विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

नेपालमे मधेशीकेँ समस्या आ समाधान

शीतल झा · 2010-01-01 · अंक 49

१.शीतल झा
नेपालमे मघेशीकेँ समस्‍या आ सामाधान!
(1) नेपाल
भारतके उत्तर‍दिस बिहार स उत्तर, पश्चिम बंगाल स पश्चिम, उत्तरप्रदेश स उत्तर पूर्वमे हिमालय पर्व‍तके एक अंशमे स्थित एकटा देश नेपाल अछि। २४० वर्ष पहिले गोरखा के एकटा लड़ाकु राजा पृथ्‍वी नारायण शाहके राज्‍य बिस्‍तारमे महत्‍वाकांक्षा स्‍वरूप उपत्‍यका सहित पूर्वमे तिस्‍ठा नदी आ पश्चिमे कांगड़ा किल्‍ला तक बिस्‍तारके क्रममे दक्षिणके सम्तल भूमिमे स्थित बिभिन्‍न ऐतिहासिक मुलुक पर बिजय प्राप्‍त करैत गेल ब्रिटिस्‍ट भारत सरकारके प्रतिरोधक बाद युद्ध भेल। १८१६ के सम्‍पन्‍न संधि नेपालके बर्तमान अवस्‍था कायम करैत १८६० के संधि सँ एकटा पूर्णता प्राप्‍त भैलै आ १९२३ के संधि एकटा देश मान्‍यता देलक।
(२) मधेश
मध्‍य एशिया स बनल शब्‍द मधेश नेपालक समतल भूमिमे रहल जाति जनजातिके मधेशी शब्‍द सँ सम्बोधन कएल गेल। एहि समतल भू-भागके तराई कहितोमे यही ठामक बासिन्‍दाके तराई बासी या मधेशी कहित खष भाषिक पहाडि वर्ग सम्‍बोधन करैत रहल १८१६ के सन्धिके खाकामें राप्‍ती आ कोशी के बिचक भूभाग ब्रिटिस्ट भारत लेने छल आ नेपालके २ लाख रुपैया देने छल। मुदा अन्तिम कालमे नेपालक अनुरोधपर ओ छोडि देलक। १८५९ भारतके प्रसिद्ध स्‍वतन्‍त्रता युद्ध सैनिक बिद्रोह के दमन करावक लेल नेपाली सेना भारतमो पठोलक बदलामे पश्चिमके चार जिल्‍लाके लएक जे सहित महाकालि सँ मेची तक समग्र २०-२२ जिल्‍ला मधेशक अछि आ एहि ठामक बासिन्‍दा मधेशी।
(३) मधेशी प्रति ब्‍यवहार
राजनीतिक-बर्तमान मधेशमे तत्‍कालिन अवस्‍थामे जे स्‍वतन्‍त्र राज्‍य सब रळे तकरा उपर प़थ्‍वी नारायण शाह हमला करैत गेल आ मिथिला राज्‍य सेहो कब्‍जा कएलक आ एकर १०००० ( दश हजार) सेनाके सहायता ल क पूर्वमे आक्रमण सफल कएलक आ तिरहुतिया सेनाके भंग कएलक। सम्‍पूर्ण मधेश पर ओ, साम्राज्‍य काएम करेके लेल सबपर जातिय साँस्‍कृतिक प्रशासनिक भाषिक दमन सुरु कएलक आ मधेशके पूर्ण उपनिवेश के रुपमे देखैत एकटा पूण्‍ति ओपनिबेशिक शासन चलव लागल। एही मधेशीके कहियो कोनो अधिकार नहि भेटलै जौँ कतहु नेपालक इतिहासमे मधेशीके चर्चा अवैतछैक ओ राजाके षडयन्‍त्र में ओकरा प्रयोग करवमे आएल छै। खस जातिमे २ जात शाह आ राणा आ क्षेत्री सत्ता संघर्षक क्रममे राजा के कटपुतली बनाक राखके काज