विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मिथिलाक कतिआएल सिद्धपीठ

पंचानन मिश्र · 2009-10-15 · अंक 44

मिथिलाक कतिआएल सिद्धपीठ
आसिनक शारदीय नवरात्र मिथिलाक सामाजिक, सांस्‍कृतिक, ऐतिहासिक अस्मिताक विशिष्टता के जोगाए रखने रहल अछि। अदौ मे ई प्रधानत: घरैया-पूजाक स्‍वरूप ग्रहण कएने छल तहुखनहो एकरा मे एकात्‍मकता, संस्‍कारात्‍मकता ओ अंश धरि सामाजिकता विद्यमान छल। आब त’ डेगे-डेग ई सार्वजनिक स्‍थापन भऽ दुर्गा मूर्त्ति पूजाक प्रवर्त्तक मिथिला भूपति राजा कंसनारायणक स्‍मृति के जग जियार कए रहल अछि। अभिप्राय जे सम्‍पूर्ण मिथिलांचल मे मूर्त्ति स्‍थापित कए किंवा प्रस्‍तर प्रतिमाक पूजाक माघ्‍यम सँ जीवन के क्रियाशील रखवाक परम्‍परा रहल अछि। राजेश्‍वरी (दोखर मधुबनी), गिरिजास्‍थान (फुलहट मधुबनी), भुवनेश्‍वरी (भगवतीपुर मधुबनी), भद्र कालिका (कोइलख मधुबनी), चामुण्‍डा स्‍थान (पचही मधुबनी), सोनामाइ (जनकपुर नेपाल), योगमित्रा (जनकपुर नेपाल), कालिका देवी (जनकपुर नेपाल), राजेश्‍वरी देवी (जनकपुर नेपाल), छिन्‍नमस्तिका (उजान आ मिर्जापुर दरभंगा), वनदुर्गा (खरड़क मधुबनी), सिंधेश्‍वरी देवी (सरिसव मधुबनी), देवी स्‍थान (अंधराठाती मधुबनी), कंकाली देवी (रामबागपैलेस दरभंगा), उग्रतारा (महिषी सहरसा), दुर्गास्‍थान (उच्चैठ मधुबनी), जयमंगला स्‍थान (मुँगेर), पूरन देवी (पूर्णियाँ), काली स्‍थान (हाजमा चौराहा दरभंगा), कात्‍यायणी स्‍थान (वदलाघाट सहरसा), बासठि योगिनी (सहरसा) आदि (स्‍त्रोत कुरूक्षेत्रम् अन्‍तर्मनक: गजेन्‍द्र ठाकुर) स्‍थान पर आसिन आ अन्‍यहुँ समयावधि मे भेल आयोजन भनहि प्रसिद्धि पओने रहल अछि मुदा अन्‍यहुँ कैक स्‍थान जतय शताब्‍दीयों सँ पूजाक आयोजन सेहो इतिहासक अंशहि बूझल जएबाक चाही। एहि संक्षिप्‍त आलेख मे मेन स्‍ट्रीम सँ विलग किछु स्‍थानहिंक चर्च भेल अछि जकर स्‍थापत्‍यक महत्ता अछि, लोक परम्‍परा अलग छवि बनौने रहल अछि, सांस्‍कृतिक प्रतिमानक गढ़नि कैक रूप मे गढ़ल जाइत रहल अछि।
मधुबनी जिलाक फुलपरास अनुमंडलक न्‍योर गाम सँ डेढ़ किलोमीटर उत्तर सखड़ा मे सखड़ेश्‍वरी भगवतीक भव्‍य मन्दिर अछि। ई मन्दिर धार्मिक, सांस्‍कृतिक ओ सामाजिक एकताक जाग्रत प्रतीक थिक। एकर प्राचीनताक प्रसंग कहल जाइछ जे मिथिलाक कर्णाटवंशीय राजा नान्‍यदेव जखन शासनाच्‍युत भऽ गेलाह तऽ अपन कुलदेवी कुर्जा भवानी सँ रक्षार्थ प्रार्थना कयलनि। मां कुर्जा स्वप्न मे हुनका आदेश