विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

६अम शताब्दीक लोकनायक सलहेश: वृत्तचित्र आ इतिहास

सुजीत कुमार झा · 2009-12-15 · अंक 48

६अम शताब्‍दीक लोक नायक वृतचित्रमे
६अम शताब्‍दीमे मिथिलामे विशेष कऽ तिब्‍बती आ भुटानी आक्रमण बढल छल । उत्तर क्षेत्र सँ तिब्‍बतीक आक्रमण बढल छल । ओहि समयमे सिरहाक महिसौथा (बर्तमानमे नेपालक सिरहा जिल्‍ला) मे जन्‍म लेनिहार सलहेश किराँती सभ संग समन्‍वय कऽ संयुक्त शैन्‍य दस्‍ता बनौलन्‍हि आ कुशलता पूर्वक लडाइ लडि अपन देशक सीमा बचौने रहैत ।
सीमा केँ रक्षा कऽ मिथिलामे राज्‍य करयबला दुसाध (पासवान ) जातिक ओहे लोक नायकक रुपमे चिन्‍हल जायबला सलहेशक विषयमे रंगकर्मी रमेश रञ्‍जन झा वृत्तचित्र बनौलन्‍हि अछि ।
जनकपुरक लोक सञ्‍चार नामक संस्‍थाक प्रस्‍तुति रहल सलहेश वृत्तचित्रमे हुनक जिवन,योगदान आ ओहि समयमे बाहिरी आक्रमण सँ मिथिलाकेँ बचौने इतिहास समेटल गेल अछि ।
२४ मिनेटक ओ वृत्तचित्र फेर सँ सलहेशक सम्‍पूर्ण व्‍यक्तित्‍वकेँ आम जनता लग स्‍मरण करा देलक मिथिलाञ्‍चलक वरिष्‍ठ रंगकर्मी मदन ठाकुर कहैत छथि ।
वृत्तचित्रक लेखक एवं निर्देशक रमेश रञ्‍जन झाक अनुसार सलहेशक मिथिलाञ्‍चलभरि मात्र नहि जतय कतौ मैथिल सभ रहैत छथि ओतयकेँ लोक हुनक योगदान आ कतेको शताब्‍दीपूर्व बिकेन्‍द्रीकरण निति लागु कऽ जनताकेँ न्‍याय देने स्‍मरण करैत पुजैत आबि रहल अछि ।
ओहन व्‍यक्ति सँ अखनकेँ देश चलाबयबला नेता सभ सिखै बहुत आवश्‍यक रहल हुनक कथन अछि ।
सलहेशक इतिहास
६अम–७अम शताब्‍दीमे मिथिलाक महिसौथा स्‍थानमे सलहेशक जन्‍म भेल छल । सलहेशक जन्‍मक समयमे मिथिलामे सामाजिक आ राजनीतिक आरजकता व्‍याप्‍त छल । छोट छोट ग्राम पिता बिचक अन्‍तरद्वन्‍दमे आम जनता पिचायल छल । सलहेश तात्‍कालिन सामन्‍त विरुद्ध सुसंगठित शक्तिक निर्माण कऽ सभकेँ परास्‍त करैत राज्‍य स्‍थापनाक कएलन्‍हि ।
पूर्वमे कोशी आ पश्‍चिममे गण्‍डकी उत्तरमे चुरे पर्वत शृंखला आ दक्षिणमे गंगा तक मैदानी भागमे सलहेशक शासन सत्ता स्‍थापना भेल । बाहरी आक्रमणकारी सँ अहि क्षेत्रकेँ सुरक्षित बनाबय सलहेश अत्‍यन्‍त कुशल आ युद्धकलामे निपुण शैन्‍य शक्तिक स्‍थापना कएलन्‍हि ।
आम जनताक जिविकाक माध्‍यम कृषि आ पशु पालन तथा प्राकृतिक स्रोत साधनमे आम जनताक पहुँच सुनिश्‍चित कएलन्‍हि ।
किराँत सँगक सम्‍बन्‍ध
मिथिलामे सलहेशक राज्‍य स्‍थापना भेलाक बाद सभ सँ बडका चुनौती जनताकेँ एकजुट बनाएब आ इहे बलमे सीमाके सुरक्षित पारब रहल छल ।
