संगाईप्राऊ : नागा पूर्वजक स्मरणक धरोहर
उत्तर-पूर्व भारतक तमाम प्रदेश हमरा नीक लगैत अछि। नीक लगैत अछि ओतए केर पहाड़, पठार, जंगल, गाछ, बृक्ष, फल, फूल, खेत, खरिहान, सुरम्य झरना, जीव-जन्तु आ ओइ परिवेशमे बसल भांति-भांतिक लोक जे अपन बहुरंगी संस्कृतिक संग जीब रहल अछि। तखन जखन हमर मणीपुर केर राजधानीसँ लगभग 7 किलोमीटर केर दूरीपर समतल भूमिमे बसल कबुई नागा जनजाति बहुल गाममे जएबाक निमंत्रण शोधक कारणे भेटल तँ मोन गद-गद भऽ गेल। ई समए थीक सितम्बर 2010 केर मध्य। हमरा लग हवाई जहाजक टीकट यात्रा करक पाँच दिन पहिने आबि गेल छल। इहो निर्णय भऽ गेल छल जे शोध कार्यमे हमरा एकटा कबुई बाला - बीजू जे कि ओही गामसँ थीकीह से मदति करतीह। बीजू समाजशास्त्रमे पूणे विश्वविद्यालयसँ एम.ए. केलाक बाद आइ-काल्हि असम सेन्ट्रल विश्वविद्यालय सिलचरसँ पी.एच.डी. कऽ रहलि छथि। बीजुक आयु लगभग 26 वर्षक हेतन्हि। मोट मुदा मजगुतगर देह हष्टि। थुलथुन नहि, आकर्षक। नाक कनी पीचल, आँखि कनी धसल मुदा सोहनगर। गसल-गसल बाहि, भरल गाल, उन्नत वक्ष आ मध्यम कद-करीब 5फीट 2 ईच, गौर वर्ण, गसल-गसल दुधिया दाँत चमचम करैत। हँसैत मुँह, लज्जाभावसँ भरल, अतिथि सेवा-सत्कारमे सदतिकाल तैय्यार। अंग्रेजी बीजू मातृभाषा जकाँ बजैत छथि तँए हमरा हुनका संगे सम्प्रेषणमे कुनो तरहक दिक्कत नै भेल। ओना हमर परियोजनाक सम्बन्ध महिला विकास, इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी, आ संस्कृतिसँ रहैत अछि आ बीजू सोसल वर्कमे शोध कार्य करैत छलीह। मुदा हुनकर फोकस उत्तर-पूर्व भारत केर जनजातीय महिला समुदायमे एड्स एवं अही तरहक विमारी (अथवा महामारी)क प्रकोपपर छलन्हि। सोचल, नारी चेतना दिस तँ कार्य करिते छथि, किछु ट्रेनिंग आ उत्साह सम्बर्धन केर पश्चात हमरो संगे काज कऽ लेतीह . यएह सोचैत बीजूकेँ हम अपन परियोजनामे राखि लेलयन्हि।
जखन पहिल बेर मणिपुरक राजधानी इम्फालसँ संगाइप्राऊ गाम दिस गामक चारि युवक आ Read Global संस्थाक एगो सहयोगी नाहिद जुबेरक संग हमरा लोकनि विदा भेलहुँ तँ लागल जे युवक सभ उत्साही छथि आ हिनका लोकनिक मदति से हमरा एतऽ कार्य करैमे सुविधा हएत।