देलीह जे प्रात: स्‍नान करैत काल नदी मे जे कोनहुँ वस्‍तु भेटय ओ उठा कए चोट्टे पड़ा जायब आओर जाहि स्‍थान पर ई वस्‍तु खसि पड़य ततहि अपन शासन स्‍थापित करी। ताहि अनुसारेँ जनकपुर सँ सोलह माइल पश्चिम सिमरौनगढ़ मे कर्णाट वंशक राज्‍य पुन: स्‍थापित भेल जे पांच खाढ़ी धरि शासक रहैत गेलाह अन्तिम शासक सक्रदेव सिंह एहि भगवती के यंत्रक सिंहासन पर मन्दिर बनाए स्‍थापित कएलनि। 1934 ई. क भूकम्‍प मे मूल मन्दिर त’ खसि पड़ल मुदा अलौकिक शक्तियुक्‍त सिंहासन आजहुँ विद्यमान अछि। सखड़ेश्‍वरी वा सक्रेश्‍वरी भगवती राजा सक्रदेव सिंहक स्‍मृति मे नामित अछि।
मुजफ्फरपुर जिलाक मीनापुर प्रखण्‍डक पश्चिम छोर पर गण्‍डकी नदीक कतबइमे पानापुर गाम मे विख्‍यात भष्मी देवीक मन्दिर अछि। भगवती भष्मीक मूर्त्ति एकहि पाथर सँ तराशि बनाओल गेल अछि जकर दिप्‍ती आइयो मंद नहि भेल अछि। साइत मिथिलांचल मे इएह एक भगवती थिकीह जनिक सोझाँ पड़वा के पूजोपरान्‍त मुक्‍ताकाश मे विचरण करबाक लेल छोडि देल जाइछ। एतूका हवन कुंड् सँ प्राप्त भभूत मे चर्म रोग सँ मुक्तिक विश्‍वास पाओल जाइछ।
पुरातात्विक दृष्टि सँ पूर्णत: उपेक्षित ऐतिहासिक - सांस्‍कृतिक धरोहर के सुरक्षित रखने दरभंगा जिलाक मनीगाछी प्रखंडक मकरन्‍दा-भंडारिसम गाम स्थित मां वाणेश्‍वरी एखनहुँ आस्‍था एवं विश्‍वासक केन्‍द्र थिकीह। मनीगाछी प्रखण्‍ड मुख्‍यालय सँ 5 किलोमीटर दक्खिन-पश्चिम कोन मे डीह पर स्थित ई तांत्रिक साधना स्‍थल सामान्‍य धरातल सँ अनुमानत: 10 फीट ऊँच अछि। किछु अन्‍वेषक एहि डीह के कर्णाटवंशीय शासकक प्रशासकीय स्‍थल मानैत छथि तँ किछु राजा शिव सिंहक गढ़। जे-से। मां वाणेश्‍वरीक प्रार्दुभावक सम्‍बन्‍ध मे कैक मान्‍यता थिक। कहल जाइछ जे वाण नामक भगवतीक एक उपासकक घर पुत्रीक जन्‍म भेल। जनिक रूप-गुणक प्रशंसा सुनि तखनुक यवन राजा बलजोडि वाणक पुत्री के अंगीकार करबाक लेल दूत पठौलनि जकर प्रतिक्रिया स्‍वरूप वाण-पुत्री स्‍वयं के प्रस्‍तर मे परिवर्त्तित कए जल समाधि लए लेने छलीह। आजहुँ एहि परिसर मे ओ ‘परसाइन पोखरि’ अवस्थित अछि जाहि मे सँ पाथरक मूर्ति निकालि पूजा-अर्चना आरम्‍भ भेल छल। एखनुक मंदिर निर्माणक सम्‍बन्‍ध मे कहल जाइछ जे महाराज लक्ष्‍मीश्‍वर सिंह पत्‍नी रानी लक्ष्‍मीवती द्वारा एहि भगवतीक पूजोपरान्‍त अपन भाए श्रीनाथ मिश्रक घर पुत्र होएबाक याचना कयने छलीह जे फलीभूत भेल छल आ 1916 ईo मे मन्दिर बनवाओल गेल।