जंग बहादुर राणा कएलक जेकर वंश १०४ वर्ष तक राजा आ प्राजा दुनुपर शासन कएल। जकरा कालमें चाक‍रीवाज शोषक पहाडी के शासनमें अंश रहलै, मुदा तहियो मधेशी निर्मम शोषण दमनके शिकार भेल। सम्‍पूर्ण मधेश शाह आ राणा सभक के जमिन्‍दार छलैक या दरवरियाक भाइभरदार दार के प्रशासन मार्फत राजनीतिक होइछलै आ प्रशासन मे मधेशी नहिं छलै ।
राणा शासनक अन्‍तथ आ शाह शासनक प्रारम्‍भ २००९ सालक कथित क्रान्तिमें। राजनीतिक स्‍वतन्‍त्रता नहीं, शाह वंशीय स्‍वतन्‍त्रता अएलै। २००७ साल सँ २०१७ सालतक विभिन्‍न राजनीतिक घटना क्रममें मधेशी के जनसंख्‍याके अनुपातमें कतहु राजनीतिक स्‍थान नही देल गेलै। जौ किनको स्‍थान भेटल ओ राजनीतिक आन्‍दोलनमें विशेष योगदान कएलनि तै। प्रशासनमें आ सुरक्षा क्षेत्रमें प्रवेश नही कतहु मधेशीकै देशक हरेक क्षेत्र पर रहल जाहिमे मधेश पूर्णत: पिसा गेल। एकरा अस्तित्‍वपर प्रत्‍येक क्षण खतरा रहै। नागरिकता ऐन कडा एकल गेल आ मधेशी के नागरिकता पर शंका करैत, देव में हाथ कठोर कएलक। एकरा कता संख्‍याके न्‍यून देखावक लेल पहाड स पूनर्वासिके नाम पर पहाडीके बसोवास मधेश में करौलक। जंगलके विचमे स राजमार्ग वनाक मधेशीके जनसंख्‍याक कम देखावकें खडयन्‍त्र करैत मधेशके मरभूमि बनावके चाल चलला। आसामी भुटानी वर्मेली नागरिक समेतके बसौलक आ सामाजिक अस्तित्‍व सेहो खतडा में पडैत गेल। एक भाष एकभेष एकराज्‍य एकदेश क निर्मम नीति के मधेश मे जे दमनपूर्वक प्रयोग क सकै तेहन मेधशी नेताके प्रयोग करैत रहल।
तथापि २०४६ सालमें आन्‍दोलन भेले आ लोकत पुर्जीवित प्राप्‍त कएलक। मुदा मधेशीके जीवन में कोनो परिवर्तन नहीं भेल। राजनीतिकमें कोनो अधिकार नहीं, सतामे कतछु पहुँच नही। सरकारी नीति निर्माण में किनको स्‍थान नही। दलके उच्‍च तहमें कोनो संख्‍यात्‍मक परिवर्तन नही। कोनो सम्‍मानजनक स्‍थान नही। केवो टिकाउ नही। किनको स्‍वाभिमान नही। सवपर एकटा कलंक मढल रहैछ। मधेशी नेताक निर्यात इएह भेल। प्रशासनमें मधेशी न्‍यून होइत गेल। जनपद प्रारीमें सेहो घटे तगेल सेनामें कतहु प्रवेश नही प्रावधिक क्षेत्रमे रहल सभके दमन वेस्‍नी वृत्तिविकाश कम एहि यस अवस्‍था सभ दलमें देखल गेला कोना प्रगतिशील कोन प्रजातान्त्रिक अन्‍याय भेल कहि नहीं सकैछी तुरुन्‍त सम्‍प्रदायिक आरोप, तुरुन्‍त निस्‍कासन, एहन निति रहल ०४६ स ०६२ तक राजा ज्ञानेन्‍द्रक शाही कालमे विभिन्‍न जाति, जात सभक विचमें लोकहतान्त्रिक चेतना