संगाइप्राऊ एक साफ आ सुन्दर गाम थीक जे कि पश्चिमी इम्फाल जिलाक अन्तर्गत लमजाओतोंगबा ग्राम पंचायतमे अबैत अछि। अगर इम्फाल शहरसँ हवाई अड्डा दिस प्रारंभ करब तँ शहरसँ लगभग 7 किलो मीटर चललाक बाद दूटा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 53 और 150 केर मध्य ई गाम बसल अछि। संगाईप्राऊ नाम मणिपुर राज्यक माइथोलाॅजीसँ लेल गेल छैक। तै मीथक अनुसारे संगाईप्राऊ संगाई जे कि राज्यक जानबर छैक केर आवास स्थान मानल जाइत छैक।
ओइ गाममे अधिकांश लोक सभ कबुई नागा समुदायसँ छथि। कबुई नागाकेँ रोंगमेई नामसँ सेहो जानल जाइत छैक। गाममे प्रवेश करिते हमरा बीजू भेँट भेलीह। हम बीजूकेँ कहलिएनि जे हम अतए केर किछु बुढ़-पुरान, किछु महिला, किछु युवक आदि सँ भेँट करए चाहैत छी आ हुनका लोकनिसँ ऐ गाम, एकर लोक इतिहास, एतुक्का परम्परा, आर्थिक-सामाजिक परिवेश इत्यादि पर अपन जानकारी बढ़बए चाहैत छी जैसँ रिपोर्ट लीखबामे सुविधा रहत। हमरा बातकेँ सुनिते बीजू हमरा गामक सभसँ बुढ़ आ जातीय प्रधान लग लऽ गेलीह। बुढ़ 86 वर्षक छलाह। सातमा पास केलाक बाद सरकारी स्कूलमे मास्टर भऽ गेलाह। बेटा-बेटी सभकेँ नीक शिक्षा देलन्हि। हुनकासँ ज्ञात भेल जे हुनकर पूर्वज किछु आरो लोक सबहक संगे पहाड़सँ उत्तरि ऐ गाममे लगभग 1780 ई.मे बसलाह। यद्यपि हुनका लग ऐ बातक ऐतिहासिकताक कुनो लिखित प्रमाण नै छलन्हि। हुनका हिसाबे प्रारम्भमे मात्र ग्यारह परिवार ऐ गाममे बसल। ऐ ग्यारह परिवारकेँ मुखियाक नाम आइयो गामक बूढ़-पुरान सबहक मँुहमे छै। ई ग्यारह व्यक्ति छलाह-
1. गोन्बी
2. थोम्बुई
3. बोंकमलाक
4. सचाऊ
5. लंगखोंग्टबा
6. गंगबी
7. ममुईबा
8. गंगथवांगम
9. मईपाक
10. तरांगबोन्नांग
11. कपजीलुपूई (महिला)
अगर दन्तकथाकेँ मानी तँ ई लोकनि बड्ड उद्यमी छलाह। स्थानीय राजा हिनकर उद्यमितासँ प्रसन्न भऽ हिनका लोकनिकेँ अगल-बगल केर पनिगर खेत सभमे धान उपजेबाक लेल कहलखिन। ई सभ बड़ा साहसी आ दबंग सेहो छलाह। तै दिनमे हिनका लोकनिकेँ गुण्डा आ अपराधी तत्वकेँ पकरबाक तथा सजा देबाक अधिकार सेहो दऽ देलखिन। ई ग्यारह पूर्वज संगाईप्राऊ बच्चा संगे बसि अवश्य गेलाह मुदा अपन-अपन मूलग्रामसँ सम्बन्ध सेहो बनौने रहलन्हि। ओतए अर्थात पहारक घर इत्यादिकेँ नै छोड़लाह। जाइत-अबैत रहलाह।
जखन द्वितीय विश्वयुद्ध चलि रहल छल, तै क्षण नेताजी सुभाषचन्द्र बोस अपन आजाद हिंद फौजक संग जापानक सहयोगसँ अही रस्ते ताहि समएक वर्मा (आ आजुक म्यंमार)सँ सम्पर्क रखने छलाह। मणिपुर म्यंमारक सीमा सं सटल अछि। फलत: अतए केर लोकके भयंकर बमबारीक समाना करए पड़लैक। पहाड़ीपर रहैबला लोकक जीवन लगातार, बमबारीसँ परेशान भऽ कखनहुँ झाड़-झंखाड़ दिस तँ कखनहुँ मैदानी भाग दिस दहशतसँ प्राणरक्षाक लेल भागए लागल। ओहुकाल पहाड़ीपर बसल गामसँ किछु कबुई नागा लोकनि संगाईप्राऊ गाममे आबि बसि गेलाह।
