67म सगर राति दीप जरय
67म सगर राति दीप जरयक आयोजन मानाराय टोल, नरहन, समस्तीपुरमे 05 सितम्बर,2009 केँ डा.रमानन्द झा ‘रमण’क अध्यक्षतामे भेल। डा.विपिन विहारी ठाकुर दीप बारि उदघाटन कएल। संयोजक छलाह रमाकानत राय ‘रमा’। 19 टा कथाक पाठ आ’ ओहिपर चर्चा भेल। ओहि अवसर पर डा.विभूति आनन्दक भाषा टीकाक लोकार्पण डा.रमानन्द झा ‘रमण’, गुवाहाटीसँ आएल ललित कुमार झाक कविताक छाँहमे कलोकार्पण डा.रमानन्द झा ‘रमण’ एवं कल्पनाक सागर मे क लोकार्पण रमाकान्त राय‘रमा’ द्वारा भेल। 68म सगर राति अरविन्द ठाकुरक संयोजकत्वमे दिसम्बर,2009 क पहिल सप्ताहमे सुपौलमे होएत।
मनोज मुक्ति - रिपोर्ताज
सभ् ग।ेटे कहै छयि जिवन अमूल्य छियै, बहुत तपस्याक बाद मनुष्यक जिवन भेटैत छैक। आ इहो कहवी छइ जे जीवन एकटा संधर्ष छियै, संधर्षक बाद मनुष्यके सफलता अवश्य भेटैत छइ हमरा लेल मा़त्र कहवीए मे सिमीत रहिगेल इ सब।
हमर नाम रोशन पंजियार अछि,हमर घर सुनसरी जिल्ला मे पडैत अछि। हमर परिवार एकटा किसान परिवार अछि। हमरा घर मे दाइ, बाबा,माय बाबु आ हमरा लग हमर एकटा बहीन आ दूटा भाय अछि। हम अपना परिवारक सबस जेठ संतान छी। एकटा मघ्यम वर्गीय परिवार होइतो जेठ संतानक नाता स होइ वा जेइ कारणे होइ सबहक सिनेह भरपुर हमरा भेटल। दाइ, बाबा, के विशेष इच्छा भेलाक बादो हम मैट्रिक स आगा नइ पढ सकलौ। कारण इ जे पढ मे ठिक ठाक होइतो एकही बेर मे हम एस. एल. सी. पास नइ कर सकलहुॅं, जबकी हमरा स कमजोर बहुतो वि़द्यार्थी पास भ गेल। कहुनाक दोसर बेर हम परीक्षा देलौ आ पास भेली। मैट्रिक पास क क हम काठमाण्डू गेलौ, कोनो काज करबाक लेल। काठमाण्डू जाक सबस पहिने अपना क्षे़त्रक नेता लग गेलहुॅ, जकरा हमर बाबु सब चुनाव मे बड सहयोग कैने रहथिन्ह। हूनका जाक कहलियैन जे हमरा कतहुॅ काज लगा दिय। ओ कहलैथ देखैत छियै। हम प्रत्येक दिन ओइ नेताजी ओत जाइत छलौ। ओना हमरा लगायत आरो बहुतो बेरोजगार सब नेताजी ओत पहुॅचैत छल। हमरा सबके क्षेत्र मे चारि भाग मे 3 तीन भाग, लगभग 80 प्रतिशत मधेशीक जनसं़ख्या छइ आ 20 प्रतिशत गैर मधेशीक। ताहिस नेता जी ओत मधेशी आ गैर मधेशी दुनु तरहक बेरोजगार रोज हाजरी लगवैत छल। लागातार डेढ, दू मास हम ओत गेलहुॅ, मुदा हमरा नोकरीक कोनो जोगाड नइ भ सकल। जबकी हमरा सामने मे 25/30 टा नेताजीक अपन जाति़़़़़़़़़़ भाइ या कही गैर मधेशी सबहक नोकरी भेट गेल छल। तखन हमरा सोच
आयल जे हम सब बेकारे दोसर के जितवै छी अपना क्ष़ेत्र सॅ। आब हारल थाकल हम एकटा गार्मेन्ट मे काज कर लगनहुॅ। ओत हमरा हेल्फर के काज भेटल कहियो अपना घर मे एकटा मोटा नइ उठौने छलौ हम मुदा एत दिन राति हमरा समाने लाद पडैत छल। कहुनाक 4/5 मास गुजारा कंएलहुॅ। आब हम अपने काज करबाक बात सोचलहुॅ आ एकटा पुरान साइकल किनिक ओइ मे पाछा बडका केलियर लगबाक छिटटी बन्हलहु आ तरकारी बेच लगलहुॅ। आब हम भोरे पाॅच बजे उठित छलहुॅ आ साइकल ल तरकारीक बडका बजार कालिमाटी चलि जाइत छलहुॅ आ ओत तरकारी किन क अपन डेरा चल अवैत छलहुॅ। कनी जलखइ क क तरकारी निकजका साइकल पर ध क काठमाण्डूक गलिए गली मे निकलि जाइत छलौ बेचबाक लेल। 