विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मिथिलाक लुप्तप्राय गीत: गर्भसँ छठिहार धरि

हृदय नारायण झा · 2009-02-01 · अंक 27

कला आ संगीत शिक्षा
हृदय नारायण झा, आकाशवाणीक बी हाइग्रेड कलाकार। परम्परागत योगक शिक्षा प्राप्त।
मिथिलाक लुप्तप्राय गीत

गर्भ सॅ छठिहार धरि
सोहर आ खेलउना पर आधारित संस्कार गीतक बानगी

मिथिलाक गौरवमयी श्रेष्ठ संस्कृति एवं परम्परा केॅ सुरक्षित रखबाक श्रेय मैथिली लोकगीत कें अछि।
परम्पराक सूत्रधार पूर्वजलोकनि मैथिल समाजक जन सामान्य कें अपन मूल संस्कृति ओ परंपराक प्रति उदार बनाबए लेल तदनुकूल लोकगीतक परंपरा विकसित कएलनि । कालान्तर में अनेकों विद्वान गीतकार ने अपन कृति मे मैथिली लोकगीतक भण्डार के अत्यन्त समृ( बनओलनि । देश ,काल और परिस्थिति में परिवर्तनक संग संग लोकगीतक रचना में सेहो विविधता आएल । मुदा आदर्श आचार पर आधारित लोकगीतक परंपरा लोककण्ठ में स्थान पबइत रहल जे आइयो मिथिलाक आचार आदर्श सॅ परिचय करबइत अछि ।
सर्वविदित अछि जेे लोकगीतों में कृत्रिमतानहि होइत अछि । समाज मे प्रचलित सामान्य बेवहारक अभिव्यक्ति होइत अछि । मैथिली लोकगीतक अवलोकन सॅ मिथिलाक सभ्यता ,संस्कृति , रीति रिवाज ,पर्वत्योहार ,कला ,साहित्य सामाजिक उन्नति आ मानवीय आकांक्षाक यथार्थ रूप आइयो अनुभव करबा योग्य अछि । मिथिला में जन्म सॅ लऽ कऽ विवाह धरि सब बिध बेवहार गीतक संग सम्पन्न होइत अछि ।
बारहो मास मे प्रचलित पर्व त्योहार व्रत पूजन आदि परंपराक लेल अलग अलग गीत अछि । )तुक अनुसार मैथिली लोकगीतक अपन विशेषता रहल अछि मिथिला में । विवाह ओ उपनयन आदि संस्कारक गीत में खास प्रकार के रागक प्रयोग भेल अछि जे अन्य़त्र नहि देखल जाइछ । धर्म प्रधान क्षेत्र हेबाक कारणें मिथिला में प्रातः जागरण सेहो
पराती लोकगीत सॅ होइत रहल अछि । जहॉ तक मैथिली लोकगीतक प्रकारक प्रश्न अछि अनेकों प्रकारक लोकगीत आइयो लोककंठ में रचल बसलन अछि। पुत्रकामना ,जन्म सॅ संबंधित सामान्य व्यवहार एवं लोकाचारक सहज अभिव्यक्ति सोहर , खेलउना , छठिहार , पीपर पिलाई , आॅख अॅजाई , बधैया , आदि नाम सॅ प्रचलित लोकगीत सभ मे अछि । एहि मे लौकिक एवं भक्ति प्रधान विषय पर आधारित गीतक समावेश अछि । एक भक्त हृदय स्त्रीक पुत्रकामना व्यक्त करइत सोहर अछि -
पॉच गाछ रोपल आप पॉचे गाछे इमली रे । ललना तइयो ने सोभय बगीचबा एकहि चनन बिनु रे ।।
नहिरा में छथि पॉच भइया आओर पॉच भातिज रे । ललना तइयो ने भावए नइहरबा एकहि अमा बिनु रे ।।
ससुरा में छथि पॉच जाउत आओर पॉच जइधी रे । ललना एक नहि भाबए सासुरबा अपन होरिला बिनु रे ।।
गंगा पइसी नहइतहुॅ हरिवंश सुनितहुॅ रे । ललना सूति उठि लगितहुॅ गोर कि दैव सहाय हएत रे ।।
ललना एकहि पुत्र दैव दीतथि जिउरा जुड़बितहुॅ रे ।।
