विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिलीमे अनुवाद-कलाक शास्त्रीयकरणक इतिहास

डॉ. मेघन प्रसाद · 2011-01-15 · अंक 74

मैथिलीमे अनुवाद-कलाक शास्त्रीयकरणक इतिहास
हम पहिनहि कहि दी जे हम अनुवाद कलाक ने तँ मर्मज्ञ छी आ ने कहियो अनुवादक काज कयलहुँ अछि। तथापि राष्ट्रीय अनुवाद मिशन योजना क तहत केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान क अध्किारी लोकनि पूर्ण विश्वसनीयताक संग अनुवादक शास्त्रीय विषयपर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनारमे मंचसँ हमरा किछु कहबाक दायित्वपूर्णं ई भार देलनि तकरा लेल हम संस्थाक अध्किारी लोकनि खासक ऽ डॉ0 अजित मिश्रजीक प्रति कोटिशः आभार प्रकट करै छी।
अनुवादक काज करबाक उत्कट इच्छा तँ छल मुदा साहित्य अकादेमीक प्रतिनिध् ितथा सदस्य लोकनि तकरा आइ ध्रि पूर्ण नहि होमय देलनि। पता नहि हमरा प्रति कोन प्रकारक दुराग्रह पोसने छथि। एकाध् बेर साहित्य अकादेमीक प्रतिनिध्/िपदाध्किारीसँ पत्राचारो कयलहुँ मुदा सेहो निरर्थके गेल। ई जरुर कहि दी जे मैथिलीसँ जुरल रहबाक कारणेँ मैथिलीमे अनुदित रचना बेस संख्यामे पढ़बाक अवसर प्राप्त भेल अछि तेँ ओहि अनुभवक आधर पर मैथिलीमे अनुवाद-कलाक इतिहासपर किछु कहबाक हिम्मति जुटा सकलहुँ अछि।
अनुवाद-कलाक अर्थ - अनुवाद-कलाक मादेँ मैथिलीक अनुभवी आ सफल अनुवादक पण्डित श्री गोबिन्द झाजीक कहब बेसी उपयुक्त बूझि पडै¬़ अछि - एहेन कोनो रहस्य एहेन कोनो सूत्रा नहि वा एहेन कोनो मन्त्रा नहि छैक जे कानमे ढारि देने केओ सफल अनुवादक भ ऽ जाए। हमरा जनैत अनुवाद थिक कोदरबाहि जाहिमे शिक्षण-प्रशिक्षण नहि केवल अभ्यास अपेक्षित होइत छैक। 1
स्वतन्त्राताक सन्दर्भमे अनुवाद जे थिक से एक प्रकारक व्याख्या थिक। प्रायः 1915 ई0मे भाषा वैज्ञानिक Saussure छलाह जे कॉलेज नोट (College Note) लिखलनि तकरा बादमे अनुवाद कहि क ऽ प्रकाशित कराओल गेल। ओ अपन नोटक व्याख्या क ऽ क ऽ प्रकाशित करौलनि जे हुनक मृन्युपरान्त अनुवाद कहि क ऽ प्रकाशित भेलैक।
अनुदित रचना लोक सभ मनोरंजन लेल कम्मे ज्ञान लेल बेसी पढ़ैए। तेँ ओकर मूल बिन्दु आ तकनीकि अर्थ बला शब्दक उपयोग कर ऽकाल पूर्ण सावधनीक आवश्यकता अछि।
विषयवर्गानुसार अनुवाद तीन प्रकारक मानल गेल अछि - शास्त्रीय व्यावहारिक आ साहित्यिक। अनुवाद शास्त्रीय कम व्यावहारिक बेसी होयबाक चाही। शास्त्रीय आ व्याव- हारिक अनुवादमे मुख्यतः अर्थ अर्थात् Suface Meaning आ भाव अर्थात् Intended Meaning इएह दूनू पकड़बाक प्रयोजन होइत छैक। मुदा साहित्यिक अनुवादमे मूलक
