुग्गीक भीतर। ढनमनैल वस्तु जात। खटुली पर बिछौन कयल। निचांमे पटिया बिछौल।ओकर कगनी पर दशवींक छात्रा प्रीतो मोन घोर घोर केने बैसलि भुइयाँ पर चीछ फाड़ि रहलि अछि आ मूड़ी डोला डोलाके ओकरा मेटाइयो रहल अछि।उजरल केश ओढ़नी अस्तव्यस्त आ आँखिमे भरल नोर ओकर मानसिक कथा सहजहिं व्यक्त कय रहल अछि।रामवरनक कोढ़ से देखि फाइट जाइत छैक।ओ दौड़िके बेटीके बेटीक मूहँ अपन दुनू हाथे उठाके पुछैत छैक --
रामबरन - की भोलौए तोरा जे एहेन भेख बनाके बैठल छेँ ?जत्ते दूरा तक पढ़बेँ से हम तोरा दुनू भाइ बहीनके पढ़ेबौ!! (कनैत अवरुद्ध गला सँ ) तोरा बापके बेटू किछ नै छौ। जनिते छेँ कोनाके गुजरबसेरा होइ छौ से। हँ तखन छौ मे छौ ई रिक्सा! देखै छिही ने ••••(इसारा करैत पुनः आत्मवल प्रदर्शन करैत) कोनो चिन्ता नै कर! कह की भेलौ? तोरा हमरे सप्पत!
( पिताक मार्मिक बात सुनि बेटी बापक गरदैन पकैरके कनैत बजैत अछि)
प्रीतो -हँ •••• हम सबटा बात बुझहै छियै हौ बाबू! कोन धरानी तों हमरा आरूके पढ़बै लिखबै छह ! से ककरोसे छिपल नै छै। तखन••••(रुकि जाइत अछि)
रामबरन - तखन की गै?
प्रीतो --पेपर लीक भ' गेलाक कारणे परीक्षा केन्सिल भ' गेलै (कनैत अछि)
रामबरन - आ धुर बताहि! ऐले तूँ चिन्ता बलौले करैछेँ ने! नोर पोछ आ बहादूर बन!फेनो पढ़ जमिके आ देखा दहीं दुनियाँके जे गरीवक बच्चामे कतेक दम होइ छै!(स्वगत आत्मविश्वासक प्रदर्शन पुनः प्रकाशमे) आँइ गै प्रीतो!एगो बात ते बुझबे नै केलियै। ई लिक लिक की होइ छै गै?
प्रीतो --लिक लिक नै हौ बाबू!
रामबरन - तहन की?
प्रीतो - पेपर लीक भ' गेलैये! (बिहुंसैत)
रामबरन - तैयो नै बुझहलियौ तोरा औरक ई अंरेजी बंरेजी!
प्रीतो - (माथ ठोकैत) नै बुझलहक!प्राइभेट इसकूल बला सब अपन अपन खास बच्चा लग तीन घंटा पहिनहिं पहुँचा देलकै पेपर।बस्स, एक कान दू कान आ वाट्सएप पर खेला भ' गेलै। आब बुझलहक!!
रामबरन - (चिंतित स्वर मे) बुझहलियै ते मुदा सरकार कुछ्छो नै कहलकै ओकरा आरूके?
प्रीतो -हँ जाँच भ' रहल छै, जे पकरेतै से जहल जेतै।
रामबरन - गरीवक बच्चा आरुक जीवनसे खेलवार केनिहारके इस्सर माफ नै करथीन।चल लैग जो बेटू फेनो अपन तैयारीमे।निसांस छोड़ैत बेटीक माथ पर हाथ फेरय लगैत अछि रामबरन।
‌‌। यवनिका पतन।