प्रवेश्‍ कएलक समावेशीकरण, समानुपातिक उपस्थिति जातीय स्‍वायाता संधीय संरचना आत्‍मनिणर्निक अधिकार आदि शब्‍दक राजनीतिक अर्थ जनतामें प्रवेश कएलक आ विभिन्‍न आन्‍दोलन भरहल अछि। राज्‍य पक्ष शब्‍दमें स्‍वीकार कएलक अछि मुदा नियतव एह पुरान छै, प्रवृति राणाकालीन छै। कपटपूर्ण मनशाय शाहकालीन छै। दलक केन्‍द्रीय निकायामें वएह रबैआ छै। मधेशी अधिकारक आन्‍दोलनपर वएह आरोप, वएह कलंक, वएह दमनक धम्‍की, वएह मिथ्‍या अस्‍वासन वएह स्‍थान, सम्‍मान नहिं देवाक सामन्‍ती प्रवृति।
(४) आर्थिक
मधेशी पर भ रहल आर्थिक शोषणक अनन्‍त स्‍वरुप अछि। 1816 के संधिताकाल में मधेश मांगल गेल छैक पहाडीके पलएवाक लेल चितौनके सामने मधेश नहीं मांगल गेल छेक1 किए ओतेक भूभाग में ओहि क्षेत्रक सामन्‍तक पोषण भजेतै भन्‍सार मधेसमें सव खर्च पदाडके लेल। कारखाना मधेश मधेशमें राजस्‍व पहाडके लेल। उत्‍पादन मधेश मधेशी नियन्‍त्रण वेचविखन भष्‍ट पहीके हाथ में कोनो निकायपर मधेशीके नियन्‍त्रण नही भ्रष्‍टाचार मे सलग्‍न पहाडी सजाय मधेशी के मधेशीस्थिति गाँव गाँवमें एकेटाकें पहाडी जीमन्‍दार के राजनीतिक हस्‍तक्षेप ओकरे प्रशासनिक पहुँच ओकरें। पूरे क्षेत्रमें आर्थिक शोष ओकरें । ओहे प्रभावशाली व्‍यक्ति। ओकरें सामाजिक हैसियत। गामक झगडाके न्‍यायधीश ओहे। सारा जमिनपर ओकरें कब्‍जा। कोनो छोअ जीमन्‍दार मधेशी त ओकरा उपर क जीमन्‍दार पहाडी । मध्‍य युगीन निर्मम सामन्‍ती शोषण अखनो देखल जाति अछि मधेश में।
(५) सांस्‍कृतिक भाषिक, सामाजिक दमन
नेपाल विभिन्‍न जाति आ वर्णके मिश्रित देश अछि स्‍वीकारितोमें विभिन्‍न जातिक विभिन्‍न भाषा, विभिन्‍न भेष अलग सामाजिक सम्‍बन्‍ध सांस्‍काृति पहिचानके स्‍वीकार नै कएकल कहिओ पहाडी सत्ता शाही प्रशासनके मजबूत आ निर्मम वनकेलेल एकहि भाषा, खस भासा अर्थात शाही भाषा, अर्थात गोरख भाषा, अर्थात नेपाली भाषा के दमनकारी नीति प्रयोग एकलक बाँकी सभ भाषा पर सम्‍बैधनिक रुपस प्रतिबन्‍ध लागल आ सरकारी कामकाजक भाषा भेष आ ओहि भाषाभाषीके जे पारम्‍परिक पहिरन रहै से पहिरनके के दरवारक पहिरन मानल गेल। ओहे भेष सरकारी भेष भेल ओ है प्रशासनिक भेष भेल पहिरन आ राजनीतिक भेष होइत आ अन्‍तमें जनप्रतिनिधिक औपचारिक भेष होइत-होइत सम्रग नेपाली नागरिकके भेष जकाँ ओकरें। ओपचारिक पोषाक मानल गेल। शिक्षामें सरकारी काम काजके आ इएह भाषा रहल आ अदालत एहि विषयमें शाही हाथक कठपुतली रहल।
६. जातिय जनजातीय शोषण
