जनकपुरमे मिथिला महोत्सवक आयोजन ः नवअध्यायक शुभारंभ २.-कथा-ऋषि बशिष्ठ-पूत कमाल
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रामभरोस कापडि भ्रमर
नेपाल सरकारक संस्कृति मंत्रालय द्वारा २०५५ सालक ऐन द्वारा गठित वृहत्तर जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद् एहिसं पूर्वो तीन बेर ‘मिथिला महोत्सव’क आयोजन २०६३, २०६४ आ २०६५ सालमे कऽ चुकल अछि । मुदा ओ तीनू आयोजन खेल तमासा सं आगां नहि जा सकल । राजनीतिक हस्ती सभक जमघट आ तेहने सन पृष्टपोषण करैत सम्पूर्ण आयोजन ।
एमहर दीगम्वर राय जखन परिषद्क अध्यक्ष भऽ अएलाह तं मिथिला महोत्सव किछु फूट करबाक सोच बनौलनि । फूट एहि मायने मे जे ओ मिथिलाक परम्परागत लोक संस्कृति आ जविनशैलीके मूर्त्त अमूर्त्त रुपें प्रस्तुत कएल जएबाक विचार रखलनि । तकरालेल स्थानीय जानकार सभक चारि पांच बैसार भेल आ तखन जे ढांचा तैयार भेलै तकरे आधारपर सम्पूर्ण कार्यक्रम करबाक नियार भेल अछि । अगामी रामनवमीक अवसर पर चैत्र ९ गते सं १३ गते (२२ मार्चस २६ मार्च धरि) आयोजन होब’ बला ई महोत्सव स्वयं अपनामे एखन धरिक नव हयत ।
औचित्य एवं विशेषता
प्राचीन मिथिलाक स्थापना माधव विदेह द्वारा आइसं पांच हजार वर्ष पूर्व भेल ई इतिहास सत्य अछि । तहिया सं आइधरि तीन राजवंश मिथिलामे शासन कएलक । राजा जनकक वंश समाप्त भेलाक बाद १०९७ ई. मे नान्यदेव मिथिलाराजक नओ ठाढ कएलनि जे २२७ वर्ष धरि चलल । तकरा वाद हेरायल मिथिला पुनः १५५६ ई. मे ओइनवारवंशक संग उजागर भेल जे दरिभंगा महाराजक राजपाट गेला धरि चलल । एहि विच अनेकों तरहक सामाजिक, राजनीतिक उथल–पुथल होइत रहल । मुसलमानी शासक सभक आक्रमणसं पीडित मिथिलाञ्चलक राजा वा श्रेष्ठ व्यक्तित्व, विद्वान सभ नेपाल दिश शरण लेलनि । अपन संस्कृति आ भाषाक संग पलायन कएल ई महापुरुष लोकनि मैथिल संस्कृतिक छापकें अक्षुण्ण रखलनि । ओकर परम्परागत सम्पदा, लोक व्यवहार, जीवन शैली, आचार–व्यवहार सभकें वर्षहुं धरि वचा कऽ रखलनि । जकर प्रभाव समस्त मिथिलाक आवादीपर पड़लैक । मिथिलाक विशिष्ट जीवनशैली, सांस्कृतिक परम्परा, धार्मिक सहिष्णुता एखनो मननीय रहल अछि । माछ–मरुवाक रोटी, खेसारीक साग आ आलुक सन्ना, तिलकोरक तरुआ, छाल्हिगर दही–मुंहसं पानि आबि जाए तेहन भोजनक सामग्री रहल अछि । धोती, अंगपोछा, मुरेठा, गोलगाला–खास पहिरन अछि तं जट–जटिन, सामाचकेवा, झिझिया, लोक पर्व । अरिपन, टाटपरक चित्रांकन मौलिक चित्र अछि तं पोखरि मे चुभक्का मारि उजी–उजीक खेल अपन पहिचानक साक्षी बनल अछि । पौती, पेटारी, खुरपी–हंसुआ, जांत–ढेकी, खेत–खढ़िहान जीवन पद्धतिक अंग रहल अछि । सोहर, झूला, पराती, पावस, महराई, पजनिया,ं गोदना, पमरिया गीत – घर–आंगनक शोभा बनैत आबि रहल अछि । हजाम, लोहार, कुम्हार, डोम गृहस्थी चलब’ बला पसारी सभ अछि । एहने तत्व सभक सहयोगसं वनैत अछि एकटा मैथिल परिवार, मिथिलाक जनजीवन ।