बच्चा जन्मक समय प्रसव पीड़ा सॅ विह्वल स्त्रीक मनोदशाक वर्णन सेहो स्वाभाविक लगइत अछि । एहि प्रसंगक सोहर अछि है इस प्रसंग के सोहर गीत में । प्रसव पीड़ाक वेदना मे स्त्री अपन सासु ,जेठानी आ ननदियो कें स्वार्थी आ कठोर बूझऽ लगैत अछि आओर पुत्र प्राप्तिक बाद सभ कष्ट कंे बिसरि जाइत अछि । पुत्र जन्मक खुशी मे ओकरा सभक बेवहार नीक लगइत अछि । एहि भाव कें व्यक्त करइत सोहर अछि -
अपन माए मोरा रहितइ , मुुंहवां निहारितइ ,दरद बॉटि लीतइ हो ।
ललना पिया जी के माए निरमोहिया होरिला होरिला करइ हो ।।
अपन भाउज मोरा रहितथि डॉड़ लागि बइसतथि हो ।
ललना पिया जी के भाउज निरमोहिया भानस भानस करइ हो ।।
आधा राति बीतल पहर राति आरो भिनसर राति हो ।
ललना होइते भिनसर पह फाटल होरिला जनम लेल रे ।।
ललना पुत्र फल पाओल से देखि सब दुःख बिसरल रे ।।
मिथिला मे जन्मक प्रथम उत्सव छठिहार होइत अछि । एहि उत्सव मे ननदि आ भाउजक बीच हास परिहासक जे स्वाभाविक रूप मिथिला मे अछि तकर अभिव्यक्ति खेलउना और बधइया गीत मे अछि । ननदि आ भाउजक बीच मधुर संबंध कें व्यक्त करइत एक खेलउना मे छठिहारक अवसर पर ननदि कंे बजाबऽ लेल पति सॅ आग्रह करइत भावव्यक्त होइत अछि -
पिया तोर गोर लागूॅ ननदी मॅगा दे ।
जब रे ननदिया नगर बीच आएल । पूरी मिठाई बड्र्र्र्ऱा मीठ लागे ।। पिया तोर गोर लागूॅ
जब रे ननदिया दुअरे बीच आएल । बिछिया बाजे बड़ा मीठ लागे ।। पिया तोर गोर लागूॅ
जब रे ननदिया आॅगन बीच आएल । ननदी के बोली बड़ा मीठ लागे ।। पिया तोर गोर लागूॅ
जब रे ननदिया सोइरी बीच आएल । बेसरि मॉगे बड़ा तीत लागे ।। पिया तोर गोर लागूॅ ननदी मॅगा दे ।।
आओर भाउज आ ननदिक बीच हास परिहास एहनो होइत अछि जाहि मे ननदि इनामक मांग करइत अछि आ भाउज ओहि मांग के अपना तर्क सॅ टारबाक कोशिश करइत अछि ।
ननदि- सब गहना में नथिया बड़ा महराजा हो राज ।।
भाउज- नथिया ने लेइ ननदिया हो महराजा हो राज ।।
;ननदि बच्चा कंे उठाकऽ चलि दैत अछि । तखन भाउज कहइत अछि द्ध
लय गेलइ बबुआ उठाय हो महराजा हो राज ।
दए जाहु ननदी बउआ हमार महराजा हो राज ।।
लए जाहु भइया उठाय हो महाराजा हो राज ।
ननदि- हम लेबइ भइया के राज हो महाराजा हो राज ।।
भाउज- जौं तोहें लेब ननदी भइया के राज महाराजा हो राज ।
की लेतइ बउआ हमार हो महाराजा हो राज ।।
भाउजक तर्कक समक्ष ननदि हारि जाइत अछि तखन ननदि बधैया गबइत अधिकार पूर्वक भाउज सॅ कहैत अछि -
बधइया हम लेबउ भउजी हे ।।
अॅउठी आ मुनरी हम नहि लेबइ। जड़ाउदार कंगना भउजी हे ।। बधइया
बाली आ कनफूल हम नहि लेबइ । मीनादार नथिया भउजी हे ।। बधइया
बाजू बिजउठा हम नहि लेबइ । घॅुघरूदार पायल भउजी हे ।। बधइया
रेसम के सरिया हम नहि लेबइ । लहरदार चुनरी भउजी हे ।। बधइया हम लेबइ भउजी हे ।।