आई प्रत्‍येक जातीय क्षेत्रमें खसजाति, पहाडी वर्गाके दमनकारी, नीति प्रवे भेल अछि। अल्‍पसंख्‍यक जाति, विलिन भ रहल अछि। कहाँ थाररु कहाँ दनुवार अहि सभक जातिय क्षेत्रक उन्‍मूलन भएरहल अछि सभक भाषाभेषक विलनक अवस्‍था में सांस्‍कृतिक अतिक्रमण आक्रमण प्रतीक्षा जनजातिक खस क्षेत्रमें।
(७) प्रशासनिक
प्रशासनिक क्षेत्रमें रहल पक्षपात उत्‍पीडन, शोषन दमन अति निर्मत आ उल्‍लेखनीय अछि। कर्मचारी तन्‍त्रके उच्‍च पद पर बहुत नगन्‍य मधेश्‍ी रहल छथिआ तिनका हतोत्‍साहित आ कमजोर बनाएल जाइत अछि। निचका कर्मचारी सव सेहो हुनका टेरैत नहि छनि। निक कार्य क नहि सकै छथि1 मधेशी पर दमन चलावके हुनकर योग्‍यता बनाबल जाइत छनिअ पहाडी ओकरा मधेशी पर दमनके लेल लाठी के रुपमे प्रयोग करैत अछि। ओ स्‍वयं भयभीत रहैत छ‍थि समग्र पहाडी वर्ग जातीय आ साम्‍प्रादायिक भावनासँ ग्रस्‍त रहैत अछि आ मधेशी पर सम्‍प्रदायिक आरोप लगवैत अछि। मधेशी के उपर मानव अधिकारके हनन होइत अछि आ ओकरा कतहु दर्ज करैत अछि।
(८) न्‍याकि क्षेत्र
अदालती कामकाजक भाषा खस भाषा अछि। न्‍याय‍धीशवादी प्रतिवादी के मर्म, भाषा, पीडा अर्थ विना बुझ्ने न्‍याय सम्‍पादन करैत छथि उल्‍टा अर्थ लगाक फैसला होइत अछि। सारा खस भाषामें होव के कारणस मधेशी न्‍या प्राप्‍त ने क सकैछे आ न्‍यायधीश सभ सेहो पहाडी (खस) र के हित में कहछथि आ स्‍वयं सम्‍पद्रायिक भावना स ग्रस्‍त रहैत छथि।
(९) अन्‍य क्षेत्र
कोनो निर्वाचित मनोनित संस्‍थामे मधेशी के पहुँच स्‍थाना, सम्‍मान नहिं अछि मानव अधिकार आयोग प्राध्‍यापकसंघ, चि‍कित्‍सक, संघ, अधिवक्ता संघ, इन्जिनियर संघ, विद्यार्थी संघ, शिक्षक संघ, महिला संघ, किसान संघ, कर्मचारी संघ, कतहु मधेशीके शायदे गोठे स्‍थान दैत अछि आ। तकरो नीति निर्माण में अल्‍पमत रहला के कारण वात रखवाक अवसर नीहं रहैछै। कोनी राष्‍ट्रयी दलक मातृ संगठन मे सेहो यह अवस्‍था अछि । तै शोषणा उत्‍पीडन, अवहेलना, दमन सर्वत्र व्‍याप्‍त अछि असहय अछि।
(१०) प्रजातन्त्रिक आन्‍दोलन मा आ राष्‍ट्र निर्माण में मधेशक भूमिका
