विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

स्वान विमर्श

सत्यानंद पाठक · 2010-04-01 · अंक 55

स्वान विमर्श
आइ बारहम दिन बीतय पर अछि, मुदा ओइ बेल्ट वलाक कोनो अता-पता नहि अछि। परचून कें दुकानक आगा राति १० बजे धरि चलय वला चौपाल पर ओ आइयो नहि आयल आ' सभ ओकरहि लेल चिंतित छलथि। ककरो नीक नहि लगैत छलन्हि। ने बतियाय मे आ' ने खेलाय-धूपय मे। गोरकी मौसी आ' भुल्ला काका एक संग जरूर बैसल छलाह, मुदा बतिया नहि रहल छलाह। ओम्हर छोटकन सेहो उदास छल। ओ बेल्टे वलाक संग बेसी रहैत छल। दुनूक उम्र मे बड्ड कम फर्क छलैक। आब ओकरा संग खेलय वला कियो नहि छल। हं, मोती ओकरा बगल मे जरूर बैसल छल। मुदा एहि चितकबराक मन सेहो उदास छल।
मिनी दीदी नांगरि डोला रहल छलीह आ' बाट कें निहारि रहल छलीह। दहिना कात कुनो आहट भेला पऽर ओ बगलक गली में सेहो झांकि लैत छलीह। हुनका लगैत छलैन्ह जेना मैक्सी एम्हर सँ तऽ नहि आबि रहल अछि। ओहि बेल्ट वला नटखट कें लोक सभ प्यार सँ मैक्सी कहैत छथि। ओकरा पर सभ जान लुटबैत छलाह। ओ कहां जनमल, ओकर माय-बाप कें छथि ककरो पता नहि। जखन सँ ओ राति कऽ चौपाल पर आबय लागल सभकें पसिन्ह पडि गेल। ओ सिर्फ भुल्ले काका सँ डेराइत अछि। ओ कहियो काल डांटि-डपटि दैत छथिन्ह। मैक्सी भुल्ला काकाक बाहर निकलल दांत सँ डेराइत अछि। मैक्सी कहैत रहैत अछि जे अगर गलतियो सँ भुल्ला काकाक दांत कतहु फंसि गेल तऽ असाध्य घाउ भऽ सकैत अछि। ओना भुल्ला काकाक कोर पर लाल बनल भुल्ल आंखि कम खतरनाक नहि लगैत अछि। हुनकर आंखि सँ तऽ तैयो बचि सकैत अछि। ओना इ अलग बात छल कि भुल्ला काका सेहो ओकरा कम स्नेह नहि करैत छथि। अनुशासन अलग बात अछि।
परचूनक दुकानक मालिक गंजू महाजन दुकान समेटब शुरू कऽ देने छलाह। हुनकर तीनू बेटा अपन-अपन दायित्व मे लागि गेल छलाह। नन्हकू खाली पडल कार्टून कें कबाड में फेंकि रहल छल। बडका बेटा दुकान मे घटल समानक चिट्‌ठा बनबय में अपस्यांत छल। मझिला दुकानक बाहर पसरल समान कें भीतर ठेलि रहल छल आ' गंजू महाजन रोकड मिला रहल छलाह। इ सभ देखि गोरकी मौसीक आंखिक कोर भीजि गेल। नोर टपकहि वला छल। चितकबरा उसांस भरैत बाजल-ङङ्गआइयो नहि फिरल।'
गंजू महाजनक दुकानक आगाक खुलल स्थान दिनभरि कतेको तरहक जमघटिक केंद्र अछि। भोर आठ बजे सँ ओतय लगक इस्कूल मे अपना धीया-पूता कें पहुंचावय वला अभिभावक आपस मे बतिया लैत छथि। हिनका लोकनिक गप्प-सप्पक शाश्वत विषय इस्कूलक हेडमास्टरनीक धीया-पूताक प्रति क्रूरता आ' इस्कूल मे अजब-गजब कें नियम होइत अछि। हिनका लोकनिक गेलाक बाद ऑफिस जाय वला सभक हुजूम ओतय अबैत-जाइत रहैत अछि। बैग