विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

संस्कार गीत आ लोकगीत नाद

जगदीश प्रसाद मंडल · 2009-10-01 · अंक 43

संस्कार गीत/ लोक गीत नाद-
जगदीश प्रसाद मंडल
संस्कार कल्पना थिक। हमरा सभक बीच संस्कारक प्रयोग विभिन्न रूप मे विभिन्न जगह पर होइत अछि। ओना जहि रूप मे संस्कारक प्रयोग हमरा सभक बीच होइत, ओ मन्द आ कुषाग्र रूप मे सेहो होइत। मुदा विचारणीय प्रष्न अछि जे मन्द तँ किऐक? आ कुषाग्र तॅ किऐक? एखन हम एहि प्रष्नक उत्तर नहि द शास्त्रीय प्रयोग दिषि नजरि दैत छी। गर्भजनित वातावरण जन्य कतिपय अपदार्थ के दूर करैक हेतु संस्कारक कल्पना कयल गेल अछि। कहल गेल अछि जे एहि सॅ शरीर आ मन परिष्कृत होइत अछि। शालीनता आ शिष्टता मनुष्यताक परम सिद्वि थिक आ ओकर प्राप्तिक साधन थिक संस्कार कर्म। दषर्न शास्त्रक अनुसार भोग्य पदार्थक अनुभूतिक छाप थिक संस्कार कर्म। मनुष्यक अव्यक्त मन पर अुभवक जे छाप पड़ैत छैक, समय अयला पर ओ प्रकट भऽ जायत छैक। यैह छाप थिक वासना आ यैह कहबैत अछि जन्मान्तक संस्कार। धर्मशास्त्री लोकनि संस्कार केॅ शारीरिक, मानसिक आ बौद्धिक गुणश्दोषक प्रक्रियाक रुप ग्रहण कयलनि अछि।
आष्वलायन अपन गृहसूत्र मे एगारह तरहक संस्कारक वर्णन केने छथि। जखन याज्ञवल्क्य बारह तरहक। गौतम भिन्नश्भिन्न दैवयज्ञ केॅ संस्कार मे परिगणित कऽ अड़तालिस संख्या धरि लऽ गेल छथि। भारत सरकारक 1901 इसवीक जनगणना प्रतिवेदनक अनुसार ओहि समय हिन्दू मे बारह संस्कार प्रचलित छल। मिथिला मे सोलह तरहक संस्कारक विधान मान्य अछि ई थिकश् गर्भधान,पुंसवन, सीमन्तोन्नयन, जातकर्म, नामकरण, निष्क्रमण, अन्नप्राषन, चूड़ाकर्म,कर्णबेध, उपनयन, वेदारम्भ, समावर्तन, विवाह, वानप्रस्थ, सन्यास आ अन्त्येष्टि। एखन सिर्फ पाँच तरहकश् जन्म,मूड़न,उपनयन,विवाह आ मृत्यु संस्कारक चलनि अछि। मुदा इहो सभ जाति मे समान नहि अछि। जेना उपनयन सिर्फ समाजक अगुआइल जातिक बीच अछि। मूड़नोक रुपरेखा एकरंगक नहि अछि। तेँ जँ सभकेँ नजरि मे राखि देखैत तँ सिर्फ तीनिये टा संस्कार जन्म,विवाह आ मृत्यु अछि।
संस्कारक कल्पना आ ओकर चयन वा नामकरणक पाँछा सामाजिक कारण सोहो प्रमुख रहल। स्पष्ट अछि जे संस्कारक शासन जीवन पद्धति के खास ढ़ंग सॅ नियंत्रित आ आदर्षोन्मुखी बनयवाक लेल देल गेल। शुद्धताक अपेक्षा सुनियोजित जीवनश्व्यवस्थाक आवष्यकता अथवा स्थितिक उपस्थिति दिषि संकेत करैत अछि। कहैक तात्पर्य जे आर्यश्अनार्यक घालमेल सँ उपजल सामाजिक स्थिति मे संस्कारक माध्यम सॅ अपन अस्मिता के सुरक्षित रखवाक ब्राहम्णवादी चिन्तनक परिणाम थिक संस्कार। मध्यकाल मे संस्कारक पालन पर बेसी जोर देल गेल। ओना दोषक निवारण आ गुणक अंगिकार करब अधलाह बात नहि थिक। इतिहास साक्षी अछि जे भौतिक परिस्थितिक प्रभवक कारणे समाज मे कखनो बेटिक त कखनो बेटाक मोल बढ़ैत रहलैक अछि।