मुदा आब एहि सब तरहक गीतक परंपरा लुप्त प्राय अछि तें इ गीत सभ सेहो लुप्त भऽ रहल अछि । एहि सभ गीतक परंपरा लुप्त भेला सॅ लौकिक परंपरागत संबंधक मधुरता कोन रूप मे प्रभावित भऽ रहल अछि विचारणीय अछि संगहि इहो विचारणीय अछि जे ओहि आदर्श कें बचाबऽ के विकल्प कोना खोजल जाय ।
बालानां कृते- 1. मध्य-प्रदेश यात्रा आ 2. देवीजी- ज्योति झा चौधरी
1. मध्य प्रदेश यात्रा
तेसर दिन :
25 दिसम्बर 1991 :
आहिके हमर सबहक यात्रा प्रातः साढ़े नौ बजे प्रारम्भ भेल जखन हमसब नर्मदा एक्सप्रेस सऽ पेण्ड्रारोड दिस विदा भेलहुं।अहिबेर हमसब अपन गतिविधि कम कऽ गाड़ीक गतिविधि पर विशेष ध्यान देने रही।हमर सबहक गाड़ी उस्लापुर (10:05 a.m.) घुटकू (10:15 a.m.) कलमीटर(10:30 a.m.) करगीरोड(10:40 a.m). बेलगहना(11:00 a.m). टेमनमाड़ा(11:15 a.m). बेलगहना(10:40 a.m.) होंगसा (11:35 a.m. सऽ होइत पेण्ड्रारोड पहुंचल। ओत सऽ हमसब तुरन्त अमरकण्टक लेल रवाना भऽ गेलहुं।लगभग सवा दू बजे हमसब अमरकण्टक पहुंचलहुं।ओतय हमसब पर्यटक अतिथिशालामे रूकलहुं।भोजनोपरान्त हमर सबहक पहिल पड़ाव छल ‘माइ की बगिया’। ई जगह नर्मदा नद तथा सोनभद्रा नदीक उद्गम स्थान अछि।
माई की बगिया के भ्रमण मे सबसऽ पहिने विवेकानन्द सेवाश्रम देखलहुं।अकर स्थापना 1983 इर्सवीमे भेल छल।अत साधुसब गेरूआ वस्त्र धारण केने विराजमान छलैथ।ओतऽ सऽ कनिके आगू बढ़लापर नर्मदामूड़ा पहुंचलहुं जतय एकटा छोट सन जलकुण्ड छल। यैह कुण्ड नर्मदा नदके मूल उद्गम स्थान छल। अत नर्मदा अवतरित भऽ पुनश्च भूमिगत भऽ जाइत छैथ। ई कुण्डके नर्मदाक बाल्यकाल मानल गेल अछि।अहिठाम ‘गुलवकावली’ नामक बूटी भेटैत छै जे की आयुर्वेद विज्ञानमे अमूल्य छै आर मेकार पर्वतके अतिरिक्‍त मात्र अतै भेटै छै।तकर बाद श्री महातीर्थ सोन उद्गम कुण्ड महन्तजी श्री 108 बालकेश्वर गिरि के तपोभूमि अवस्थित छै।तकर बाद सोन आऽ भद्रा नदीक संगम कुण्ड छै जे भूमिगत भेलाक बाद कनिके दूर पर विशाल झरनाक रूप लऽ लैत छै्र। अहि विशाल जलप्रपातक सुन्दरताक वर्णन केनाई असम्भव लागि रहल अछि।मानव निर्मित वाटर फाउण्टेन अकर सामने बहुत तुच्छ अछि। शहर मे अतेक वास्तविक एवम् मनोरम प्राकृतिक दृष्य कहां देखऽ भेटैत छै।
ऊंच ऊंच वृक्ष श्रृंखलाक बीच कच्चा सड़क के पार करैत हमर सबहक टाेली आब करीब तीन फीट ऊंच घासक मैदान मे घुसल।फेर सऽ गाछक झुण्ड आयल।गाछ पर चढ़ि कऽ सब फोटो सेहो खिंचेलक लेकिन हमरा लग कैमरा नहिं छल से हमेशा पछतावा रहत।एक वृताकार पथ स होएत हमसब ‘जय मां नर्मदे हर’ पहुंचलहुं।अहि ठाम एकटा नर्मदा कुण्ड छै जे एक टा छोट पोखरि के आकारक छै। कहल गेल छै जे नर्मदा अपन बाल्यकालके बाद अहिठाम पुनः अवतरित होएत छथि।अत अनेको देवी देवताक मन्दिर छैन जेनाकि गोरखनाथ मन्दिर श्री रोहिणी देवी मन्दिर श्री दशावतार मंदिर नर्मदेश्वर महादेव मन्दिर श्री गाैरीशंकर मंदिर श्री सूर्यनारायण मंदिर श्री ग्यारह रुद्र मंदिर सिद्धेश्वर मंदिर इत्‍यादि।अहि सबहक बाद हम सब घुरि एलहुं अपन स्थान पर।पता चलल जे आहि हम सब करीब 7 किलाेमीटर पैरे चललहुं। ई ज्ञात भेलासऽ हमर सबहक थकान आर बढ़ि गेल।तकर बाद फेर वैह संग मे खेलनाइ़ अंताक्षरी़ चुटकुला़ गीत नाद आ सबसऽ नीक छल माउथआर्गन सुननाई।हमरा सबके खुजल मैदान भेटल छल ताहिमे कैम्प फायर के मजा सेहो उठेलहुं।
