विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

निर्मलीसँ जनकपुर धाम

उमेश मंडल · 2010-04-15 · अंक 56

नि‍र्मलीसँ जनकपुर धाम
प्राय: बच्‍चेसँ जनकपुर धाम जेबाक जि‍ज्ञासा छल जे आयोजि‍त कथा गोष्‍ठी ‘‘सगर राति‍ दीप जरय’’ क 69म खेपमे शामिल भऽ 3 अप्रैल 2010 केँ पूरा भेल। जहि‍सँ दोहरी खुशी भेटल।
चारि‍ए बजे भोरमे नि‍र्मली टीशनपर पहुँचलहुँ। करीब पॉंच बजे गाड़ी खुजल आ समएसँ सकड़ी टीशनपर उतरलहुँ। सकड़ीसँ जयनगरक मेल नहि‍ रहने मेक्‍सी पकड़ि‍ मधुबनी गेलहुँ। मधुबनीसँ पुन: मेक्‍सी पकड़ि‍ कलवाही, नगर कोठी होइत जयनगर गेलौं। तखन ढाइ बजैत रहै। जयनगरसँ जनकपुर लेल नेपाली ट्रेन
तीन बजेमे खुलत से जानकरी भेल। तहि ‍बीच हमसभ भोजन केलौं आ समएसँ अबिब ट्रेनमे बैसि रहलौं।
मैक्‍सीमे जखन भीड़ आ गुमारसँ परेशान रही तँ मनमे हुअए जे कोनो तरहेँ जयनगर तक पहुँचक अछि‍। ओइठॉंसँ तँ ट्रेनक यात्रा रहत। मुदा, ट्रेनक नमती आ भीड़ देखि‍ हुअए जे बसे जेकॉं हाल हएत। सएह भेल। मुदा, तइयो मनमे खुशी रहए ि‍कएक तँ दस-बारह गोटाक संगवे रहए जहि‍सँ यात्रामे कोनो कठि‍नाइ नहि‍ बुझना गेल, भरि‍ रस्‍ता गप-सप्‍प चलैत रहल। नव कथाकारक संग-संग श्री जगदीश प्रसाद मंडल आ श्री राजदेव मंडल सेहो संगमे रहथि‍, जे हमरा सबहक लेल सौभाग्‍य छल। गोसॉंइ लुक-झुक करि‍ते छल तावत् गाड़ी जनकपुर धाम पहुँचि गेल।
ट्रेनसँ उतरि‍ हमसभ रामानन्‍द युवा क्‍लब जेबाक लेल आगॉं बढ़लौं। ि‍मथि‍ला महोत्‍सवसँ जनकपुर भरि‍ बाजारमे रमणीय वातावरण छल। जहि‍सँ चाह-जलपान केनाइ आकि रि‍क्‍सासँ गेनाइ सभ कियो ि‍बसरि‍ गेलाह। पएरे सभ बिदा भेलौं। देखैत-सुनैत समए रामानन्‍द युवा क्‍लबमे प्रवेश केलौं। दोसर मंजि‍लपर पएर दइते रही आकि श्री राजाराम सि‍ंह राठौरजी भेंट भऽ गेला। हमरा सभकेँ देखते हाथ पकड़ि‍ बड़ी अहलाद्सँ यथोचि‍त स्‍थानपर लऽ गेलथि‍। उपस्‍थि‍त साहि‍त्‍यकार लोकनि‍केँ देखि‍ हर्ष भेल। दीप जरा गोष्‍ठि‍क शुभारम्भ भेल। संयोजक महोदय श्री राजाराम सि‍ंह राठौर सभ व्‍यवस्‍था बड़ नीक जेकॉं कएने रहथि‍। कथा जानकीक नामसँ एकटा बैनर टांगल रहै। आदरणीय रमानन्‍द झा “रमण”जी पहि‍नहि‍सँ उपस्‍थि‍त रहथि‍। गोष्‍ठीक संचालन आदरणीय फूलचन्‍द्र ि‍मश्रजीकेँ देल गेलनि‍।
गोष्‍ठि‍क शुरूहेँमे दर्जन भरि‍ पोथीक लोकार्पण कएल गेल, जहि‍मे मौलाइल गाछक फूल (उपन्‍यास) आ ि‍मथि‍लाक बेटी (नाटक)- जगदीश प्रसाद मंडल। भाग रौ आ बलचन्‍द्रा (नाटक)- ि‍वभा रानी। हम पुछैत छी (कवि‍ता संग्रह)- वि‍नीत उत्‍पल। नताशा (कॉंि‍मक्‍स)- देवांशु वत्‍स। अर्चिस (कवि‍ता संग्रह)- ज्‍योति‍ सुनीत चौधरी। नेपथ्‍य (नाटक संग्रह) आ नैमि‍कानन (कथा संग्रह)- सम्‍पादक- रेबती रमण लाल। ि‍मथि‍ला सृजन (पत्रि‍का) सम्‍पादक ऋृषि‍ बशि‍ष्‍ठ। वि‍देह- कथा 2009-10, प्रबन्‍ध समालोचना 2009-10 आ वि‍देह पद्य 2009-10 सम्‍पादक गजेन्‍द ठाकुर जीक रहनि‍।
एहि‍ तरहेँ बारह गोट पोथी‍क लोर्कापणक शि‍लशि‍ला करीब घंटा भरिक‍ रहल। फोटोग्राफर सभ फोटो खि‍चलनि‍। तहि‍बीच चाह-जलपान सेहो चलल। रजि‍स्टरपर सभ कथाकार अपन-अपन उपस्‍थि‍ति‍ आ कथाक नाम दर्ज केलनि‍। पहि‍ल कथा श्री सुरेन्‍द्र नाथ, दोसर श्रीमती ि‍वजेता चौधरी, तेसर ि‍वभूति‍ आनन्‍द फेर ि‍जज्ञासु जी, जगदीश प्रसाद मंडल, रौशन जनकपुरी, अरवि‍न्‍द ठाकुर, ऋृषि‍ बशि‍ष्‍ठ, उमेश मंडल, रघुनाथ मुखि‍या, महाकान्‍त ठाकुर, चौधरी जयंत तुलसी, बेचन ठाकुर, कपि‍लेश्‍वर राउत, मनोज कुमार मंडल, खड़ा नन्‍द यादव, राजदेव मंडल, दुर्गानन्‍द मंडल इत्‍यादि‍ तीस गोट कथाकार कथा पाठ केलनि‍। तीन-तीन कथाक पाली होइत छल। एक पालीक पठित कथापर समी‍क्षा होइत रहए। प्रखर समी‍क्षक डॉ. रामावतार यादव, डॉ राजेन्‍द्र ि‍वमल, रौशन जनकपुरी, डॉ रमानन्‍द झा रमण, श्री ही‍रेन्‍द्र कुमार झा, श्री योगानन्‍द झा, श्री अजीत आजाद आदि‍ अपन दृष्‍टि‍कोण दैत समीक्षा रखलखि‍न। ई शि‍‍लशि‍ला राति‍ भरि‍ चलैत रहल। लागि‍ रहल छल जे ई नव कथाकारक लेल ट्रेनि‍ंग काॅलेज सदृश्‍य अछि‍।