आइ जकरा मैथिल संस्कृति कहल जा रहल अछि,से की वस्तुतः मिथिलाक संस्कृति थिक? एहि लेल मिथिलाक इतिहास दिषि देखए पड़त। मिथिलाक धरती हिमालयक माटिश्बालू सँ बनल अछि। नदी प्रदेषक एहि भूभाग पर किरात आ कोल रहैत छल। आर्यीकरणक अभियान मे जे किछु बहरबैया लोक सभ एहिठाम अयलाह ओ द्विज बनि के एहि प्रदेष पर सत्ता स्थापित केलनि। क्षत्रिय राजसत्ता कब्जा केलनि आ ब्राह्मणक हाथ मे समाज सत्ता आयल। वैष्वलोकनि अर्थसत्ताक स्वामी बनलाह। मूलवासी अर्थात आदिवासी अन्त्यज बनि गेलाह। बहरबैया लोक कम संख्या मे आयल रहथि तेँ कृषि कर्यक लेल वा आनो प्रयोजन सँ प्रतिलोम विवाह जोर पकरलक। जकर चर्चा मनुस्मृति आ मिथिलाक इतिहास मे बिस्तार सँ अछि। द्विजक संख्या कम रहने, एहि ठामक आदिवासीक देवीश्देवता,पावनिश्तिहार आ नेमश्तेम अपनौलनि। जहि स ब्राह्मणीकरण भऽ गेल। समाजक सत्ता ब्राह्मणक हाथ मे छलनि तेँ हुनके जीवनश्षैली संस्कृति बनल। बहुसंख्यक मूलवासी पर एकटा नवश्संस्कृति आरोपित कयल गेल। औझुका जेँका प्रचारश्प्रसारक माध्यम त नहि छल, मुदा जे किछु छल ओ हुनके सभक बीच छलनि। लिखैकश्पढ़ैक सुविधा आ सामथ्र्य रहने हुनके (द्विजिक) संस्कृति सम्पूर्ण मिथिलाक संस्कृति रसेश्रसे बनि गेल। मुदा मूलवासीक जीवनश्शैली आ रीतिश्नीतिक पूर्ण विलयन ने त संभव छल आ ने से भेल। आइयो ओ (मूलवासी) दूबि बनि माटि पकड़ने छथि। जकर संस्कृति लोक संस्कृत कहल जाइत छैक।
मूड़न आ उपनयन, आब सेहो काम्य संस्कारक कोटि मे अबैत जा रहल अछि। अखनो मिथिला मे ढ़ेरो जाति बसल अछि। किछु जाति छोड़ि बहुसंख्यक जातिक बीच उपनयन प्रथा नहि अछि तेॅ उपनयन के मिथिलाक संस्कार कोना मानल जाय? हाँ, खंडित संस्कार कहल जा सकैत अछि। तहिना मूड़नोक अछि। एक रुप मे मूड़नोक चलनि नहि अछि। केयो देवस्थान जा मूड़न करबैत त क्यो गंगाकात जा। केयो गामे मे कबुलाश्पाती द करबैत त केयो बिना गीतेश्नाद,पूजेश्पाठ केने,करैत। केयो समाज मे खीरश्टिकड़ी बाॅटि करैत त क्यो भोजश्भात कऽ। तेॅ सब मिला के देखला पर प्रष्न उठैत जे मुड़नक कोन रुप मानल जाय? तहिना विवाहोक संबंध मे प्रष्न उठैत? कुमार बर आ कुमारि कन्याक संग विवाह प्रचलित अछि। मुदा द्वितीय बर आ कुमारि कन्याक संग विवाह होइत जखन कि बहुसंख्यक जाति मे द्वितिय बरश्कन्याक विवाह सेहो होइत। द्वितिय कन्याक संग कुमार बर के सेहो होइत अछि तहिना मृत्यु संस्कार मे सेहो एकरुपता नहि अछि। मृत्यु के शोक बुझि गीतिश्नाद नहि होइत। मुदा प्रष्न उठैत जे मृत्यु शोकेक संस्कार किऐक थिक? हाॅ, असामयिक मृत्यु के शोकक श्रेणी मे राखल जा सकैत। मुदा उचित आयु बीतला परक मृत्यु के शोक किऐक मानल जाय? जहिना प्रकृति मे देखैत छी जे अपन पूर्ण आयु पाबि स्वतः नष्ट भऽ जाइत अछि तहिना त मनुष्यो थिक। मुदा ढ़ोरो प्रष्न उठलाक उपरान्तो समाज, विवाह आ मृत्यु के व्यवहारिक संस्कार रुप मे अपनौने अछि। छिटश्फुट ढ़ग सँ जे किछु होइत हो मुदा समुद्र रुपी समाज, सब कुछ अपना पेट मे समेटि लैत अछि।