2.देवीजी : सरस्वती पूजा
वसंत पंचमी के शुभ दिन आबि रहल छल।सब विद्यार्थी गौँवा सबसऽ चंदा जमा कऽ पूजाक तैयारी केलैथ। अहि पूजा लेल विद्यालयके प्रांगण सऽ उत्तम आर कोन स्थान भऽ सकैत छल।सब प्राधानाध्यापक सऽ अनुमति लऽ कऽ सरस्वती जीक प्रातिमा अनलक। पूजाक तैयारी मे देवीजी विद्यार्थी सबहक संगे सतत् उपस्थित एवम् कार्यरत रहैथ।पुरोहित के बजाओल गेल।
पूर्ण विर्धिविधान सऽ देवी सरस्वतीजीक पूजा अर्चना भेल। अहि सबमे पुरोहित सबके सरस्वतीजीक महिमा बतेलखिन। ओ कहलखिनजे माता सरस्वती विद्याके देवी छथि।ई श्वेतवस्त्र धारण करैत छथि जे सात्‍विकताक प्रातीक अछि।हिनकर हाथमे वीणा रहैत छनि तथा हंस पक्षी हिनकर सवारी छैन।हिनकर चारिटा हाथ चारि वेदक प्रातीक मानल गेल अछि आर ई चारिटा वेद मे साहित्‍यके तीनू विधा पद्य़ गद्य तथा संगीत निहित अछि।एक हाथमे पुस्तक गद्यक प्रातीक़ दोसर हाथमे स्फटिक माला पद्यक प्रातीक़ तेसर हाथमे वीणा संगीतक द्याेतक तथा चारिम हाथमे पवित्र जल सऽ भरल कलश साहित्‍यक तीनू विधाके शुद्धताक प्रातीक मानल गेल अछि।सरस्वती देवीके सेब फल सबसऽ प्रिय छैन से मानल गेल अछि तथा हिनका मधुक नैवेद्य चढ़ायल जायत छैन। मधुके ज्ञानक सम्पूर्णताक प्रातीक मानल गेल अछि। फेर मूर्त्तिके विसर्जन सेहो कैल गेल।
अहि प्राकारे सब अपन बौद्धिक विकास के लेल विद्याक देवीके पूजा केलैथ।आबै वला समयमे विविध प्राकारक प्रातियोगिता आबैवला छल से सब देवी सरस्वती सऽ आशीर्वाद लऽ आगामी कार्यक्रमक तैयारी मे लागि गेलैथ।
बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।
Top of Form
Input:(कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Roman or Mithilakshara)
Language: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Roman, Mithilakshara and Phonetic Roman.)
English to Maithili
Maithili to English
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विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.
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Suggested citation: हृदय नारायण झा. “मिथिलाक लुप्तप्राय गीत: गर्भसँ छठिहार धरि.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 27, 2009-02-01. https://www.videha.co.in/research/2009/27/मिथिलाक-लुप्तप्राय-गीत-गर्भसँ-छठिहार-धरि.htm

मूल विदेह अंक / Original issue