अभिव्यजना सेहो सुरक्षित राखबाक अपरिहार्यता रहैत छैक। अभिव्यजनाकेँ पकड़ि पयबाक हेतु विद्वता नहि भावुकता चाही। एहि अभिव्यजनामूलक विशिष्टताकेँ देखैत विभिन्न विद्वान् साहित्यिक अनुवादकेँ अनुवाद नहि कहि Transereation, Recreation पुनःसर्जन प्रतिरूपण आदि नानाविध् नाम दैत छथि।
परोक्षानुवाद - भारतीय भाषा सभमे खास क ऽ मैथिलीमे अनुवादक एक विकृत अर्थात् अवाछनीय परम्परा चलि पड़ल अछि। ई थिक परोक्षानुवाद। अर्थात् अनुवादसँ अनुवाद। एहि प्रकारक परोक्षानुवादमे बहुत-रास विकृति आबि जाइत छैक। विकृति कोना आ कतेक अबैत छैक एक बेर तकर परीक्षण यूरोपक कोनो संस्था करौने छल। लेखक जेन आस्टिन केर प्रसि( उपन्यास प्राइड एण्ड प्रीजूडिस केर एक अध्यायक अनुवाद चीनक मण्डेरिन भाषामे भेल छलैक ताहिसँ अरबीमे आ ताहिसँ फेर अंग्रेजीमे कयल गेलैक। बादमे ज्ञात भेलैक जे एहि अनुवाद-श्रंृखलामे मूल पाठक अध्कितर भाग आमसँ कटहर भ ऽ गेलैक। एहि प्रकारक अनुवादक Channel Distortion निश्चय परोक्षानुवादक श्रेणीमे अबैत अछि। परोक्षानुवादक मादेँ एक बात आओर कहल जा सकैत अछि- जँ अनुवादक मूल भाषा चीनी वा अरबी सदृश विदेशी हुअए तखन तँ मैथिली अनुवादमे मूल भाषाक कोनो खास कुप्रभाव नहि पड़तैक किएक तँ दूनू मैथिलीसँ बहुत दूरक भाषा छैक। मुदा मूल भाषा हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद होयत तँ मूल भाषाक बेसी कुप्रभाव पड़तैक आ ओ मैथिलीक स्वरुपकेँ किछु-ने-किछु अवश्ये बिगाड़ि देतैक। हिन्दीक मूल ग्रन्थ वा अनुदित ग्रन्थसँ जतेक मैथिली अनुवाद हमरालोकनि देखि सकलहुँ अछि सभटा लगैत अछि जे मैथिलीक परिधनमे साक्षात् हिन्दीए ठाढ़ हुअय। संगोष्ठीमे विचारणीय अछि जे एहि प्रवृत्तिक विरोध् कोना आ कतेक दूर ध्रि हुअय।
सफल अनुवादकक प्रवीणता - सफल अनुवादककेँ तीन क्षेत्रामे प्रवीणता रहबाक चाहीऋ मूल भाषामे प्रवीणता लक्ष्य भाषामे प्रवीणता आ अनूद्य सामग्रीक विषयक्षेत्रामे प्रवीणता। जेना मूल सन्दर्भ गणितक हो तँ गणित-शाड्डमे प्रवीणता वा कमसँ कम प्रवेश तँ अवश्ये चाही। मैथिलीमे वास्तविक स्थिति तँ ई अछि जे जेना आजुक मन्त्राी सर्वज्ञ बूझल जाइत छथि तहिना आजुक मैथिली अनुवादक सेहो सौभाग्य वा दुर्भाग्यवश सर्वज्ञ मानि लेल जाइत छथि। आदर्श
अनुवाद तँ ओ होयबाक चाही जे विषय-विज्ञ मूलभाषा-विज्ञ आ लक्ष्यभाषा-विज्ञ लोकनिक सहयोगसँ प्रस्तुत होयत।