व्यक्तिगत जीवनक समस्या सँ ऊपर उठि कऽ सार्वजनिक जीवन जीवाक एहि अभ्यास कालक महत्व आइयो अछि। सन्यास यैह थिक। ब्रह्मचर्य जीवन ज्ञान अर्जनक होइत। गृहस्ताश्रम व्यवहारिक जीनगी होइत, जे उपार्जन क जीवनश्जीवाक माध्यम होइत। नव परिवारक सृजन होइत। जहि सॅ समाज आगूओ बढ़ैत आ समृद्धो होइत। तेसर अवस्था वा अंतिम संन्यास अवस्था तक पहुँचैतश्पहुँचैत ज्ञान आ कर्म सँ पूर्ण मनुष्य केँ अज्ञान आ अबोध मनुष्यक सेवा मे लगि जायब, बेजाय नहि। वास्तव मे ओ जरुरियो अछि।
संस्कार गीतक अर्थ थिक विभिन्न संस्कारक प्रसंग मे गाओल जायवला गीत। ई लोक प्रचलित गीत थिक। तेँ एहि मे लोक गीतक आत्मा बसैत अछि। लोक गीतक मनोहर फुलवाड़ी मे यदि संस्कार गीत के हटा देल जाय तँ ओ निष्प्राण भऽ जायत। यैह कारण थिक लोकगीतक, प्रायः समस्त विषेषता संस्कार गीत मे उपलब्ध अछि। मृत्यु संस्कार केँ छोड़ि अन्य सभ संस्कार आनन्दोत्सवक माहौल मे मनाओल मे जाइत अछि। उमंगमय वातावरण मे नारी कंठ सँ निकलैत स्वरलहरी देह मे थिरकन, हृइय मे झंकार आ मस्तिष्क मे चुलबुली उत्पन्न कऽ दैत अछि। गीति गायव मिथिलाक सभ नारश्नारीक सहजात गुण रहल अछि। जेना दखैत छी जे मूड़न, उपनयन, विवाह इत्यादिक समय सभ नारी समवेत स्वर मे गीति गबैत छथि। जे मिथिलाक धरोहर छी। तहिना पुरुषो पावनि आ धार्मिक कार्य मे सभ मिलि गबैत छथि।
संस्कार गीत लाकगीतक अंग थिक। कहल जाइत अछि जे लोकगीतक रचनाकार नहि होइत छथि, ओ सार्वजनिक रचना होइत अछि। एकर वास लोक कंठ मे अछि। एक कंठ सँ दोसर कंठ धरि जाइतश्जाइत गीतक स्वरुप बदलि जाइत। ततबे नहि! गीतक भास सेहो बदलैत। एक्के गीत भास बदलिश्बदलि कत्ते रुप मे गाओल जायत। तेँ संस्कार गीत मे एकरुपताक अभाव भेटैत अछि। स्वभावगत एहि स्थितिक दोसर परिणाम थिक भनिताक बेलगाम प्रयोग। गीत गौनिहारि सभ अपने फुरने कोनो गीत मे कोनो रचनाकार नाम भनिताक रुप मे जोड़ि दैत छथि। विद्यापतिक रचना उमापतिक भ जाइत त कखनो उमापतिक चंदा झाक वा मनबोधक। ततबे नहि मैथिली क्षेत्र सँ बाहरोक रचनाकार जना तुलसी, सूर दास,मीरा इत्यादि मिथिलाक माएश्बहीनिक कंठ मे आबि मिथिलेक आ मैथिलिऐक गीतिकार बनि जाइत छथि। जे उचित आ अनुचित दुनू थिक। उचित एहि लेल जे हुनकर लोकप्रियता विनयपत्रिता, रामायण, सुरसागर माध्यम सँ एतेक अधिक प्रचलित भऽ गेल अछि जे अपन बनि गेल छथि। जहाँ धरि शब्द टूटैक प्रष्न अछि ओ ज्ञानश्अज्ञानक बीचक बात थिक। भषाक जन्म आम जनक बीच होइत। किछु नव शब्दो जन्म लैत अछि आ शुद्व शब्द टूटि कऽ नवो बनि जायत अछि। तेँ कोन गीत किनकर लिखल थिकन्हि, संस्कार गीत मे वुझब कठिन भऽ जायत अछि। स्पष्ट अछि जे संस्कार गीत मैथिलश्महिलाक परिष्कृत सांस्कृतिक चेतनाक परिचायक थिक।
