विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

प्रदेश केर विकास: बिहार-विकास सन्दर्भ मे आलोचनात्मक अभिव्यक्ति

बिपिन कुमार झा · 2010-12-01 · अंक 71

बिपिन कुमार झा
प्रदेश केर विकास : एक चिन्तन
(बिहार-विकास सन्दर्भ मे आलोचनात्मक अभिव्यक्ति)
Ph. D , IIT Mumbai
बिहार विधान सभा चुनाव सम्पन्न भेल। नितीश सरकार ’हाथ’ ओ ’लालटेन’ कें अपन कर्मक समुचित फल हेतु पाछू छोरैत पुनः एक बेर अपन अस्तित्व मे आयल। कलियुग कर्मयुग छैक। ओ अतीतक गप्प करी अथवा वर्तमानक, भारत सनहक गणतन्त्र राष्ट्र मे कर्मक फल जनता द्वारा जनता कें अवश्य भेटैत रहल अछि।
आब प्रश्न ई उठैत अछि जे बिहार केर विकास निरन्तर हो एहि हेतु ई केकर उत्तरदायित्त्व अछि? निश्चित रूप सँ उत्तर होयत नितीश सरकारक। जहाँ तक हमर मन्तव्य अछि ’ई उत्तर एकांगी अछि’ कियाक त { 92,257.51 sq. Kms ग्रामीण क्षेत्र, 095.49 sq. Kms शहरी क्षेत्र, (कुल 94,163.00 sq. Km), कुल जिला-38, कुल आवादी- 8,28,78,796 अधिकतम साक्षरता पटना- 63.82%, कुल विश्वविद्याल- 13, इंजीनियरिंग कालेज-08, प्रबन्धन संस्थान 06, मेडीकल कालेज 08, शोध संस्थान 06, ला कालेज 10, आयुर्वेद महाविद्यालय 05, वेटनरी कालेज- 02, कृषि महाविद्यालय 04, फाइन आर्ट्स महाविद्यालय 02, शोधकेन्द्र 04, अन्य शैक्षिक संस्थान 14)} एहि वृहत क्षेत्र बला राज्य केर विकास क उत्तरदायित्त्व मात्र अस्थायी प्रशासक के ऊपर छोडि पल्ला झाडनाई कतय तक समुचित अछि ई अपन विवेक सँ तय कयल जाय। विकास केर उत्तरदायित्त्व एहि प्रकार सँ निर्धारित कयल जा सकैत अछि।
· प्रशासक (विकासकर्ता कहब विशेष उचित)
o स्थायी
§ सिविल सेवारत पदाधिकारीगण
§ अन्य सहयोगी पदाधिकारीगण
§ जनता स्वयं
· निवासी
· प्रवासी
o अस्थायी
§ चुनाव मे जीतल जनताक प्रतिनिधि
एतय विभाजन किछु विशेष दृष्टि सँ कयल गेल अछि जाहि सँ बिहार अथवा कोनो प्रान्तक विकास केर गप्प केनाई समुचित होयत।
सिविल सेवारत पदाधिकारी केर आचरण यद्यपि निर्दुष्ट मानल जा सकैत अछि मुदा वर्तमान समय मे ई बात कदाचित अप्रासंगिक भय गेल अस्तु एहि तरहक पदाधिकारी सँ एतबा कहब उचित जे राष्ट्र अस्मिता, एकता एवं उत्कर्ष समुचित नीतिनिर्माण सँ संभव छैक जेकर कर्णधार सिविलसेवके होइत छथि, आ यदि ओ अपन उत्तरदायित्व प्रलोभन अथवा भयवश बिसरि जेता तऽ भविष्य की होयत ई सहज बुझल जा सकैत अछि।
जहाँ तक अन्य सहयोगी पदाधिकारी तथा पुलिस प्रशासनक गप्प अछि, यदि अनुचित नहिं मानल जाय तऽ ई कहब अनुचित नहि होयत जे सबहक कर्ता आ हर्ता ई होइत छथि। यदि पुलिस प्रशासन आ कर्मचारी वर्ग ठानि लथि तऽ भ्रष्टाचार 90% धरि समाप्त भय सकत, शिक्षा तथा अन्य सेवा पंगु नै रहत, यात्री पटना स्टेशन सँऽ बस स्टेशन राति मे जायब अनुचित नै बुझत। एकटा उचित काज हेतु हरियर पत्ती नै देखबय पडत, बिना लाइसेंस अथवा कागज के हजारो गाडी सडक पर नै दौडत, डी० एम० सी० एच० मे चिकित्सा मे लापरवाही नै होयत, लोक के अन्यत्र भटकय नै पडत काज लेल। बहुतो एहेन गप्प छैक जेकरा ई पुलिस, कर्मचारी, चिकित्सक सदृश अधिकारी दूर कय सकति छथि।
