नेपालमे मैथिली भाषामे पढाइ: उत्साह कम निराशा बेसी
अपन मातृभाषाक उत्थानक लेल नेपालक हरेक जनता जागल अछि ।
कोना बेसी अधिकार प्राप्त हुए ताहिमे सम्बन्धित भाषीसभ लागल रहैत अछि । नेपालक राजा सभद्वारा लागु कएल गेल एकटा भाषा आ एकटा भेषक सूत्रमे परिवर्तन भऽ रहल अछि ।
एहनमे सभ अपन अधिकारक लेल सचेत अछि ।
कोनो भाषाक विकासमे ओकर इतिहास, साहित्य आ लिपीके जहिना योगदान होइत छैक ताहि सँ कम ओकर भाषामे पढाइ आ भाषाक माध्यम सँ रोजागारीके सेहो नहि होइत छैक ।
मैथिलीके स्वर्णिम इतिहास अछि एकर अपन लिपी अछि एकर पढाई सेहो प्राथमिक विद्यालय सँ लऽ कऽ स्नात्तकोत्तरधरि होइत अछि । नेपाल आ भारतक लाखो व्यक्तिक मातृभाषा मैथिली अछि । मुदा एकर विकास जाहि गति सँ होएबाक चाही से नहि भऽ रहल अछि । उपलब्धी सेहो ओतेक नहि अछि ।
पढाइके स्थिति
मैथिलीमे प्राथमिक विद्यालय सँ स्नात्तकोत्तरधरि पढाइ होइत अछि । नेपाल भारतक विभिन्न विश्वविद्यालय में एकर पढाइके मान्यता अछि । नेपालमे मिथिला राज्य स्थापनाकें चर्चा चलिते विद्यार्थीसभ मैथिली पढाइके अपन भविष्य बनाबय लागल छथि ।
नेपालक त्रिभुवन विश्वविद्यलय अन्तर्गत भऽ रहल एमएकेँ पढाईमे मैथिली विषय लऽ कऽ जनकपुरमे मात्र एक सय सँ बेसी विद्यार्थी अहि वर्ष नामाकंन करौने छथि । पाँच वर्ष पूर्व एमए मे दूटा तीनटा विद्यार्थी रहैत छल । मुदा तीन वर्ष सँ विद्यार्थीसभक चाप एकाएक बढल मैथिली विभागक तथ्यांक देखबैत अछि । तहिना नेपालमे एफएम रेडियो सभक विकासक कारण सेहो मैथिली भाषामे पढाइ दिस लोक अग्रसर भेल अछि । नेपालक ४० टा एफएम रेडियो मैथिली भाषामे समाचार आ कार्यक्रम प्रशारण करैत अछि । नेपालक किछ टेलिभिजन सेहो मैथिलीमे समाचार देबय लागल अछि । अहि सभ सँ मैथिली भाषा लिखय आ जानयबलाके मँाग कसि कऽ बढ़ल अछि ।
फेर प्राथमिक विद्यालयमे सेहो नेपालमे मैथिलीकेँ पढाइ होइत अछि । २०५६ सालमे मैथिलीकेँ प्राथमिक तहमे पढाइक लेल किताब छपाएल । तहिया सँ विभिन्न विद्यालय सभमे पढाइ होइत अछि । अहि क्रममे अखन फेर सँ प्राथमिक स्तरक पढाईक लेल ४० हजार किताब छपाबयकेँ काज चलि रहल अछि ।
नेपालक सप्तरीमे मैथिली पढाइकेँ केना व्यवस्थित कएल जाए ताहि लेल बभनगामा कट्टीक प्राधानाध्यापक जबाहर लाल देबक नेतृत्वमे मैथिली पढाइ उत्प्रेरक कार्यदल गठन कएल गेल अछि ।