उपयुक्त पर्यायक चयन - अनुवादमे भनहि भावक उपदेश देल जाय उपयुक्त पर्यायकचयनकेँ सभसँ पहिने आ सभसँ उच्च स्थान दिअ ऽ पड़त। उपयुक्त पर्यायकेँ चुनबाक हेतु अनुवादकर्त्ता पहिने अपन हृदयकेँ नहि द्विभाषिक शब्द-कोशकेँ ढूँढ़ ऽ लगैत छथि। अनुवादकर्त्ता पहिने अपन हृदयमेसँ उपयुक्त पर्याय ताकथु आ अपन आत्मविश्वास बढ़ाबथु आ तकरा बाद द्विभाषिक वा बहुभाषिक शब्द-कोशमे ढूँढ़थु तँ नीक अनुवाद प्रस्तुत भ ऽ सकैछ।
मैथिलीमे नीक अनुवादक लेल बहुभाषिक व्याकरण रहब आवश्यक अछि जकर अभाव मैथिलीमे सभसँ बेसी अखरैत अछि। एखन एहि दिशामे डॉ0 राम नारायण सिंहजी एकटा नीक काज क ऽ रहल छथि। डॉ0 राम नारायण सिंहजी व्यावसायसँ संस्कृतक शिक्षक छथि मुदा मैथिलीसँ नीक जकाँ जुड़ल छथि। मैथिली-मलयालम-संस्कृत- अंग्रेजी क्रिया-कोश (Multi Langual Verbal Dictionary)क निर्माणमे लागल छथि। प्रायः पूर्ण भ ऽ गेल छनि। आब छपबाक स्थितिमे अछि। ज्ञातव्य जे साहित्य अकादेमीसँ पुरस्कृत मलयालम भाषाक लेखक श्री तकष़ी शिवशंकर पिळैक एकटा उपन्यास चेम्मीन् साहित्य अकादेमीसँ पुरस्कृत आ विश्वक अनेक भाषामे अनूदित उपन्यासक मैथिली अनुवाद मलाहिन साहित्य अकादेमीसँ शीघ्र प्रकाश्य छनि। हिन्दीक लेखिका डॉ0 मिथिलेश कुमारी मिश्रक छटता कोहरा लघुकथा-संग्रहक मलयालममे जाग्रता शीर्षकसँ अनुवाद प्रकाशित भ ऽ चुकल छनि। मलयालम भाषाक प्रसि( लेखक श्री जी0 शंकर पिळैक तीनटा मलयालम नाटक पूजा मुरि करुत्त दैवत्ते तेडि स्नेहदूतन् केर हिन्दी अनुवाद पूजा घर काले देव की खोज स्नेहदूत शीर्षकसँ नेशनल बुक ट्र्रस्ट ऑफ इन्डियासँ शीघ्र प्रकाश्य छनि।
मैथिली भाषामे शब्दकोषक परम्परा:- अनुवादक लेल आवश्यक सामग्री यथा शब्दकोषक परम्परा मैथिलामे आरम्भ भेल बहुत बादमे जा ऽ क ऽ 1951 ई0मे। एहिसँ पहिने बहुतो मैथिली शब्दक प्रयोग/समावेश आन-आन भाषाक कोश तथा शब्दावली सभमे कयल गेल छल। मैथिलीमे एखन ध्रि प्रकाशित 11 गोट कोश उपलब्ध् अछि- 1 मिथिला शब्द प्रकाश 3 2 मिथिलाभाषाकोष 4 3 धतुपाठ 5 4 बृहद् मैथिली शब्दकोश 6 5 पर्यायवाची शब्दकोश 7 6 मैथिली शब्दकोश 8 7 मैथिली शब्दकल्पद्रुम 9 8 अंगिका हिन्दी शब्दकोश 10 9 कल्याणी-कोश: मैथिली अंग्रेजी शब्दकोश 11 10 चातुर्भाषिक शब्दकोश 12 एवं 11 मैथिली अंग्रेजी शब्दकोश 13। मैथिली मे प्रकाशित उपर्युक्त शब्दकोश सभक तुलना जँ आन भारतीय भाषा सभसँ करी तँ निश्चये मन खिन्न भ ऽ जायत। मैथिलीक नवीनतम कोश थिक श्री गजेन्द्र ठाकुरक मैथिली-अंग्रेजी-शब्दकोश जे प्रायः प्रकाशनक क्रममे अछि। एकर अतिरिक्त न्यू हिन्दुस्तानी इंग्लिश डिक्शनरी