प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका

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लालदेव कामत

अक्षय पात्रके रचनाकार


मधुबनी जिलांतर्गत सकरी थानाके वीरसाइर गामक स्व० गरीबनाथ पासवान आ स्व० फुलेश्वरी देवीजीके घर ९ मई १९५७ केँ श्री झौली पासवान जीके जन्म भेलनि। ओ दादा स्व० ठकाई पासवान आ दादी स्व० रामबोल देवी 'क बढ़ दुलारू एवम् नाना स्व० फेकन पासवान ओ नानी स्व० सुनरी देवी ' के तँ बूझू खेलौना रहथि। बालक झौलीजीक शिक्षा - दीक्षा समय सँ ग्रामीण क्षेत्रमे भेलनि ,स्नातक पण्डौल कालेज सँ कयलाह हेन। सन् २००१ ई० सँ प्रभात संस्था वर्दीवन सँ जुड़िकय महादलित (मुसहर) समाजके धीयापुता कें पढ़ाबैत- लिखाबैत जागरुकता करैत आबि रहलाह अछि। विगत २००३-०५ ई० मेँ राष्ट्रीय दलित मानवाधिकार अभियानक निरीक्षण काज कयल। हिन्दीके बाल पत्रिका ' खिलते फूल " के प्रकाशनमे प्रभात संस्था केँ सक्रिय सहयोग देलनि। कारितास इण्डिया - दिल्ली सँ रोशनी कार्यक्रम केर तहत् मुसहर समुदायके वालिका सभमे शैक्षिक जागरूकता बढेबामे अहर्निश सेवा कयलनि। हिनक रचनात्मक गतिविधिके देखैत रमेश रंजनजी 'हमर मिथिला ' फिल्ममे पिताक भुमिका लेल अवसर देलथिन। वर्तमान समयमे सरकारी विद्यालय केर कमजोर बच्चा सबके स्वतंत्र रूपेँ पढाबैत सराहनीय काज कय रहलाह अछि। बिहार सरकारके राजभाषा विभाग 'क त्रिमासिक पत्रिकामे रचना आओर नौएडा सँ प्रकाशित 'पाखी' पत्रिकामे हिनक कविता छपैल छन्हि। हिन्दी - मैथिली साहित्य आन्दोलनमे नियमित रूपेँ विभिन्न कार्यक्रममे संलग्न रहैत छथि। जाहि लगनशिलता केँ देखि दिल्लीक भारतीय दलित साहित्य अकादमी मार्च २०२१ मे" अम्बेडकर फेलोशिप " सम्मान प्रदान केने रहैन। श्री पासवान जीक मैथिली मातृभाषामे माटिक सुगंध,अक्षय पात्र पोथी प्रकाशित भेल अछि। ओ पहिले हिन्दी भाषामे अपन रचनाधर्मिता निमाहैत छलाह, जे माँ का आंचल, सारथी तथा बाल साहित्यमे आसमां के तारे, इंद्रधनुष,कब आयेंगे चंदा मामा रुपेँ जगजियार भेल रहथि। ई कहि सकैत छी जे हुनक दर्जनों हिन्दी पोथी लेल पाण्डुलिपि छैन से पुस्तक रूपेँ बहरेबाक मदैतगारक वाट जोहि रहल छैक। मैथिली कथा गोष्ठी ' सगर राति दीप जरय' के अवसर पर अपन मैथिली काव्य संग्रह हमरा भेँट केलनि, ताहि मादे किछु चर्चा करैत छी।
सद्यप्रकाशित अक्षय पात्र मैथिलीमे छिड़ियाएल काव्यक संग्रहित १२३ पृष्टक पोथी थीक ,जाहिक दाम दूसय पचास टाका राखल गेल छैक। एहिमे ७४ गोट नव कविता अछि जे पल्लवी प्रकाशन निर्मली सँ सन् २०२३ म प्रकाशित भेल अछि। प्रसिद्ध साहित्यकार गजेन्द्र ठाकुर जी हिनका पोथीके महिमा मण्डन कयने छथि। स्वयं कविवर झौली पासवान जी पोथीक वाबत अपन बातमे काव्य सृजन केर अनेको पहलू पर विस्तार सँ आधुनिक साहित्य केर परिपेक्ष्य मे गप्प कयलनि हेन। हिनक काव्य सौष्ठव बढ़ दिव्य होय छन्हि। समकालीन कविता केर पाठक केँ हिनक कविताक भाव स्पष्ट बुझाइत छन्हि। रामायण ग्रन्थके तरह आर्ष काव्य आओर महाभारत ग्रन्थ केर तरह अस्थि काव्य पढ़बाक नवपिढ़िकेँ फूर्सत नहि रहने कविजी एकपनियां - दू पनियां अकविता रचि पाठक वर्ग बीच प्रशंसात्मक काज अवडेरलाह अछि। वर्तमान समयमे गद्य कविता धूम मेने अछि।पद्य जे छंद आ दोहा रूपेँ रचल जाई, तकर जगह आब फकरा आ गीत ल' लेने छैक,जे मंचीय प्रस्तुति सँ थपरी बटोरैत छैक। परंच अपन भाव सोझ रूपेँ जाहि विधामे राखि समाजकेँ उत्प्रेरित करैत होए,ताहिमे नव कविता प्रमुखता सँ स्थान बनौलक हेन। तेँ हिनक कविता अपील करैत देखाईत आओत। प्रजातंत्रमे शिक्षा अहम छैक,आ से ओम्हरे विकासकाज ऐ माध्यम होती।एम्हरका समाजमे शिक्षाक कमी सँ सामाजिक मुख्य धारामे पछुआयल समाज अधिगम स्तर धरि नहिं पहुँच पौलनि अछि। तेँ काव्य केर माध्यम सँ अपन सम्यक दृष्टिकोण रखबामे समर्थ भेलाह अछि। पाँति द्रष्टव्य अछि -:
...... प्रजातंत्रक रीढ़ जे शिक्षा
तेकरो हालत नीक कहाँ
शिक्षा बँटल दू भागमे
समताक दर्शन बनत केना ..…....!
समाजमे आजादी'क ७५ म् अमृत भारत वर्ष म हम सब छी,मुदा संविधानके स्वीकृत लक्ष्य -समानताक अधिकार आईधरि नहिं भेलैक। एकोटा अफसर आ राजनेता अपना बच्चाकेँ सरकारी पाठशालामे पढबैत नहिं छथि। प्राईवेट कान्वेंट स्कूलमे नहिं तँ विदेशक महंग स्कूलमे पढबैत देखाईत छथि। कवि पाँति गढ़ैत छथि-: भलहिं जाति आ धर्म अनेक
देशमे शिक्षा होअए एक।
तखने स्वर- मे - स्वर मिलत
मानवता केर बल मिलत ।।
मनुखमे मनुखता रहने आ ममत्व रहने ,सबहक प्रति सद्भावना रखने सँ प्रशंसा भेटैत छैक। कदाचित जौं अपना विशेष स्वर्थमे लोक रहैत अछि तँ दस लोकीमे देखार होईछ। एक दिन तँ ऐ रंगमंच सँ लोक आँखि मुनि सदा लेल चलिए जाईछ। तँ एतेक हाँईं- हांईं कथिक ? कवि समरूपता केर पक्षधर छथि। हिनक सिरजल पाँति देखू -:
...... सदा बहार ई रंग मंच अछि
एक अबैत एक जाइत अछि।
बड़ पुरान ई सिलसिला अछि
भू लोकक अमिट कथा अछि।।......
कोनू देशमे श्रम शक्तिक महौत सब दिन सँ छैक । परंच किछ अतिशय बुधियार लोक शारिरीक श्रम सँ दूरस्थ आ मानसिक काज सँ लगीच बनौने रहैछ,ताहूमे चलकपनी धरि खूब करैत काज सुतारैत य। से सरिपहुँ अँखिगर लोक अखियाइस लैत छैक। ताहि टीश केँ अपन कवित्व भावे कविवर महोदय शिक्षक दिवस पर एक काव्यात्मक पोथी लिखि ख्याति अर्जित कयलाह अछि। जोन - बोनिहार 'क विवशताक संग- संग देशमे पसरल अंधश्रद्धा, दलित- दमित उत्पीड़न ,धर्मान्धता आओर वर्गभेद जहन समस्या पर चिन्तित देखेलाह हेन। एक दिश देशमे वैज्ञानिक नव- नव अविष्कार सँ अभिमानमे छथि तँ दोसर दिस जादू टोना आ झार फूंक सन समाजमे अभिशाप सँ व्यथीत सेहो छथि। १४ सालसँ कम उमेरक बच्चा लेल सर्वशिक्षा अभियान आ बालबाड़ी- आंगनबाड़ी केंद्र तथा अनौपचारिक शिक्षा धरि चलल,मुदा शिक्षाके स्तर कमतर रहने बीचेमे छात्र - छात्रा वर्ग सँ तीजन भ' जाईछ। ई एकटा यक्ष प्रश्न भऽ समक्ष ठाढ़ छैक। ऐ संदर्भ मेँ झौली बाबूकेँ कविता फुराईत छैक। अपन संवेदना अनेकों विषय पर कलम चलाबैत व्यक्त कयलाह अछि। समाजके बीच धार्मिक उन्माद आ साम्प्रदायिक तनाउ बढैत देख सुधारवादी रूपरेखा आनबाक ले आर्तनाद सँ अजस्र कवित रसवाला बहेने छथि। हिनक आशु कविक पहचानके कियो प्रांजल कवि कहि दिअ तँ अनसुहांत लागत। पर्यावरण संतुलन आ संरक्षण लेल जल जंगल में बचेबाक लेल अपना कविता सँ पाठककेँ उत्प्रेरित करैत छथि। केन्द्रीय कविता 'अक्षय पात्र' म बढ़ पकठोस बात कहबामे कवि श्री पासवान जी समर्थ भेलाह अछि। ई पोथी सागरमे गागर भरैक काज केलक हेन। ऐ सँ मैथिली साहित्य केँ अक्षय भंडार भरल आ ऐ अक्षय पात्र सँ हीरा चुनि- चुनि अहाँ अपने आपमे गौरव बोध करब से विसबास जगैत य। पोथिमे मुद्रण / टंकण ठाम - ठाम अशुद्ध पाएल गेल अछि।

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