ओ दल विभिन्न जिल्लामे कोना किताब पठाओल जाए सँ लऽ कऽ पढाइ केना शुरु कएल जाए ताहिमे अग्रसर रहल कार्यदलक सचिव देवेन्द्र मिश्र जानकारी देलन्हि । धनुषाक बहुअर्बा माध्यमिक विद्यालयक पूर्व प्राधानाध्यापक अयोध्यानाथ चौधरी धनुषामे पहिलवेर प्राथमिक तहमे पढाइ शुरु कएलन्हि । ओ विद्यालयमे प्राथमिक तह तथा ९ आ १० कक्षामे एखनो मैथिलीमे पढाइ होइत अछि ।
पढाईकेँ इतिहास
भारतमे बहुत पहिनहि सँ मैथिलीमे पढाइ शुरु भऽ गेल मुदा नेपालमे २००८ साल सँ पढाइ शुरु भेल इतिहास अछि । जानकी आधार स्कुलमे एकर पहिल पढाई शुरु भेल अछि । ओना २०१९ सालमे सरकारद्वारा पूर्वीय भाषाके रुपमे ९ आ १० कक्षामे पढाइके लेल अनुमति देलाक बाद जोड सँ शुरु भेल अछि । जनकपुरक सरस्वती माविमे पण्डित सच्चिानन्द झा मैथिली पढाइ शुरु कएलन्हि । फेर धनुषाक विभिन्न विद्यालयमे क्रमशः मैथिली पढाइ शुरु भेल । धनुषाक बभनगामा मावि आ नगराइन माविमे बहुत विद्यार्थी रहैत छल । बभनगामामे मैथिलीक प्रसिद्ध नाटककार महेन्द्र मलंगिया लम्बा समयधरि मैथिलीमे पढबैत रहलाह ।
क्याम्पसक इतिहासक बात कएल जाए तऽ २०१४ साल साउन १४ गते इन्टर कलेजक नाम सँ क्याम्पसकेँ स्थापना भेल आ स्थापने काल सँ मैथिलीक अध्ययन शुरु भेल । मैथिलीक प्रथम प्राध्यापकक रुपमे पण्डित सूर्यकान्त झा नियुक्त भेलाह आ डा. धीरेश्वर झा धिरेन्द्रके आगमन १९६१ इ.धरि ओ कुशल शिक्षकके रुपमे सुशोभित रहलाह । डा. धीरेन्द्रक करिश्माई व्यक्तित्वक कारण सभक ध्यान मैथिली दिस आएल । डा. धीरेन्द्रक प्रयासमे २०३८ सालमे जनकपुरमे त्रिभुवन विश्वविद्यालय मैथिलीकेँ केन्द्रीय विभाग खोललक । ओहि साल सँ मैथिलीके स्नात्तकोत्तरमे पठन पाठन शुरु भेल । पहिल ब्याच मे १६ गोटे छात्र रहथि ।
एखन क्याम्पसक बात कएल जाएत तऽ जनकपुरक अतिरिक्त सिरहा, सप्तरी आ महोत्तरीमे मैथिलीके पढाइ होइत अछि । ई जिल्ला सभमे रहल प्लस टू क्याम्पस सभमे सेहो मैथिलीके पढाइ होइत अछि ।
अवरोधक रुपमे मैथिली विभाग
नेपाल सरकार मैथिली भाषाक विकासक लेल त्रिभुवन विश्वविद्यालय अन्तर्गत केन्द्रीय मैथिली विभाग खोलने अछि ।
ओकर कार्यालय जनकपुरमे रहला सँ आ मैथिली भाषाक लेल सरकारक उच्च निकाय सेहो रहला सँ विभागक दायित्व किछ आओर बढि जाइत अछि । मैथिली भाषाक स्नात्तकोत्तरमे मात्र एक सँ बेशी विद्यार्थी नयाँ ब्याचमे अध्ययन कऽ रहल अछि । मुदा पढाई नहि होइत अछि । एकर मुख्य जिम्मेदार विभागाध्यक्ष डा. पशुपति नाथ झा छथि जे तलब भत्ता पकाबय पर मात्र ध्यान केन्द्रित कएने छथि ।