दृश्य तृतीय

स्थान -झुग्गीक बाहर।एकटा फोल्डिंग खाट आ दूटा प्लास्टिकक स्टूल।फोल्डिं पर रामबरन चितंग भेल पड़ल अछि।प्रीतो आ मगन हाथ पयर दबा रहल छै। बीयैन डोलबैत रानीक प्रवेश।
रानी -लौ पैहले चैह पीबिलौ,तहन जतबैत रहतै।
रामरन - ऐ ले एकरा डाह किए होइ छै? सूतै कला हमहीँ एकरा जैँत पीच देबै!
रानी - बेसी ठिठौली जुनि करौ! धिया पुता लगमे छैन से जेना बुझिते नै छथीन।
रामबरन -( जीह कुचैत) लाबौ चैह ,आ परसादी सेहो सब खूटे बाँटि लौ!
रानी --पहीले चैह ते पकड़ौ! लड़ू खाइये बेरमे लेतै (एतबा कहि भीतर जाय लगैत अछि कि रामबरन टोकार मारलकै)
रामबरन -खेनाइ बनि गेलै की?
रानी - हँ
रामबरन -की सब बनौलकैहे?
रानी - रोटी मौसरीक दालि आ अल्हुक चटनी!
रामबरन - नेमो आ हरियरका मिरचाइ रखने छै ने!
रानी -नेमो पियौज आ हरियरका मिरचाइ द'के तीसीक चटनी सेहो बनौने छियै!
रामबरन - एह!!! तहनते आइ ई भोज क' देलकै!
रानी - भोज एकरे कहै छै?
रामबरन - ते आर की? गरिबहाक असली भोज यैह भेलै ने!(सब खिलखिलाके हँसय लगैत अछि आ रानी कोनो सोचमे डूबि गेल)
रानी - (लगमे स्टूल पर बैसैत) एगो बात कहियै पिरीतो बाबू! ई बिगरतै नै ने!!
-रामबरन - कहौने! एकरा हम कहिया बिगरलियैहे से?
रानी- से ते नै तहन••••
रामबरन - की तहन? बोलौने निधोख!
रानी -एगो कूलर ल' लैतै कौहना किस्तो पर। पंखा से काम नै चलै छै।
रामबरन -हँ से ते लेबहि पड़तै।
रानी - परीच्छा सेहो प्रीतोक कपार पर रहिये गेलैए तैपरसे।
रामबरन -(दीर्घ श्वास छोड़ैत) से ते छैहे। पढ़तै फेनो जमिके की! जल्दीये कौहना डेट निकैल दौ सरकार
प्रीतो - अही दश दिनुका भीतर मे निकलतै!
रामबरन - कोनो चिंता नै! गदाधारी सबहक बेड़ा पार करथीन।
यवनिका पतन

दृश्य चतुर्थ

घरमे एक कात खटिया पर रामबरन त' दोसर कात निचामे पटिया पर रानी प्रीतो आ मगन पड़ल अछि।रानी बम्मा हाथ गाल पर टेकने दहिना हाथे बीयैन डोलाके गरमी भगा रहल अछि।
रानी -जरलाहाके गर्मीयों ऐ बिरदा हद्दे कऽ देलकै।धैन कही मलिकिनीक देलहा मटकाके जे भैर छाक पानियों पिबै छी।
रामबरन - साँचमे टंकीक पानिते जनु खौलके इनहोर बनल रहै छै।
रानी - टंकीक बात करै छै। घरक पानि ते बड़ैकके आगि बनल रहै छै।
रामबरन+आ पंखाके ने देखौ केहेन गरम हवा फेकै छै!जीनाइ मोश्किल भ' गेलैये गरीबक।
रानी -चलौ कैलखिना कूलर आनियेँ लै छी!
प्रीतो -चलै चल जे हेतै से हेतै आनियेँली दुनूटा!
रामबरन - दुनूटाऽऽऽ!!!
प्रीतो - हँ हौ! कूलरक संग एकटा छोटकी फ्रीज सेहो!
रामबरन - आ, पाइ कोनाके चुकेबही एते रास?
प्रीतो - तामे हमरो परीक्षाते भैये गेल रहतै । दू चैरगो ट्यूशन पकैर लेबै। सबटा भार तोरे पर नै रहतह।मिला जुलाके सधा देबै।
रामबरन - आ तोहर पढ़ाइ लिखाइ?
प्रीतो --जहन रिजल्ट निकलतै तहनने हौ! बीचमे देह धूनिके तोरा समहारि देबह आ बादमे देखल जेतै।
रामबरन -देखल की जेतै? तोरा अपन पढ़ाइ पर खाली ध्यान देबाक छौ!आ मगनाके सेहो समहारैक छौ!देह धुनैले ते हम दुनू परानी छीहे!
प्रीतो - हँ हौ! तोरा हमरा पर बिसबास नै होइ छह?
रामबरन - तोरे दुनू भाइ बहीन पर ते आब हमर आसमान टिकल अछि। तूँ सभ कामयाब भेलेँ कि हमरा सब किछ भेट गेल।
प्रीतो -- से हेतै हौ! मोन छोट नै करह ! सबटा दुख भगवान कि हमरे सबके देताह?
रामबरन -देखही •••• मैलकक की किरपा होइ छै!(ऊपर निहारैत अछि)
रानी - सुतबो करतै कि दुनू बाप बेटी अहिना फदर फदर करैत रहतै? देखौ मगना के फोंफ कटै छै।
रामबरन - बेस ते सूतै जाइ जो जेना तेना। गरमीते असाधे छै।
‌‌पटाक्षेप (यवनिका पतन)
पात्र परिचय
पुरुष पात्र 1 रामबरन (रिक्शा चालक अधेर वयसक)
2-मगन - आठवींक छात्र, रामवरनक बेटा
स्त्री पात्र-
रानी - करीब चालिसेक उमर, रामबरनक पत्नी
प्रीतो - दशवींक छात्रा ,करीब पन्द्रहेक उमर
नारा लगौनिहार छात्र छात्रा पाँच से दश । उम्र आठ से पंद्ह वर्षक।
सबहक हाथमे तिरंगा झंडा।

-प्रमोद झा 'गोकुल', दीप,मधुवनी (बिहार), फोन -९८७१७७९८५१
 

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