फील्ड-वर्कपर आधारित खिस्सा सीत-बसंत
-गजेन्द्र ठाकुर(गाम,मेहथ, भाया-झंझारपुर,जिला-मधुबनी) विशेष सहयोग श्री केशव महतो (बहादुरगंज, जिला किशनगंज, बिहार)
एहि क्षेत्रकार्यक सूचक श्री केशव महतो सीत बसंतक फील्डवर्कमे विशेष सहयोगक कारण एहि प्रबन्धक सह-लेखक छथि।सीत बसंतक कथाक कैक टा विभिन्न रूप पाओल गेल आ ओहि सभक विवरण यथास्थान देल गेल अछि। समाज आ संस्कृतिकेँ बुझबामे लोक कथाक बड्ड महत्व अछि, मुदा बिना फील्ड-वर्क कएने लिखल लोककथा अपन उद्देश्य प्राप्तिमे असमर्थ रहैत अछि। श्री सुभाषचन्द्र यादवजीक हम सेहो आभारी छी जिनकर एहि विषयक आलेख (फील्डवर्क आ लोककथापर) एकटा सेमीनारमे सुनलाक बाद हम आर तन्मयतासँ एहि कार्यमे लागि गेलहुँ। एहि क्षेत्रकार्यमे आधुनिक फील्डवर्क तकनीक केर उपयोग कएल गेल आ सहभागिता, प्रेक्षण, साक्षात्कार,प्रश्नावलीक इत्यादिक आधारपर ई लोककथा निर्मित भेल अछि। लोककथा-कविताक कोनो स्वरूपमे कोनो परिवर्त्तन अवैज्ञानिक अछि आ तकर ध्यान एतए राखल गेल अछि ।
मणीपुर नगरक राजा महेश्वर सिंह छलाह।
ओ बड्ड प्रतापी राजा छलाह। ओ बड्ड निकेनासँ राज्य चला रहल छलाह।
किछु दिनुका बाद ओहि राजाकेँ दू टा बेटा जन्म लेलक।
ओकर रानी सेहो बड्ड सुशील आ स्वाभिमानी छलीह।
एक बेरुका गप अछि।
रानी अपन महलमे रहैत छलीह आ बहुत दिनसँ ओहि महलमे दू टा पौरकी चिड़ै खोता बना कए रहैत छल। एक दिन ओ अपन खोतामे दू टा अंडा देलक। अंडासँ दू टा बच्चा बहार भेल। एक दिन अनचोक्केमे ओहि बच्चा सभक माए मरि गेल। तकर बाद पौरकी सभकेँ बड्ड कष्ट होमए लगलैक। ओकर बाप किछु दिनुका बाद एकटा बोनसँ एकटा पौरकी संग बियाह कए अनलक। तकर बाद दू-चारि दिन कोनो तरहेँ बीतल। तकर बाद एक दिन पौरकी ओहि दुनू बच्चाकेँ खेनाइ खुअएला काल मुँहमे काँट धऽ देलक। ओ दुनू बच्चा ओही काल मरि गेल। मरलाक बाद खोतासँ दुनू बच्चाकेँ लोलसँ धकेल कऽ नीचाँ खसा देलक। ओहि समय रानी महलमे छलीह आ बच्चा सभकेँ खसबैत ओ देखलन्हि। ओही दिनसँ रानीकेँ शंका भऽ गेलन्हि आ सभ दिन हुनका चिन्ता घेरि लेलकन्हि।
राजाकेँ रानी कहलन्हि -– हे राजा। देखू। अपना महलमे दू टा पौरकी रहैत रहए। ओ दू टा बच्चा देलक। बच्चाक माए मरि गेल। तकर बाद ओ दोसर बियाहि कए अनलक। दू चारि दिनुका बाद ओ दुनू बच्चाकेँ मारि देलक। से हे राजा, कतहु हमहूँ मरि जाइ तँ अहाँ दोसर बियाह कए लेब तखन हमरो दुनू बच्चाक ईएह हाल ने भऽ जाए।
राजा बाजल- यै रानी। एखन अहाँ जीवित छी, तखन एहि गपक अहाँ किएक चिन्ता कए रहल छी।
रानी बजलीह - नहि राजा। यदि हम मरि गेलहुँ तँ अहाँ बियाह तँ नहि कए लेब?
