मिथिला विभूति पं मोदानन्द झा-प्रोफेसर रत्नेश्वर मिश्र
पूर्णियाँ जिलाक पंजीकार परिवारमे उत्पन्न पं. मोदानन्द झा आधुनिकताक कसौटीपर अनुदार मुदा पारम्परिकताक कसौटीपर उदार, विद्वान आ विद्वत्ताक सत्संगति लेल आतुर, विलक्षण प्रतिभासँ सम्पन्न व्युत्पन्नमतित्व वाला मिथिलाक अत्यन्त सम्मानित पंजीकार छलाह। पंजीशास्त्र हुनका पूर्णतः अधिगत छलनि आ ओ पंजीसँ जुड़ल ककरहु कोनो जिज्ञासाक समाधान लेल सदैव तत्पर रहैत छलाह। ओ वस्तुतः मिथिलाक विभूति छलाह जनिकर स्मृतिक संरक्षणार्थ जे किछु कयल जायत से थोड़ होयत।
पूर्णियाँ जिलाक रसाढ़ ग्रामक रहनिहार पं मोदानन्द झा पड़वे महेन्द्रपुर मूलक ब्राह्मण छलाह आओर विस्तृत कृषि-भूमिक कारणे बादमे शिवनगर ग्राममे रहय लगलाह। रसाढ़ आ शिवनगर दुनू धर्मपुर परगनान्तर्गत अवस्थित अछि। १९१४ ई.मे उत्पन्न ओ अपन माता-पिताक एक मात्र पुत्र छलाह। परम्परासँ हुनकर परिवार पंजीकारहिक छलनि आ हुनक पिता भिखिया झा ई व्यवसाय करितो रहथिन। ओ मुदा नीक कृषक रहथि आ हुनकर बेसी समय ओहिमे लगनि। हुनका २०० एकड़सँ बेशीक जोत रहनि। ओ अपने प्रायः शिक्षितो नहियें जकाँ रहथि, मुदा अपन पुत्रकेँ नीकसँ नीक शिक्षा दिआयब हुनकर अभीष्ट रहनि। मोदानन्द झा स्वयं बुझबा जोगरक भेलापर अपन कौलिक व्यवसाय आ प्रतिष्ठाक पुनरुद्धार करबा लेल कृतसंकल्प भेलाह।
अपन बाल्यावस्थाक संस्मरण बजबाक क्रममे ओ प्रायः बाजथि जे ओ बड़ए प्रसन्नता आ आह्लादक समय छल। ओ माता-पिताक दुलरुआ त छलाहे, काका-काकी तथा आन सम्बन्धी आ कुटुम्बी जनक स्नेह सेहो हुनका प्रचुर प्राप्त छलनि। ओ दैनिक कृत्य आ विद्यालयसँ बाँचल समयमे माछ मारथि आ ई बहुत दिन धरि हुनकर प्रिय मनोरंजन रहनि। ओ एक बेर बहुत गम्भीर रूपेँ बीमार पड़लाह। वस्तुतः तहिया पूर्णियाँ जिलामे मलेरिया आ कालाजार महामारीक रूपमे पसरल छल। आ कहबी छलैक जे “जहर खाउ ने माहुर खाउ, मरैक होइ तऽ पूर्णियाँ जाउ”। हुनकर माता एक सम्पन्न कुलक महिला रहथिन आ ओ अपन पुत्रक रुग्णताक समाप्ति लेल किछु करबा लेल तत्पर छलीह। हुनकहि जिदपर २०० रुपया पीस दऽ कलकत्तासँ डाक्टर मँगाओल गेल। चारि पंडित अहर्निश हुनकर रुग्णावस्थामे दुर्गा सप्तशती आ गीताक पाठ करैत रहलाह। हुनकर माता स्वयं ताधरि अन्न ग्रहण नहि कयलथिन जा हुनकर पुत्र पथ्य ग्रहण करबा जोगरक नहि भेलनि। कलकत्तासँ आयल डॉक्टरक तऽ अन्य विदाइ कैले गेलनि, पाठ केनिहार ब्राह्मणो लोकनिक आ पुत्रक आरोग्य-लाभक उपलक्ष्यमे गाम-टोलक लोक सभकेँ भोज सेहो खोआओल गेल। मुदा पिताक आकांक्षा छलनि पुत्रकेँ विद्वान् देखबाक आ विद्यार्थीक लेल गण्य करक-चेष्टा, वक ध्यान, श्वान-निद्रा तथा अल्पाहारी आदि लक्षणसँ जन्मतः परिपूर्ण मोदानन्द झा लेल समय अयलनि गृह-त्यागी होयबाक।
(अगिला अंकमे)