विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मातृभाषा: बम्बईमे ‘विदेह’ पत्रिका आ मैथिली फिल्मक संस्मरण

डॉ. कल्पना मणिकान्त मिश्र · 2009-05-15 · अंक 34

डा. कल्पना मणिकान्त मिश्र,पिता डा शिव कुमार झा,गाम राटी,सासुर-गजहारा। विगत ३०-३२ बरस सँ मुम्बईवासी।मेडिकल शिक्षा जे.जे.होस्पीट्ल/ग्रान्ट मेडिकल कॉलेज सँ सम्पन्न कए स्त्री-रोग विशेषज्ञ रुपमे कार्यरत।
मातृभाषा
मातृभाषाक प्रेम,बहुत किछ पढल आ सुनल अछि। अहूँ सब सुनने होयब कतेक बेर मुदा स्वयम अनुभव करबाक अवसर किछुयेक लोक के भेटैत छन्हि।हम सब बम्बई आएले रही। ओना तँ एहि गप्पक एक युग सँ बेसी भए गेल मुदा बिसरबाक हिम्मत नहि करि सकैत छी। आर कियैक बिसरु? महानगरीक चकाचौन्धमे हरायल रही,कतौउ भटकि नहि जाइ से चिन्ता रहए। १९८० दशक मे संजय गाँधीक एकटा योजना आएल छल, बेरोजगार ग्राजुएट लेल बैंकसँ किछु सुविधा २०,००० रुपया देबए लेल। हमहुँ बेरोजगार डाक्टर रही। आवेदन केलहुँ तँ लोन तुरते भेट गेल। मुदा आब ओहि पैसाक हम की करु? अपन रोजगार जेना दवाईखाना,कोनो छोटसन घर आदि भविष्यमे अपन क्लीनिक खोलि सकी, जे कि ओहि समयमे अति सुलभ आर सम्भव छल, आब तँ सपना रहि गेल। ओही पाइसँ निवेश करि हम अपन भविष्य सुरक्षित करि सकैत छ्लहुँ, गहना-गुड़िया बना अपन सोख-सेहनता पूरा करि सकैत छलहुँ वा भारत भ्रमण करि सकै छलहुँ। मुदा नहि ! हमर पतिक (डा. मणिकान्त मिश्र) इच्छा छ्लन्हि जे मैथिली भाषाक पत्रिका निकाली। हम दुनु गोटे मिली क ’विदेह’ नामक मैथिली पत्रिकाक शुरुआत केलहुँ। पत्रिका तँ छपए मुदा के कीनत आर के पढत ई बड पैघ समस्या छ्ल। कोनाहु करि कए अपन घरक पूँजी लगा कए २ बरख तँ पत्रिका चलेलहुँ। फ़ेर हमरा सभकेँ बन्द करए पडल किएक तँ दुनु गोटे डाक्टरी व्यवसाय मे लागल रही, घर-अस्पताल-पारिवारिक झन्झट सम्हारैत बड मुश्किल छ्ल। बम्बई मे नबे- नबे रही।
तहूमे एतेक दुस्साहस कोनो साधारण आदमी नहि करि सकैत अछि सिर्फ आर सिर्फ डा मणिकान्त मिश्रा करि सकैत छ्लाह। किएक तँ मैथिलीक प्रति हुनका जुनूनी लगाव छ्लन्हि। बम्बईक आपाधापी भरल जीवन एवम स्वास्थ्यक उतार-चढाव किछु हुनकर मैथिली प्रेमक उत्साह केँ कम नहि कए सकलन्हि आर बीस-बाईस बरखक पश्चात ओ अपन सबटा पूँजी शरीर-समांग समेत मैथिलीक फिल्म "आउ पिया हमर नगरी"बनौलनि। फिल्म बड सुन्दर बनलै, अहाँ सभ देखने होएब। यदि नहि तँ एक बेर अवश्य देखी। फिल्म बनाबए मे जे कष्ट आर अनुभव भेल से हम एखन वर्णन नहि करि सकै छी। आर कखनो।।।।!
मुदा एहिसब प्रकरण मे माँ मैथिली अपन लायक पुत्र सँ हरदम लेल बिछुडि गेली। अछि कोनो मात्रभाषा भक्त-पुत्र जे अपन माँ-मैथिलीक हृदयक पीडाक अनुभुति करि हुनका लेल अपन सब किछु समर्पित करि दिअए।
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www.google.com/accounts/o8/id?id=AItOawnfdWWeKghW5vw2SndwaYt0nMuZlEe_-H0 said...
Didi ,
Bahut neek lagal paedh ka ...ahaan neek Doctor aa didi chi se ta bujhal chalaik ......Ati Uttam likhal aich !!!
