विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

यू.पी.एस.सी. (मैथिली) प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन

डॉ. शंभु कुमार सिंह · 2010-10-01 · अंक 67

“यू.पी.एस.सी. (मैथिली) प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन”
संकलनकर्ता: डॉ. शंभु कुमार सिंह
 मिथिलाक परम्परागत सीमा बृहदविष्णुपुराण (5म शताब्दी)क मिथिलामहात्म्य खंड मे वर्णित अछि जकर अनुवाद कवीश्वर चन्दा झा एहि प्रकारेँ कएने छथि:
“गंगा बहथि जनिक दक्षिण दिसि पूर्व कौशिकी धारा
पश्चिम बहथि गण्डकी उत्तर हिमवत बल विस्तारा
कमला त्रियुगा अमृता धेमुड़ा बागमती कृतसारा
मध्य बहथि लक्ष्मणा प्रभृति से मिथिला विद्यासारा।”
 बृहदविष्णुपुराण मे मिथिलाक बारह गोट नामक उल्लेख भेटैत अछि:
मिथिला तीरभुक्तिश्च वैदेहीनैमिकाननम।
ज्ञानशीलं कृपापीठं स्वर्णलांगलपद्धतिः।।
जानकी जन्मभूमिश्च निरपेक्षा विकल्मषा।
रामानन्दकरी विश्वभाविनी नित्यमंगला।।
 मिथिलाक आदि शासक विदेहक नामपर मिथिलाक नाम ‘विदेह’ पड़ल।
 ‘तिरहुत’ नामक उल्लेख सर्वप्रथम पुरूषोत्तमदेवक ‘त्रिकाण्डकोश’ (12म शताब्दी) मे भेल अछि।
 विदेह राज्यकुलक मिथिला पर शासनक समय 3000 ई.पू. सँ 600 ई.पू. धरि अनुमानित अछि।
 मिथिलामे पञ्जी व्यवस्थाक सम्पादन कर्णाटवंशीय नरपति हरिसिंहदेवक द्वारा प्रारंभ भेल।
 सप्तरत्नाकरक रचयिता छलाह चण्डेश्वर ठाकुर।
 मिथिलाक प्रथम कर्णाटवंशीय शासक छलाह ‘नान्यदेव’ (1097 ई.)।
 खण्डवला राजकुलक स्थापना म.म. महेश ठाकुर द्वारा 1557 मे भेल।
 मिथिला पर ओइनवार राज्यवंशक शासन चौदहम शताब्दीक मध्यमे आरंभ भेल।
 मिथिलामे भस्मसँ अंकित त्रिपुण्ड शिवभक्तिक,लम्बाकार श्रीखंडक टीका विष्णुभक्ति एवं सिन्दूरक ठोप शाक्त भावनाक प्रतीक मानल जाइत अछि।
 मिथिलाक्षरक विकास तान्त्रिक यन्त्रसँ मान्य अछि। ई मानल जाइत अछि जे तिरहुताक्षरक आरंभ जाहि मंगल चिह्न ‘आँजी’ सँ होइत अछि से तान्त्रिक कुण्डलनीक बोधक थिक।
 मिथिलामे विवाहक अवसर पर गाओल जायबला ‘जोग’ तन्त्रसँ सम्बद्ध मानल गेल अछि।
 मिथिलाक धार्मिक जीवनक मुख्यधारा शिव ओ शक्तिमूलक थिक।
 मैथिलीय रागरागिनीक प्राचीनतम उल्लेख सिद्ध लोकनिक ‘चर्यापद’ मे उपलब्ध होइत अछि।
 कर्णाटनरपति म. नान्यदेव (1097 ई.पू.) मिथिलामे अपन राज्य स्थापित करबाक पश्चात् ‘सरस्वती हृदयालंकार’ नामक संगीतग्रंथ लिखल जाहिमे सर्वप्रथम ओ मैथिलीय रागरागिनीक उल्लेख क्रमबद्ध रीतिएँ कएल।
 मैथिलीय संगीतक सक्रिय गतिविधि ओ विकास-प्रसारक दृष्टिसँ म. हरिसिंहदेव (1296-1326)क राज्यकाल विशेष रूपेँ उल्लेखनीय अछि।