मिथिला मे संस्कार गीत अनौपचारिक षिक्षाक माध्यम अछि। मैथिल समाज मे नारीक लेल औपचारिक षिक्षा वर्जित छल। सिर्फ नारिये नहि माटि परक लोकक लेल सेहो छल। कहल जाइत अछि जे वेद वा गीता पढ़ला सँ ओ बताह भऽ जायत। नारी मे विदुषी होइत छलीह। संस्कार गीतक संबंध संस्कृति आ साहित्य से त अछिये, समाज स सेहो अछि। संस्कृति, साहित्य आ समाजक अन्तरावलम्वन केँ जत्ते नीक जेँका संस्कार गीत प्रकट करैत अछि तत्ते एहि प्रकारक आन कोनो घटक नहि। संस्कार गीतक संकलनश्प्रकाषन सँ मौखिक परम्परा साहित्य समेटल जाइत अछि आ ओ साहित्य अघ्ययनश्विष्लेष्णक आधार प्रस्तुत करैत अछि
मिथिला मे संस्कार गीतक श्रीगणेष होइत अछि गोसाउनिक गीत सँ। एहि स मैथिल समाजक धर्मभावनाक ज्ञान होइत अछि। किन्तु प्रष्न अछि जे संस्कारक अवसर पर ई धर्मश्भावना मुख्यतः गोसाउनिऐक गीत मे किऐक प्रकट होइत अछि? स्पष्ट अछि जे एहिठाम गोसाउनि गोसाई सँ बेसी महत्वपूर्ण छथि। भगवानोक गीत मिथिला मे गाओल जाइत अछि मुदा संस्कार कर्मक अवसर पर जे प्रधानता भगवती गीतक अछि से भगवानोक गीतक नहि! आब प्रष्न उठैत जे मिथिला मे देवीश्पूजाक प्रमुखता किऐक अछि? सभ जनैत छी जे देवीश्पूजा तंत्रसाधना सँ सम्बद्ध अछि। किछु इतिहासकारक मत छन्हि जे तंत्रसाधना असंस्कृत जनजातिक समाज सँ आयल अछि। जकरा कालान्तर मे ब्राह्मणवादी लोकनि अपना लेलनि। बहुत दिन धरि तंत्रश्साधना अवैदिक कार्य बूझल जायत छल। रसेश्रसे अपनवैतश्अपनवैत सनातन धर्म मे जोड़ा गेल। वैदिक धर्मावलम्बी सभ सेहो तंत्रश्साधना अपना देवी पूजा दिषि आकृष्ट भेलाह। एहि सँ अतिरिक्त मिथिलाक समाज मे शैवश्धर्मक प्रमुखता छल अथवा शाक्त धर्मक। जे विवाद विद्वत मंडली मे बहुत दिन धरि चलल। पनचैती सँ फरिआयल जे मिथिलाक लोक पंचदेवोपासक होइत छथि। ई मान्यता पुरानकालक समन्वयवादी धार्मिक जीवनक देन थिक। संस्कार गीतक मध्यकालीन चरित्र के देखार करैत अछि।
गीत संस्कार मे मैथिली गीतक अपन इतिहास अछि। लोचनक ‘रागतरंगिणी’ मे मैथिल गीतक जे इतिहास लिखने छथि तदनुसार एकर जन्म तेरहमश्चैदहम शताब्दी मे भेल। षिव सिंह आ विद्यापति समकालिन छलाह। हुनके पितामह सुमति मैथिली गीतक परम्पराक प्रारंभकर्ता छलाह। एहि प्रकारे मिथिलाक देषी गीत परम्पराक स्थापना भेल। ऐतिहासिक आाधार पर यैह मानल जाइत अछि मुदा गीत गेवाक प्रवृति मनुष्यक विकासक संग जुड़ल अछि। जहि आधार पर आरो पुरान कहल जा सकैत अछि।
गीत गेवाक ढ़ंग, जकरा राग कहल जाइत, मिथिला मे भास कहल जाइत छैक। मिथिला भासक अपन विषिष्टता छैक। संस्कार गीत एहि भासक भंडार छी। हँ,किछु त्रुटिपूर्ण बात सेहो अछि जे कम जनने एक्के गीत (समदाउन) खुषीक समय मे सेहो गवैत छथि आ शोकक समय सेहो जखन कि दुनूक लेल अलगश्अलग विषयवस्तु होइछ। तहिना बेटाक विवाह मे कुमार गीत आ बेटीक लेल कुमारि गीत मे सेहो अंतर होइत अछि। जनमक समय खेलौना आ सोहर मे सेहो अंतर अछि। ...
-नवेन्दु कुमार झा