मिथिलाकेँ गण्‍डक , गंगा आ कोशी सँ एक प्रकारक सुरक्षा चक्र प्रदान छल । उत्तर दिस सँ मात्र मिथिलाके आक्रमण होएबाक बेसी खतरा छल । तिब्‍बत आ भुटानक नरेश सँग संलग्‍नता आ मिथिलाक खुँखार डाकु चुहर मलक सहयोगमे बेर बेर आक्रमण भऽ रहल छल ।
मिथिलाक मैदानी भूमि अन्‍न आ पशुधनक दृष्‍टि सँ अत्‍यन्‍त समृद्ध भेलाक कारण आक्रमणकारी सभक अहि क्षेत्र उपर दृष्‍टि छल । आक्रमण कऽ फिर्ता होबयबला तिब्‍बती सैनिक सभ महाभारत पर्वत श्रृंखला में रहल किराती सभकेँ सेहो लुटपाट करैत छल ।
अर्थात मिथिला आ किराँत दूनु समान्‍य रुपमे आक्रमणक पीडा सँ ग्रस्‍त छल ।
ओहि समयमे मैथिल आ किराँत संयुक्त सैन्‍य निर्माण करब आ सामुहिक प्रतिबाद करब सलहेसक प्रस्‍ताब किराँती सैन्‍यपति केवला किराँत स्‍वीकार कएलन्‍हि ।
किछ दिनक वाद पकरियागढ आ तरेगना गढ लडाइमे तिब्‍बत भुटान आ चोहरमलक संयुक्त सैन्‍य शक्तिके परास्‍त कऽ भुटानी नरेश सुंगके सलहेस बन्‍दी बनाबय सफल भेल रहथि । अर्थात किराँत सँगक संयुक्त सैन्‍य निर्माणक वाद बाहरी आक्रमणकारी पराजित होबय लागल छल ।
सलहेसक उपासक सभ हुनका देवताक रुपमे पूजा करय लागल छल । तकर निरन्‍तरता अखनो जारी अछि ।
सलहेसक समाजमे प्रभाव
तत्‍कालिन समाजमे सलहेस अत्‍यन्‍त न्‍याय प्रेमी शासक मानल जाइत छलाह । जातिय द्वन्‍द्व बढल समयमे सलहेस सभ गोटेके संगठित कएलन्‍हि । सभ जाति के लोक सलहेसक नेतृत्‍वके स्‍वीकार कएलन्‍हि । मिथिला समाजमे सलहेस आ हुनक सहयोगी पात्रके सयौ वर्ष वितलाक बादो कियो नहि विसरि सकल । सलहेसके न्‍यायक प्रतिमूर्ति मानल जाइत अछि ।
कोनो इच्‍छा विमारी, भुख, ऋण , पीडा सँ मुक्तीक लेल अखनो सलहेसक कोवला कएल जाइत अछि ।
सलहेसक भाई मोतीरामके पहलमान सभ स्‍मरण कऽ मात्र अखाडामें उत्तरैत अछि । जंगलमे लकरी आ अन्‍य उत्‍पादित समान लाबय जायबला सभ हिंसक जानवर सँ बचय सलहेसक भगिना कारिकन्‍हा आ वहिन वनसप्‍तीके पूजा करैत अछि ।
अर्थात मिथिलाक समाजिक जिवनमे सलहेसक प्रभाव एखनो अत्‍यधिक अछि ।
बिपिन
बिपिन झा
॥ कथं ’संस्कृतं’ संस्कृतम् ॥
(विशिष्टभाषाक रूप मे संस्कृत:- एक विमर्श)
संसारक प्राचीनतम उल्लिखित भाषाक रूप मे संस्कृत प्रथित अछि। संस्कृत शब्द दू शब्द “सम्” (अर्थात्, सम्पूर्ण) और “कृतम्” (अर्थात्, कयल गेल) (सम्+कृ+क्त) सऽ मिलकें बनल अछि| एहि शब्द कअर्थ होइत अछि- सम्पूर्ण, त्रुटिहीन| अन्यान्य भाषाक नामकरण क्षेत्रादिक नाम पर कयल गेल अछिमुदा संस्कृतक नामकरणक हेतु एकर संस्कारयुक्त होयब छैक। एतय संस्कारयुक्त होयबाक तात्पर्य एकरपरिष्कृत व्याकरण, सरलता एवं वैज्ञानिकता छैक। संस्कृत कें विशिष्ट स्थान प्रदान करय बला किछुअन्यान्य कारक सेहो छैक जेकरा अधोलिखित बिन्दुक माध्यम सऽ निर्दिष्ट कयल जा सकैत अछि-
