कन्या भ्रूण हत्या, प्रकृति के साथ खिलवार
पिछला छुट्टीमे एक सालपर हम गाम गेल छलहुँ। जहिया गाम पहुँचलहुँ ओकर दोसरे दिन पता चलल की हमर बचपनक दोस्तक बहुत जोर मोन ख़राब छनि ! आर ओ अस्पतालमे भरती छथि ! खबर जहिना हम सुनलहुँ अस्पतालक लेल चलि देलहुँ ! हमरा संग हमर पत्नी सेहो चलि देलीह, अस्पताल पहुंचला पर पता चलल जे कुनू चिंताक बात नै सब ठीक ठाक अछि ! एक घंटाक बाद हुनका (हमर दोस्तकेँ) छुट्टी मिल जेतनि, बहुत दिनक बाद अस्पताल आयल छलहुँ, इच्छा भेल कनी चारू दिस घुमि - फिरि ली। मनमे अस्पतालक लेल बहुत जिज्ञासा छलए ! हम आर हमर पत्नी जहिना दोस्तक वार्डसँ बाहर निकललहुँ, हमर नज़रि अपन चचेरा भैया - भाभी पर पड़ल, अचानक हुनका सभकेँ अस्पतालमे देखिकेँ हम चौक गेलहुँ ! हमर नज़र एकाएक भाभीक उदास, कनमुँह चेहरा पर परल .....पुछलियनि की बात ... मुदा ओ किछु जबाब नञि देलीह। हमर पत्नी कातमे बजा कए हुनकर पीड़ा सुनलन्हि ! दुबारा पुछलासँ भाभी अपन पीड़ा नञि रोकि सकलीह, हुनकर पीड़ा हुनकर आँखिसँ छलकि उठलनि, पता चलल जे दू गोट कन्याक जन्मक बाद आब तेसर बेर फेरसँ कन्याकेँ नञि बर्दाश्त करैक चेतावनी भैया हुनका पहिने द् चुकलकिन-ए ....पता चलल गर्भ परिक्षण लेल भैया भाभीकेँ अस्पताल अनने छथि ! गर्भमे पोसा रहल बच्चाक प्रति पिताक खौफनाक इरादासँ उपजल भयक भाव भाभीक चेहरा पर साफ - साफ देख्अलहुँ ! बादमे हमरा आर हमर पत्नी केँ कतेक बुझेलापर भैया भाभीकेँ वापस घर लए गेलखिन ! संयोगवश अगला संतानक रूपमे हुनका बालकक प्राप्ति भेलनि ....
ओना भ्रूण परिक्षण प्रतिबंधित अछि आर सरकार एकरा लेल बाकायदा कानूनो बनेने छथि ! मुदा ई की ? लागैत अछि पिछला दरवाजाक संस्कृति अस्पतालों के नञि छोड़ने अछि, तखने तँ भैया बहुत आसानीसँ भाभीकेँ गर्भ परीक्षण करबाबए लेल चलि देने छलथि। हम तँ कहए छी चाहे सरकार लाखो कानून बनबथि, लाखो कड़ासँ कड़ा सजा तय करथि लेकिन जा तक हम सब स्वयं अपना तरफसँ कुनू कदम नञि उठायब ई कानूनक हेब नञि हएबक समान अछि ! आइ तक भ्रष्ट्राचार, बालश्रम, शोषणक विरुधो सरकार बहुत कानून लागू केलथि मुदा कि समाजमे एकर रोकथाम भs सकल ? नञि ! आर यदि अपने ई नञि हेबाक कारणक पता करब तँ पायब कि शायद हम खुद कतहु ने कतहु कुनू न कुनू प्रकारे एकर दोषी छी ! हम सब परिस्थितिक संग कुनू तरहक समझौता करबाक वजाय ओकरा सदा बदलबाक फेरमे नए रहैत छलहुँ चाहे ओकरा लेल हमरा सभ के कुनू तरहक हथकंडा कियेक नञि अपनाबए परए .... हम सब चुकय नञि छी ! हम तँ पूछे छी जे कि कारण अछि जे लड़कीक जन्म भेला पर आइयो मूह सिकोरल जाइत अछि ? शायद हुनकर परवरिश, शिक्षा, विवाह आदिमे आबै वाला तमाम मुश्किलक कारण एहि तरहक व्यवहार कएल जाइत अछि ! मुदा कि लड़काक जन्म भेनेसँ ई तमाम समस्या समाप्त भs जाइत अछि ? लड़कोकेँ तँ परवरिश करए परए-ए ? हुनकरो शिक्षा,नौकरीक लेल दर-दर भटकए पड़ैत अछि ! आर विवाह ........!
यदि एहि गतिसँ कन्या भ्रूण हत्या होइत रहत तँ बूझि लिअ जे सब लड़काकेँ कुंआरे रहए पड़त ! उदाहरण स्वरूप अपने हरियाणामे लड़कीक संख्यामे लगातार दर्ज कएल गेल कमी देख सकैत छी, हरियाणामे विवाह लेल लड़की नञि भेटए छनि। ओहि ठामक लोकनीकेँ दोसर राज्यमे लड़कीक तलाश करए पड़ैत छनि .....
कनी सोचु अगर पूरा देशमे ईएह स्थिति भs जाएत तँ की होएत ?
हम नीक जेकाँ जनैत छी जे अपने एहि बातकेँ ध्यानमे नञि राखब आर यदि राखबो करब तँ दोसर केँ उदाहरण देबाक लेल ! लेकिन कि अपने स्वयं कन्या भ्रूण हत्या रोकएमे दोसरकेँ जागरूक करब ? अपनेकेँ नञि लागैत अछि जे प्रकृति द्वारा निर्धारित जीवनकेँ सुचारू रूपसँ चलबै लेल एहि गाड़ीक दुनु पहियाक समान रूपसँ आवश्यक अछि ! आर कन्या भ्रूण हत्या यानी कि प्रकृतिक संग खिलवाड़ अछि ! एहि खिलवाड़केँ रोकए लेल हमरा सभकेँ एकजुट हेबए परत आर एतबे नञि एहि मानसिकतोकेँ बदलए पड़त कि वंशबेल खाली आर खाली लड़के चलेता, तखने हम सही रूपामे आधुनिक कहाएब ....