लटकौने नवका-नवका छौडा सभ बस पकडक लेल ओतय ठाढ भऽ जाइत अछि आओर बस अबैत मांतर इ सभ लपकि कऽ लटकि जाइत अछि। दुपहर एक बजे सँ तीन बजे धरि गार्जियन लोकनि फेर ओतय मंडराय लगैत छथि। हुनकर निशाना इस्कूल गेट होइत अछि। गेट सँ भारी-भरकम बस्ता लटकौने नेना-भुटका निकलैत छथि जिनका हुनकर गार्जियन लपकि लैत छथि। नेना सभ अपना अभिभावक कें ओतय आइसक्रीम, जलपुरी, गोलगप्पाक ठेला दिस खींचय लगैत अछि आओर अभिभावक डांटि-डपटि-चुचकारक अस्त्र सँ हुनका बुझावक कोशिश करैत छथि। सांझ होइत मांतर ओतय थाकल-ठेहियायल लोकसभ, नवतुरिया छौंडा सभक जमघट लगैत अछि। परचून दुकान लगक शराबक दुकान टिमटिमाय लगैत अछि आ' फेर रंगीन सांझक नजारा उपस्थित भऽ जाइत अछि। राति ढहलाक संगहि प्लास्टिकक गिलास आ' छोट-पैघ बोतलक खन-खन सँ ओ स्थान गूंजय लगैत अछि। अलग-अलग झुंड मे लोकसभ सडक पर पासिखानाक आनंद मे डूबि जाइत छथि।
इ नवीन संस्कृति किछुए वर्ष सँ पनपल अछि। शराबक प्रचलन आओर ओकर उपलब्धता दुनू समान रूप सँ बढल अछि। पछिला किछु वर्ष मे एहि शहर मे शराब दुकानक बाढिसन आबि गेल अछि। हर पांच मे एक दुकान विदेशी शराबक अछि। शहर मे दूधक अभाव अछि। शराब दुकानक कोनो अभाव नहि। एहि बातक परवाह बिना कएने कि इ दुकान कहां होमय चाही। इस्कूल, मंदिर, व्यायामशाला बगल मे अछि तैयो कोनो परवाह नहि। शराबक दुकान बढलाक कारणहि शहर मे शराब सेवनक ढेरो तरीका इजाद भेल अछि। एहि क्रम मे ङङ्गफोर व्हील बार'क प्रचलन तेजी सँ बढल अछि। आफिस, दुकान आ' अपन प्रतिष्ठान सँ फुर्सत भेटल आओर चारिटा दोस्त तय कएल। बस फेर बोतल, सोडा, नमकीन और जलक बंदोबस्त भेल आओर बाटक कात लागल कारहि मे बार खुजि गेल। आब स्टेंडिंग बार सेहो आबि गेल अछि। शराब दुकानक सामनहि एकटा मोटरसाइकिल कें घेरि कऽ चारिटा दोस्त ठाढ भेटि जाथि तऽ बुझू ओतय ङङ्गस्टेंडिंग बार' चालू अछि।
गंजू महाजनक परचूनक दुकानक सामने वला जगह पर भोर छः बजे सँ राति बारह बजे धरि गतिविधि चलैत रहैत अछि। राति साढे नौ बजे सँ ओतय श्वान समाज जुटैत अछि। एहि समाजक लेल हऽम संस्कृतनिष्ठ शब्दक प्रयोग कएल अछि। ओना चालू भाषा मे कतेक शब्द अछि, मुदा एतय जाहि समाजक चरचा कएल जा रहल अछि ओ वास्तव मे साधारण नहि अछि। ओकर संवेदना, चिंतन प्रक्रिया आ' व्यवहार कतहु सँ आम आदमीक स्तर सँ कम नहि अछि। इ समाज जखन जुटैत अछि तऽ समाज, जनजीवन सहित कतेको मुद्दा पर गंभीर चरचा होइत अछि। समाजक लोक दिनभरि छितरायल रहैत अछि। भुल्ला काका आइयो ओहि पुरना दरबारक सामने दिनभरि जुटल रहैत छथि आओर कोनो अनचिन्हार आदमी कें देखैत मांतर भूकय लगैत छथि। गोरकी मौसी