विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

की अछि दिल्लीक जी.बी. रोडक कोठाक सत

विनीत उत्पल · 2010-10-15 · अंक 68

विनीत उत्पल
की अछि दिल्लीक जी.बी. रोडक कोठाक सत
हिन्दू मिथ कथामे वर्णित नर्क आआ॓र आ॓तुक्का ‘यातना’ साकार रूपमे देखबाक इच्छा होअए तँ दिल्लीक जीबी रोडक अगल-बगलके 25 टा बिल्डिंगमे रहैबला पांच हजार सेक्सवर्करकेँ देखि आउ। एहि नर्कसँ निजात दियाबैक सरकारी प्रयासक काजकेँ लऽ कऽ जहिना एकटा सेक्सवर्कर परवीनसँ पुछैत छी, आ॓ तमैक कऽ कहैत अछि, ‘एतए एतेक किछु भोगलहुँ अछि जे आ॓ नहि जानैत अछि। कतय के सरकार आआ॓र कोन सरकार?’ सरकार अछि तँ हम एतए टा मांगैत अछि जे आ॓ हमरा जीबैले दिअए।
धंधाक ‘नर्क’ केँ आ॓ बुझाबैत अछि, ‘देह बेचि कऽ जे टा पैसा मिलैत अछि आ॓करा छह टा हिस्सा होइत अछि, कोठा मालकिन, दलाल, पुलिस, राशन कार्ड मालिक, सूदखोर आआ॓र गुंडा।’ देहमंडीक गणित ई अछि जे सौ टकामे हिनकर हिस्सा मात्र पंद्रह टका आबैत अछि। एहि पाइमे हुनका परिवार चलबै पड़ैत अछि, ग्राहक लेल सजय-संवरै पड़ैत अछि आ ग्राहकक संसर्गसँ सौगातमे भेटल बीमारीक इलाज सेहो करए पड़ैत अछि। बाकी 85 टका दलाल, कोठाक मालकिन आआ॓र पुलिस सभक हफ्तामे बँटि जाइत अछि। ई केकरो मजबूरीपर बेइमानीसँ फलैत-फूलैत धंधा अछि। सरकारक नजरिमे ई धंधा दिल्लीमे केबल जीबी रोडपर भऽ रहल अछि, मुदा हयात होटलक इलाका हो वा लक्ष्मीनगर, पटेलनगर आ खानपुर जिस्मफरोशीक अड्डा बनल अछि। जीबी रोडपर दुकानक बीचसँ गुजरैबला अन्हार सीढ़ीक दरवाजापर लाल रंगसँ लिखल अछि, ‘दलालों और जेबकतरों से सावधान’। मुदा जिस्मक भूखक आगू ई चेतावनी बेइमान लागैत अछि। अहि कोठापर हमर भेंट होइत अछि, विमला, नसरीन, बबीता, सीता, परवीन, फरहाना आदिसँ जे दिनराति घुटैत रहैत अछि आ लड़ैत अछि अप्पन जिनगीसँ। देह व्यापार गैर कानूनी होएबाक कारण ई सभ दिनक उजालामे सामान कीनैलै नहि जाइत अछि। राशन बला मिट्टीक तेलमे मिलावट कऽ कऽ दैत अछि आ नापतौलमे बेइमानी करैत अछि। ताहिसँ ई सभ कमला मार्केट जाइत अछि बाजार करै लेल जाहिसँ आ॓तए कियो हिनका चिन्हि नहि लिअए। स्वीपर हिनकासँ घूस मांगैत अछि आ नहि देलापर सीढ़ीपर कूड़ा-कचरा फेंकि दैत अछि। एतए पांच हजार सेक्स वर्करमे सँ 12 सए वोटरक आइ-कार्ड तऽ बनि गेल अछि, आब आ॓ वोटर अछि। एकर बादो लाइमलाइटमे आबैसँ डरैत अछि जे समाज हुनका सभकेँ बारि नहि दिअए। एहन सेक्सवर्कर जे मजबूरवश अपना लेल फैसला कऽ कऽ एहि धंधामे उतरल अछि आआ॓र हुनकर घरबला एहि धंधासँ अनजान अछि, आ॓ सेहो अप्पन तस्वीर उजागर होएबासँ डरैत अछि। दूर-दूरसँ आएल लड़की पावनि-त्योहार, शादी-ब्याहक मौका्पर घर तँ जाइत अछि मुदा अप्पन धंधाकेँ लऽ कऽ केकरोसँ गप नहि करैत अछि। फोटो खिचाबैसँ एहि लेल मना करैत अछि। ई सेक्सवर्कर धंधाक पाइ-पाइ हिसाब बताबैत अछि जे कॉलगर्लक धंधा पनपैसँ हुनकर धंधाक रौनक कम भऽ गेल अछि। आ॓ पांच हजार टका महीना कमाबैत अछि जाहिमे 1500 टका बच्चापर खर्च भऽ जाइत छै। एक हजार टका कपड़ा आ मेकअपमे खत्म भऽ जाइत छै। संगे एक हजार टका रेंट दिअए पड़ैत छै। खाए-पीब के जे पैसा बचैत छै आ॓करा घर पठा दैत अछि। एकरामे सभकेँ अप्पन बच्चाक परवरिशक खास ख्याल छै। कियो-कियो अप्पन बच्चाकेँ एम.सी.डी. स्कूलमे नहि भेजि कऽ मंटो रोड लग प्राइवेट स्कूलमे भेजैत अछि आ मास्टरसँ कहैत अछि जे हुनकर धंधाक गप बच्चा लग नहि करू। कतेक सेक्सवर्कर एहनो अछि जे अप्पन धंधाक भेद बच्चाक लग खुजि नहि जाए, एकर डरसँ अपनासँ दूर बोर्डिंगमे राखि कऽ बच्चाकेँ पढ़ा-लिखा रहल अछि। देहक बाजार सर्वधर्म समभावपर चलैत अछि। जी.बी. रोडपर हनुमान मंदिर आआ॓र मस्जिद एकहि इलाकामे अछि। एक कमरा्मे मक्का-मदीनाक फोटो अछि तहि बगलमे हिन्दू देवी-देवताक कएक टा फोटो टांगल अछि। बालकनीमे लागल तुलसी आआ॓र मनीप्लांटक गाछ एहि गपक गवाह छल जे देहव्यापारक नहि कोनो धर्म होइत अछि आआ॓र नहि कोनो जाति होइत अछि। एतए सभक बस एक्के टा जद्दोजहद अछि, जिनगी गुजारैक।

Suggested citation: विनीत उत्पल. “की अछि दिल्लीक जी.बी. रोडक कोठाक सत.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 68, 2010-10-15. https://www.videha.co.in/research/2010/68/की-अछि-दिल्लीक-जी-बी-रोडक-कोठाक-सत.htm

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