राजा उत्तर देलक – नहि । हम दोसर बियाह नहि करब।
ई कहि राजा अपन दरबज्जामे आपस चलि गेल।
ओही दिनसँ रानी दुखित रहए लगलीह आ अनचोक्के एक दिन मरि गेलीह।
आब एहि गपकेँ लए राजा बड्ड चिन्तामे पड़ि गेल। आब दुनू भाए सीत आ बसन्त सेहो दिक्कतमे पड़ि गेलाह।
राजाकेँ राजाक खबासिनी, मन्त्री, मुंशी आ मारते रास लोक सभ बुझाबए लागल।
राजासँ कहए लगलाह- राजा यदि अहाँ बियाह नहि करैत छी तखन एहि दुनू बच्चाक की दशा होएत। ने एकरा सभक खेनाइक कोनो ठेकान रहत आ नहिये पढ़ाइक। ताहि द्वारे अहाँ एकटा बियाह करू।
एहि तरहेँ बुझओलापर राजा बाजल - ठीक अछि। जखन अहाँ सभक यैह विचार अछि तखन जाऊ , कोनो गरीबक लड़की भेटत तँ हम ओकरा संग बियाह कए लेब।
एहि तरहेँ राजाक सभटा गप बुझि-गुणि मुन्शी दीवान सभ क्यो लड़की ताकए लगलाह। एकटा लड़की राजाक नगरमे भेटल। ओ लड़की महागरीबक बेटी छलीह। राजा शुभलग्न बना कए ओहि लड़कीकेँ बियाह कए आनि लेलक। किछु दिन धरि ओ लड़की घरमे रहलीह। किछु दिनुका बाद ओकर ममता ओहि दुनू भाएपर कम होमए लागल। दुनू भाए स्कूलसँ पढ़ि कए घर आबथि आ अपन दरबज्जापर गेन्द लए खेलाइमे लागि जाथि। एक दिन अनचोक्केमे गेन्द आँगनमे जा कए खसि पड़ल।
ओहि समयमे ओकर सभक सतमाए आँगनमे छलीह। गेन्द खसलाक संग ओ गेन्दकेँ उठा कए अपन कोरामे राखि लेलन्हि।ओ दुनू भाए गेन्द तकैत आँगनमे अएलाह आ कहलन्हि जे माए गेन्द हमरा सभकेँ दए दिअ। हम दुनू भाए खेला रहल छी। माँ कहलखिन्ह जे हमरा लग गेन्द नहि अछि, अहाँ सभ चलि जाऊ। गेन्दकेँ दुनू भाए मायक कोरामे देखलन्हि। फेर कहलन्हि - माँ हमरा सभकेँ गेन्द दिअ। हम सभ खेलाएब। एहि तरहेँ दुनू भाए मँगैत-मँगैत माँक कोरासँ गेन्द लए लेलन्हि । गेन्द लऽ लेलाक बाद रानीक हृदयमे बड्ड तामस अएलैक। रानी तामसे भेर भेल कोचपर आबि पड़ि रहलीह आ खेनाइ-पिनाइ त्यागि देलन्हि। खबासिनी सभ बुझा कए थाकि गेलीह जे रानी चलू, हमरा सभ खा ली। मुदा रानी कोनो उत्तर नहि देलन्हि। ओ कहलन्हि जे आब हम मरि जाएब। एतेक गप सुनि खबासिनी राजा लग जा कए कहलक जे रानी बड्ड दुखित छथि। आब बचबा योग्य नहि छथि। अहाँ जा कए देखू। राजा एतेक गप सुनि कए अपन महलमे गेलाह आ रानीसँ पुछलन्हि। रानी कहलन्हि जे तोहर एहन हालत कोना भेलह जल्दी बताबह।
रानी कहलन्हि-अहाँ हमरासँ पुछैत छी तँ पहिने अहाँ हमरासँ सत करू तँ हम कहब। नहि तँ हम मरि जाएब। राजा किछु नहि सोचलन्हि। ओ रानीक संग सत कए लेलन्हि। सत केलाक बाद रानी कहलन्हि- हमर ई दशा अहाँक दुनू बेटा कएने अछि। हमर बिमारीक यैह एकटा उपाय अछि नहि तँ हम नहि बचि सकैत छी - अहाँ ओहि दुनूकेँ मारि ओकर करेज निकालि हमरा दिअ। तखन हम बचि सकैत