पश्चिम चम्‍पारण जिलाक रामनगर प्रखंडान्‍तर्गत सोमेश्‍वर मे मां कालिका देवीक प्राचीन मंदिर अछि। हेवनि मे मंदिरक ऊपर नेपाली झंडा आ मंदिरक प्रवेश द्वार पर नेपाली भाषामे ‘हाम्रो अमर’ शिलापट्ट देखि विवाद उत्‍पन्‍न भऽ गेल छल।
दरभंगाक बेनीपुर अनुमण्‍डल मुख्‍यालय सँ पांच किलोमीटर उत्तर-पश्चिम अवस्थित नवादा गाम मे हयहट्ट देवी दुर्गाधाम सिद्धपीठ मानल जाइछ। एहि पीठक उत्‍पत्ति शिव प्रिया सती सँ जुड़ल थिक। तंत्र चूडामणि मे सतीक अंग सँ संबंधित कुल 52 शक्तिपीठक चर्च अछि। जाहि मे ईहो परिगणित अछि। देवी भागवत पुराण एवं मत्‍स्‍य पुराणक अनुसार सती केर वाम स्‍कन्‍ध ए‍तहि खसल छल। कहल जाइछ जे लगभग 600 वर्ष पूर्व राजा हयहट्ट द्वारा एतय जगदम्‍बाक मूर्ति स्थापित भेल। बहेड़ी प्रखंडक हावीडीह गामक एक साधक प्रतिदिन देवीक साधना-आराधना लेल अबैत छलाह। पछाति वृद्धावस्‍था मे दुर्बल कायाक कारण भगवतीक प्रेरणा सँ सिंहासन सँ मूर्त्ति उठाकए हावीडीह चलि गेलाह जतय आइयो ओहि मूर्तिक पूजा कएल जाइछ। पछाति हावीडीह सँ नवादा मूर्ति अनबाक लेल संघर्षक स्थिति बनि गेल। अन्‍तत: नवादाक सिद्धपीठ मे अगवे सिंहासन शेष रहल जकरहि पूजा होइत रहल अछि।
दरभंगाक घनश्‍यामपुर प्रखंड मुख्‍यालय सँ 8 किलोमीटर पर मां ज्‍वालामुखीक भव्‍य मंदिर एहि क्षेत्र मे भगवती डीहक नाम सँ प्रसिद्ध थिक। एतय मांक पिंडीक पूजा कएल जाइछ। कसरौर गामक पनचोभ मूलक ब्राह्मण परिवारक घर केर कुल देवी एकहि ठाम भगवती डीह मे विराजमान थिकीह। कहल जाइछ जे 600 वर्ष पूर्व उफरौल गाम वासी स्‍वo लखनराज पाण्‍डेय के हिमाचल प्रदेशक भिंडी जिलाक नगरकोट सँ दैवीय दर्शन भेल छलन्हि। काल क्रमें कसरौर मे पिण्‍ड बना पूजा होमय लागल । जकरा स्‍वoपाण्‍डेयक स्‍थापना मानल जाहछ। मां ज्‍वालामुखीक दर्शन सँ रोग निवारणक आस्‍था व्‍य‍क्‍त कएल जाइछ।
मधुबनी जिलाक जयनगर अनुमण्‍डल मुख्‍यालय मे प्रान्‍तक सभ सँ ऊँच दुर्गा मन्दिर अछि। एतय दुर्गा पूजाक अवसर पर जमीनक भीतर रहि कए साधना करबाक परिपाटी अछि।
सुपौल बजारक रामनगर दुर्गास्‍थान मे आब बलि नहि, छागरक परीक्षा लेल जाइछ। जौं छागर परीक्षाक क्रम मे दुर्गा कबूला स्‍वीकार करैत छथि तखनहि बलि प्रदान होइछ। स्‍नानोपरान्‍त छागर के कान पकडि उपर दिस उठा कए पुन: जमीन पर राखि देल जाइछ । छागर सिरा के हिला दैछ तखनहि बलि देल जाइछ अन्‍यथा नहि।