राजा शासनके विरुद्ध में भेले प्रजातान्त्रिक आन्‍दोलनके केन्‍द्रीय स्‍थान मधेश छल। ओहि आन्‍दोलनके लेल मधेश भूमि मात्र नहीं देलक मधेशी आन्‍दोलनमें भाग लेलक आ रक्‍त देलक आ जान देलक २०१७ सालकेँ पचायती विरुद्धकेँ आन्‍दोलन सेहो मधेशमें केन्‍द्रीत रहल २०३६ सालक आन्‍दोलन मधेशमें सेहो भेल। विद्यार्थीद्वारा कएल गल प्रत्‍येक प्रगतिशील प्रजातान्त्रिक आन्‍दोलन में मधेशक व्‍यापक आ अग्र भूमिका छल । आ क जनआन्‍दोलन-2 त सेहो पूर्णत मधेश ओकरा उर्वराभूमि प्रदान कएलक आ अखनक संसद कमे पूनर्जीवन देलक। नेपालक कोनो प्रगति शील आ प्रजा‍तान्त्रिक नेता नहि छथि। जिनका मधेश राजनीतिक जन्‍म आ पालन पोषण आ कर्म भूमि देलक। मुदा मधेशक एतेक योगदान आ एकरा प्रति एतेक गद्धारी एतेक कृतध्‍नत्रा ।
एकटा प्रश्‍न प्रत्‍येक मधेशीके अनुतरित करैत अति जे मधेश सभक स्‍तरके पहाडी नेताके जितवैत अछि मुदा कोनो उच्‍च तहक मधेशक नेताक पहाड में टिकट भेटिते आ ओत स ओ जिविका अविर्त यह प्रश्‍न अछि जे कोनो मधेशी नेता मात्र नही पहाडी नेता के सेहो अनुत‍रित वना दैत अछि। निर्लज्‍ज वना दैत अछि। मुदा 2014 साल सँ अखन तक सभ चुनावमें कोनो भेदभाव नही राखि मधेशी पहाडी के भोट दैत अछि। टिकट पवाएक अधिकार होइतो में पहाडीके लेल टिकट छोडिदैन। अछि उत्‍साहपूर्वक ओकरा जिवैत अछि मुदा ओकर इज्‍जत ओतवे। ओकरालेल ओहे दुर्भाग्‍य ओहे विडम्‍बना।
प्रत्‍येक आन्‍दोलनमें जेकरा पहाडी जेकरा राष्ट्रियता के आन्‍दोलन कहलकै, बुझने आ विना मधेशी ओहिमें सामेल भेल1 मुदा ओ राष्‍ट्रीय नागरिक नही, राष्‍ट्रीय व्‍यक्ति नही। इह छै मधेशी क नियति !
(११) शोषण, दमनक इएह स्थिति देखैत असहय भेला स ०६३ माघ में मधेशी आन्‍दोलन फुटि पडल मधडेशी आन्‍दोलनक किछु प्रमुख कारण:
(क) हजारो वर्ष सँ (मधेशपुर) रहल सामन्‍ती शोषण उत्‍पीडन दमन दिक्कियाए अछि।
(ख) गोर्खा राजा का शाह वंशीय राजतन्‍त्रात्‍मक निर्मता जे जनतापर हरेक क्षेत्रमें व्‍याप्‍त छैय, जे उपरोक्त बूँदा पर देखावल गेल अछि, जकर अन्‍तय लोक‍तान्त्रिक सरकार क अवस्‍थामें सेहो संभावना नहीं देखलगेल आ नैरश्‍यता आ असहयताक अवस्‍था आएल।
(ग) लोक‍तान्त्रिक आन्‍दोलन उठावएकालमें दलक नेता सभद्वारा नमहर आश्‍वासन मुदा सरकार वनलापर उएह स्थिति, उएह दमन।
(घ) मानवअधिकार, जातीय अधिकार, लोकतान्त्रिक अधिकार सम्‍बन्‍ध में वेसी सँ वेसी लेख, रचना, अन्‍तर्राष्टि्य जगतमें ख्‍याति प्रप्‍त विद्वान सभक महत्‍वपूर्ण विचार सब आएल वौधिक जगतमें हलचल पैदा करैत रहल, चेतना लवैत रहल आ आन्‍दोनलिन करैत रहल।
(ङ) राजनीतिक दलमें मधेशी समुदायक नगव्‍य पहुँच रहितोमे ओकरा प्रति दमन, उत्‍पीडन स आएल ओकरा में उकुसमुकुस होइल रहल जे नीत वनिक फुटैल छल आक्रोस वनैत छल चाहे अपना व्‍यक्तिगत उत्‍थान के लेल मात्र सही।