ओहि बैंक वला दंपति कें खूब स्नेहिल छथि। आब एहि उम्र मे गोरकी मौसीक लऽग कोनो गंभीर जिम्मेदारी नहि छन्हि। ओ दिनभरि दंपतिक घरक छहरदिवारी मे रहैत छथि आओर सांझ कऽ दंपतिक घर फिरते मांतर हुनकर काज समाप्त भऽ जाइत अछि। राति अन्हार होइत मांतर ओ घर सँ निकलि कऽ एहि चौपाल पर आबि जाइत छथि। मिनी दीदी कतहु बान्हल नहि छथि। ओ जन्महि सँ एहि दुआरि-ओहि दुआरि दौडैत रहली अछि। चितकबरा कें कियो कलकत्ता सँ लायल छल। कीनि कऽ। एक दिन बीमार पडि गेल तऽ ओकर मालिक ओकरा सडक पर छोडि गेल छल। छोटकन तऽ नया अछि। ओकर माय ओकरा एहि इलाका मे छोडि गेल। एहि बीच मैक्सीक एहि समाज मे आगमन भेल। ओ एकटा समृद्ध परिवारक दुलरुआ अछि। राति मे किछु समयक लेल ओ खुलल बसात मे छोडि देल जाइत अछि आओर ओ ओकर फायदा उठाकऽ समाजक चौपाल मे शामिल भऽ जाइत अछि।
परंच एहन पहिले कहियो नहि भेल। जखन सँ मैक्सी समाज मे शामिल भेल अछि ओ नियमित रूप सँ चौपाल पर हाजिर होइत रहल अछि। हं, कोनो दिन अपन मालिकक संग कतहु जाइछ तऽ ओ ओहि दिन नहि अबैत छल, मुदा दोसर दिन ओ फेर मौजूद भऽ जाइत छल। इ पहिल मौका छल जे बारह दिन सँ गायब छल। एहिलेल समाजक लोक मे खूब चिंता पसरल छल।
गोरकी मौसी कहलनि-ङङ्गमैक्सी के बिना चौपाल सुन्न लगैत अछि।' भुल्ला काका मौसीक तरफ देखैत सहमति मे मुडी हिलौलनि। मौसी फेर बजली-ङङ्गहमरा चिंता एहि बातक भऽ रहल अछि कि ओहि अभिशप्त ३० अक्टूबरहि सँ मैक्सी गायब अछि। ओहि दिन शहर मे कतेको ठाम पैघ-पैघ बम विस्फोट भेल छल। कतहु मैक्सियो तऽ ओकर चपेटि मे नहि आबि गेल?'
- ङङ्गअ-रे की बात करै छी मौसी। तीस अक्टूबर कऽ मैक्सीक मालिकक छुट्टी नहि छल। एहिलेल ओहि दिन ओ बाहर नहि निकलल होयत।' चितकबरा कहलक।
- ङङ्गआब इ तू कोना कहि सकैत छह? भऽ सकैत अछि ओहि दिन मैक्सीक मालिक छुट्टी लऽ लेने होथि आ' ओ मैक्सी कें लऽ कऽ गणेशगुडी तरकारी कीनऽ गेल होथि, जेना कि कतेक बेर होइत अछि।'
- ङङ्गहं, एना भऽ सकैत अछि। मुदा सवाल अछि कि हमसभ एना कियाक सोचू।' मिनी दीदी कहलनि।
भुल्ला काका हाफी केलथि आओर कहलथि-ङङ्गएना सोचऽ कें कतेको कारण अछि। कियाक तऽ मैक्सीक कोनो अता-पता नहि अछि। ओकर मालिकक घरक दरबज्जा सभ दिन खुलैत अछि। हम स्वयं देखलहुं अछि। अगर मालिक एतहि छथि तऽ मैक्सी कें सेहो एतहि होमक चाही आओर अगर मैक्सी एतहि अछि तऽ ओकरा चौपाल पर जरूर आबक चाही।'
चितकबरा- ङङ्गभऽ सकैत अछि बम विस्फोट वला दिन ओ मालिकक संग नहि निकलल हो।'
गोरकी मौसी-ङङ्गभऽ सकैत अछि। मुदा संकट सिर्फ ओही दिनक तऽ नहि अछि। बम विस्फोटक बाद सँ तऽ समाज पर संकटक बादल छारलहि अछि।'
चितकबरा-ङङ्गकोना?'