ऐन इन्ट्रोडक्शन टु द मैथिली लैंगुएज ऑफ बिहार भाग-2 क्रैस्टोमैथी एण्ड भोकेब्युलरी ट्रान्सलेशन ऑफ मनबोध् स हरिवंश एण्ड इन्डेक्स टु मनबोध् स हरिवंश बिहार पीजेन्ट लाइफ ए कम्पैरेटिभ डिक्शनरी ऑफ द बिहारी लैंगुएज भाग-1 बंगीय शब्दकोश ए कम्पैरेटिभ एण्ड ईटीमोलोजिकल डिक्शनरी ऑफ नेपाली लैंगुएज अमरकोशविवशति वर्णरत्नाकर विद्यापतिर पदावली कृषि कोश बेसिक कलोक्विअल मैथिली आदि कृति सभकेँ शब्दसूची शब्दानुक्रमणी वा पारिभाषिक पदावली कहल जा सकैत अछि जकरासँ मैथिलीक कोश सभ बनल आ अनवादक काज लेल गेल अछि।
अनुवाद भाषाक नहि भावक होयबाक चाही। अनुवादककेँ भाषाक फेरमे नहि पड़ि पूर्णतः भावग्राही होयबाक चाही। भाव प्रसंगसँ पकड़ल जाइत अछि। प्रसंग शब्दक अर्थ बड़ व्यापक अछि। एहिमे देश काल पात्रा प्रकरण घटनाक्रम विषय आदि पारिवेशिक तत्त्व समाहित रहैछ। अनुवादमे प्रसंगसँ बेसी महत्त्व अछि संगतिक। अनुवादककेँ संगति पर सतत् ध्यान रखबाक चाही।
अनुवादकक श्रेणीकरण - अनुवादककेँ शब्दग्राही वाक्यग्राही आ भावग्राही आदि तीन श्रेणीमे विभक्त कयल जा सकैत अछि। जेना साइकिल सिखनिहार खसबाक डरेँ साइकिलकेँ कसिक ऽ पकड़ने रहैत अछि। तहिना नवसिखुआ अनुवादक अशु( भ ऽ जयबाक डरेँ मूल भाषाक शब्द आ वाक्य-विन्यासकेँ ध्यने रहैत छथि। हुनका डर होइत छनि जे मूल भाषासँ कनेको विचलित होयब तँ अनुवाद अशु( भ ऽ जायत।परिणाम उनटा भ ऽ जाइत छै। कहबाक तात्पर्य जे मूल भाषाक सतर्क अनुसरणक फेरमे हुनक लक्ष्य भाषाक सहज प्रवाह बिगड़ि जाइत छनि। तेँ अनुवादककेँ भाषाक फेरमे नहि पड़ि पूर्णतः भावग्राही होयबाक चाही। एकटा टंकक उदाहरण द ऽ अनुवादक पण्डित श्री गोबिन्द झा अनुवादकक एहि श्रेणीकरण - शब्दग्राही वाक्यग्राही आ भावग्राही आदिक पुष्टि कयने छथि।2
भाषाक प्रभाव अनेक प्रक्रममे प्रतिफलित होइत अदि। भारतीय शब्दशाड्डमे एकर चारि प्रक्रम वखणत अछि - परा पश्यन्ती मध्यमा आ बैखरी । बैखरी थिक भाषाक ध्वन्यात्मक स्वरुप। इएह एक भाषाकेँ दोसर भाषासँ फराक करैत अछि। प्रक्रमक विभिन्न ध्वन्यात्मक प्रतीकसँ जे प्रतीत होइत अछि से थिक अर्थ। एकरे कहल जाइत छै मध्यमा किएक तँ ई प्रक्रम ध्वनि आ भाव दूनूक मध्यमे पड़ैत अछि। पश्यन्ती केवल ध्यान-चक्षुसँ देखल जाइत अछि। एही ध्यान-चक्षुसँ भाषाक अर्थात्मक स्वरुप देखाइत अछि। प्रक्रममे आगाँ जा ऽक ऽ पश्यन्ती लुप्त भ ऽ जाइत छैक सकल भाव मिलि एक अखण्ड महाभाव भ ऽ जाइत छैक तखन भावना परा पर पहुँचि जाइत छैक। ई परा योगशाड्ड वा दर्शनशाड्डक विषय थिक। परा