10 बजे धरि घुमित छलहुॅ आ आबिक खाना बनाक खाक आराम करैत छलौ आ फेर 2 बजे साइकल ल क निकलि जााइत छलौ। ओना कहियो हमरा बेसी राति धरि नइ घुम पडैत छल, किया त हम दोसर स कनि कमे नाफा ल क बेच देयै रही तरहे हमर दिन बितैत छल। हम जहिया गार्मेन्ट मे काज करैत छलहुॅ त दिन राति मेहनत क क चारि साढे चारि हजार पाइ कमाइत छलौ बा उपर स ठिकदार के गारि बात मुदा तरकारी बेचे मे 6/8 हजार हम कमा लैत छलहु। अही बीच मे काठमाण्डू मे रहिरहल हमरा गाम के एकटा लडका हमरा घर मे जाक कहलकै जे रोशन साइकल पर तरकारी बेचै या। तुरन्ते हमरा गाम स चिठठी आयल घर अएबाक लेल। हम घर गेलहुॅ त हमरा दाइ, बाबा, माय बाबुजी सब गोटे कहलथि जे इ कोन काज शुरु क देले त मान, इज्जति के कोनो ठेकान नइ छौ, तोरा अही लेल तोरा मैट्रिक धरि पढलियउ। भ गेलै काठमाण्डु जाय के कोनो काज नइ छै, आब गामे मे रह। हम हूनका सबहक बोली सुनिक अबाके रहि गेलहुॅ। फेर हूनका सब के कहलियैन, देखियौ काज कोनो छोट आ नम्हर नइ होइत छैक, हम जना एस. एल. सी. पास कैने छियै त हमरा केओ हाकिम थोरही बना देतै आ दोसर मे मधेशी संगे केहन भेदभाव छइ से बुझले अछि। दोसर के नोकरी स त बहुत नीक छइ अपन काज। आहाॅ सब निश्चिन्त रहुॅ अइमे इज्जति ककरो नइ जायत रहिगेल समाज के बात त समाज आइ धरि ककरो नीक नइ कहलकैया। आहाॅ बड नीक जका रहैत छी त इश्र्या करत आ स्थिति कनि खराब भ गेल त समाज हॅसत। ताही स समाज के चिन्ते नइ करु। अहिना कहुना कहुना, समझा बुझाक घरक लोक के हम फेर काठमाण्डु
गेलहुॅ। आ पुनः तरकारिए बेचबाक काज मे लागि गेलहुॅ। हमरा मोन भेल जे मेने रोडजखने मालूम भेलइ ओकरा सबके जे हम विदेश जाय चाहैत छी बस पासपोर्ट बनाब स लक विदेश जाय धरि काज के जिम्मा ल लेलक, किया त सब काज फटफट भ जाइत छै जै 8/10 दिन मे पासपोर्ट बनिक आब मेडिकल जॉचला काठमाण्डू गेलहु मेडिकल भेलाक बाद मलेशिया क लेल पासपोर्ट मैनपावर मे बना देल गेल हमर हम फेर गाम चलि अयलहु 2 मास के बाद मे 1 लाख टका ल क अगिला 5 दिन मे काठमाण्डू चलिआउ आहा क फलाइट उठम दिन मे कहल गेल हमरा लग 30 हजार छला आ 60 हजार कर्ज लक काठमाण्डू अएलहु हमरा उडबला हमरा संगे हमर बाबुओ औलथि पाइ पुरा बुझा देलियैक आ हमर वीजा द देलक वास्तव मे उठम दिन मे हमर फलाइट भ गेल हम 2 वर्षक लेल एकटा कम्पनी मे सुपर भाइजरक लेल जाइत छलौ मलेशिया पहुचलहु त कम्पनीक एकटा आदमी हमरा सबके लेब एयर पोर्ट पर आयल छल हम सब गोटे संगे कम्पनी मे गेलहु काल्हिस काज पर आब पडत कहिक कनि दूर पर रहल एकटा गोदाम सनक घर मे ल गेल हमरा सबके ओकहल गेल जे एतही रह पडत काल्हि भिने कम्पनी मे गेलहु हमर बारी आओल त बजाक ल गेल एकटा गोदाम मे आ सामान एत स उठाक ओत धर परत से काज हमरा देखाओल गेल हमरा बड खिस उठल एजेन्ट पर,कहने छल सुपर भाइजरक काज आ एत लेबर के काज कर परैया हम नेपाल फोन केलहु...