भि‍नसर छह बजे गोष्‍ठि‍क समापन भेल। अगि‍ला कथा गोष्‍ठी 70म सगर राति‍ दीप जरय केँ प्रस्‍ताव श्री योगानन्‍द झाजी रखलनि‍। आदरणीय रमानन्‍द झा रमण जीक संग-संग सभ साहि‍त्‍यकार लोकनि‍ सहर्ष एकरा स्‍वीकार केलनि‍। रजि‍स्टर आ दीप श्री राजाराम सि‍ंह राठौर जी अगि‍ला कथा उत्‍पल हेतु श्री योगानन्‍द झा जीकेँ देलनि‍। एकबेर सभ खुशी-खुशी थोपड़ी बजेलनि‍।
अगि‍ला कथा गोष्‍ठीक स्‍थान- कवि‍लपुर लहेरि‍यासरय (दरभंगा)
ति‍थि‍- 12 जून 2010
संयोजक- श्री योगानन्‍द झा
कबि‍लपुर (दरभंगा)
रामानन्‍द युवा कल्‍व जनकपुर धाममे ३ अप्रैल २०१० 69म सगर राि‍त दीप जरय- कथा गोष्‍ठीकेँ उद्दघाटन- डॉ रामावतार यादवकेँ द्वारा कएल गेल। संयोजक श्री राजाराम सि‍ंह राठौर आ रामानन्‍द युवा कल्‍व रहथि‍।
12टा पोथीक वि‍मोचनक कएल भेल
1 मौलाइल गाछक फूल (उपन्‍यास)
जगदीश प्रसाद मंडल
-- डॉ राजेन्‍द वि‍मल
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-- श्री रामनन्‍द झा ‘‘रमण’’
2 ि‍मथि‍लाक बेटी (नाटक)
जगदीश प्रसाद मंडल
-- डॉ राजेन्‍द्र वि‍मल
-- श्री रामानन्‍द झा ‘‘रमण’’
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3 वि‍देह पद्द 2009-10
-- श्री हीरेन्‍द्र कुमार झा
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-- श्री रामानन्‍द झा ‘‘रमण’’
4 ि‍वदेह प्रवन्‍ध-समालोचना 2009-10
-- डॉ वि‍भूति‍ आनन्‍द
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5 वि‍देह कथा 2009-10
-- डॉ वि‍भूति‍ आनन्‍द
-- श्री अजीत आजाद
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6 हम पुछैत छी (कवि‍ता संग्रह)
वि‍नीत उत्‍पल
-- राम भरोस कापड़ि‍ ‘‘भ्रमर’’
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7 भाग रौ आ बलचन्‍द्रा (नाटक)
वि‍भा रानी
-- श्री अरवि‍न्‍द ठाकुर
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8 अिर्चस (कवि‍ता संग्रह)
ज्‍योति सुनीत चाैधरी‍
-- डॉ वि‍भूति‍ आनन्‍द
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-- श्री रामानन्‍द झा ‘‘रमण’’
9 नताशा पहि‍ल चि‍त्र श्रंृखला
देवांशु वत्‍स
-- श्री प्रफूल कुमार मौन
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10 नेपथ्‍य (नाटक)
-- डॉ रेबती रमण लाल
-- डाॅ रामावतार यादव
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11 नैमि‍कानन (कथा संग्रह)
-- श्री फूलचन्‍द्र ि‍मश्र
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12 ि‍मथि‍ला सृजन पत्रि‍का
सम्‍पादक- ऋृषि‍ बशि‍ष्‍ठ
-- डॉ राजेन्‍द्र वि‍मल
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एहि‍ तरहेँ दर्जन भरि‍ पोथीक लोकार्पण भेल। आ एहि‍ कथा गोष्‍ठीमे 30 टा कथाक पाठ भेल जाहि‍मे सभसँ खुशीक बात ई जे दजनोसँ बेसी नव कथा कारक उपस्‍थि‍ति‍ रहय।
कथाकार आ कथाक नाम एहि‍ तरहेँ छल-
श्री सुरेन्‍द्र नाथ सुमन- संस्‍कृति‍
श्रीमती वि‍जेता चौधरी- भ्रूण
ि‍वभूति‍ आनन्‍द- अरे
जि‍ज्ञासू जी- वि‍वस्‍ता
जगदीश प्रसाद मंडल- प्रेमी
रौशन जनक पुरी-
ऋृषि‍ बशि‍ष्‍ठ- जौवॉं
उमेश मंडल- जेहन मन तेहन जि‍नगी
रघुनाथ मुखि‍या- वंश
महाकान्‍त ठाकुर- दि‍यादी
चौधरी ज्‍यंत तुलसी- के वुरि
बेचन ठाकुर- पत्तावाली
कपि‍लेश्‍वर राउत- सलाह
मनोज कुमार मंडल- घासवाहि‍नी
खड़ानन्‍द यादव- गहुमक बोड़ा
दुर्गानन्‍द मंडल- लाल भौजी
राजदेव मंडल- ‍
गजेन्द्र ठाकुर-
कथा-तस्कर