सेमीफाइनलमे धाराशायी भेल राजग
बिहार विधान सभाक सेमीफाइनल प्रदेशमे सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधनक लेल परेशानी बाला रहल। एहि चुनावमे मतदाता नीतीश सरकारकेँ जोरक झटका धीरेसँ देलनि। विधान सभाक अठारह सीटक लेल भेल उप चुनावक जे परिणाम सोझाँ आयल अछि एकर कल्पना शायद सत्तारूढ़ गठबंधन नहि कयने होयत।ज्यों एकर एहसास रहैत त चुनाव प्रचारक क्रम मे राजगक नेता अपना-आपके आत्म विश्वास सँ भरल प्रकट नहि करितथि। लोकसभा चुनाव आ विधान परिषदक स्थानीय निकाय कोटाक चुनाव मे भेटल सफलता सँ उत्साहित मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एहि चुनाव मे जे राजनीतिक प्रयोग कयलनि से असफल रहल। राजनीति मे परिवारबाद विरूद्ध डेंग उठायब आ दल-बदलू के तरजीह देब हुनका लेल महग पडल। एहि चुनाव मे दल बदलूक पूरा मान-मर्दन मतदाता कयलनि अछि। भाजपा छोडि राजदक टिकट पर मूँगेर सँ जीतल विश्वनाथ प्रसाद गुप्ता आ उदय माँझी के छोडि आन उम्मीदवार चुनाव नहीं जीति सकल।
अठारह सीट पर भेल मतदानक परिणाम राजद-लोजपा गठबंधनक पक्ष मे गेल अछि। एहि गठबंधन के नौ सीट पर सफलता भेटल अछि त राजग के मात्र पाँच सीट पर संतोष करय पडल अछि। काँग्रेस आ बसपा लेल ई चुनाव लाभदायक रहल। काँग्रेस जतय दूटा सीट कय झटकि लेलक ओतहि बसपा एक सीट हथिया कय उत्तरप्रदेशक सीमा सँ सँटल क्षेत्र सभ मे परिवार बादक विरूद्ध जे विगूल मुख्यमंत्री फूकलनि से निरर्थक गेल। पूरा बिहार नीतीश के, घोसी जगदीश के’क नाराक संग जदयू सांसद जगदीश शर्माक कनिया शांति शर्मा निर्दलीय उतरि जीतय मे सफल रहलीह एहि ठाम जदयूक उम्मीदवार तेसर नम्बर पर चलि गेलनि।
दल बदलू के जनता रास्ता देखा देलक। राजद छोडि जदयू मे सम्मिलित भेल रमई राम, श्याम रजक, अजय कुमार टुन्ना, जदयू छोडि भाजपाक टिकट पर चुनाव लडल अभय सिंह, जदयू छोडि राजदक दामन थामने विजय राम आ ललन पासवान सहित कतेको दल बदलू विधान सभाक चौखट धरि पहुँचय मे असफल रहलाह। प्रदेश मे नव सोशल इंजिनियरिंग मे लागल मुख्यमंत्री नीतीश कुमारक प्रयास एहि चुनाव मे असफल रहल। महादलित आ अति पिछडाक रूप मे नव वोट बैंक तैयार करबाक प्रयास के सेहो झटका लागल अछि। एहि उपचुनाव मे सात टा सुरक्षित क्षेत्र सेहो छल जाहि मे सँ मात्र दूटा सीट जदयू के भेटल जखनकि राजद आ लोजपा अपन-अपन कब्जा बाला सुरक्षित सीट बचब मे सफल होयबाक संगहि लोजपा बोधगया (सु0) आ काँग्रेस चेनारी (सु0) सीट राजग सँ छीनि लेलक। ई उपचुनाव न्यायक विकास’क नारा देबय बाला नीतीश सरकारक लेल जनताक चेतौनी अछि त राजद आ लोजपाक लेल आत्म विश्वास बढब बाला कहल जा सकैत अछि। काँग्रेसक लेल ई चुनाव प्रयोग पहिल सफलता अछि असगर लडबाक काँग्रेसक निर्णय सँ एहि सँ आलाकमान पर दबाब बनब मे सफलता भेटत। उत्तरप्रदेश सीमा सँ सटल नौतन सीट पर बसपा अपन कब्जा जमा सभ राजनीतिक दलक लेल खतराक घंटी बजा देलक अछि।