‘मिथिला महोत्सव’ तेहने जीवन शैलीक ताही रुपमे प्रस्तुति हयत । आजुक नवका पीढि अपनो परम्परागत लोक व्यवहार, जीवनशैलीकें विसरने जा रहल अछि, एहि प्रदर्शनीसं अप्पन पहिचान प्रति आर उर्जावान बनत से विश्वास कएल जा रहल अछि ।
एकर आयोजन वृहत्तर जनकपुर क्षेत्र विकास परिषद् जनकपुरधाम कऽ रहल अछि । एकर नारा छैक, हम्मर संस्कृति हम्मर पहिचान ः समृद्ध मिथिला हम्मर अभियान’ ।
महोत्सवक आकर्षक पक्ष
्र मिथिलाञ्चलमे पहिल बेर एक्के ठाम मिथिलाक गौरब गाथाक विभिन्न पक्षसभ, इतिहास, भूगोल, संस्कृति, कला एवं लोक जीवनक झांखीसभ जीवंत रुपें प्रदर्शन कएल जाएत ।
्र मैथिलीमे लिखित प्राचीन पाण्डुलिपि, दस्तावेज तथा पुरातात्विक सामग्री सभक प्रदर्शन हयत ।
्र मिथिलामे रहनिहार जनजाति, आदिवासी एवं विभिन्न जाति सभक परम्परागत व्यवसाय देखब’ बला फूटफूट स्टल सभ राखल जाएत, जाहिमे व्यवसायिक, उत्पादनक क्रियात्मक रुप देखाओल जाएत ।
्र मिथिलामे परम्परागत रुपें प्रचलित भेषभूषा, परिधान आ आभूषणक सेहो ओत्त प्रदर्शन कएल जाएत ।
्र मैथिल खानपानक विविध रुपरंगक स्वाद आ अनुभूति लेल जा सकत ।
्र सभ धार्मिक सम्प्रदायक फूटफूट स्टल द्वारा अपनअपन धर्म ज्ञानक प्रचार प्रसारक अवसर उपलव्ध कराओल जाएत ।
्र लोक जीवनमे आब बला बारहो मासक पर्वतिहारक विशिष्टता दृश्य द्वारा देखाओल जाएत ।
्र लोक गायकगायिका सभक माध्यमसं जन्मसं मृत्यु धरिक भावदृश्यक अनुभूति गायन द्वारा कराओल जाएत ।
्र लोकमंचक प्रस्तुतिकरण क्रममे राजा सलहेस, दीनाभद्री, लोरिक, दुलरा दयाल, जया विसहरक नाचक संगहि जटजटिन, समाचकेबा, झिझिया नृत्यसभ देखाओल जाएत ।
्र लोकशिल्पक विभिन्न पक्षकें देखब’ बला प्रदर्शनीक आयोजन कएल जाएत ।
्र प्रचलित लोक गाथाक नायक आ कथा प्रसंगकें माटिक मूर्ति द्वारा सजीव रुपें प्रस्तुत कएल जाएत ।
्र मैथिलीमे प्रकाशित पत्रपत्रिका सभ, पुस्तक सभक प्रदर्शनी सेहो रहत ।
्र महोत्सव अबधि भरि विचारगोष्ठी, कवि सम्मेलन, वाल गोष्ठी, फिल्म उत्सव, सभासद् सम्मेलन, व्यवसायिक एवं औधोगिक प्रदर्शनी, खेलकूदक संगहि मनोरंजनक आनो सामग्रीक भरमार रहत ।
एहि तरहें विभिन्न आयोजनक तैयारि चलि रहल अछि । प्राचीन तिरहुतिया गाछीकें एकर आयोजन स्थल बनाओल गेल अछि । एकरालेल ४९ गोट उपसमिति बनाओल गेल अछि । लगभग ५० लाख टकाक खर्चसं सम्पन्न होब बला ‘मिथिला महोत्सव’ सम्पूर्ण मैथिली भाषीक हेतु दर्शनीय तं हएबे करत, आन्तरिक पर्यटनकें सेहो बढाबा एहिसं भेटतैक । नेपालमे अगामीसन् २०११ कें पर्यटन वर्षक रुपमे मनएबाक तैयारी चलि रहल अछि । एहि तरहक आयोजन ताहिमे सहयोगीक काज करत से विश्वास कएल जा सकैछ ।
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