शालिग्राममे छिद्र होइत अछि, कारी पाथर मात्र नर्मदामे भेटैत अछि। जमसम गाममे सभ किछु बदलल अछि, ग्रामदेवताक डिहबार स्थानसँ लऽ कऽ सभ ठाम मुदा किछु ने किछु लाक्षणिक वस्तु देखिये रहल छी। मुदा हमर गाथाक कोनो लक्षण एतए नहि अछि।
गाछी आ बाध बोन सभटा पतरा गेल अछि। सए बर्ख। बिज्झू आमक ओ गाछी। बीहरि सभसँ भरल। भाँति-भाँतिक चिड़ै-चुनमुनी आ छोट पैघ जीव-जन्तु। नेना रही। जेठसँ अगहन खुरचनिञा लत्ती लग गप करैत हम आ मालती। कहियो फागुन-चैतमे जाइ तँ लवङलताक लत्ती लग गप करी। मलकोका, कुमुद, भेंट, कमलगट्टा कन्द, रक्ताभ बिसाँढ़क ताकिमे कादो-पानिमे घुमैत हम आ ओ। खुल्ले पएर, काँट-कूसक बीच तड़पान-तड़पि कऽ कुदैत। आमक कलममे सतघरिया खेलाइत। हम आ मालती। करबीरसँ बेढैत अपन काल्पनिक-घर। एकहरा, दोहारा, जटाधारीक बीआ भरि साल जोगबैत मालती। मालती सेहो होएत हमरे बएसक। माए कहैत छल जे मालती छह मासक जेठ छल हमरासँ मुदा पिता कहैत छला जे छह मासक छोट अछि मालती हमरासँ। आ पिता से किएक कहै छलाह से बादमे जा कऽ ने बुझलिऐ।
भरि आमक मास आमक गाछीक दिनुका ओगरबाहीक भार हमरे दुनू गोटेपर छल। मुदा साँझ होएबासँ पहिने हमर मामा बछरू आ मालतीक बाबू खगनाथजी कलम आबि जाइत छलाह, रातिक ओगरबाहीक लेल। मुदा हमर सभक गाथाक कोनो लक्षण एतए सेहो नहि अछि। हमर सभक माने केशव आ मालतीक।
मुदा ओहि पक्काक डिहबार स्थान लग कारी रंगक शालिग्राम हम ताकि रहल छी। छिद्रयुक्त शालिग्राम। एकटा नुका कऽ रखने छलहुँ एत्तै कतहु।
गौँआ सभ धरि खूब खर्चा कएने अछि एहि डिहबारक स्थानक मंडप बनएबामे। पहिने तँ किछुओ नञि रहै। राजा जे बनेलक पोखरिक घाट आ तकर कातमे पक्काक मन्दिर सएह। मुदा बेचारो पूजा कैयो नञि सकलाह। लाजक द्वारे हमर एहि गाममे आबियो नञि सकलाह।

