2. कोना बचत मिथिलाक स्मिता ?- ओमप्रकाश झा
ओमप्रकाश झा, गाम, विजइ, जिला-मधुबनी।
कोना बचत मिथिलाक स्मिता ?
आई जहन अपना सबहक चहुतरफ़ा विकास भ रहल अछि त हम सब अपन महत्वांक्षा के पाबि के अत्यधिक प्रसन्न भ रहल छी,हेबाको चाही। मुदा कि महत्वाकांक्षा के रथ पर सवार भ कअ हम सब कतेक मगरुर नहि भ गेल छी जे अपन स्मिता अपना स कोसो दूर पाछु छुटि रहल अछि। मुदा तकरा समेतनिहार कियो नहि अछि। आय अपना अहिठामक युवा वर्ग अत्यधिक दिग भ्रमित भ रहल अछि,ओकरा कियो सहि मार्ग दर्शक नहि भेट पाबि रहल अछि। अखुनका समय कतेको पाबनि तिहार क महिना आबि गेल अछि आ कतेको गाम मे दुर्गा पूजा के अवसर पर सास्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कैल जायत अछि मुदा किछु वर्ष पूर्व मे चलु-आइ सअ आलो पहिले हर गाम मे युवक सब नाटक खेलाय छलाह,महिनोतक रामलिला ले आयोहन होयत छल,ओ सब आय कतह चलि गेल छथि। कि आर्केस्ट्रा आ परोसी (तवायफ़) के नाच मे ओ सब हरा गेल छथि। परोसजी के कार्यक्रम इ असर पड़ैत अछि जे मंदिरक कार्यकर्ता सब सेहो एकर मजा उठाबअ लागैत अछि। इमहर मौका पाबि कुकुर,बिलाड़ि मैया के प्रतिमा के सेवा मे लागि जाइया। देखने हैब जे कुकुर मुर्ती के चाटि रहल अछि। उमहर हम सब अपन तीन पुस्तक (पुरुखा) संग माने बाप- बेटा आ पोता समेत बाईजी पर पाई लुटाबय के अवसर के नहि गवांबैत छी। अधिकतर गोटे अहि स अवगत होयब।
दोसर कतअ जा रहल अछि अपन संस्कार? हयउ,आब शायद कतौ महिनो तक चलैबला रामलिलाक तम्बु गाम मे देखायत होयत? हम अपन छोट सनक अनुभव अपने संग बांटअ चाहब। पहिले रामलीला के टोली के कियो माला (मने एक दिनक भोजन) उठेनिहार नहि होइ,माने इ जे मात्र पेटे पर जे टीम सबहक मनोरंजनक वास्ते तैयार रहैत छल,ओकरा अपन समाज नकारि देलक मुदा आखन प्रायःहर छोट पैघ शहर अतह तक कि देशक राजधानी मे दुर्गा पूजा के अवसर पर लाखो आदमी रामलीलाक खुब लुफ़्त उठबैत छैथ। कतो कतो तअ रामलीला देखै के लेल टिकट सेहो लागैत अछि,कि हम झूठ बाजि रहल छी। एना मे दु टा गप्प जे हमरा स्पष्ट भेल-पहिल जे लोक के ओहि प्रति ओ रुझान नहि रहलन्हि जे कि बाईजी के नाच मे वा कौआल-कौआली मे जे कि राति भरि सबके गरिया क चलि जाइया आ हजारो आदमी मंदिरक आस पास ततबाक गोत गोबर कअ दैत छथि जे अगिला किछु महिना तक उमहर नहिये जाय मे कुशल बुझैत छी। अहि स गामक कलाक ह्रास खूब पैघ स्तर पर भेल अछि,सब गोटे बुझिति अंजान छी।
तेसर आ गंभीर गप्प इ जे समाज मे जे भाई चारा प्य््रव मे छल कि ओ खत्म भ गेल अछि। कि अपन समाज ततेक गरीब तअ नहि भ गेल अछि जे आहिठम दस गोटे के भोजन करेनाय आय कठिन भ गेल अछि। एकर एकटा छोट सनक उदाहरण हम देबअ चाहैत छी जे जौं अंहा सब मे स किछु आदमी दिल्ली-बंबई स कमा क मास दिनक लेल गाम जायत होय तअ अनुभव करैत होयब जे गाम मे बीतल समय के संगे संग अपनेक मेंटिनेन्स पर होय वला खर्च मे कटौति सेहो सबगोटे व्यक्तीगत अनुभव के गहराई स देखु। अखन बस अतेबैक।
इति
मूल विदेह अंक / Original issue
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