तँ बात करैत रही गामक सभसँ बुढ़ पुरूषक। ओ परम्परागत रूपसँ कबुई समाजक प्रधान छथि। ओ कहलनि जे आब ऐ गामक लगभग 35 प्रतिशत नागा लोकनि ईसाई भऽ गेलाह अछि। एकर बादो आपसमे कुनो वैमनस्य नै लोक सभ परम्परागत पाबनि-तिहार, नाच-गान, सभ एक्के संग अखनहुँ बड़ उत्साहसँ मनबैत छथि। अखनहुँ ई लोकनि अपन पूर्वजकेँ देवतासँ बेसिए सम्मान दैत छथि। अखनहुँ अपने-आपकेँ कुनो धर्म आ संस्कृतिसँ ऊपर उठि नागा बुझएमे गर्वक अनुभूति करैत छथि। पितृक प्रति अतेक सिनेह कतहुँ नै देखल हम अपन आइ धरिक यायावरीक प्रवृत्तिमे। पितृक प्रति अतेक समर्पण जे कबुई नागामे देखलहुँ से एकाएक हमरा अपने-आपकेँ अपन पितृक प्रति सचेत कऽ देलक। पितृक प्रति अतेक इमानदारी जे गामक एक नागा चित्रकार प्रथम ग्यारह पूर्वजक चित्र बनाए गामक िनर्माणक एक भव्य पेन्टिंग बनौलनि। पेन्टिंग भव्य आ पैघ। आकर्षक आ रंग तथा तुलिकाक समायोजन केर सर्वश्रेष्ठ उदाहरण। केनवासमे एक-एक रत्ती जगह भरक असाधारण प्रयास। बाह रे कलाकार! बाह रे कला! बह रे पित्रिक प्रति समर्पण! हम पूरा आत्मविश्वासक संग कहि सकैत छी जे अतेक सिनेह हमर पिताक अलावे आर कियोक आन पुरूष हमरा नै दऽ सकैत छल।
परम्परागत कबुई नागा धर्मकेँ मानैबला प्रकृतिक समिप छथि। ओ एकटा सर्वशक्तिमान भगवान अर्थात् तींगकाओ रगवांग' केँ मानैत छथि, एकर अतिरिक्त अनेक तरहक देवी-देवताक अराधना आ पूजा-उपचार सेहो करैत छथि। परम्परागत कबुई नागाकेँ बीच ई विश्वास अखनहुँ छन्हि जे मनुक्ख तखने विमार पड़ैत अछि जखन ओकरा कुनो भूत-प्रेत परेशान करैत छैक आ ओकरापर सवार भऽ जाइत छैक। कखनो काल डाइन-जोगिन सभ सेहो जादू-टोनासँ लोककेँ परेशान करैत छैक। भूत-प्रेत या शैतानी आत्मासँ मुक्त करबाक लेल विमार व्यक्तिक सामने गामक ओझा हरियर तरकारी, फल, फूल, मुर्गीक बच्चाक शोणित, चाउर, देशी दारू आदिसं अपन ईष्ट देव पितृ इत्यादिकेँ अर्पित करैत अछि आ निष्ठापूर्वक पूजा करैत अछि। विश्वास ई कएल जाइत अछि जे एहि प्रक्रिया आ आराधनासँ लोकक कष्टक समाधान भऽ जएतैक।
संगाईप्राऊ गामक कबुई नागा मूलत: छः गोत्रक छथि। ई 6 गोत्र गामक बुजुर्ग लोकनिक कथनानुसार निम्नलिखित अछि-
