मऊ वाजितपुर सँ विद्यापतिनगर परिवर्त्तन-यात्रा
मऊ वाजितपुर गाम समस्तीपुर जिलाक अन्तर्गत सुदूर दच्छिन भाग मे बसल अछि। एकर लगीचहि दक्खिनवरिया कोन पर कहियो गंगाक अविरल धार बहैत रहल होएत। आजुक तिथि मे नदीक छारनिटाए बाँचि गेल अछि। गंगाक इएह दियारा क्षेत्र मे इतिहास प्रसिद्ध गाम थिक चौथम। सामाजिक संरचनाक दृष्टिऐ सम्प्रति राजपूत ओ यादव बहुल जाति चौथमक ‘माइनजन’ थिकाह मुदा अत्यन्त पिछड़ल समुदाय मे परिगणित 261 अत्यन्त पिछड़ल समुदाय मे कैक जातिक अवस्थिति सेहो अछिये। अनुसूचित जाति क सदस्यहुँ सँ गाम निमुन्न नहिये अछि। तैयो चोथमक प्रसिद्धि आ ऐतिहासिक महत्त्व रहल अछि महाकवि विद्या-पतिके लऽ कए। किंवदन्ती अछि जे महाकवि अपन निम्न रचनाक उपरान्ते गंगालाभक सद्इच्छा व्यक्त कयने रहथि-
सपन देखल हम शिव सिंह भूप
बतीस बरख पर सामर रूप।
बहुत देखल हम गुरूजन प्राचीन
आब भेलहुँ हम आयु विहीन।
आओर लोकमान्यताक जनतब कहैछ जे बिस्फी सँ जीवनक महाप्रयाणक चलल महफा एही चौथमे गाम मे महाकविक आदेश सँ राखल गेल छल जतए गंगा अपन मुख्य धार सँ बहराए हिनक नश्वर शरीर के जल स्पर्शक अवसर प्रदान करैत लगले अपन मुख्य धार मे घुरि गेल छलीह। चमथाक निकटस्थ मऊ वाजिदपुर गाम आजुहुँ ओही स्थान पर स्थित अछि।
पूर्व मध्य रेलवेक सोनपुर मण्डलक हाजीपुर-बछवाड़ा स्टेशनक पतियानी मे विद्यापतिनगर स्टेशन सँ चौथम बड़ लगीचहि अछि। एहि स्थान के पथ निर्माण विभाग चारि दिस सँ पक्की सड़क सँ जोड़ने अछि। एक सड़क बछवाड़ा मे जा कए राष्ट्रीय उच्च पथ सँ जा मिलैत अछि। दोसर मोहिउद्दीननगर होइत महनार-विदुपुर सँ हाजीपुर धरि गेल अछि। तेसर दलसिंहसराय-नरहन रोसड़ा-बहैड़ी क मार्ग सँ लहेरियासराय के जोड़ैत अछि आ चारिम सड़क सरायरंजन-समस्तीपुर दुनू स्थान केँ छूबैत अछि।
मऊ वाजिदपुर गामक एक पैघ भू-खण्ड आब विद्यापतिनगर नाम सँ बूझल जाइछ। तैयो बूढ़-पुरान लोक द्वारा विद्यापतिनगर के ‘वाजिदपुर बाबाधाम’ कहि सम्बोधन कएनिहारक संख्या तऽ अछिये। महाकविक समाधि भूमि होएबाक करणे बरोबर लोकक आबाजाही लागल रहैत अछि तँ विद्यापतिनगर केँ प्रखण्डक स्तर प्रदान कएल गेल अछि जे समस्तीपुर जिलान्तर्गत थिक। एतय ‘विद्यापति भवन’ नामक सामुदाथिक भवन निर्मित अछि। बिहार सरकारक पर्यटन विभाग स्थानक ऐतिहासिकता मे देखैत‘पर्यटन सूचना’ केन्द्र तऽ वनौने अछि मुदा सँ मात्र औपचारिकतावश।
राजस्व ग्राम मऊ वाजिदपुर इएह विद्यापतिनगर क्षेत्र मे महाकविक समाधि भूमि अछि। एहि स्थानक विडम्बना रहल अछि जे एकर इतिहासपरक अनुसंधान अन्वेषण आ विवेचन करबाक प्रयोजन कहियो-कोनहुँ स्तर पर नहि भऽ पाओल अछि। हम सभ बिस्फी आ एखनुक विद्यापतिनगरक महाकविक कालजयी व्यक्तित्वक संदर्भ मे स्थानीयताक दृष्टि सँ भौगोलिक परिवेशक संदर्भ मे तखनुक सामाजिक-सांस्कृतिक परिदृश्य मे अध्ययन करब आवश्यक नहि बूझि सकलहुँ अछि। ते विद्यापति सँ जुड़ल स्थान ‘स्ट्रेफोर्ड ओवेन आन’ नहि बनि सकल अछि। वर्ड्सवर्थ सँ सम्बद्ध स्थान पर कैक तथ्यात्मक आलेख अभाव हम सभ आइ धरि किंवदन्ती लोककथन आ परम्परागत आस्था के स्वीकार करैत रहलहुँ अछि जे तथ्यक निष्पक्षता पर प्रश्न ठाढ़ करैत रहल अछि, लोकमान्यताक विसंगाति के देखार