आब जनता जे मूल निवासी छथि हिनक गप्प। हम नहिं सुधरब ई शपथ खा के कदाचित बैसल छथि। ई अपन हाल नीक जँका बुझैत छथि तैय्यो प्रमाद, प्रलोभन अथवा भयवश अपन कर्तव्य नहिं करता बस अधिकारक गप्प लिअ। दोसर कें चुटकी लेब, टाँग खीचब, ईर्ष्या करब आहा हा परमानन्द दैत छन्हि। आई कोनो तरहें बीत जाय काल्हुक के देखलक? ई हिनकर सोच छन्हि। विकास आ देशक गप्प नै करू ओ त सरकारक काज छियै न!! कतहु क्रिकेट भेल तऽ कान पथता, अपने कोनो खेल मे आगू एता अथवा अपन बच्चा के कोनो क्षेत्र विशेष मे आगू अनता ई तऽ... “की कहू एहेन राज मे हम छी न किछु सम्भव नै अछि”। हँ, ध्यान आयल “पढि लिखि के की हेतै? कोनो नौकरी भेटतै?” ई हिनक सोच छन्हि। गामक चौक पर गाजा आ भांग खायत से बड्ड नीक। कतेक गप्प कहू। हिनको स बस एतबा आग्रह जे अपन कर्तव्य जे छन्हि यथासम्भव ओकर पालन करथु।
हमरा सदृश प्रवासी नागरिक तऽ बेचारे पटना धरि गाम जेबाक जोश रखैत छथि ओकर बाद बिहार नहिं सुधरी वाक्य बजैत छथि। की ई उचित अछि? अपना लेल उत्तर देब सदा मुश्किल होइत अछि। किन्तु ई किछु हिनकर कर्तव्य सेहो छन्हि न? गाम जेबा मे होयब समस्या देखाइत छन्हि मुदा घर मे बच्चा के मूँह सँ मैथिली सुनबा मे बज्रपात होइत छन्हि!! बिहार किं वा मिथिला लेल अहाँ की कयल? अपन पेट तऽ कुकुरो पोसैत अछि। आय NBT मे एकटा समाचार देखल नोएडा केर कम्पनी ल्यूना इरगोनोमिक्स केर मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेजर अभिजीत भट्टाचार्य ’पाणिनि’ नामक साफ्टवेयर केर जानकारी देलथि जाहि द्वारा 11 भाषा मे SMS पठा सकैत छी। ई न्यूज एहि दृष्टि सँ महत्त्वपूर्ण जे अपन धरोहर केर रक्षण करबाक सोच जुडल अछि। एहि तरहें गजेन्द्र जी सदृश कतिपय व्यक्ति सराहनीय कार्य कय रहल छथि जे प्रवासी होइतो मिथिला/बिहार केर विकास मे योगदान स्वरूप अछि।
आब बात नितीश सरकारक...। एहि मे कोनो सन्देह नहिं जे नितीश सरकार लालटेन के मडियल रोशनी सँऽ बिहार के जेनरेटर युग मे अनलक (एकर चर्चा आगू करब)। बिहारक विकास गाथा बिहार सरकार केर साइट पर देखल जा सकैत अछि। RTI Doc. जे ओहि साइट पर अछि, जानकारी के बुझबा मे सहायक होयत। 5 वर्षक भीतर 47000 सँ अधिक अपराधी के सजा भेटब, केन्द्रीय योजना क अतिरिक्त ४० से अधिक योजना केर कार्यान्वयन होयब, सडक केर जाल प्रस्तुत होयब, पलायनक दर कम होयब, बिहार विशेष न्यायालय अधिनियम-2009, 2008-09 मे वार्षिक विकास दर प्रचलित मूल्य पर 24.33% होयब, राज्यक कर राजस्व 2004-05 केर तुलना मे 2009-10 मे 3347 करोड सँ 8130 करोड होयब आदि किछु शुभसंकेत अछि। टीका-टिप्पणी तऽ चलबे करत मुदा एहि बातक प्रतिषेध करब की बिहार विकासक पथ पर अछि, आत्मघाती होयत।
लेकिन...! नितीश सरकार अखनहुँ किछु बात लय कें आलोचना के पात्र अछि जेकरा बिन्दुबार तऽ नहि कयल जा सकैत अछि मुदा सुधार हेतु किछु गप्प जरूर कयल जा सकैत अछि। त आगू सुनू-
अखनहुँ बिहार जे समस्या सँ त्रस्त अछि ओकर समाधान हेतु निम्न बिन्दुगत क्षेत्रक समाधान अपेक्षित अछि-
· शिक्षा- अखनहुँ गुणवत्ता क दृष्टि सँऽ शिक्षा सन्तोषजनक नहि अछि। सुधार अवश्य भेल मुदा अखनहु जरूरत अछि जे शिक्षा मे व्यापक सुधार हो। ताकि विद्यार्थी के अन्य प्रदेश हेतु रुख नहिं करय पडय। शिक्षा मे पारदर्शिता के अभाव अछि। गुणवत्ता के स्थिति एहि बात सँ लगा सकैत छी जे डाक्टरेट के डिग्री ओतय सहजता सँ प्राप्त कय सकैत छी। संस्कृत विश्वविद्यालय सँ स्वर्णपदक प्राप्त व्यक्ति एक पंक्ति संकृत नहिं बाजि सकैत छथि। संस्कृत विद्यालय जाहि हेतु सरकार करोडो खर्च कय रहल अछि ओकर भवन मात्र अछि बाकी सब कागज पर। हरिजन छात्रावास अछि सौ स अधिक कमरा के किन्तु एकहु टा हरिजन आई धरि ओतय नहिं देखल गेल। बहुत रास उदाहरण अछि सबटा नहिं देल जा सकैत अछि।