नेपाल सरकार सँ भाषिक शिक्षाक विकास विस्तारक जिम्मा पौने विभागकेँ अहि क्षेत्रक अन्य क्याम्पस सभमे मैथिलीमे पढाई विस्तारक लेल अखन धरि कोनो योजना नहि लौने अछि । आइए, बीए कोनो विषय सँ करु मुदा एमए मे मैथिली पढि सकैत छी मैथिली विभागद्वारा आनल गेल नयाँ नीति मैथिलीकेेँ समाप्त करबाक प्रयास रहल जानकारसभ कहैत छथि । मैथिली विभागद्वारा आनल गेल नयाँ पाठ्यक्रम सेहो विवाद सँ मुक्त नहि रहल अछि । मैथिली विभागमे कार्यरत सह–प्राध्यापक परमेश्वर कापड़ि कहैत छथि –‘मैथिली विभागक प्रमुख डा. पशुपति नाथ झा मैथिलीकेँ आन्दोलनी नहि मैथिलीक कर्मचारीकेँ रुपमे काज करैत छथि । हुनकर दीर्घ योजना किछ नहि छन्हि । ताहि लेल एतेक समस्या भऽ रहल अछि । ओना डा. झा नयाँ पाठ्यक्रममे किछ गल्ती भेल स्वीकार करैत अहिमे सुधार करब बतबैत छथि । ओना मैथिलीकेँ सभ सँ बडका आन्दोलनी अपने रहल प्रसंगक क्रममे बेर बेर कहलन्हि ।
पढाइक लेल बर्तमानमे प्रयास
पढाईक लेल जे नेपालमे माहौल बनि रहल अछि । ताहि हिसाव सँ विशेष रुप सँ प्रयास नहि भऽ रहल अछि । तखन मैथिलीक यूवा साहित्यकार धीरेन्द्र प्रेमर्षिक प्रयास सराहनीय रहल अछि । ओ कान्तिपुर एफएमक हेल्लो मिथिला मार्फत अभियान चला रहल छथि ।
मैथिली पढाई उत्प्रेरक दल सप्तरीक सचिव देवेन्द्र मिश्र स्वीकार कएलन्हि ‘यदि धीरेन्द्र प्रेमर्षि बेर बेर नहि खोंचारितथि तऽ सप्तरीमे कार्यदल नहि बनैत ।’ ओना जनकपुरक मिथिला नाट्यकला परिषद, युवा साहित्यकार नित्यानन्द मण्डल, मानवअधिकारवादी विजय दत्तक सेहो महत्वपूर्ण योगदान रहल छन्हि ।
जनकपुरमे अन्तराष्ट्रीय मातृभाषा दिवसक अवसर पर अहिबेर निकालल गेल जुलुसमे मातृ भाषा शिक्षा पर विशेष जोड देल गेल छल ।
आब की ?
मैथिली भाषाक विकासक लेल बहुत काज भेल अछि । मुदा एतहि सन्तोष करबाक अवस्था नहि अछि । विश्वविद्यालयक पढाईमे हरेक तहमे मैथिली भाषाक पढाई सञ्चालन करबाक लेल लविङ्ग ,कैम्पानिङ्ग, प्रचार प्रसार, क्षेत्र विस्तार, अवसरके सृजना, योजना , अनुगमन, कार्यनीति, रणनीति आ व्यवस्थापनक आवश्यक्ता अछि । अहिके लेल त्रिभुवन विश्वविद्यालय, नेपाल सरकार, गैर सरकारी संस्था, स्थानीय निकाय सहितक अग्रसरताक आवश्यक्ता अछि । तहिना आवश्यक्ता अछि आन्दोलनक आ ओकर कुशल नेतृत्वकेँ । मुदा ई जिम्मेबारी के लेत ? मिथिला ओकर प्रतिक्षा कऽ रहल अछि ।
बिपिन झा
बिपिन झा