गोरकी मौसी-ङङ्गतू एकदम भोला छह चितकबरा। कि तोरा बुझना नहि जाइत छह? जाहि दिन बम फाटल ओहि दिन लागल जेना जलजला आबि गेल अछि। हम ओहि राति चौपाल पर आयल जरूर रही, मुदा दस मिनटक लेल। महाजनक दुकान बंद छल आओर हमरा रातुक भोजन नहि भेल। किछुए काल मे सटका पटकैत किछु वर्दीधारी आयल आओर हमरा सभ कें पडाय पडल। तहिया सँ लऽ कऽ आइधरि माहौल शांतहि नहि भऽ रहल अछि। दिनभरि सायरनक अवाज गूंजैत अछि आओर वर्दीधारी लोकनिक आयब-जायब लागल अछि। बाट पर भीड निट्ठाह घटि गेल अछि आओर सून-मशान बाट हमरा समाजक दोसर मुहल्लाक कतेको गोटेक जान लऽ लेलक अछि।'
चितबकरा-ङङ्गअहां ठीक कहैत छी मौसी। हम ओहि दिन गणेशगुडी गेल छलहुं। ओतय कें नजारा देखि कऽ करेज कांपि गेल। गाडीक कबाड, जरल दुकान। कोन मे किछु पूजाक समान आ' जरैत मोमबत्ती।'
मिनू-ङङ्गहं, तीस अक्टूबरक ओहि दर्दनाक मंजरक बाद सँ तऽ माहौल बिलकुल अलग भऽ गेल अछि। कतय ओ हलचल आ' कतय इ सन्नाटा। एकदम मरघटसन। किछु लोक भोकासी पाडि कऽ कानि रहल छलथि, तऽ किछु लोक फफकि-फफकि कऽ करेजा गला रहल छलाह। जरल वस्तुक ढेर पर हम देखलहुं इस्कूलक बैग। जूता-चप्पलक अंबार लागल छल। एहि घटनाक बाद शायद पडेबाक क्रम मे लोकक पैर पिछरल हेतनि। लोकसभ बतिया रहल छलाह। ओहि दिन की भेल छल। एकटा बुढवा बाबा फफकि-फफकि कऽ बाजि रहल छलाह-ङङ्गओ अपन नातिन कें लऽ कऽ बजार आयल छलथि। नातिने जिद्द कएने छलन्हि कि हमरा बजार जयबाक अछि। ओ नातिन कें जूता कीनि देलन्हि आओर सोचलन्हि जे किछु तरकारी कीनि ली। इएह सोचब काल साबित भेल। ओ अखन तरकारीक दुकान लग पहुंचल छलाह कि कान सुन्न भऽ गेलन्हि। ओ खसि पडलाह। आओर फेर जखन होश आयल तऽ ........।' बुढवा बाबाक बात सुनि कऽ तऽ हम सन्न रहि गेलहुं। हम हुनकर आओर बात सुनय चाहैत छलहुं। जेना कि हुनकर नातिन कें की भेलनि, मगर सायरनक अवाज गूंजि उठल आओर एकटा वर्दीधारी सटका मारि कऽ हमरा भगा देलक।'
गोरकी मौसी-ङङ्गअरे, सभसँ अधलाह बात तऽ हमरा समाजक लेल भेल। बम विस्फोटक घटनाक दिन सँ तऽ हमरालोकनिक जिनाइ हराम भऽ गेल अछि। सडक सुन्न भेल तऽ हमर लोक सडक पर मटरगश्ती करक लेल निकलि पडल। हुनका की पता छलन्हि कि एहन स्थिति मे दु-चारि टा गाडी चलैत अछि ओ काफी लापरवाह होइत अछि। कतेक लोक एहि लापरवाह गाडीक चपेटि मे आबि गेलाह। जहां-तहां खद्दरधारी आओर वर्दीधारी लोक प्रकट भऽ जाइत छथि आ' हमरालोकनिक खैर नहि। सिर्फ यैह लोकनि नहि, बल्कि किछु घडियाल सेहो उभरि कऽ आबि गेल छथि ओ जगह-जगह मजमा लगा रहल छथि आओर मोमबत्ती जरा कऽ घडियाली नोर टपका रहल छथि। ओना घटनास्थल आओर प्रतिष्ठान आ' सरकारी संस्थान मे श्रद्धासुमन अर्पित कए आ' रैली निकालि कऽ अपन एकजुटता प्रदर्शित करय वला लोक सराहनीय काज कऽ रहल छथि। मुदा दुखक बात इ अछि जे घडियाल सभ सेहो एहि मे अपन फायदा बटोरक प्रयास करब शुरू कऽ देलनि अछि। बजार नहि लागि रहल अछि तऽ हमरा लेल लोक की छोडताह। से पेट पर आफत आबि गेल अछि।'