छी। राजा एतेक गप सुनि कए बड्ड तमसा गेल। ओ दुनू बेटाकेँ बजा कए बड्ड मारि मारलक आ तकर बाद जल्लादक हाथसँ मरबएबा लेल पठा देलक। जल्लाद दुनू भाएकेँ मारैत-पिटैत बोनमे लए गेल। दुनू भाए बड्ड कानि रहल छलाह। जखन जल्लाद सभ ओकरा दुनू गोटेकेँ मारए लागल तँ ओ सभ कहलन्हि जे हमरा सभकेँ नहि मारू। हमरा सभकेँ छोड़ि देब तँ हम सभ घुरि कए नगर नहि जाएब। अहाँ सभ कोनो माल-जानवरकेँ मारि ओकर करेज जा कए दए दियौक। आ ई कहि दुनू भाए संगमे जतेक पाइ छलन्हि सेहो जल्लाद सभकेँ दए देलन्हि। एक जल्लाद कहलक जे मारि दियौक। दोसर कहलक जे नहि मारू। ई सभ घुरि कए जएबो करत तँ हम सभ कहबैक जे हम सभ की करू। हम सभ तँ करेज आनि कए देने छलहुँ। मरलाक बाद जीबि गेल होएत।
जल्लाद ओहिना कएलक आ दुनू भाएकेँ छोड़ि देलक।
कथा रूप १: जल्लाद ओहिना कएलक आ दुनू भाएकेँ छोड़ि देलक।
दुनू भाए ओहि बोनमे भटकए लगलाह। रातुक मौसममे दुनू भाए एकटा गाछक नीचाँ सूति गेलाह। किछु कालक बाद दुनू भाए उठि गेलाह आ गाछक ऊपर एकटा साँपकेँ चढ़ैत देखलन्हि। ओहि गाछपर दू टा हंसक बच्चा रहैत छल। हंस चरबाक लेल गेल रहए। ओहि साँपकेँ देखि कए हंसक बच्चा बाजए लागल।
दुनू भाए सोचलक- देखू। ई साँप बच्चाकेँ खा जाएत। एतेक सोचलाक बाद तलवारसँ मारि कए साँपकेँ ओ सभ नीचाँ खसा देलक। बच्चा बजनाइ बन्न कए देलक। जखन भोर भेल तँ हंस-हंसिनी चरि कए आएल आ बच्चा लेल खेनाइ अनलक। बच्चाकेँ आहार खुआबए लागल तँ बच्चा आहार नहि खएलक आ कहलक जे माँ हमरा ई बताऊ जे एहि गाछपर हम पहिल देल बच्चा छी आकि अहाँ पहिनहियो एहि एहि गाछपर बच्चा देने छी । माए कहलकै जे हम पहिनहियो देने छी मुदा आइ धरि मात्र अहाँ दुनु गोटेक मूँह देखि रहल छी।
कथा रूप २: बेशी लोकप्रिय आ पसरल क्षेत्रमे: जल्लाद ओहिना कएलक आ दुनू भाएकेँ छोड़ि देलक।
दुनू भाए ओहि बोनमे भटकए लागल, खूब बौआएल। रातुक समय दुनू भाए एकटा गाछक तरमे सूति गेल। भोरे बोनसँ बहराइत दोसर देश जाए लागल। दुनू भाए भूखल पिआसक मारे व्याकुल भऽ गेल। जा कए एकटा गाछक नीचाँ बैसि कए सुस्ताए लागल। ओ सभ सोचए लागल जे आब कोन उपाय करू। ओही समय ओहि गाछपर दू टा मएनाक बच्चा रहए। ओहिमेसँ एकटा कहैत अछि जे हमर जे काँचहि मौस खा जाएत तकरा बड्ड शीघ्र राज्य भेटि जएतैक। आ दोसर कहलक जे हमरा जे आगिमे पका कए खाओत तँ किछु दिनुका बाद ओ राज पाबि जाएत। एतेक गप दुनू भाए सुनलक आ हाथमे एकटा लाठी लए ओकरा सभकेँ मारि कए नीचाँ खसा देलक आ लऽ कए बिदा भेल। किछु दूर आगाँ गेल तँ देखलक जे गाए-महीस चराबए बला चरबाहा सभ एकटा बएरक काँटक बोन - झाँखुरकेँ जरा रहल छलाह। ओ दुनू भाए सोचलक जे अही अगिनवानमे पका कए एकरा खाएब। ओहि आगिमे दुनू गोटे मेनाक बच्चाकेँ पका कए खएलक। काँटमे जे ओ सभ पका कए खएलक तँ ओकर सभक भाग्यमे सेहो काँट लागि गेलैक।