(च) माओवादी जनयद्धताका ओ विभिन्‍न जातीय स्‍वायतताके नारा लगौलक आ ओहि अनुसार संघीय संरचना के भ्रूण स्‍वरुप जातिय क्षेत्र निर्माण कएलक जे एकटा कान्तिकारी चेतना छलैक मुदा वाद में ओकर नीतिका व्‍यवहार नहिं रहलै।
(ज) एहन सिर्जल वातावरणमें अन्‍तरिम संविधानक घोषणा। भेल जाहिमे कोनो दल विगतकेँ आस्‍वासन वचन, घोषणा लागु नही कएलक आ धैर्यताक सीमा टुटि गेल।
(झ) जनप्रतिनिधिद्वारा बनावल गेल सभास सम्बिधानसभा वनत आ ओ जनताके संविधान होएत से मान्‍यता अनुकुल अपना सभानुपातिक उपास्थिति संविधान सभामें नही होएत से सम्‍भावना निश्‍चय देखैत आन्‍दोलन भ गेल।
(ञ) जनसंख्‍या के आधारपर समानुपातिक निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण करव दल आ नेता सभ पछा र हल थि। ओ सभ मधेश स जिते मुदा मधेशक सीट कम रहैक से मनसाय देखि जनता नहि सहल।
(ट) कोनो दल भितरके मधेशी एहन स्‍वतन्‍त्र आन्‍दोलन नहि उठावि सकैत अछि ओ दलक नीति, अनुशासन, लोभस वाहनहल रहलाके कारण सँ अलग आन्‍दोलन भँडकि उठल।
(ठ) मधेशी जनअधिकार फोरमके किछु वर्ष स लगातार बौद्धिक क्षेत्रमें एकल गेल तथ्‍यांक सहित के चेतामूलक पुस्तिका पुस्‍तकके प्रकाशन आ मधेशी अधिकारका विषयमें करै काजसँ किछु प्रतिष्‍ठा आ विश्‍वास के कारण सँ आन्‍दोलन ई स्‍वरुप लेलक।
(ड) शान्तिपूर्ण आन्‍दोलन में एकलगेल प्रहरी दमन आ सरकारी दमन सँ मधेश उत्तेजित भेल।
(ढ) शान्तिपूर्ण बन्‍दके कार्यक्रम पर माओवादी के हिंसात्‍मक प्रहार सँ आ राहारतप्राप्‍त मधेशी कार्यकर्ता के मृत्‍यु सँ आगि मे घ्‍यूके काज एकलक आ माओवादी विरुद्धमें आन्‍दोलन केन्‍द्रीत होइत समग्रमें खस वादी सत्ता केँ विरुद्ध में उत्तेजित होइत गेल।
(ण) प्रधानमन्‍त्रीको पहिल सम्‍बोधन कपटपूर्ण रहल वात में मधेशीले विश्‍वास भेल आ आन्‍दोलन उत्तेजित होइत गेल ।
(१२) वर्तमान अस्‍था
(क) आठ दलद्वारा अनुमोदित प्रधानमन्‍त्री क देशक नाम सँ सम्‍बोधन के कतहु कोनो रुपमें लागु नहि भेल अछि।
(ख) शान्ति तथा पुननिर्माण मन्‍त्री तथा वार्ता टोली संयोजनक साथ कएल गेल सहमति लागु नहि भेल छै। जाहिमे राजनीतिक मुद्दापर सहमति नहि वनलै सिर्फ प्राविधिक मुद्दा पर।
(ग) संघीय संरचनाक अधार तय सरकार नही कएलक जाहिस मधेश आ जनजाति सबके शंका सरकार पर छै।
(घ) सरकारद्वारा समानुपातिक उपास्थिति (राज्‍यके प्रत्‍येक अंगमें) के कोनो प्रयास नहि कएक गेल अद्धि पुराने खसवादी अहंकारी प्रवृत्ति कपट वर्तमानो मे अछि।