हम केशव, गाम मंगरौनी, नरौने सुल्हनी, पराशर गोत्र, कवि मधुरापतिक पुत्र।
मालती- माण्डर सिहौल मूलक काश्यप गोत्री खगनाथ झा, गाम जमसमक पुत्री मालती।
खगनाथजी आ हमर मामा बछरूमे भजार लागल। जमसममे हमर मामा गाम। मामागाम धरि सुखितगर, हम सभ तँ दरिद्रे। से हम एक मास गरमी तातिल आ पन्द्रह दिन दुर्गापूजासँ छठि धरि मामेगाममे रहैत रही। गरमी तातिलमे सपेता पकबासँ लऽ कऽ कलकतिया आम पकबा धरि गाछी ओगरी। आ दुर्गापूजामे खष्ठीसँ लऽ कऽ भसान धरि दुर्गापूजा देखी। फेर दीयाबातीमे कनसुपती जराबी आ छठिमे गाम घुरि जाइ। आ बीच-बीचमे तँ जाइत रहबे करी।
मालती संगे खूब झगड़ा सेहो होइ छल। चौथामे रही प्रायः। गरमी तातिलमे मामा गामक आमक गाछी गेल रही। कोनो गपपर मालतीसँ रूसा-फुल्ली भऽ गेल। धरि बौसलक मालतीये। आ बौसबो कोना केलक।
-हम अहाँसँ घट्टी मानै छी ओहि गपक लेल।
-कोन गप।
-जइ गपपर अहाँसँ झगड़ा भेल।
आ ओ गप नञि हमरा मोन पड़ल आ ने मालतीकेँ। मुदा फेर मालतीसँ कहियो कोनो गपपर हम झगड़ा नञि केलहुँ। वएह मुँह फुलाबए तँ हमही पुछिऐ जे कोन गपपर मुँह फुलेलहुँ से तँ मोन नहिये हएत तखन अनेरे ने झगड़ा करै छी।
गरमी तातिलक बाद दुर्गापूजा आ दुर्गापूजाक छुट्टीक बाद गरमी तातिलक बाट जोहै लगलहुँ। से कहियासँ से की मोन अछि ?