छोड़ि शेष तीनू प्रक्रमक बोध् नीक अनुवादककेँ होयबाक चाही -1 पहिने मूल भाषाक बैखरीकेँ पकड़ूऋ 2 तकरा द्वारा मूल भाषाक मध्यमाकेँ पकड़ूऋ 3 पुनः तकरा द्वारा मूल भाषाक पश्यन्तीकेँ पकड़ूऋ 4 आब ओहि पश्यन्तीक आधरपर लक्ष्य भाषाक मध्यमाकेँ पकड़ू आ 5 ताहि आधरपर लक्ष्य भाषाक बैखरीकेँ पकड़ू। एकरे नाम थिक अनुवाद। ई प्रक्रिया मूल भाषाक ध्वन्यात्मक प्रतीकक decoding सँ आरम्भ होइत अछि आओर भावक प्रक्रम पर आबि encoded होइत-होइत लक्ष्य भाषाक ध्वन्यात्मक प्रतीकक रुपमे परिणत भ ऽ जाइत छैक।
सरलता - अनुवादक भाषा एहेन हुअय जे जनसामान्य आसानीसँ बूझि सकय। एहिसँ अनुवाद बेसी लोकप्रिय होयत आ अनुवादकक कार्य-प्रगति प्रभावित होयत। एहि सन्दर्भमे अंग्रेज लेखक ग्रियर्सनक अनुसन्धनात्मक पोथीक मैथिली अनुवाद बिहारक ग्राम्य-जीवन निःसंदेह अनुकरणीय एवं सराहनीय अनुवाद-कार्य मानल जा सकैत अछि। बहुभाषिक व्याकरण वा क्रिया-कोश (Multi Langual Verbal Dictionary)क निर्माण-कालमे एहि बिन्दुपर बेसी ध्यान देल जयबाक चाही जाहिसँ कि आगाँक अनुवादककेँ अनुवाद-कार्य करबामे सुविध हुअय।
अनुवादक शास्त्रीयता नीचाँसँ उपर जयबाक चाही - आम लोकक ज्ञान यथा- लोकशब्दाबलीक उपयोग कृषकक ज्ञान यथा- कृषकक जीवन-यापनमे दैनिक व्यवहारमे आबयबला शब्दाबलीक उपयोग जेना उपर उल्लिखित चेम्मीन् क मैथिली अनुवाद मलाहिन उपन्यासमे कयल गेल अछि तेहेन उपयोग आनो अनूदित पोथीमे कयल जयबाक चाही। तकनीकि शब्द यथा- मेडिकल साइन्सक अनुवादमे गामक पशुरोग व्याध्कि नामादिक उपयोग अनुवादमे होयबाक चाही। तहिना मानवजनित रोगहुमे ग्रामीण लोकक देहाती रोगक नामावलीक उपयोग मैथिली अनुवाद लेल कयल जा सकैत अछि।
संक्षिप्तता आ स्पष्टता - अनुवाद सरल संक्षिप्त आ एकदम स्पष्ट हुअय ताहि लेल आवश्यक अछि जे बेसीसँ बेसी तकनीकि (Technical Meaning) शब्दाबलीक उपयोग करैत अर्थगूढार्थकेँ Foot Notes वा Bracket मे ओतहि बुझा दी तँ से नीक रहत।
अनुवादक शास्त्रीय सामग्रीक उपलब्ध्ता (History of knowledge:Text Translation in Maithili)-आब लिखित सामग्री खास क ऽ अंग्रेजी (English)मे कम्प्यूटर (Computer) इन्टरनेट (Internet) ई-मेगजिन (e-magazines) ई-कोश (e-dictionary) ब्लॉग्स (Blogs) आदिपर उपलब्ध् होइ छै। मुदा बिडम्बना अछि जे आजुक मैथिलीक लेखक-अनुवादक अंग्रेजी आ आध्ुनिक तकनीकि ज्ञानसँ अलगे पड़ाइत रहैत छथि। मैथिलीमे अथवा मैथिलीसँ आन भाषामे नीक अनुवाद लेल अंग्रेजी भाषाक संग-संग आन भारतीय भाषाक खास क ऽ दक्षिण