(ङ) सात दलके पार्टी संगठन में तथा नीति निर्माणके स्‍थान पर कोनो समानुपातिकता अवलम्‍बन नहि कएलक अछि।
(च) 1 दर्जन सँ वेसी हथियार धारी संगठन मधेशमें संचालन भेल जे अछि हिंसा, अपहरण, धम्‍की के माओवादी शैली अपनौने अछि।
(छ) किछु हा‍थियारधारी समूह मधेशके एकटा स्‍वतन्‍त्र देश, राष्‍ट्र के नीति ‘क’आन्‍दोलन अछि।
(ज) मधेशके उत्तरीक्षेत्रमें राजमार्ग के कातेकात परिस्थितिवस वस बसल आ बसाओल गेल पहाडी वर्ग मधेश आन्‍दोलन, मधेशी आ मधेशी आ मधेककके विरुद्धमें अपन शक्ति प्रयोग करेत अछि। राजमार्गपर कब्‍जा नियमित बन्‍द मधेशी पर हमला, मधेशी अधिकार प्रति विष वमन, संघीय अन्‍तर्गत मधेश राज्‍यके विरुद्ध मे अलग राज्‍यकमाग कत्‍यादिस मधेशमें एकटा खास प्रकारक शंका भय आ छै आ उत्तेजना के सम्‍भावना छै। ओनाक हुनका पहाडी समुदायक सभके मधेशमें अधिकार, सम्‍मान, सुरक्षा, स्‍थान इत्‍यादी खतडा देखैत आक्रोशित अछि। आ एकटा नयाँ द्वन्‍दक संभावना अछि ।
(झ) अखन कोनो एकता दल एकटा नेता मधेशक भावनाके प्रतिनिधित्‍व नहिक रहल अछि। संगिठत आवाज नहि आवि रहल अछि। समग्र मधेश अहिंसात्‍मक आ हिंसात्‍मक आन्‍दोलनमें केन्‍द्रीत अछि।
(ञ) मधेश मे वर्तमान राज्‍यसत्ता प्रति अविश्‍वास आक्रोस आ आग्रह मात्र अछि मुदा एकरा अपराधिक कृयाकलाप के आरोप लगवैत सीमा कडा करारहल अछि जैस नेपाल भारतके सम्‍बन्‍धके गलत प्रयोग आ भविष्‍यमें गलत व्‍याख्‍या कएल जाएबाक संभावना अछि।
(ट) राज्‍य पक्ष सँ जायज माग पूरा करके बदलामें या सहमति भेलवात के पुरा कर के बदलामें गृहमन्‍त्री तथा अन्‍य विशाल नेता सभक धमकीसँ सेहो आक्रोस में बृद्धि भ रहल अछि। मधेशकै हतियारधारी समूह उत्‍साहित अछि। आ उदाहरणीय बुझैत अछि।
(ड) दिना‍नुदिन मधेशक होइत मरुभूमिकरण राज्‍यपक्षद्वारा उत्तरी मधेशमें कएल गेल जंगल विनास पहाडी मूलके नागरिकके बसोबास स मात्र भेल से मधेशमें बौद्धिक क्षेत्र आ राजनीतिक क्षेत्रमें व्‍यापक उठि रहल अछि। ई सभ अखन वर्तमान मनस्थिति आ पतिरि‍स्‍थति नेपालमें अछि।
(१३) मेधशी समस्‍या के समाधान:
(क) सुगौली सन्धि पश्‍चात मधेशमें रहल मधेशी के पहाडी सत्ता नेपाली ने बुझैत रहल अछि। मधेश नेपाल आ मधेशी इन्‍डीयन कहिक बुझैत रहल, व्‍यवहार करैत रहल, सनीति वनबैत रहल, अपमान करैत रहल, नागरिकता सँ ब‍ञ्चित करैत रहल। तैं मधेशी के नेपाली बुझैक सम्‍मान दैक व्‍यवहार नीक करैत। अर्थात मधेशी के अपन पहिचान सहित नेपालमें रहए पाएव।