ओतएसँ दुनू भाए बिदा भेल। किछु दूर गेलाक बाद ओकरा सभकेँ आमक एकटा गाछी भेटलैक।
बसन्त चलैत-चलैत थाकि गेल रहए आ ओकरा आर चलल नहि भऽ पाबि रहल छलए।
सीत कहलक-भाइ, तूँ एतए बैस, हम ओहि गामसँ किछु माँगि कए अनैत छी आ तखन खा कए हमरा सभ आगाँ चलब। सीत मँगबा लेल गाममे चलि गेल। सीत जाहि गाममे (कथा रूप ३ गामक नाम हस्तिनापुर सेहो कतहु-कतहु कहल जाइत अछि) मँगबाक लेल गेल ओहि गाममे राजाक बेटीक स्वयम्बर रचाओल गेल छल। ओहि स्थान पर जन सम्मर्द छल। ओतए भीड़ देखि सीत अटकि गेल आ देखए लागल। सीत अपन भाएक सुरता बिसरि गेल । स्वयम्बरमे लड़की जयमाल लए सभामे घुरए लागलि आ माला सीतक गरदनिमे पहिरा देलक। ओहीठाम सीतक बियाह ओहि लड़कीक संग भए गेल।
(रूप ४) बियाहक पहिने ओतुक्का लोक सभ बाजए लागल जे ई राजाक बेटी होइतो एकटा भिखमंगाक गरदनिमे माला पहिरा देलक। आ ईहो जे ओ लड़की बताहि भऽ गेल अछि। ओकर गरदनिसँ माला निकालि कए ककरो दोसराक गरदनिमे माला पहिराऊ नहि तँ बियाह नहि होमए देब। ई गप सुनि लड़की बाजलि जे हमर भाग्यमे ईएह भिखमंगा लिखल अछि तँ हमरा राजा कतएसँ भेटत ? हम एकरे संग बियाह करब। ई गप सुनि सभ राजा अपन-अपन घर चलि गेलाह आ कहलन्हि जे एहि लड़कीकेँ एहि गामसँ निकालि दिअ आ कोनो दोसर ठाम पठा दिअ। राजा ओनाही कएलक। ओहि दुनू गोटेकेँ अपन गामसँ बाहर पठा देलक। ओ ओही नगरमे रहए लागल। किछु दिनुका बाद लोक सभ राजाकेँ कहए लागल जे अहाँ ओहि लड़काक संग लड़कीसँ छोड़ा दियौक आ कोनो दोसर लड़काक संग ओकर बियाह कराए दियौक।
सभक कहलापर राजा एकटा कुटनी बुढ़ियाकेँ जहर-माहुर संगमे दए पठेलक जतए सीत आ राजाक बेटी रहैत छल। ओ बुढ़िया ओकरा सभक संगे रहए लागल। किछु दिन धरि ओ ओतहि रहल। दुनू गोटेकेँ कोनो गपक चिन्ता नहि भेलैक। एक दिन सीतकेँ अनचोक्केमे बड्ड पियास लगलैक। ओ अपन रानीसँ बाजल-हमरा पानि पिया दिअ। बुढ़िया फटाकसँ उठि कए गेल आ एक गिलास पानिमे जहर घोरि सीतकेँ देलक। सीतकेँ बड़ जोरसँ पियास लागल रहैक से ओ खटसँ पानि लऽ कए पीबि गेल। पानि पीबिते सीतकेँ किछुए कालक उपरान्त बड्ड निशा अएलैक। स्थिरे-स्थिरे निसाँ बढ़ैत गेल। निसाँमे सीत ओन्घरा गेल। बुढ़िया बाजल जे कोनो गप नहि। चिन्ता नहि करू। सभ ठीक भऽ जाएत। कनेक कालक बाद सीत मरि गेल। रानी खूब हाक्रोस कए कानए लागलि। ओहि ठाम कोनो गाम नहि छल। सीतकेँ धारक कात लऽ जा कए गारि देल गेल। बुढ़िया कहलक- देखू चिन्ता नहि करू। आब हम सभ असनान कए ली। असनान करए गेल तँ एकटा नाह किनारमे लागल छल। बुढ़िया