करैत रहल अछि इतिहासक मापदण्ड के आघार भूमि नहि प्रदान कऽ सकल अछि। ते आइ चौथम आ विद्यापतिनगर प्रसंग मे जतेक मुंह ततेक वाणी। विद्यापतिनगर मे महाकविक समाधि भूमि अछि। तकर समीपहिं पीपरक एवं अजोध गाछ एखनहुँ अछि। कहल जाइछ जे चमथा अएला उत्तर ओ एही गाछक नीचां विश्राम कएने रहथि। क्यो ईहो कहैछ जे इएह बुढ़वा पीपर हुनक समाधिस्थक साक्ष्य अछि। जे-सँ। आजहुँ एहि गाछ के महाकवि सँ जुड़ल रहबाक आस्था अछि। ते लोक अपन संतान के संस्कार वृद्धि लेल ताविज एहि मे बन्हैत अछि।
जतय महाकवि समाधिस्थ भेल छलाह आ मां गंगा अपन अमोध सलिला मे हुनका जलमग्न कऽ देने रहथिन ततय आइ एक विशाल प्रस्तर मन्दिर अछि। लाल रंगक मंदिर एहि मंदिरक गर्भ गृह मे महाकवि विद्यापति ओ महादेवक प्रस्तर प्रतिमा छेन्हि । दुनू प्रतिमा कारी पाथरक अछि। कहल जाइछ जे ई दुनू प्रतिमा स्वत: स्फुट अछि। एकरा महाकविक महाप्रयाणक दोसर दिन देखल गेल छल। महाकविक एहि विशाल मंदिरक पूर्व भाग मे उत्तर सँ दच्छिन भाग मे चारि छोट-छोट मंदिर अछि। मुख्य मंदिरक वहिर्गमन द्वार सँ बहरएला उत्तर पार्वती मंदिर अछि। श्वेत प्रतिमा मे पार्वती ठाढ़ मुद्रा मे छथि। एकर वाम भाग मे श्वेत पाथरक महावीरजीक विशाल मूर्त्ति अछि। तकर बाद बसहा आ अंतिम काल भैरव क मूर्ति जे कारी पाथरक विचित्र ओ भयावह लगैछ। कला सौष्ठव ओ धार्मिक अनुष्ठानक दृष्टि सँ ई मंदिर एवं एतूका प्रतिमा सभ मूर्तिकला ओ वास्तुकलाक अनुपम उदाहरण अछि। सामने एक नौलखा प्रवेश अछि जे गाम मलकलीपुरक सम्पन्न लोक द्वारा बनाओल गेल अछि।
वर्त्तमान विद्यापति मंदिरक संग कैक सत्य कथा संलग्न अछि। कहल जाइछ जे महाकविक महाप्रयाणक बाद पाथरक दू प्रतिमा विद्यापति ओ शिवलिंग स्वत: स्फुट भैल छल। एकर सटले पीपरक नव अंकुर कोपरि सेहो निकलि आयल छल। पछाति एतय धार्मिक कृत्य होमय लागल। तखन दुलारपुर महन्थक तखनुक मैनेजर दिस सँ टीनक छोट-छीन मंदिर बनबौलनि। बाद मे बछवाड़ाक कोनो व्यक्ति ई मंदिर क निर्माण करौलनि। एहि समय दलसिंहसराय थानाक केवटा गामक भेषधारी चौधरी केँ पचहत्तरि वर्षक अवस्था मे मंदिरक कृपा सँ पुत्र भेल छलन्हि।
एक बेर तखनुक नोर्थ बंगाल रेलवे एहि मंदिर ओ पीपर गाछ के ध्वस्त करबाक प्रयास कएने छल मुदा ओहि अंग्रेज अफसर के काल कवलित होमय पड़ल छल। मंदिरक निकट एक ब्रजगिरा टीला अछि। कहल जाइछ कोनो मुगलकालीन बादशाह महाकविक समाधिक पशास्ति सुनि क्रोधित भऽ गेल छलाह। मंदिरक प्रशस्ति गाथा सुनि कए एकरा ध्वंस करवाक नीयत सँ ओ हजारक संख्या मे सैनिक पठौलनि। सैनिक सभ पड़ाव दए रहल छल कि भयंकर वर्षाक संग ठनका खसल आ सौनिक विजय नहि भऽ सकल।
एहि मन्दिरक परिसरमे शिवराति ओ वसन्त पंचमी क अवसर पर पैघ मेलाक आयोजन होइछ।
हमर जनैत विद्यापति सँ जुड़ल स्थान के पर्यटन क दृष्टिऐ विकसित करबाक योजना आइ धरि राज्य सरकार किंवा मैथिली सेवी संस्थाक स्तर पर नहि बनाओल गेल अछि। आइ ‘बुद्धिष्ट सर्किट’ क माध्यम सँ राज्य मे भगवान बुद्ध सँ जुड़ल प्रमुख स्थान के चिन्हित कएल गेल अछि। ‘विद्यापति सर्किट’ मे बिस्फी उगना स्थान आ विद्यापति नगर के जोडि़ पर्यटनक संभावना ताकल जा सकैछ।
पंचानन मिश्र
विद्यापति जयन्ती (31 अक्टूबर 09) क अवसर पर