क. कामेई 27 घर
ख. पालमेई 09 घर
ग. गोलमेई 11 घर
घ. गंगमेई 08 घर
च. मारिंगमेई 08 घर
छ. न्यूमेई 01 घर
इसाइयक प्रभाव तेजीसँ बढ़ि रहल छैक। गाममे एकता मध्यम आकृति केर गिरिजाघर आ एकटा एक्टीभीटी केन्द्र इसाइ मिशनबला बना देने छैक।
गामक लोक सभ, मुख्यरूपेण महिला लोकनि बड़ा कलात्मक आ रचनात्मक प्रवृतिक छथि। Read- Global संस्थाक सहयोगसँ पच्चास प्रतिशत साझेदारीकेँ स्वीकारैत ऐ गामक स्त्री-पुरूष गामक गैरमजरूआ भूमिपर सार्वजनिक प्रयोगक हेतु एगो पुस्तकालय, कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र, महिला वर्गक लेल आर्थिक उपार्जन हेतु व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र बना रहल छथि। ऐ प्रांगणाक नाम तजाई राखल गेल छै। पूछलापर पता चलल जे स्थानीय भाषामे तजाई केर अर्थ होइत छै पहाड़ी जंगलमे एहेन पोखरि जतए नूनगर पानि उपलब्ध होइत छै। आ सभ तरहक जानवर ओइ पानिक स्वाद स्वतंत्र भावसँ अतए लैत अछि। तहिना तजाई प्रांगण अगल-बगलक तमाम लोकक हेतु चाहे वो स्त्री-पुरूष, बच्चा-बुढ़, नव-पुरान, जनजाित-सामान्य जातिक किएक नै हो, सबहक लेल छै। सभ कियो अतऽ आबि ऐठाम उपलब्ध सुविधाक लाभ उठा सकैत अछि। आब बुझैमे कुनो भांगठ नै अछि जे आपसी सौहार्दक बीच कोना कऽ कबुई नागामे व्याप्त अछि।
ई रहस्य अखनो धरि पता नै चलल जे बीजू किएक बहुत रास अगरबत्ती जरेने छलीह। हलांकि कुनो विशेष तरहक दुरगन्धक अनुभूति अवश्य भऽ रहल छल। जखन ओइ गामसँ सम्बन्धित नाना तरहक जानकारी लऽ लेलहुँ तँ ओइ बुजुर्गकेँ कहलिएनि- “बीजू हमरा लेल जानकारी इकत्रित कऽ रहलि छथि। अहाँ लोकनि लग बेर-बेर एतीह आ विभिन्न तरहक प्रश्न करतीह। निवेदन जे ऐ गामक नागा समाजक प्रधान होमाक नाते, सभसँ बुजुर्ग होबाक नाते, अनुभवी होबाक नाते अहाँ हिनका यथासंभव मदति करबन्हि ; गामक लोक सभसँ सेहो आग्रह करबनि जे ई लोकनि बीजूकेँ सहयोग करथि।”
बुढ़ बजलाह- “कुनो बात नै। बीजू तँ गामक बेटी थीकीह। आर अहाँ लोकनि तँ हमरे सभ लेल कार्य कऽ रहल छी। फेर सहयोग तँ करबे करबनि।”
एकर बाद हुनका नमस्कार कए एक महिला लग विदा भेलहुँ। रास्तामे बीजू कहलनि- “श्रीमान्, ऐ घरक बारी मे एकटा तीन दिन पूर्व मरल बरदक मांस निकालल जाइत छलैक तथा खालकेँ अलग करैत छलीह घरक महिला लोकनि। तकरे दुर्गन्ध आबि रहल छल। दुरगन्ध कनि कम भऽ जाए तँए तीन-चारि मुट्ठी अगरबत्ती जरा देने रही।”