पिता गाममे बटाइ करथि। मिडिल स्कूलक बाद कोनो स्कूल नहिये रहै आस-पड़ोसमे। संस्कृत पाठशाला सभ बन्ने भऽ गेल रहै।
से तातिल बला कोनो बात आब रहबे नञि करए। भरि साल बुझू काजे आकि तातिले। नाना-नानी जिबिते रहथि। माएक लियौन कराबए लेल कियो ने कियो आबिये जाइ छल। हमहुँ दू चारि मासमे मामा गाम कोनो लाथे भइये अबैत छलहुँ।
गामपर कएक टा समस्या। नञि जानि कोन भाँज रहै जे पाँजिक रक्षाक गप पिताक मुँहे सुनैत रहैत छलहुँ। आ से हमर बियाह मालती संगे भेने टा सँ सम्भव, सेहो हुनका मुँहे उचरैत छलन्हि।
मालती हमर संगी मुदा एहि गप-शपसँ ओकर हमर दूरी बढ़ि जेकाँ गेल। जे सहजता हमरा आ ओकरा मध्य छल से खतम होअए लागल। जेना ओकरा देखिते हमर मोनमे पत्नीक छवि नजरि आबै लागल छल, तहिना तँ ओकरो मोनमे ने अबैत होएतैक।

हमर गाम आएल रहथि बछरू मामा।
मधुरापति- “बछरू आब अहींक हाथमे हमर सभटा इज्जत अछि। खगनाथक पुत्री केशवक लेल सर्वथा उपयुक्त। सुन्दरि सुशील अछि तँ केशव सेहो जबर्दस्त अछि। एक्के बतारीक अछि मुदा किछु दिनुका छोटे अछि मालती। हे। अहाँकेँ तँ ई बुझले अछि जे ७०० टाका लड़कीबलाकेँ दए हमर विवाह करा हमर पिता पाँजि बनाओल। मुदा आब जमीन जत्था नहि अछि। काल्हि घोड़ीकेँ चिलम पियाए ओहिपर चढ़ि आएल छलाह पञ्जीकार। साफे कहि देलन्हि जे मात्र खगनाथेक पुत्रीसँ अधिकारमाला बनैत अछि। आ से नहि भेने पुबारिपार श्रोत्रियक श्रेणीसँ चुत भऽ जाएब हम”।
बछरू- “हम पुछै छियन्हि खगनाथसँ। संगी तँ छथि मुदा हुनकर मोनमे की छन्हि से वएह ने कहताह”।
आ ने जानि किएक प्रेमसँ भरि गेल छल हमर मोन। बिदा भऽ गेल रही हुनका संगे।

मालती- “केशव। तोहर कत्तौ दोसर ठाम बियाह भऽ जएतौक तखन हमरासँ भेँट कोना होएतौक”।
केशव- “आ तोहर ककरो दोसरासँ बियाह भऽ जएतौक तँ एहन अनर्गल प्रश्न सभ ककरासँ करमे”?
मालती- “मुदा एकटा गप बुझलहीं। काल्हि तोहर मामा हमर पितासँ हम्मर-तोहर बियाहक चरचा कऽ रहल छलाह”।
केशव- “तखन”।
मालती- “नञि, सभटा तँ ठीके मुदा तखने दरभंगा राजाक दूत बनि एक गोटे आबि गेलाह आ कहए लगलाह जे राजाक समाद अछि”।
केशव- “राजाक कोन समाद”।
मालती- “कियेने गेलिऐ। मुदा हमर पिताकेँ ओ दूत कहलन्हि जे बेटीक बियाहक चर्च किछु दिन रुकि कऽ करबाक लेल”।
केशव- “तोहर सुन्दरताइ तँ छौहे तेहने। राजोक नजरिमे तोरा लेल कोनो लड़का अभरल छै की”?
मालती- “कियेने गेलिऐ”।

राजाक मन्त्रीक सवारी खगनाथक दरबज्जापर! दुइये दिनमे कीसँ की भऽ गेल। ओ दूत जा कऽ किछु कहि तँ नञि अएलै जे खगनाथ अपन बेटीक बियाह लेल धरफरायल छथि। से सतर्की देखियौ। लोक सभ गर्दमगोल करैत। सभ स्वागतमे जुटल। आ हमहुँ सभ चीजक जाएजा लैत रही। साँझ होइत-होइत हमर पिता सेहो आबि गेल छलाह। ओम्हर राजाक मन्त्रीक स्वारी गेल आ एम्हर हमर पिता माथपर हाथ रखने गुम्म रहि गेलाह। खगनाथ सेहो मौन।
राजा अपन बियाह मालतीसँ करबाक प्रस्ताव खगनाथ लग पठेने छलाह। महाराज बीरेश्वर सिंह। कहू तँ। अपने चालीससँ उपरे होएत आ एहि तेरह-चौदह बरखक बचियासँ बियाहक प्रस्ताव। खगनाथक की ओकाति जे ओकरा मना करितथिन्ह।
हमर पिता चिन्तित जे आब पाँजि नहि बाँचत।
ओहि दिन साँझमे कोनटा लग मालतीसँ हमर भेँट भेल। करजनी सन-सन आँखि फुलल, जेना हबोढ़कार भऽ कानल होअए। की सभ गप केलहुँ मोनो नञि अछि। हँ आखिरीमे हम कहने धरि रहिऐ जे सभ ठीक भऽ जाएत।