भुल्ला काका-ङङ्गतू ठीक कहैत छह। हमरो अंदेशा भऽ रहल अछि। या तऽ मैक्सी ओहि दिन बम विस्फोटक चपेटि मे आबि गेल होयत अथवा ओकर बाद जे हंगामा भऽ रहल अछि ओहि मे कतहु दबि गेल होयत।'
गप-सप्प जारी छल। तखने चितकबरा किछु सूंघि लेलक। ओकर चेहराक भाव बदलि गेल। ओ चिकरल।
-ङङ्गअरे, देखू.... मैक्सी आबि रहल अछि।'
सभ सतर्क भऽ गेल। सचमुच नारंगीक दिश सँ झुमैत मैक्सी आबि रहल छल। ओकर स्वागत मे सभ लोक ठाढ भऽ गेलाह। सभ भाव विह्वल छलथि। ककरो मुंह सँ कोनो अवाज नहि निकलि रहल छल। अबैत मांतर मौसी सँ लेपटा गेल। सभ फफकि पडल।
मौसी ममता सानल डांटैत पुछलथि-ङङ्गकतय छलह एतय दिन?'
चितकबरा बचल रोटी ओकरा पकडबैत गर्दनि सँ लगा लेलक। छोटकन तऽ कूदि पडल। सभ इ बुझवाक लेल उत्सुक छल जे आखिर एतेक दिन कहां छल? मैक्सी सभक जिज्ञासा शांत करैत कहलक-ङङ्गहमर मालकिन हमरा गणेशगुडी लऽ गेल छलीह। ओ गणेशगुडी फ्लाईओवरक नीचा गाडी पार्क कय आओर हमरा लऽ कऽ दोसर तरफ मिठाइयक दुकान दिश गेलीह। एतबे मे भीषण धमाका भेल आ' हमर मालकिन खसि पडलीह। हम कूं-कूं करय लगलहुं। हम अपन मालकिन के बचबय चाहैत छलहुं। एतबे मे भयभीत लोकक एकटा हुजूम आयल आओर हमरा मालकिन सँ बिछुडा देलक।'
- ङङ्गफेर....।' सभगोटे एक संग बाजि उठलाह।
- ङङ्गहम भीडक धक्का खाइत फटकी चलल जा रहल छलहुं, मुदा हमर नजरि मालकिनहि पर छल। हम देखलहुं जे मालकिन कोनो तरहें उठली आओर किछु लोक हुनका दुकानक भीतर लऽ गेलाह। ओकरा बाद तऽ हम बस भटकैत रहलहुं। एम्हर आबक रास्ता खोजैत रहलहुं। एहि बीच हम वर्दीवलाक कतेक सटका खएलहुं कहि नहि सकैत छी। एकटा तऽ हमरा पकडि लेने छल आओर रस्सी सँ बान्हि देने छल। शायद ओ हमरा अपन घर लऽ जाय चाहैत छल। मुदा हम कोनो तरहें ओकर चंगुल सँ आजाद भऽ गेलहुं आओर भागि पडेलहुं। एहि बीच हम सिर्फ भागितहि रहलहुं अछि। ओ लोकनि आओर अपना लोकनि सँ सेहो। अपन लोक सभ तऽ हमरा संग अपन इलाका मे घुसपैठीक जकां देखलक आओर कतेक लोक हमरा पर टूटि पडलाह। हम कोनो तरहे बचैत आइ नारंगी तिनाली पहुंचलहुं तऽ ओ अपन इलाकाक पहचान भेल। हम बचि गेलहुं।'
एतेक कहि कऽ मैक्सी सांसहि लऽ रहल छल कि सायरन बाजि उठल। सब बुझि गेल कि आब वर्दी वला आबि धमकताह। एहिलेल सभ अपन-अपन बाट पकडलन्हि।

Suggested citation: सत्यानंद पाठक. “स्वान विमर्श.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 55, 2010-04-01. https://www.videha.co.in/research/2010/55/स्वान-विमर्श.htm

मूल विदेह अंक / Original issue