बेगूसराय जिलाक मंझौल अनुमण्‍डलक विक्रमपुर गाम मे पछिला 400 वर्ष सँ फूल, वेलपात ओ कलशक सहायता सँ माता जयमंगला देवीक प्रतिकृति बना कए दुर्गा पूजा करैत जाइत छथि । लगभग छ:(ह) हजारक आबादीवला एहि गाम मे रोस्‍टर सिस्‍टम सँ फूल एवं वेलपात जमा कएल जाइछ। कहल जाइछ जे एतूका लोक जयमंगलागढ़ मे दवीक रूप मे दुर्गाक समक्ष बलि प्रदान करैत छलाह। पहसाराक ग्रामीण मे सर्वप्रथम बलि प्रदान देबाक प्रश्‍न पर विवाद भऽ गेल। राति मे माता जयमंगलाक स्वप्न भेल। विक्रमपुरहिमे वेलपात-फूल सँ हमर आकृति बना कए पूजा करैत जाइ।
चम्‍पारण जिलाक सेमरा रेलवे स्‍टेशन सँ 2 किलोमीटर पश्चिमोत्तर एक विशेष देवी शक्तिपीठ, जकरा वनसती देवी स्‍थान कहल जाइछ। सहरसाक सोनबरसा प्रखण्‍ड मे वराँटपुर मे चण्‍डीमाताक मंदिर थिक। मंदिर पर सर्वसिंहदेवक नाम अंकित अछि। चण्‍डीपूजा सँ पूर्व लोक ‘बुधाँई’क पूजा करैछ। ओ दुसाध जातिक देवांशी पुरुष छल। एहि स्‍थल के राजा विराटक स्‍थान मानल जाइछ।
मानसी-सहरसा रेलवे खण्‍डक बीच धमहारा घाट स्‍टेशनक निकट हरौ कतानेथान शक्तिपीठ अछि जकरा कात्यायनी थान सेहो कहल जाइछ। कहल जाइछ जे महादेवक भार्या सती जखन राजा दक्षक यज्ञ मे जरि गेल छलीह त’ हुनक अधजरुआ लाश अधि महादेव हरिद्वार सँ कामाख्‍या जाइत काल सती (कात्‍यायनी) क ‘कत्ता’ एत‍हिये खसि पड़ल छल जाहि कारणेँ एकर नामकरण ‘कतानेथान’ पड़ल।
मधुबनी जिला मुख्‍यालय सँ 14 कि.मी. पर स्थित कोइलख गाम मे भद्रकाली कोकिलाक्षीक मन्दिर अछि जे हिनक मंदिर सँ पश्चिम प्रवाहित कमला नदी सँ बहराएल छलीह। हिनकहिं नाम सँ गामक नामकरण भेल अछि।
मिथिलाक संथाली लोकनि दशहरा मे इरा केर पूजा करैत जाइत छथि। इरा संथालक देवी थिकीह। प्रतिदिन एक-एक इराक अलग-अलग स्‍वरूप क आराधना दस दिन कएल जाइछ। विष्‍णु पुराणक अनुसार सँ महर्षि कश्‍यपक एक पत्‍नी इरा छलीह जनिका संथाली देवीक रूप मे अदौ सँ पूजैत रहलाह अछि।
सम्‍पूर्ण मिथिलांचल मे भगवती वाराही देवीक मूर्त्ति मात्र बहेड़ामे अछि। जतय आसिन मासमे बेस जमघट रहैछ ।
दुर्गा पूजाक अवसर पर अन्‍य उद्देश्‍यक संगहि ओकर स्‍थानीय माहात्‍म्‍य परम्‍परागत स्‍वरूप स्‍थापत्‍य विवेचन आदि जौं हमर एजेंडा मे होइ त’ एक सकारात्‍मक प्रयास मानल जाएत।

Suggested citation: पंचानन मिश्र. “मिथिलाक कतिआएल सिद्धपीठ.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 44, 2009-10-15. https://www.videha.co.in/research/2009/44/मिथिलाक-कतिआएल-सिद्धपीठ.htm

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