आब हमरा लोकनि गामक एक 64 वर्षीए नागा महिला श्रीमती एथेनाक घर पहुँचलौं बड्ड साफ-स्वच्छ आ कलात्मक घर। चारू कात फूल आ हरियरीसँ भरल। घरक भीतरसँ एक युवक बाहर एलाह। हमरा लोकनिकेँ बैसवाक लेल कहलनि। कनी कालक बाद श्रीमती एथेना कमरमे फनेक लपेटने तथा ब्लाऊज पहिरने एलीह। सहज आ सुन्दर स्वरूप। निश्छल मोन। शांत स्वरूप। बात होमए लागल। कहलनि- “हम्मर माता-पिता कहि नै किएक इसाइ भऽ गेलाह। मुदा हमरा लोकनि नागा परम्पराकेँ धेने रहलहुँ। पिताजी हमरा एदतिकाल बेटे जकाँ सिनेह देलनि। अन्तत: 1969 ई.मे गुवाहाटी विश्वविद्यालयसँ राजनीति शास्त्रमे एम.ए. केलहुँ। हम पहिल कबुइ नागाक महिला छी जे एम.ए. केलहुँ तकरबाद हमर विवाह भऽ गेल। हमर पति इन्जिनीयर छलाह। ओ हमरा कहलनि जे अहाँ चाही तँ नौकरी कऽ सकैत छी। फेर की छल। भारतीय डाक विभागमे भेकेन्सी एलैक हम अपन आवेदन पत्र जमा केलौं आ हमरा नौकरी भेट गेल। आब अवकाश प्राप्त कए अपन गाममे रहि रहल छी। बेटा अपन मकान गौहाटीमे बनौने अछि आ बेटी िदल्लीमे। दुनू कहैत अछि गौहाटी किंवा दिल्ली आबि जाऊ। अतए तमाम सुविधा उपलब्ध छै। मुदा हम कतौ नै जाए चाहैत छी। हमर पति केन्सरसँ मरि गेलाह। हम देखैत छी जे गामक बच्चा सभ दिशाहिन भऽ रहल अछि। युवक सभ बेरोजगार आ सड़कछाप छथि। महिला लोकनि शोषित जीवन जीबाक लेल बाध्य छथि। लोकमे देशी दारू बनेबाक आ पीबाक जबरदस्ती रोग भऽ गेल छै। बच्चासभ लेल कुनो एहेन सार्वजनिक स्थल नै छै जतए ओ सभ खेल-कुदि सकए, कला आ रचनात्मक प्रवृत्तिकेँ आगाँ बढ़ा सकै, महिला एवं युवा वर्ग सभ लेल कुनो आमदनीक जरिया नै छै। सोचैत छी गामेमे रहि ऐ दिशामे कार्य करब। आब Read Global संग कार्य प्रारंभ भेल अछि। किछु-ने-किछु अवश्य भऽ जएतैक।”
एथेनाकसँ इहो पता चलल जे गामक अनेको युवक दारू पीब समएसँ पहिने काल-कवलित भऽ गेलाह। हुनका लोकनिक विधवा सभ बड़ा कष्टक जीवन जीवाक लेल बाध्य छथि। संगाईप्राऊ गामक अधिकांश महिला लोकनि स्थानीय दारू भातसँ बनबैत छथि। शहरक लोक सभ घरे-घरे आबि दारू पीबैत अछि। पच्चास टकामे एक मग दारू आ ओकरा संगे सुगरक मांस, कनिक सलाद सेहो भेटैत छै। एक ग्राहक सँ लगभग 20-25 टकाक आमदनी भऽ जाइत छै। अगर एक घरमे एक दिनमे पाँचोटा ग्राहक आबि गेलैक तँ औसतन 125 टकाक आमदनी। मुदा एकर विपरीत प्रभाव स्पष्ट छै। दारू पीऐबला सभ महिला सभकेँ कुदृष्टिसँ देखैत अछि। आर्थिक विवशता तथा पैसाक लोभें किछु नागा महिला देह व्यापारमे लागलि छथि। घरमे दारू सदरिकाल उपलब्ध रहबाक कारणे पुरूष सभ बच्चेसँ दारूक सेवन प्रारम्भ कऽ लैत अछि। महिला सभकेँ अगर अवसर भेटनि तँ ऐ धंधा छोड़ि अर्थोपार्जन केर कुनो आन ब्यौंत करतीह।