 भाषावैज्ञानिक अध्ययन मे एकर प्रभूत योगदान (सन्दर्भ हेतु ऋग्वेद १/१६४/४५, ४/५८/३,१०/७१/१-२-३, १०/११४/८, यजुर्वेद १९/७७, अथर्ववेद९/१०/२-२१ द्रष्टव्य)।
 प्रमुख प्राचीन ज्ञान-विज्ञान, कला, पुराण, काव्य, नाटक आदिपरक ग्रन्थक संस्कृत मे निबद्धता।
 हिन्दू धर्मक लगभग सबटा धर्मग्रन्थ संस्कृते मे निबद्ध अछि।
 एकताकऽ शिक्षा देनाई।
 संस्कृत भाषा क व्याकरण अत्यन्त परिमार्जित एवं वैज्ञानिक अछि। संस्कृत हेतु प्रथितव्याकरण अछि पाणिनि अष्टाध्यायी जे एकरा कम्प्यूटर फ्रेण्डली भाषा होयबा मे योगदानदेलकैक।
संस्कृत भाषा कऽ वैशिष्ट्य-
 अक्षर कऽ उच्चारण-
संस्कृत मे प्रत्येकव्यंजनक उच्चारण हेतु स्वरक योग सर्वथा अपेक्षित रहैत छैक। संगहि उच्चारणकवैशिष्ट्य ई अछि जे कतहु व्यतिक्रम नहि होइत अछि। उदाहरण हेतु ’अ’ कऽ १८ भेद होइत अछि।व्यतिक्रम नहिं भेलाक कारणे उच्चारण वैषम्य नहिं दृष्टिगत होइत अछि। एहि भाषाक विपरीत आंग्लआदि मे ई व्यतिक्रम स्पष्टतः दष्टिगत होइत अछि। उदाहरणतः come (कम) और coma(कोमा) मे‘co’ क दू टा भिन्न भिन्न उच्चारण भेटैत अछि|
 संस्कृत शब्दक निर्माण-
संस्कृत मे धातु-रूप, शब्द-रूप, प्रत्यय, उपसर्ग, और सन्धि आदिक सहायता सँऽ नवीन शब्द कनिर्माण सरल अछि| संस्कृत मे शब्दो क निर्माण पूर्णतः वैज्ञानिक ढंग सँऽ कयल जाइत अछि|।
 व्याकरण-
एकर व्याकरण आओर वर्णमाला कऽ वैज्ञानिकता क कारण सर्वश्रेष्ठता स्वयंसिद्ध अछि। प्राचीनकाल हो या आधुनिक काल, उत्तर भारत हो या दक्षिण भारत, संस्कृत का व्याकरण अपरिवर्तित रहलअछि|
 प्राचीनता
वैदिक ग्रन्थक प्राचीनता निर्विवाद रूप सँ स्वीकृत अछि। अस्तु संस्कृत हजारो वर्ष पहिने सविद्यमान अछि।
 संस्कारित भाषा-
संस्कृत केवल स्वविकसित भाषा नहीं थीक, अपितु संस्कारित भाषा अछिएहि कारण एकर नामसंस्कृत अछि। संस्कृत कऽ संस्कारित करय बला छथि महर्षि पाणिनि; महर्षि कात्यायिनि और योगशास्त्र क प्रणेता महर्षि पतंजलि ।
 सरल भाषा-
सामान्य रूप सँऽ संस्कृत वाक्य मे शब्द कें कोनो क्रम मे रखल जा सकैत छैक। जाहि सँऽ अर्थकअनर्थ नहिं होइत छैक। ई एहि कारण संभव छैक जे एतय प्रत्येक पद वैज्ञानिक तरीका (समुचितविभक्ति आदिक संग) सँ राखल गेल होइत छैक।उदाहरणतः – अहं गृहं गच्छामि या गच्छामि गृहंअहम् दुनू ठीक छैक।
