विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

साझा प्रकाशनमे विद्यापति

रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’ · 2009-11-15 · अंक 46

साझा प्रकाशनमे विद्यापति
रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’
हम २०६५ साल पुस २ गते साझा प्रकाशनमे अध्यक्षक रुपमे नेपाल सरकार सं नियुक्त भेलहुं । साझा प्रकाशन सरकार आ किछु निजी क्षेत्रक शेयर होल्डर सभक राष्ट्रिय प्रतिष्ठान अछि जे अपन पुस्तक आ पत्रिका तं छपिते अछि नेपाल अधिराज्य भरि एक कक्षासं लऽ दश कक्षा धरिक सरकारी विद्यालयक पाठ्य पुस्तक वितरण आ विक्री करैत आएल अछि ।
लगभग ९० करोडक कारोबार कर’ बला आ तीन सयसं उपर कर्मचारीक संलग्नतामे देशभरिमे २८ गोट शाखा, उप–शाखा, क्षेत्रिय शाखा सभक संजाल कार्यरत् अछि । एकर स्थापना २०२१ सालमे भेल अछि आ एखन धरि नेपाली साहित्यकार वाहेक केओ एकर अध्यक्ष आ महाप्रबन्धक नहि बनाओल गेल छलाह । देशमे बदलैत राजनीतिक अवस्था आ समावेशी लोकतंत्रक प्रादुर्भाव भेलापर मंत्रालयमे मधेशक मंत्री लोकनिक प्रवेश भेल आ तखन खूजल ४५ वर्षक बाद बज्जर केबार । हम पहिल मधेशी, मैथिली साहित्य प्रेमी एहि गरिमामय पदपर बैसाओल गेलहुं ।
ई संस्था सालमे ३०–४० गोट साहित्यिक पुस्तक प्रकाशित करैत अछि । ईसभ साहित्यिक कृतिक सभा भाषा मात्र नेपाली । ई नेपाली भाषा वाहेक आन भाषामे पुस्तक नहि छपैत छल । हमरा गेलाक बाद माहौल बनओलहुं आ तखन निर्णय भेल जे नेपाली वाहेकके भाषामे सेहो पुस्तक छापल जाए ।
बड़ कुहरि कऽ भेलो निर्णयकें कार्यान्वयनमे काज बढाओल गेल । जाहिमे सर्वप्रथम विद्यापति’क पोस्टर चित्र बहार करबाक निर्णय कराओल । विद्यापतिक प्रचलित चित्रकें साझा प्रकाशनक कलाकारकें देखा बनएबाक कतेको आग्रह ओ पुरा नहि कऽ सकल । कारण छलै तत्काल उपलव्ध छोटचित्रमे देखाओल विद्यापतिक पागक गणित ओकरा समझसं बाहरक होएब । नेपालक चर्चित कलाकार छथि टेकवीर मुखिया साझाक प्रत्येक पुस्तक पर हुनके डिजाइन रहैत छनि । हमरा जनकपुर अएबाक रहए आ ताहिसं पूर्व चित्रकें सार्वजनिक करबाक हमर इच्छा । बड़ मुश्किलसं हम पाग खोजलहुं । साझा प्रकाशनक एकटा कर्मचारीकें पाग पहिरा बुझा कलाकार लग पठएलहुं, तखन ओ पागकें देखि स्केच कएलक आ तैयार भेल कलर विद्यापतिक चित्र, जे मिथिलाञ्चलक विक्री कक्षसं किछु मासमे विक्री भऽ चुकल छैक । दोसर खेप छापबाक तैयारी चलि रहल छैक, एहिमे कागजमे सुधार कऽ विद्यापतिक चित्रकें आर निखारल जएबाक योजना छैक । ई चित्र हम पटनामे जा जवावदेह व्यक्तित्व सभकें दऽ आएल छीयनि, मुदा ओ लोकनि एकटा समाचारो पत्रिकामे देबाक जरुरति नहि बुझलनि ।
एमहर भाद्र मसान्तमे मैथिली भाषाक पहिल पुस्तक वालकथाक बहार भऽ गेल अछि । “बगियाक गाछ” नामसं छपल ई पुस्तक साझा प्रकाशनक इतिहासमे नेपाली वाहेकक प्रथम मैथिली पुस्तक भऽ गेल अछि । राजविराजक देवेन्द्र मिश्रक संकलनमे १५ गोट वालकथाक एहि संग्रहमे कथा सम्वन्धित चित्र सभ सेहो मिथिला लोकचित्रमे अछि । आब साझा प्रकाशनक दरबज्जा खुजि गेलैए, आनो साहित्यकार ओ मैथिली, भोजपुरी, अबधी, थारु, गुरुङ, आदि भाषाक किएक ने हो अपन अधिकारक हेतु लड़ि सकैत छथि ।