उपचुनावक परिणामक सभ दल अपना-अपना दलक मोताबिक विश्लेषण क रहल अछि। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हारिक कारण स्थानीय मुद्दा के जनैलनि अछि आ एहि हारिक चिंतन करबाक बात कहलनि अछि। भाजपाक निशाना पर काँग्रेस अछि। भाजपाक अध्यक्ष राधामोहन सिंहक मानब अछि जे राजद-लोजपा आ काँग्रेस भीतरे-भीतरे एकजूट छल आ राजग के नोकसान पहुँचैबा लेल काँग्रेस असगर मैदान मे उतरल जहि सँ राजग के नोकसान भेल अछि। लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान आ राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद एहि जीत पर खुशी व्यक्त करैत कहलनि जे चुनाव परिणाम नीतीश सरकारक पोल खोलि देलक अछि। विकासक नाम पर जनताक ठगबाक काज आ महादलित आ अति पिछडलक नाम पर समाज के बँटबाक प्रयासक जबाब जनता द देलक अछि। काँग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार शर्मा दू सीट पर भेटल सफलता आ पार्टी प्रदर्शन के सोनिया गाँधी आ राजीव गाँधीक बढैत लोकप्रियताक परिणाम जनौलनि अछि। भाजपाक आरोप के खारिज करैत श्री शर्मा कहलनि अछि जे काँग्रेस ककरो वोट बैंक मे सेंधमारी नहि कयलक बल्कि काँग्रेसक जे वोट बैंक छिटकि गेल छल ओकरा वापस अपना दिस अनलक अछि।
हाँलाकि एहि परिणाम सँ सरकारक स्वास्थ्य आ स्थिरता पर कोनो असरि नहीं पडत मुदा भाजपा आ जदयूक भीतर आक्रोशक विस्फोट भ सकैत अछि आ एकर किछु बानगी सेहो सोझा आयल अछि। ओना एहि चुनाव के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आत्म विश्वासक संग सेमीफाइनल कहैत छलाह आ खेलक नियमक मोताबिक सेमीफाइनल हारलाक बाद फाइनल मे स्थान नहीं भेटैत अछि मुदा राजनीतिक नियम अपना अनुसार बनैत अछि। हारि के जीत आ जीत के हारिक विश्लेषण राजनीतिक दल आ राजनेता अपना अनुसार सँ करैत छथि आ नियमानुसार फाइनल मे फेर राजग, लोजपा-राजद आ काँग्रेस एक दोसरा के सोझा होयत त परिणाम कि होयत ई त भविष्यक गर्त्त मे अछि मुदा सत्तारूढ भाजपा-जदयूक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधनक बढल आत्म विश्वासक खतराक घंटी जनता बजा देलक अछि।
वि0 सभा विजयी उम्मीदवार निकटतम प्रतिद्वन्दी भोटक
क्षेत्र आ दल आ दल अंतर
बगहा(सु0) कैलाश बैठा नरेश राम 6950
(जदयू) (काँग्रेस)
नौतन नारायण प्रसाद मनोरमा प्रसाद 13326
(बसपा) (जदयू) वारिसनगर विश्वनाथ पासवान डा0 संजय पासवान 6235
(सु0) (लोजपा) (भाजपा)
कल्याणपुर अशोक वर्मा रंधीर कुमार 19029
(राजद) (जदयू)
बोचहाँ मुसाफिर पासवान रमई राम 4000
(सु0) (राजद) (जदयू)
औराई सुरेन्द्र राय राम सूरत राय 8801
(राजद) (जदयू)
अररिया विजय कुमार मंडल अजय कुमार झा 13468
(लोजपा) (भाजपा)
बेगूसराय कृष्ण सिंह सुदर्शन सिंह 9259
(भाजपा) (लोजपा)
त्रिवेणीगंज दिलेश्वर कामत दीनबन्धु यादव 11419
(जदयू) (लोजपा).