जमसममे बीरेश्वर सिंह लेल लड़की निहुछल गेल!
जमसम गाममे पोखरि खुनाओल गेल। ओतए मन्दिर बनल जे राजा दोसराक मन्दिरमे कोना पूजा करताह।
मुदा हमहुँ रही मधुरापति कविक पुत्र केशव।
बियाहक दिन लगीचे रहै आ दोसर कोनो दिन सेहो नञि रहै। आ ओहि दिन मालतीसँ सभ गप भइये गेल छल।
कटही गाड़ीमे आगूक चाप आ पाछूक उलाड़, आगाँक चाप नीक कारण पाछाँ उलाड़ भेलापर गाड़ी उनटि जाएत। मुदा हम ओहिना गाड़ीकेँ उलाड़ केने बँसबिट्टी लग मालतीक इन्तजारीमे रही।
ओ आयलि आ गाड़ीपर बैसि गेलि। जे कियो रस्तामे देखए से डरे नञि टोकए जे गाड़ी ने उनटि जाइ एकर। एकटा पतरंगी चिड़ै देखि उल्लसित होअए लागलि मालती तँ आँगुरसँ हम ओकर ठोढ़ बन्न कऽ देलिऐ।
मालतीकेँ लऽ कऽ गाम आबि गेलहुँ, धोती रंगाइत छल। फेर जे मालतीक पता करबाक लेल आएल रहए तकरा पकड़ि राखल। आ ’कन्यादान के करत’क अनघोल भेलापर ओकरा सोझाँ अनलहुँ जे कन्यादान यएह करबाओत।
सलमशाही चमरउ जुत्ता उतारि धोती पहीरि हम विवाह लेल विध सभ पूर्ण केलहुँ। मालतीक सीथमे सिनुर हमरे हाथसँ देब लिखल जे रहै।

तकर बाद राजा बीरेशवर सिंह की करताह?
पञ्जीकारकेँ बजा कऽ हमर नाममे तस्कर उपाधि लगबाओल। मुदा मधुरापति अपन पुत्रक प्रति गर्वोन्नत्त। बाघक बेटा बाघ। पाञ्जि आ पानि अधोगामी मुदा खगनाथ झा- श्रीकान्त झा पाँजि, तस्कर केशवक श्रोत्रिय ओहिठाम विवाह कएलापर श्रोत्रिय श्रेणी विराजमान रहतन्हि।
आ सए बर्खक बाद आइ एहि गाममे कोनो नाटक होएतैक। सुल्ताना डाकू।
आ हम तस्कर केशव, मंगरौनी नरौने सुल्हनी- पराशर गोत्र, कवि मधुरापतिक पुत्र अपन गाथाक कोनो एकटा लक्षण एतए जमसम गाममे ताकि रहल छी। मुदा राजा बीरेश्वर सिंहक वएह पोखरि आ आब ढ़नमनाएल मन्डिल देखै छी, बेचारो घुरि कऽ लाजे एहि गाममे एबो नहि केलाह।
यएह पोखरि आ ढ़नमनाएल मन्दिर हमर प्रेमक अछि अवशेष।
३. पद्य
३.१. कालीकांत झा "बुच" 1934-2009- आगाँ
३.२.ज्योति सुनीत चौधरी-मोनक गति
३.३.रूपेश कुमार झा त्योंथ- खायब की
३.४.शिव कुमार झा-किछु पद्य
३.५.गजेन्द्र ठाकुर-गीत-प्रबन्ध-नाराशंसी
३.६.गंगेश गुंजन:अपन-अपन राधा २२म खेप
३.७.श्यामल सुमन-कहू कि फूसि बजय छी?
३.८.१.-राजदेव मंडल-मिझाइत दीया २.जगदीश प्रसाद मंडल-गीत३.मनोज कुमार मंडल-फैशनक धमाल

Suggested citation: उमेश मंडल. “निर्मलीसँ जनकपुर धाम.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 56, 2010-04-15. https://www.videha.co.in/research/2010/56/निर्मलीसँ-जनकपुर-धाम.htm

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