· सुरक्षा- एहि क्षेत्र मे नितीश सरकारक कदम सराहनीय अछि मुदा अखनि धरि अन्य क्षेत्रक गप्प छोडू राजधानी सुरक्षित नहिं अनुभव कयल जाइत अछि। एहि पर विशेष ध्यानक आवश्यकता अछि।
· संसाधन –
o विद्युत – हम सभ लालटेन युग सँ निवृत्ति लय जेनरेटर युग मे त आबि गेलहु किन्तु बिजली हेतु आइयो दुनिया अन्हार अछि। भगजोगनी आ अतिथि रूपी बिजली रानी के विकास मार्ग मे बाधा हेतु सबसँ पैघ कारक कहल जा सकैत अछि। बिजली केर दुखद स्थितिक उदाहरण हम एना दय सकैत छी- हम अपन प्रथ त्रैमासिक संकृत ई जर्नल जाह्नवी (jahnavisanskritejournal.com) केर तृतीय अंकक लोकार्पण मिथिला मे प्रख्यात साहित्य्क विद्वान प्रो० रामजी ठाकुर सं करायब निश्चित कयल। अस्तु लैप टाप आ इण्टर्नेट सेवा हेतु अपन मोबाइल गाम लय गेलहुं। ओतय बिजली रानी हमरो सँ पैघ अतिथि छली। अन्ततः एक व्यक्ति कें आग्रह कय जेनरेटर पर कोनो तरहें चार्ज कयलहुं आ कार्य सम्पन्न करायल। यदि बिजली व्यवस्था सम्यक हो तऽ गाम आ शहर के चक्कर नहिं रहत। रोजगारक सृजन सेहो होयत।
o यातायात- यातायात केर समस्या अखनो धरि अछि। वाहन संचालक केर अनियमितता ओ भाडा, समय, यात्री क सं बदसलूकी, गाडीक कागज अथवा लाइसेंस लय के हो, प्रशासन अधिकांश समय मौने नहि रहैत अछि अपितु हरियर पती गनबा मे व्यस्त रहैत अछि।
o रोजगार- रोजगार एकटा एहेन बिन्दु अछि जे लोक कें परदेश जेबाक हेतु विवश कयदैत अछि। समाजिकता के नष्ट कय रहल अछि। व्यक्ति अपन भावना मात्र सं सरोकार रखबाक हेतु विवश अछि। अस्तु रोजगार सृजन अत्यावश्यक अछि। आवश्यकता अछि जे टेण्डर आदि केर दलाल सँ दूर स्वच्छ वातावरण मे रोजगारक अवसर जनता के देल जाय। जनता सतत नीक के संग दैत छैक अन्तःकरण सँ मुदा रोजी क चक्कर मे अनुचित काज सेहो करबाक हेतु विवश होइत अछि।
o जागरुकता- अन्त मे नितीश सरकार सँ अपेक्षा जे जनता मे जागरुकता के संचार हो एकर प्रयास कयल जाय। बहुत किछु जनता नहिं बुझबाक कारण अनुचित करैत अछि। किन्तु यदि जागरुकता बढायल जाय तऽ जनता भ्रष्टाचार के संग नहि देत, विविध कार्यक्रम विशेष रूप सँ सफल होयत।
अन्त मे निष्कर्षतः हमर वक्तव्य होयत जे बिहारक उत्कर्ष समग्र सहयोग सँऽ संभव अछि नकि केकरहु पर दोषारोपण सँऽ मानवमात्र मे कमी आ गुण दुनू छैक। अस्तु गुणक आलम्बन कय अपन संविधान एवं संस्कृतिक अनुकूल कर्तव्य कय प्रत्येक व्यक्ति आ संस्था समग्ररूप सँऽ राष्ट्रक उत्कर्ष मे योगदान दी ई सादर निवेदन।
(लेखक IIT मुम्बई कें शोधछात्र छथि। लेख मे निष्पक्ष लेखिनी केर प्रयोग कयल गेल अछि। कोई कोनो आशय के वैयक्तिक तौर पर नहिं ली। प्रस्तुत कतिपय आँकडा बिहार राज्यक साइट सँऽ लेल गेल अछि। लेख सन्दर्भित टिप्पणी kumarvipin.jha@gmail.com पर सादर आमन्त्रित अछि)

Suggested citation: बिपिन कुमार झा. “प्रदेश केर विकास: बिहार-विकास सन्दर्भ मे आलोचनात्मक अभिव्यक्ति.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 71, 2010-12-01. https://www.videha.co.in/research/2010/71/प्रदेश-केर-विकास-बिहार-विकास-सन्दर्भ-मे-आलोचनात्मक-अभिव्यक्ति.htm

मूल विदेह अंक / Original issue