Ahina likho !!!
Binny
Reply05/29/2009 at 06:24 AM
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Dr. Dileep Kumar said...
Respected Mam,
I know you because, I am from 'Pilakhwar' and I met you in my villege when you were in pilakhwar for making your film "Aau piya hamar nagari". Very nice film, and more than that, I just inspired by you n your husband (Dr. Manikant mishra)affection & love with mithila culture n language. I am respecting you from my inner heart for doing all such thing to promote mithila culture, tradition, & language.
With regard:
Dr. Dileep Kumar ( Sree Chitra Inst., Trivandrum).
dr.dileep08@gmail.com
+91 9633463050.
Reply05/25/2009 at 03:00 PM
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सुशांत झा said...
मिथिला और मैथिलीके उत्थान के लेल एखनों कतेको लोक लागल छथि। लेकिन दुर्भाग्य के गप्प जे नवका पीढ़ी अपन भाषा सं कटि रहल अछि। आ ई मैथिलिए संगे नहि..बल्कि सब भाषा संगे भ रहल अछि। हमसब अंग्रेजी आ हिंन्दी के भाषाई साम्राज्यवाद के शिकार भ रहल छी। एकर कोनो रास्ता नहि सूझि रहल अछि सिवाय अई बात के जे कम स कम अपन घर में त हमरालोकनि अप्पन भाषा बाजी। नहि त एकटा दिन एहन आयत जे जेना जेना शहरीकरण बढ़ल जायत, हमर भाषा खतम भेल जायत। अपन भाषा बजनाई हीनता नहि, स्वाभिमान के प्रतीक थिक।
Reply05/22/2009 at 01:31 PM
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vivekanand jha said...
दाय
हम तऽ एतबे कहब जे प्रेम छलन्हि
आ ओ हम सब एखनॊ देखि सकैत छी
एहिना बहुतॊ लॊक छथि जे
मैथिली लेल मरैत-जीवैत छथि
एहन लॊकक संख्या ओना हरदम कमे हॊइत छैक
प्रेमक निर्वाह करऽ वला कम आ सतत श्रद्धेय हॊइत छथि
Reply05/17/2009 at 04:12 PM
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अंशुमाला सिंह said...
विदेह अहाँ आ अहाँक पति शुरू कएने रहथि से देखि नीक लागल। एहि विदेहमे अहाँक संस्मरण आ ई जानि जे आउ पिया हमर नगरी अहाँक पति बनेने छलाह से सुखद, कारण ई फिल्म हम देखने छी। अपन पतिक फोटो सेहो एहि आलेखक संग दी आ हुनकर संग बिताओल अपन स्मरण राखी से आग्रह।
Reply05/15/2009 at 09:22 PM
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ज्योति वत्स said...
videha 30 sal bad dekhi ahank prasannata ahak photo aa aalekh me dekhai paral,
ahan se sabh ank me rachna aabay aa ham sabh dekhi tahi aasha sang.
Reply05/15/2009 at 09:19 PM

Suggested citation: डॉ. कल्पना मणिकान्त मिश्र. “मातृभाषा: बम्बईमे ‘विदेह’ पत्रिका आ मैथिली फिल्मक संस्मरण.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 34, 2009-05-15. https://www.videha.co.in/research/2009/34/मातृभाषा-बम्बईमे-विदेह-पत्रिका-आ-मैथिली-फिल्मक-संस्मरण.htm

मूल विदेह अंक / Original issue