जितिया पावनि-मनोज झा "मुक्ति"
मकर सँक्रान्ति अर्थात तीला सकराँइत-मनोज झा "मुक्ति"
मकर सँक्रान्ति अर्थात तीला सकराइँत माघ महिनाक पहिल दिन, प्रायः माघ मासक १ गतेके मनाओल जाइत अछि । मकर सँक्रान्ति माघभरि लोक भोरमे स्नान करैत अछि । माघ मासक सँक्रान्तिक दिन लोक उडीदक दालि, चाउर,तिलबा, चुल्लौर आदि दान करैत अछि । धनवान लोकसब गोदान, उनीवस्त्र, कम्बल, सोन आदि सेहो दान कायल करैछथि । एहि दिनमे खिच्चरि खएबाक चलन चलि आएल अछि । आजुक दिन भगवान भगवतीके चुल्लौर, तिलबा चढाओल आइत अछि । बहुतो ठाम दिनमें चूडा,दही,चुल्लौर आ रातिमे भोजन काएल जाइत अछि । आ किछु ठाम चुल्लौर, तिलबा, चूडा,दही जलपान कऽ दूपहरक भोजन खिच्चरि सँ सँम्पन्न होइत अछि ।
मिथिलाञ्चलमे भेरे स्नान कऽ कऽ तीलक डाँठ अर्थात तीलाठीक आगि तापल करैत छथि । जौं तीलक डाँठ उपलब्ध नई होमय सकल त आगिमे तीलक किछु दाना धऽ आगि तापि परम्पराके निर्वाह कायल करैछथि । ताइकेबाद अपना सँ पैघ या कहु श्रेष्ठद्धारा चाउर, तील आ गुँड मिलाबिकऽ बनाओलगेल तील खुवाबिक अपना प्रतिके कर्तव्यबोध कराओल जाइत अछि, जकरा “तील बहव” कहल जाइत अछि ।
ई पावनि सँ आयु, आरोग्य, सम्पति, रुप, गुणक प्राप्ति होएबाक सँगहि सब तरहक पापसँ मुक्ति भेटबाक विश्वास कायल जाइत अछि । माघ स्नानके बृहत मन्त्र सेहो होइत अछि जे एहि प्रकारक अछि
ॐ माघमासमिमं पुण्यं स्नाम्यहं देव माधव ।
तीर्थस्यास्थ जले नित्यं प्रदीदा भगवन हरे ।
दु ःख दरिद्रयनाशाय श्रीविष्णोस्तोषणय च ।
प्रातः स्नानं करोम्यद्य माघे पाप प्रणाशनम् ।
मकरस्थे रवौ माघे गोविन्दाच्युत ।
स्नानेनानेन मे देव यथोक्त फदो भव ।
दिवाकर जगन्नथ प्रभाकर नमोऽस्तुते ।
परिपूर्ण कुरुष्वेदं माघस्नानं महाव्रतम् ।
ओना वैज्ञानिक दृष्टिकोणे गुँड खएला सँ शरीरमे गर्मी अएबाक कारणे जाढ मासमे एही पर्वके अति उपयोगी मानल जाइत अछि ।
जितिया पावनि- मनोज झा "मुक्ति"
मिथिलामे बहुतो पावनि बड श्रद्धापूर्वक मनाओल जाइत अछि । मिथिलाके साँस्कृतिक रुपसँ धन्निक कहऽजायबामे एहि पावनितिहार सबहक बहुत पैघ महत्व रहल अछि । ओना सब पावनि सबहक अपन हटले महत्व रहल करैत अछि, सब पावनिके अपन अपन प्रयोजन सेहो ओतबे विशेष भेल करैत छैक ।
मिथिलामे मनाओल जाएबला एकगोट महत्वपूर्ण पावनि सबमे सँ जितिया पर्वके अपने तरहक महत्व रहल अछि । मिथिलाञ्चलमे प्रचलित अछि जे केओ पुरुष कोनहुँ दूर्घटनासँ बाँचिगेल त कहल जाइत अछि,माय षडजितिया केने छलै ताहिसँ बाँचि गेलै । ई वाक्य स्पष्ट करैत अछि जे जितिया पावनि एकटा बेटाकेलेल हूनक मायद्धारा कायल जाइत अछि ।
भविष्य पुराणमे सेहो उल्लेख अछि जे पुत्रक दिर्घायुक कामनासँ ई व्रत कायल जाइत अछि । जितिया पावनि, कृष्ण अष्टमीक दुनू साँझ उपवास कऽ भोरमे तिथि बदललापर पारणा करबाक विधान रहल अछि । मिथिलाञ्चलमे जितिया व्रतसँ एक दिन पूर्व अहिवात स्त्रिसब माछ मरुआ अरबधिकऽ खाएल करैत छथि । तहिना पावनि केनिहार विधवा लाकनि अर्वा अर्वाइन खाइत छथि । भिनसरमे जौं अष्टमी नहि पडल रहैत छैक त चूडा दही ल ओंगठन करैत छथि । ताएँ बुझाइया ई कहबी बनल छई, जितिया पाबनि बड ध्यान रखैत छथि । एहि तिथिमे योग विशेष भेलापर षडजितिया मनाओल जाइत अछि, जकरा बहुत पैघ मानल जाइत अछि । जाहि दिनमे प्रदोष कालमे अष्टमी पडैत छैक ओह दिन व्रत होइत अछि, जौं दू दिन प्रदोष कालमे अष्टमी पडैत अछि त खोसर दिन जितिया पावनि व्रत करबाक लोकाचार व्याप्त अछि । जाहिबेर उदय कालमे अष्टमी पडैत अछि तहिया व्रत काएल जाइत अछि आ नवमीमे दोसर दिन पारणा कएल जाइत अछि ।
अष्टमी जाहि दिन पडैत अछि ताहिदिन व्रत कयनिहार जाहि ठाम स्नान करैत छथि( पोखरि,नदी या इनारपर ) ओकर प्राँगणमे पूवमुँहे ठाढ भऽ तामक अर्घामे मन्त्र पढिकऽ सूर्य भगवानके अर्घ दैत छथि, एवं व्रतक सँकल्प लइछथि । सँकल्प कऽ भरिदिन व्रत रहि साँझमे गायक गोबर सँ नीपि आँगनकेँ शुद्ध कऽ एकटा खधिया खुनि पोखरीक निर्माण कायल जाइत अछि । पोखरीक मोहारपर एकटा पाकडिक ठाढि आनि गारि देल जाइत अछि, गाछक डाढिपर गोबर माटिक चिल्ह राखिदेल जाइत अछि । गिदरनीक आकृति बनाबिकऽ डाढिक नीचामे राखि देल जाइत अछि । तकरा लगेमे जलसँ भरल कलश राखल जाइत अछि ।कलशमे कुशक जिमूतवाहनक मूर्तिक निर्माण कऽ राखल जाइत अछि । ताइकेवाद समय अनुसारक फलफूलके नैवेद्यक व्यवस्था ककऽ राखल जाइत अछि । नैवेद्यमे केरावक आकुरी आ खीराके राखब आवश्यक मानल जाइत अछि । सब सामग्रीक ओरियाओन केलाकबाद व्रति महिला सब पूजा करैत छथि ।
जितिया पावनिके बहुत कठीन पावनि मानलगेल अछि । ई पावनि केनिहार व्रति महिलासब पानि त नहिंए पिवैत छथि, एतऽधरि कि ओसब खढोधरि नई खोंटैत छथि ।
धीरेन्द्र प्रेमर्षि (१९६७- )मैथिली भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति आदि विभिन्न क्षेत्रक काजमे समान रूपेँ निरन्तर सक्रिय व्यक्तिक रूपमे चिन्हल जाइत छथि धीरेन्द्र प्रेमर्षि। वि.सं.२०२४ साल भादब १८ गते सिरहा जिलाक गोविन्दपुर-१, बस्तीपुर गाममे जन्म लेनिहार प्रेमर्षिक पूर्ण नाम धीरेन्द्र झा छियनि। सरल आ सुस्पष्ट भाषा-शैलीमे लिखनिहार प्रेमर्षि कथा, कविताक अतिरिक्त लेख, निबन्ध, अनुवाद आ पत्रकारिताक माध्यमसँ मैथिली आ नेपाली दुनू भाषाक क्षेत्रमे सुपरिचित छथि। नेपालक स्कूली कक्षा १,२,३,४,९ आ १०क ऐच्छिक मैथिली तथा १० कक्षाक ऐच्छिक हिन्दी विषयक पाठ्यपुस्तकक लेखन सेहो कएने छथि। साहित्यिक ग्रन्थमे हिनक एक सम्पादित आ एक अनूदित कृति प्रकाशित छनि। प्रेमर्षि लेखनक अतिरिक्त सङ्गीत, अभिनय आ समाचार-वाचन क्षेत्रसँ सेहो सम्बद्ध छथि। नेपालक पहिल मैथिली टेलिफिल्म मिथिलाक व्यथा आ ऐतिहासिक मैथिली टेलिश्रृङ्खला महाकवि विद्यापति सहित अनेको नाटकमे अभिनय आ निर्देशन कऽ चुकल प्रेमर्षिकेँ नेपालसँ पहिलबेर मैथिली गीतक कैसेट कलियुगी दुनिया निकालबाक श्रेय सेहो जाइत छनि। हिनक स्वर सङ्गीतमे आधा दर्जनसँ अधिक कैसेट एलबम बाहर भऽ चुकल अछि। कान्तिपुरसँ हेल्लो मिथिला कार्यक्रम प्रस्तुत कर्ता जोड़ी रूपा-धीरेन्द्रक धीरेन्द्रक अबाज गामक बच्चा-बच्चा चिन्हैत अछि। “पल्लव” मैथिली साहित्यिक पत्रिका आ “समाज” मैथिली सामाजिक पत्रिकाक सम्पादन।