(ख) राज्‍यक प्रत्‍येक अंगमे मधेशीके समानुपातिक आ सम्‍मानजनक उपस्थिति:-
राज्‍य नीति निर्माणक प्रत्‍येक अंगमें राज्‍यक प्रतीक्षा अंगमे मधेशीके उपस्थिति देखवनाई अति आवश्‍यक अछि। दलक केन्‍द्रीय निकाय, राज्‍यक अग सभमें शीघ्रतिशिघ्र मधेशीके स्‍थान नहीं भेटत मधेश शान्‍त नही रहत से सम्‍भावना।
(ग) राज्‍यक पुनसंरचना
राज्‍यक पुनर्संरचना होइक आ ओ संघीय संरचनाके निर्णय करैक आ संघीय संरचना जाति, संस्‍कृति, भाषा भौगोलिक एकरुपता, प्राकृतिक सम्‍पदा इत्‍यादिके आधारपर होइक जे मधेशक चाहना आ माग छैक। समग्र मधेश पर स पहाडी शोषणा उत्‍पीडन के अन्‍त्‍य होइक आ तहन संधीय संरचना के प्रत्‍याभूति होइत एहन संधीयता र पृथकतावादी आन्‍दोलन कमजोर होइछ।
(घ) राज्‍स्‍वक समुचित उपयोग
कर भन्‍सार, मालपोत इत्‍यादी राजस्‍वक जे आय छै तकरा मधेसमें नगणय मात्रामें व्‍यय करबाक नीति आव व्‍यवहार रहि आएल छै तै एकरा मधेशमें मधेशी प्रतिनिधिके राखि नीति निर्माण कएनाई आवश्‍यक छै।
(ङ) सन्धि सम्‍झौता कालमें मधेशीक सहभागिता
भारत नेपालक वीचमें ऐतिहासिक, भगौलिक, राजनैतिक सांस्‍कृतिक साहित्‍यक सम्‍बन्‍ध छै तकरा देखैत भारत के कोको सम्‍झौता, सन्धि के कालमे मधेशी प्रतिनिधि बुद्धिजीवी रहनाई आवश्‍यक छै, अन्‍यथा निर्णय अव्‍यवहारिक होइत छैक। खास के जल सम्‍बन्‍धी जलविद्युत सम्‍बन्धि कोनो सम्‍झौता में।
(च) संविधान सभामें समानुपातिक सहभागिता:
आगामी संविधानसभामें मधेशाकी केँ मधेशक जनजातिके समानुपातिक उपस्थिति, संविधान सभाके लेल अगामी संविधान के लेल देशक शान्तिकेँ लेल, मधेशाक समस्‍याके समाधान के लेल आ राष्ट्रिय धारमें मधेशीके सम्‍माहितक लेल नेपालके सवल राष्‍ट्र बनकेलेल आवश्‍यक अछि।
(१४) अन्‍तमे
मधेशके समस्‍या के तत्‍काल समाधान आ दीर्घकालीन समाधानक उपाय में उपरोक्त विविसभ दीर्घकालीन अछि त तत्‍कालीन समाधान के रुपमें मधेशके प्रत्‍येक शक्ति सँ विना धम्‍की वार्ता के ‘क’ समस्‍याक शान्तिपूर्ण समाधान करबाक चाही आ मधेशीके साथ विना कोनो छल‍कपट, विशवासमें लक राष्ट्रिय समाधानदिस जएवाक चाहि।
शीतल
जनकपुर, धनुषा

Suggested citation: शीतल झा. “नेपालमे मधेशीकेँ समस्या आ समाधान.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 49, 2010-01-01. https://www.videha.co.in/research/2010/49/नेपालमे-मधेशीकेँ-समस्या-आ-समाधान.htm

मूल विदेह अंक / Original issue