बाजल जे चलू, ओहि नाहपर बैसि कए स्नान कए लेब। तखन दुनू गोटे ओही नाहपर बैसिकए नहाए लागल। तखन आस्ते-आस्ते नाह आगाँ जाए लागल। जखन नाह बीच धारमे गेल तँ (रूप ५: एतए रानीक नाम फुलवन्ती सेहो अबैत अछि) रानी देखलक जे नाह बीच धारमे आबि गेल अछि। तखन ओकरा बुझबामे अएलैक जे ई बुढ़िया ओकरा ठकि कए लए जा रहल छैक। ओ रानी अपन पत्नीक बियोगमे छलीह। ओ हृदयमे सोचलक जे ओकर पति मरि गेल छैक तँ ओ जीवित रहि कए की करत। ई सोचि कए नाहसँ कूदि कऽ ओ धारमे फाँगि गेल। भँसैत-भँसैत ओ बड्ड दूर चलि गेल आ ओतए ओ कात लागि गेल।
आब बसन्तक खिस्सा:
बसन्त ओहि गाछीमे भाएक आस तकैत रहए। दिन साँझमे बदलए लागल। ओहि गाछीमे कुम्भकार लोकनि गाछीक पात बहारि रहल रहथि। तखने बसन्त कनैत-कनैत ओहि कुम्भकार लग गेल। कुम्भकार पुछलक-अहाँ किएक कानि रहल छी। बसन्त सभ गप बतेलक। कुम्भकार कहलक-अहाँ चिन्ता नहि करू। अहाँ हमरा घरपर चलू। अहाँ हमरा घरपर रहब। बसन्त कुम्भकार लग चलि गेल आ रहए लागल। ओतए रहैत-रहैत एक बेर एकटा बनिजारा अपन जहाज लए वाणिज्य करए लेल जा रहल छल आकि बीच धारमे ओकर जहाज बीचमे ठाढ़ भए गेलैक।
जहाजक इन्जीनिअरसँ (रूप ६ एतए बनिजाराक नाम नैका बनिजारा सेहो कहैत सुनल गेल) बनिजारा पुछलक जे की जहाज एतएसँ आगाँ नहि जा रहल अछि। इन्जीनिअर कहलक-जहाज बलि माँगि रहल अछि। कोनो मनुक्खक बच्चाक बलि देलाक बाद जहाज आगाँ जाएत। एतेक गप ओ बनिजाराकेँ कहलक तँ बनिजारा तीन लाख रुपैया लए एकटा बच्चाक तलाशमे गेल। ताकैत-ताकैत ओ ओही गाममे गेल जाहि गाममे बसन्त रहैत छल। बनिजारा अबाज लगबैत जा रहल छल जे, जे क्यो एकटा बच्चा देत ओकरा हम तीन लाख रुपैया देब। एहि प्रकारसँ ओ अबाज लगबैत जा रहल छल। क्यो गोटे नहि बाजल। जखन ओ कुम्भकारक दरबज्जाक सोझाँ गेल तँ कुम्भकार कहलक-हँ हम एकटा लड़का देब। हमरा पाइ चाही। बनिजारा ओहि कुम्भकारकेँ तीन लाख टाका देलक आ ओतएसँ ओ बसन्तकेँ लए अपन जहाजक लग गेल।
बसन्त ओकरासँ पुछलक-बनिजारा। अहाँ हमरा कतए लए जा रहल छी।
बनिजारा बाजल-हम अहाँकेँ बलि चढ़एबा लेल लए जा रहल छी। किएक तँ हमर जहाज धारक बीचमे ठाढ़ भऽ गेल अछि। ताहि द्वारे अहाँक बलि हम चढ़ाएब। एतेक गप सुनि कए बसन्त बाजल जे हे बनिजारा। हमरा ओतए गेलाक बाद, जहाज छूलाक बाद जे जहाज खुजि जाएत तँ अहाँ हमरा छोड़ि देब ने?
बनिजारा कहलक-हमर जहाज जे खुजि जाएत तँ हम अहाँकेँ छोड़ि देब।
बसन्त बीच धारमे जा कए हाथसँ जहाजकेँ छूबि कए बाजल। जहाज अहाँ जाऊ तँ हमर जान बाँचि जाएत।
एतेक कहबाक देरी रहए आकि जहाज ओतएसँ बिदा भऽ गेल।
इन्जीनिअर बनिजाराकेँ कहलक-एकरा बैसा लिअ जहाजमे। कतहु आन ठाम ठढ़ भऽ जाएत तखन?