मैथिली व्याकरण लिखबाक काज प्रारंभ भऽ गेल अछि – भाषाविद् डा. योगेन्द्र प्र. यादवक नेतृत्वमे । मैथिली कथा संग्रह, भोजपुरी कथा संग्रहक प्रकाशन योजना प्रगतिपर अछि । साझा प्रकाशनक नेपाली भाषाक स्तरीय पत्रिका ‘गरिमा’ मे आब मैथिली, भोजपुरी, अबधी भाषा साहित्य सम्वन्धी समालोचना, निबन्ध आब’ लागल छैक । ई सभ परिवर्तनक संकेत अछि ।
दुनू देशमे मैथिली गतिविधिक जे किछु घटना होइत अछि, तकरा सूचना प्रवाहक संकट छैक । भारतीय क्षेत्रक लेखक अपनामे सिमित भऽ गेने नेपालक गतिविधि पर नजरि राखब जरुरी नहि बुझैत छथि । परिणामतः बहुतो सूचना अपूर्ण रहल अछि । ने प्रयास कएल जाइछ, ने जरुरीए बूझल जाइछ ।
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान विगत चारि वर्षसं राजनीतिक शिकार भेल अछि । गठन नहि भेने बहुतो काज रुकल पड़ल छैक । पंक्ति लेखकक प्रधान सम्पादकत्वमे निकलल ‘आंगन’ पत्रिका (जकर चर्च भारतीय पत्र–पत्रिका मे कहियो ने भेल) ठमकल अछि, कतेको मैथिली परियोजना अपूर्ण राखल छैक । तहिना एहि विच दर्जन भरि मैथिली पुस्तक छपल रहैत, से नहि भऽ सकल अछि । आ ई तखने आबो संभव हयत जं प्रज्ञाक गठन होइक । पा्रज्ञ लोकनिक ई पद राजनीतिक कार्यकर्ता सभ हथिअएबा मे जुटि गेलासं ई निष्प्रभावी बनल निरिह पड़ल अछि । एकरा राजनीतिसं मुक्त जं कऽ देल जाए तं अवश्य इहो मैथिली समेतकें नीक सहयोग त पहुंचा सकैत अछि ।
‘गोरखापत्र’ दैनिक एक पृष्ट मैथिलीमे दैत छैक, मुदा ओहो पृष्ट मैथिलीकें कतेक उपकार करैत अछि से देखले पर पता चलत । तखन मैथिली भाषामे छैक ई सन्तोषक बात ।
निजी चैनल सभ सेहो मैथिलीमे समाचार शुरु कएलक अछि । माहौल बनि रहल छैक । उपराष्ट्रपतिक हिन्दी शपथ विवादसं मैथिली प्रति जनमत वृद्धि भेलैए, ई उपलव्धिए मानल जएबाक चाही । जे से मैथिलीक नीक संभावना छै नेपालमे–संघीय सम्विधान बनलाक वाद तं आओर । जं कि हम साझा प्रकाशनमे छी ओत्तसं नेपालक मैथिली साहित्यक इतिहासक प्रकाशनक योजना बनाओल गेल अछि । नेपालक मै.सा.क इतिहास लिखनिहार डा. प्रफुल्ल कुमार सिंह मौनकें हम पत्रद्वारा आग्रह कऽ चुकल छीयनि जे आधुनिक कालकें कनेक अपडेट कऽ देथि । हुनक स्वीकृति आ पाण्डुलिपिक प्रतिज्ञा अछि ।
एम्हर पुस्तक सभ सेहो खुबे आएल अछि । ‘भ्रमर’क नेपाली भाषामे “मैथिली लोक संस्कृति” काठमाण्डूसं छपि कऽ बाजारमे अछि । धीरेन्द्र प्रेमर्षिक गजल संग्रह (नेपालीमे) बाजारमे अछि । रमेश रंजनक कविता संगह आबि रहल छैक तं रामानन्द युवाक्लव द्वारा कथा संग्रह बहार भऽ रहलैक अछि । हिमांशु चौधरीक कविता संग्रह आएल अछि । रेवती रमणक नाटक संग्रह अएलनि अछि तं ‘भ्रमर’क सम्पादनमे नाटक संग्रह जल्दीए प्रेससं बहार हयत ।
आवश्यकता छैक छपल पुस्तक सभकें उचित प्रचार प्रसार आ समालोचना समीक्षा । जे आन भाषा जकां मैथिलीमे दुर्लभ अछि । कनेक उदार होब’ पड़त तखने पुस्तक प्रकाशनक सोकाज लगतै लोककें । संभव थिक आब’ बला काल्हि खुशनामा होइक मैथिली प्रकाशनक लेल ।

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साझा प्रकाशन
पुलचौक, ललितपुर, काठमाण्डू
नेपाल

Suggested citation: रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’. “साझा प्रकाशनमे विद्यापति.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 46, 2009-11-15. https://www.videha.co.in/research/2009/46/साझा-प्रकाशनमे-विद्यापति.htm

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