 त्रुटिहीन भाषा-
ई भाषा संगणक आओर कृत्रिम बुद्धि क लेल सबसँऽ उपयुक्त भाषा मानल जाइत अछि। संस्कृतव्याकरण तर्कशास्त्रीय दृष्टि सँऽ उपयुक्त अछि अस्तु मशीनक भाषाक लेल पूर्णतः उपयुक्त अछि| Forbes magazine, (July, 1987) केर अनुसार “Sanskrit is the most convenient language for computer software programming.” [ref - http://www.stephen-knapp.com/indian_contributions_to_american_progress.htm]
 मष्तिष्क विकास
आधुनिक शोध सँऽ ई स्पष्ट अछि जे संस्कृतक अध्ययन स मानसिक दृढता और स्मरणशक्तिकविकास होइत अछि। [ref-http://www.galendobbs.com/theck/sanskrit.html]
 एकताक निर्वाहक-
संस्कृते एहेन भाषा अछि जे भाषाविवाद कें प्रश्रय नहिं दैत अछि। ई एकता केर गीत सुनवैत अछि।
अस्तु उक्त विविध बिदुक माध्यम सँऽ एतेक निर्विवाद अछि जे संस्कृत विशिष्ट भाषाक रूप मे विद्यमान अछि। एकटा प्रवाद सतत सुनवा मे अबैत अछि जे संस्कृत आब मृतप्राय अछि; एहि सन्दर्भ मे विभिन्न सन्दर्भक संग भ्रान्ति दूर करबाक प्रयास करब हम आगामी लेख मे। ता धरि विभिन्न राजनेता द्वारा संस्कृत मे शपथग्रहण करब, संस्कृत लेल जनमानस द्वारा समस्त वसुधाक अखण्ड मानैत कयल जारहल प्रयास आदि अपनें लोकनि कें उक्त प्रवादक जाल मे फँसवा सऽ वारित करत संगहिhttp://sanskritam.ning.com/ ई अन्तर्जाल श्रोत संस्कृतक जीवन्तताक झांकी प्रस्तुत करत।
बिपिनझाhttp://sites.google.com/site/bipinsnjha/home
अनमोल
अनमोल झा
रिलेशन-१
-गोर लगै छी। हम निखिल बजै छी।
-नीके रहू। कहू की समाचार छै गामक।
-ठीके छै चचाजी। कहलहुँ जे हप्ता दिनक एकटा काज अछि लखनऊमे। से अपनेक डेरापर रहबै। कोनो दिक्कत तँ नै ने हएत।
- दिक्कत। दिक्कत कोना नै हएत। एकटा घर, बरण्डापर खेनाइक समान। कोना रहै छी से हमहीं सभ बुझै छी। भातिज छी, दिक्कत थोड़े होमए देब अहाँकेँ। आऊ, एकटा होटल बुक कऽ देब। कोनो दिक्कत नै हएत..।
जितेन्द्र
जितेन्द्र झा

Suggested citation: सुजीत कुमार झा. “६अम शताब्दीक लोकनायक सलहेश: वृत्तचित्र आ इतिहास.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 48, 2009-12-15. https://www.videha.co.in/research/2009/48/६अम-शताब्दीक-लोकनायक-सलहेश-वृत्तचित्र-आ-इतिहास.htm

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