धोरैया मनीष कुमार नरेश दास 2695
(सु0) (जदयू) (राजद)
मूँगेर विश्वनाथ प्र0 गुप्ता मो0 सलाम 4152
(राजद) (जदयू)
सिमरी चौधरी महबूब अली डा0 अरूण कुमार 5870
बख्तियारपुर कौसर (काँग्रेस) (जदयू)
रामगढ अम्बिका प्र0 यादव नरेन्द्र कु0 सिंह 2957
(राजद) (बसपा)
चैनपुर बृजकिशोर बिन्द विरेन्द्र कु0 सिंह 3369
(भाजपा) (राजद)
चेनारी मुरारी प्रसाद गौतम ललन पासवान 1150
(सु0) (काँग्रेस) (राजद)
घोसी शांति शर्मा दिनेश प्र0 यादव 5200
(निर्दलीय) (राजद)
बोध गया कुमार सर्वजीत विजय कुमार मांझी 7662
(सु0) (लोजपा) (भाजपा)
फुलवारी उदय मांझी श्याम रजक 1274
शरीफ(सु0) (राजद) (जदयू)
सीटक हेरा-फेरी
विस0 सीट 2005 उपचुनाव
रामगढ राजद राजद
चैनपुर राजद भाजपा
चेनारी जदयू काँग्रेस
बेगूसराय भाजपा भाजपा
घोसी जदयू निर्दलीय
नौतन जदयू बसपा
बगहा जदयू जदयू
औराई जदयू राजद
बोचहाँ राजद राजद
फुलवारी राजद राजद
कल्याणपुर जदयू राजद
वारिसनगर लोजपा लोजपा
त्रिवेणीगंज जदयू जदयू
बेगूसराय भाजपा भाजपा
मूँगेर जदयू राजद
अररिया भाजपा लोजपा
धोरैया जदयू जदयू
सिमरी बख्तियारपुर जदयू काँग्रेस
परिणाम तालिका
दल सीट(सं0) मे विधान सभा सीट राष्ट्रीय जनता दल 06 फुलवारी शरीफ(सु0), रामगढ,
मूँगेर,बोचहाँ(सु0), औराई आ
कल्याणपुर।
लोकजनशक्ति पार्टी 03 वारिसनगर(सु0), अररिया आ
बोढगया(सु0)।
जनता दल यूनाइटेड 03 बगहा(सु0), धोरैया(सु0) आ
त्रिवेणीगंज।
भारतीय जनता पार्टी 02 चैनपुर आ बेगूसराय।
काँग्रेस 02 चेनारी(सु0) आ सिमरी
बख्तियारपुर।
बहुजन समाजवादी पार्टी 01 नौतन।
निर्दलीय 01 घोसी।
कुल 18
......

Suggested citation: जगदीश प्रसाद मंडल. “संस्कार गीत आ लोकगीत नाद.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 43, 2009-10-01. https://www.videha.co.in/research/2009/43/संस्कार-गीत-आ-लोकगीत-नाद.htm

मूल विदेह अंक / Original issue