बसन्त बाजल-हमरा मारि देने रहितहुँ तँ फेर जहाज ठाढ़ भेलाक बाद हमरा कतएसँ अनितहुँ?
बनिजारा बाजल-छोड़ि दिअ एकरा।
बसन्त ओतएसँ धारक काते-काते बिदा भेल आ ओतए पहुँचि गेल जतए सीतक स्त्री कानि रहल छलीह।
बसन्त पुछलक-अहाँ किएक कानि रहल छी ?
एतबा सुनितहि ओ कानब बन्द कए चुप भए गेलीह।
बसन्त कहलक-हमहूँ दुखक मारल छी। हम दू सँ बिछुड़ि कए एक भए गेल छी।
स्त्री पुछलक-अहाँक की नाम छी आ अहाँक भाएक की नाम छी?
बसन्त बाजल-हमर नाम बसन्त छी आ हमर भाएक नाम सीत छल।
ई बात सुनैत स्त्री फेरसँ कानए लागल आ कहलक जे अहाँक भाए स्वर्गवासी भए गेलाह। हुनके वियोगमे हम कानि रहल छी। ई गप सुनि कए (रूप:७ एतए नाम दिल बसन्त सेहो अबैत अछि) बसन्त कहलक जे आब हमरो जीवित नहि रहबाक अछि।
ई गप सुनितहि सीतक स्त्री मरि गेलि आ बसन्त ओही समय बोनमे जा कए एकटा पैघ गाछपर चढ़ि कए अपन जान देबाक लेल तैयार भऽ गेल। ओही समय एकटा आकाशवाणी ओकरा अबाज देलक-बसन्त तूँ अपन जान नहि गमा। तोहर भाए जीवित छौक। जो जतए तोहर भाएक सारा छौक ओहिपर अपन दहिन हाथक कंगुरिया आँगुर काटि कए ओहिपर छीटि दे। तोहर भाए जीवित भए जएतौक। एतेक गप सुनि कए बसन्त गाछसँ नीचाँ उतरि गेल आ जतए ओकर भाएक सारा छल ओहिपर ओहिना कएलक। सीत राम-राम बजैत उठि गेल। दुनू भाइ गरा मिलल। ओहि ठामसँ दुनू भाए बिदा भेल। दिनसँ साँझ पड़ि गेल आ दुनू भाए एक ठाम गाछक नीचाँ अटकि गेलाह।
सीत कहलक-भाए बसन्त एतहि रुकैत छी। भोर भऽ जाएत तखन फेर हम सभ बिदा होएब।
दुनू भाए ओहि गाछक नीचाँ रात्रि व्यतीत करए लगलाह।
खिस्सा रूप ८: रात्रिक बारह बाजल तँ बोनसँ एकटा साँप बहार भेल आ गाछपर चढ़ए लागल। ओही गाछपर हंसक खोता रहए। ओहि हंसक खोतामे दू टा हंसक बच्चा रहए। साँपकेँ देखि कए दुनू बच्चा अबाज देमए लागल। ई अबाज दुनू भाए सुनलक आ साँपकेँ गाछपर चढ़ैत देखलक आ सोचलक जे ई साँप बच्चा सभकेँ खा जाएत से एकरा जे मारि दी तँ बच्चा सभक जान बचि जाएत। ओ सभ साँपकेँ मारि देलक।
तावत हंस दहमे चरए लेल गेल रहए। हंस ओहि खोतामे कतेक बेर बच्चा देने रहए मुदा एकोटा बचा उठा नहि सकल रहए। भोरे सकाले हंस दहसँ चरि कए आएल। बच्चा सभकेँ जीवित देखि बड्ड प्रसन्न भेल। बच्चाकेँ अहार देमए लागल। बच्चा मुँह घुमा लेलक आ पुछलक-माँ अहाँ एहि गाछपर कतेक बच्चा पाड़लहुँ आकि हमही पहिल बच्चा छी।
माँ बाजलि-नहि एहि गाछपर कएक बेर हम बच्चा देलहुँ मुदा मुँह अहीं दुनूक हम आइ देखलहुँ।
बच्चा बाजल जे हमरो मुँह अहाँ नहि देखि सकितहुँ , जे ई मुसाफिर नहि रहितए। नीचाँ देखू की पड़ल अछि।
हंस देखलक जे नीचाँ मे एकटा साँप पड़ल छैक आ दू टा मुसाफिर फिरि रहल अछि।
बच्चा बाजल-ओहि साँपकेँ यैह दुनू मुसाफिर मारलक अछि। पहिने जा कए ओही मुसाफिरकेँ खएबा लेल दियौक। ओ खाओत तँ हम खाएब।
हंस नीचाँ उतरि कए आएल आ कहलक- मुसाफिर, जखन अहाँ नहि खाएब तँ ई दुनू बच्चा सेहो नहि खाएत।
ई दुनू भाए कहलक-माँ खेनाइसँ प्रेम पैघ अछि। माँ हमहूँ सभ परिस्थितिक मारल छी। हमर सभक के सहायता करत ?
