विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

समसामयिक सन्दर्भ मे गाँधीविचारक महत्ता

विपिन झा · 2010-10-15 · अंक 68

विपिन झा*
समसामयिक सन्दर्भ मे गाँधीविचारक महत्ता
“काल्हि मृत्यु कें प्राप्त होयब एहि चिन्तनक संग जीबाक चाही आ हम अमर छी एहि अवधारणाक संग ज्ञानार्जन करबाक चाही” {M.K.Gandhi}
’गाँधी’ ओहि देदीप्यमान नक्षत्रक नाम अछि जेकर आभा सँऽ भारतवर्ष सतत आलोकित होइत रहल अछि। भारतीय स्वाततन्त्र्य संघर्ष मे हुनक योगदान सर्वविदित अछि। सत्य आ सहिष्णुताक अनुपालनक जे अप्रतिम उदाहरण ओ प्रस्तुत कयलथि कदाचित हुनक आलोचको ओहि समक्ष नतमस्तक रहल। ओ नहिं तऽ राजनीतिक आ नहिं तऽ कोनो अन्य सिद्धान्त प्रस्तुत कयलथि प्रत्युत हुनकर व्यवहार सिद्धान्तक रूप लेलक।
जहाँ धरि गाँधीक सिद्धान्तक गप्प अछि; महात्मा गाँधी कोनो नवीन सिद्धान्तक प्रतिपादन नहि कयलथि सनातनधर्म सँ स्वीकृत सिद्धान्त केर अपन जीवन मे प्रयोग कय शिक्षा देलथि जे ई मात्र सैद्धान्तिक नहिं अपितु एकर व्यावहारिक महत्त्व सेहो छैक।
स्वतन्त्रता सँऽ पूर्व गाँधीजीक ई व्यावहारिक प्रयोग जतय स्वराज्यप्राप्ति हेतु प्रयत्न के गति देलक ओतहि स्वाधीन भारत मे नीतिनिर्धारण मे आधारभूमि केर कार्य केलक। ध्यातव्य अछि जे परिकल्पना परिपुष्ट भय सिद्धान्तक रूप लैत अछि आ सिद्धान्त परिपुष्ट भय नियम बनैत अछि। गाँधीजीक स्वाराज्य ग्राम परिकल्पना कालान्तर मे सिद्धान्तक रूप लेलक जाहि हेतु हुनक समस्त गतिविधि दृष्टिगत भेल।
गाँधीजीक प्रमुख सिद्धन्त कें अनुशासन, सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, सादगी आ विश्वास केर गिनती कयल जा सकैत अछि। आब प्रश्न ई उठैत अछि जे ई सिद्धान्त प्रायोगिक रूप मे कतेक अनुगम्य अछि? कोनो सिद्धान्त “करबाक चाही” एकर निर्देश दैत अछि न कि “करैत छी”। प्रत्येक सिद्धान्त एहि धरातल पर सर्वथा प्रायोगिक रूप सऽ अनुगम्य अछि।
अनुशासन एहेन आदर्श अछि जे व्यक्तिमात्र के पशु सँऽ पृथक करैत अछि। अनुशासनक महत्त्व सेना क सन्दर्भ मे नजदीक सँऽ देखल जा सकैत अछि। सत्य केर अनुपालन सर्वथा असत्य बजनिहार सेहो करय चाहैत अछि। अहिंसा सऽ आशय मात्र हत्या सँऽ नहिं लय कायिक वाचिक सेहो लेल जाय त एकर उपादेयता सहजतया बुझल जा सकत। ब्रह्मचर्य व्यक्ति उच्छ्रिंखल नहिं बनय दैत अछि। सादगी बाह्याडम्बर के रोकबा मे महत्त्वपूर्ण भूमिका रखैत अछि।
आब सहज प्रश्न उठत जे यदि ई एतेक महत्वपूर्ण अछि तऽ लोक एकर अनुपालन कियाक नै करैत अछि? उत्तर सहज अछि आन्तरिक शत्रु के आधीनता स्वीकरबाक कारणे।
पुनश्च एकटा प्रश्न उठैत अछि जे गान्धीजीक विचारक झलक आई कतहु देखबा मे अबैत अछि आ कि बस सैद्धान्तिके अछि? निश्च्य व्यवहार मे देखाई दैत अछि। स्वतन्त्रता सँऽ पूर्व स्वराज्य हेतु पृष्ठबूमिक रूप मे, स्वातन्त्रोत्तर भारतक संविधान क प्रस्तावना, अनुच्छेद 19b, नीतिनिर्देशक तत्त्व, पंचायती राज किछु अप्रतिम उदाहरण अछि।
एतबा नहि नेल्सन मंडेला, भारतीय विदेश नीति एहि विचारधारा सँ अप्रभावित नहिं अछि। अस्तु समस्त पाठकवृन्द सँऽ आग्रह जे गाँधी जयन्ती के मात्र एकटा अवकाशदिवस नहि मानि एहि विचारधारा के यथासम्भव अनुसरण कय भारत के सत्यं शिवं सुन्दरं मार्ग मे अवाध गति दी।
*लेखक विपिन झा, IIT Bombay मे शोधछात्र छथि।

Suggested citation: विपिन झा. “समसामयिक सन्दर्भ मे गाँधीविचारक महत्ता.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 68, 2010-10-15. https://www.videha.co.in/research/2010/68/समसामयिक-सन्दर्भ-मे-गाँधीविचारक-महत्ता.htm

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