 ‘तिरहुति’ श्रृंगाररसक मधुरगीत थिक, जाहिमे नायक-नायिकाक संयोग-वियोगक रागात्मक वर्णन होइत अछि।
 ‘बटगवनी’ मे सखी सभक संग समागम-गृहमे पतिसँ अभिसारक हेतु जाइत नायिकाक वर्णन होइत अछि।
 ‘गोआलरी’ क विषयवस्तु होइत अछि गोपी सभक संग कृष्णक नोंक-झोंक एवं केलिकौतुक।
 ‘रास’ मे गोपी सभक संग कृष्णक रासलीलाक वर्णन होइत अछि।
 रासक सर्वप्रथम रचयिता छथि ‘साहेबरामदास’।
 मिथिलाक लोकवाणी हेतु ‘मैथिली’ शब्दक प्रयोग सर्वप्रथम कोलब्रुक 1801 ई. मे कएल, परन्तु एहि नामकेँ प्रसिद्ध करबाक श्रेय मैथिली भाषासाहित्यक आदि उन्नायक ग्रियर्सन महोदयकेँ छन्हि।
 कालानुसारेँ मूल भारोपीय भाषाक समय 2500 ई.पू. मानल जाइत अछि।
 प्राचीन भारतीय आर्यभाषाक इतिहास 1200 ई.पू. सँ मानल जाइत अछि।
 बौद्धधर्मक सुप्रसिद्ध ग्रंथ ‘ललितविस्तार’मे “वैदेहीलिपि”क उल्लेख अछि जकरा मैथिली लिपिक प्राचीनतम स्वरूप कहल जा सकैत अछि।
 कोनहुँ युगमे शिष्ट ओ परिनिष्ठित साहित्यसँ भिन्न जे रचना होहत अछि से ओहि युगक लोक-साहित्य कहबैत अछि।
 दीर्घ आख्यान पर आधारित गेयात्मक कथा ‘लोकगाथा’ कहल जाइत अछि।
 मैथिलीक किछु प्रमुख लोकगाथा काव्य थिक— लोरिकाइन, सलहेस, अनंगकुसुमा, दुलरादयाल, नैका बनिजारा, दीनाभद्री, रईया रणपाल आदि।
 ‘वर्णरत्नाकर’ निर्विवाद रूपसँ मैथिली साहित्यक प्रथम उपलब्ध गद्य ग्रंथ थिक।
 विद्यापतिक ‘पुरूषपरीक्षा’, पंचतंत्र, हितोपदेश आदि परंपराक संस्कृत नीतिकथा थिक।
 विद्यापतिक ‘कीर्तिलता’ अवहट्टक गद्यपद्यमय ग्रंथ थिक।
 ‘गोरक्षविजय’ विद्यापतिक संस्कृत नाटक थिक, जाहिमे मैथिली पद सेहो प्रयुक्त भेल अछि।
 ‘विशुद्ध विद्यापति पदावली’ विद्यापतिसँ कम सँ कम एक शताब्दीक पश्चातक संकलन थिक।
 1879 ई.मे दरभंगा राज हाई स्कूलक स्थापना भेल छल।
 1966 ई. मे मैथिली भारतक प्रमुख साहित्यिक भाषाक रूपमे साहित्य अकादेमी, दिल्ली द्वारा स्वीकृत भेल।
 मैथिली अकादमीक स्थापना 1976 ई. मे भेल।
 नाटकमे आंगिक, वाचिक, आहार्य, तथा सात्विक चारू प्रकारक अभिनय आवश्यक होइत छैक।
 ‘अंकियानाट’क आदि रचयिता छलाह शंकरदेव (1449-1569)।
 मिथिलामे ‘कीर्तनिञानाच’क परिपाटीक आरंभ नवद्वीपक कीर्तनमंडलीक प्रभावसँ भेल 17म शताब्दीक आदिमे।
(स्रोत: मैथिली साहित्यक इतिहास, डॉ. दुर्गानाथ झा ‘श्रीश’)

Suggested citation: डॉ. शंभु कुमार सिंह. “यू.पी.एस.सी. (मैथिली) प्रथम पत्रक परीक्षार्थी हेतु उपयोगी संकलन.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 67, 2010-10-01. https://www.videha.co.in/research/2010/67/यू-पी-एस-सी-मैथिली-प्रथम-पत्रक-परीक्षार्थी-हेतु-उपयोगी-संकलन.htm

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