हंस बाजल-हमर सहायता अहाँ कएलहुँ से अहाँक सहायता हम करब। लिअ एकटा बच्चा हम अहाँ सभकेँ दैत छी। ई अहाँक सहायता करत। सियान भेलापर ई अहाँ दुनू भाएकेँ अपन पाँखिपर बैसा कए उड़ि सकैत अछि। जतए मोन होएत ओतए जा सकैत छी। ई वरदान हम दैत छी जे अहाँ दुनू भाए सफल रहब। दुनू भाए प्रणाम कए ओतएसँ बिदा भेलाह। ओ सभ जतए कतहु बिलमैत रहथि ओतए हंस अपन दुनू पाँखि पसारि छाह कए दैत छल। एहि प्रकारेँ किछु दिन बीतल। हंसक बच्चा पैघ भऽ गेल। ओ आब दुनू भाएकेँ चढ़ा कए लऽ जाए योग्य भऽ गेल।
हंस बाजल-भाए। आब तोँ दुनू भाए हमर ऊपर बैसि जाह। अहाँ जतए कतहु कहब हम अहाँ सभकेँ लए चलब।
दुनू भाए ओतएसँ हंसपर सवार भए आगू बिदा भेलाह आ जा कए कंचनपुर शहर पहुँचलाह। नगरक बाहर एकटा बरक गाछ छल। ओही गाछक लग ओ सभ डेरा खसेलक आ रहए लागल आ शहरमे जा कए काज करए लागल। साँझ भेला उत्तर ओही गाछक लग खेनाइ खा कए ओ सभ सूति जाथि। हंस भरि राति दुनू भाएक देख-रेख करैत छल। किछु दिनुका बाद ओहि कंचनपुर शहरक राजाक कंचना नाम्ना बेटीसँ सीत प्रेम करए लागल।
ओहि लड़कीक प्रत्येक दिन फूलसँ ओजन कएल जाइत छल। प्रेम कएलाक बाद लड़कीक ओजन बहुत बढ़ए लागल। राजाकेँ खबर भेल जे लड़कीक ओजन किएक बढ़ए लागल अछि। राजा अपन महलक चारू कात सिपाहीक पहरा दिआ देलक। ताहूपर सीत हंसपर सवार भए महलमे चलि जाइत छलाह। सम्पूर्ण शहरमे हिलकोर उठि गेल जे के ई लोक अछि जे हमर राजाक महलमे चोरिसँ चलि जाइत अछि। एक दिन संजोगसँ सीत गेल आ कोचपर बैसि दुनू गोटे हँसी मजाक करए लागल आ अहीमे दुनू गोटेकेँ निन्न लागि गेलैक। हंस बेचारा घुरि कए आपस अपन डेरापर आबि गेल आ भोरमे दुनू गोटेकेँ एक्के संग महलमे पकड़ि लेल गेलैक।
राजा सभटा गप पुछलक। सीत सभटा गप बतेलक।
लड़की कहलक जे हमर भाग्यमे यैह अछि आ यैह रहत।
राजा सोचि कए कहलक-अहाँ अपन भाएकेँ लए आऊ आ हंसकेँ सेहो।
बसन्त आ हंसकेँ सीत लए अनलक। हंसकेँ देखि कए राजा बड्ड प्रसन्न भेल।
राजा कहलक-हमर मन्त्री लग एकटा आर बेटी छैक। दुनू भाएक एकहि बेर बियाह कए देल जाएत।
बड्ड धूम-धामसँ दुनू भाएक बियाह भेल।
सीतकेँ कंचनपुरक राज भेटल कारण राजाक तँ एकेटा बेटी रहए। ताहि द्वारे सीत किछु दिन बितलाक बाद कहलक जे आब हम अपन शहर जाएब।
राजा खुशीक संग ओहि चारू गोटे बेटी-जमाएकेँ बिदा कएलक। सीत-बसन्त दुनू भाए अपन देश बिदा भेल। किछु दिनुका बाद ओ सभ अपन नगर पहुँचल तँ ओतुक्का हालत बड्ड गम्भीर देखलक। अपन राजक एक कोनमे ओ सभ अपन घर बनेलक आ रहए लागल। सीतक माए आ पिता दुनू गोटे आन्हर भए गेल रहथि। सभ दिसनसँ विपत्ति आएल छलन्हि। एक दिन हुनका पता लगलन्हि जे हुनकर राज्यक एक कोनमे कोनो दोसर राजा घर बना कए रहि रहल अछि। चलू ओकरासँ भेँट कए आबी।