भारतीय भाषाक ज्ञान राखब आ तकनीकि उपकरण यथा-कम्प्यूटर (Computer) एल सी डी प्रोजेक्टर (LCD Projector) कैमरा (Camera) सी डी /डी वी डी (Compact Disk/Digital Video Disk) पेन ड्राइव (Pen Drive) आदि संचालित करबाक योग्ता एवं इन्टरनेट (Internet) ई-कोश (e-dictionary) ई-मेगजिनम (e-magazines) ब्लॉग्स (Blogs) आदिक उपयोग करबाक दक्षता रहब अत्याावश्यक भ ऽ गेल अछि।
एकर अतिरिक्त अनुुवादककेँ कतेक स्वतन्त्राता भेंटबाक चाही ? अनुवादक कतेक स्वतन्त्राता चाहैत छथि ? संस्था कतेक स्वतन्त्राता देब ऽ चाहैए ? आदि-आदि नीति आ सि(ान्त आओर व्यावहारिक सम्बन्ध्पर अनुवादक स्तरीयता पठनीयता उपयेगिता उपादेयता तथा अनुवादकक कुशलता आ प्रवीणता एवं अनुवाद-कार्यक सफलता
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निर्भर करैत छैक। अनुवादपर केन्द्रित एहि राष्ट्रीय सेमिनारमे एहू मूल बिन्दू सभपर विमर्श होयब आवश्यक अछि। ध्न्यवाद। जय मिथिला। जय मैथिली।
सन्दर्भ संकेतः-
1 अनुचिन्तन: पण्डित गोबिन्द झा: नवारम्भ प्रकाशन पटना: 2010: पृ0- 113
2 अनुचिन्तन: पण्डित गोबिन्द झा: नवारम्भ प्रकाशन पटना: 2010: पृ0- 115
3 पं0 भवनाथ मिश्र प्रकाशक स्वयं ग्राम-हटाढ-रुपौली पो0- झंझारपुर जि0- मध्ुबनी प्र0 खण्ड 1951
4 पं0 दीनबन्ध्ु झा प्रकाशक स्वयं ग्राम-इसहपुर पो0- मनीगाछी जि0- दरभंगामध्ुबनी 1950
5 पं0 दीनबन्ध्ु झा प्रकाशक- मैथिली साहित्य परिषद् दरभंगा 1950
6 सम्पा0 डॉ0 जयकान्त मिश्र प्रकाशक- इन्डियन काउन्सिल ऑफ एडभान्स्ड स्टडीज शिमला 1973
7 प्रकाशक- प्रज्ञा प्रतिष्ठान काठमाण्डु नेपाल 1974
8 सम्पा0 गोबिन्द झा प्रकाशक- मैथिली अकादमी पटना 1992
9 पं0 मतिनाथ झा प्रकाशक- मिश्र बन्ध्ु प्रकाशन जमुथरि जि0- मध्ुबनी 1997
10 डोमन साहु समीर प्रकाशक- विनोद कुमार चतुर्वेदी सिकन्द्राबाद आन्ध््रप्रदेश 1997
11 सम्पा0 गोबिन्द झा प्रकाशक- महाराजाध्रिाज कामेश्वर सिंह कल्याणी पफाउन्डशन दरभंगा 1999
12 उमेश चन्द्र झा प्रकाशक- सुमित्रा प्रकाशन दरभंगा 2007
13 सम्पा0 गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा तथा विद्यानन्द झा प्रकाशक- श्रुति प्रकाशन दिल्ली 2009

Suggested citation: डॉ. मेघन प्रसाद. “मैथिलीमे अनुवाद-कलाक शास्त्रीयकरणक इतिहास.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 74, 2011-01-15. https://www.videha.co.in/research/2011/74/मैथिलीमे-अनुवाद-कलाक-शास्त्रीयकरणक-इतिहास.htm

मूल विदेह अंक / Original issue