
बद्रीनाथ राय 'अमात्य'
कुटील कषाइ
सोलकन बाबू यौ! लड़ियौ अपने अधिकारक लड़ाइ।
फुसिञाहिके दन्तकथा गढ़ि,ठकलक कुटिल कषाइ।।
सोलकन बाबू यौ!लड़ियौ अतने अधिकारक लड़ाइ।
दंतकथाके दाँतके तोड़ू ,तखने हाएत भलाइ।
सोलकन बाबूयौ!लड़ियौ अपने अधिकारक लड़ाइ।
संविधान सत्य जीवनके रगड़ू दियासलाइ।
सोलकन बाबू यौ!लड़ियौ अपने अधिकारक लड़ाइ।
दूष्ट देवता दंतकथा गढ़ि, सबटा खेलक मलाइ।
सोलकन बाबू यौ!लड़ियौ अपने अधिकारक लड़ाइ।
लड़लेपर अधिकार भेटत आब,नञि देत कुटील कषाइ।
सोलकन बाबू यौ!लड़ियौ अपने अधिकारक लड़ाइ।
पाखण्डक पछुआरपर मारु सबदिन केलक कुटाइ।
सोलकन बाबू यौ!लड़ियौ अपने अधिकारक लड़ाइ।
-बद्रीनाथ राय 'अमात्य', ग्राम पोस्ट करमौली, भाया कलुआही, जिला मधुबनी बिहार, 6205190859
अपन मंतव्य editorial.staff.videha@zohomail.in पर पठाउ।