ओ सभ जखन अएलाह तँ दरबज्जापर सीत-बसन्त दुनू गोटे चीन्हि गेलथि जे यैह हमर माए-बाप छथि। दुनू भाए अपन-अपन स्त्रीकेँ इशारा कएलन्हि। एहि दुनू गोटेकेँ भीतर लए जइयन्हु आ नीक जेकाँ असनान करबाऊ, नीक कपड़ा पहिराऊ आ खूब आ नीक खेनाइ खुआऊ आ तकर बाद एतए आनू आ मंचपर बैसाऊ।
तकर बाद सीत आ बसन्त दुनू भाए माँ-पिताक आगाँ ठाढ़ भए कहलन्हि-ई तँ बताऊ जे अहाँकेँ कैकटा बेटा अछि।
राजा महेश्वर सिंह कहलन्हि-हमरा दू टा बेटा रहए मुदा आब एकोटा नहि अछि। हमर भाग्यक दोख अछि। नहि जानि ओ सभ जीवित अछि आकि मरि गेल? हम तँ मरबा देने रहियैक।
सीत-बसन्त बाजल-नहि। अहाँक दुनू बेटा जीवित अछि। एतेक कहैत ओकरा सभक आँखि नोरा गेलैक।
-–पिताजी वैह सीत-बसन्त हम सभ छी।
ओही समय राजाक आँखि खुजि गेलैक आ दुनूकेँ अँकवारमे भरि पकड़िकेँ ओ कानए लागल आ अपन गल्ती स्वीकार कएलक। धन्य लाला, अहाँक अउरदा बढ़ए। अमर रहू ।
गजेन्द्र ठाकुर,जन्म ३० मार्च १९७१ ई.,गाम-मेंहथ, भाया-झंझारपुर,जिला-मधुबनी,“विदेह” ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/ ,क सम्पादक जे आब प्रिंटमे सेहो मैथिली साहित्य आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि।१.छिड़िआयल निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, २.उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) ,३. पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर),४.कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ),५.नाटक(संकर्षण), ६.महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन)
आ ७.बाल-किशोर साहित्य (बाल मंडली/ किशोर जगत ) कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक (खण्ड १ सँ ७ ) नामसँ। हिनकर कथा-संग्रह(गल्प-गुच्छ) क अनुवाद संस्कृतमे आ उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) क अनुवाद अंग्रेजी ( द कॉमेट नामसँ) आ संस्कृतमे कएल गेल अछि। मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी-मैथिली शब्दकोश आ पञ्जी-प्रबन्धक सम्मिलित रूपेँ लेखन-शोध-सम्पादन आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण। अंतर्जाल लेल तिरहुता यूनीकोडक विकासमे योगदान आ मैथिलीभाषामे अंतर्जाल आ संगणकक शब्दावलीक विकास।मैथिलीसँ अंग्रेजीमे कएकटा कथा-कविताक अनुवाद आ कन्नड़, तेलुगु, गुजराती आ ओड़ियासँ अंग्रेजीक माध्यमसँ कएकटा कथा-कविताक मैथिलीमे अनुवाद। ई-पत्र संकेत- ggajendra@gmail.com