ई बड़ा आशचर्यक विषए थिक। मणीपुर राज्य दू प्रकारक लोकमे बाटल अछि। समतल भू-भागमे रहएबला मैतेई आबादी जे मूलत: वैष्णव छथि, कृषिक कार्यमे दक्ष छथि, आ राज्यक जनसंख्याक पैघ प्रतिशत छथि, आ दोसर दिस पहारी क्षेत्रमे बसनिहार 31 जनजातीय समुदाय। मैतई महिला लोकनि बड्ड उद्यमी छथि। मणिपुर केर प्रत्येक जिला तथा ब्लॉक स्तरपर आमा मार्केट अर्थात मातृ-बाजार लगैत छै। ऐ तरहक अमां-मार्केटमे केवल स्त्रीगणें सभ दोकान लऽ सकैत छथि। आश्चर्यक बात ई जे समस्त मणिपुरमे अमां-मार्केटमे एकौटा दोकान आदिवासी महिला लोकनि नै लेलनि अछि। आर-त-आर संगाईप्रऊ गाममे जे तरकारी बेचैवाली महिला सभ छलीह सेहो सभ मैतेई महिला छलीह। एकर एगो कारण इहो बुझना गेल जे मैतेई पुरूष बड़ा उद्यमी होइत छथि। महिला लोकनि कपड़ा बुनि, खेत-पथारमे कार्य कऽ किछु तरकारी इत्यादि बेच, किछु समानकेेँ बाजारमे बेच आ नेरेगाक कार्यक्रममे किछु दिन कार्य के अपन-अपन घरक हेतु किछु अतिरिक्त आमदनीक ब्यौंत कऽ लैत छथि। ऐ तरहेँ गृहस्थीमे स्त्री-पुरूषक सौहार्दपूर्ण सहभागिता देखल जा सकैत अछि।
हलांकि एथेना आ संगाइप्राऊ गामक अन्य उत्साही महिला लोकनि हमरा कहलनि जे अगर महिला लोकनिकेँ तकनीकि ज्ञानक शिक्षा, उद्यमिताक प्रशिक्षण आ इन्टरीप्रेन्युअर केर ज्ञान वैज्ञानिक ढंगसँ देल जानि तँ ई लोकनि वस्त्रक बुनकरी, सुगर-आ अन्य मांसक आचार आदि प्रोसेसिंग आ पेकेजिंग, नेबो, हरियर मिरचाइ, बांसक कोपर इत्यादि अचार बना बजारमे बेच सकैत छथि। आ एथेना ऐ दिशा मे प्रयासरत छथि।
अगर सांस्कृतिक पक्षकेँ देखल जाए तँ ऐ गामक कबुई नागा अपन संस्कार, लोक रीति-रिवाज, वस्त्र-विन्यास, श्रृंगार, परम्परासँ अखनो जुरल छथि। बुजुर्गक सम्मान सर्वोपरि अछि। युवक आइयो बिना बुजुर्गक आज्ञा लेने कुनो विशेष किंवा महत्वपूर्ण निर्णय नै लैत अछि। बहुरंगी वस्त्र आ आकर्षक युवती-युवककेँ नचैत-गबैत देखब तँ देखिते रहि जाएब। सौन्दर्य जेना हिनका लोकनिक बीच कैद भऽ गेल हो। बाह रे देह सौष्ठव। बाह रे सुन्दरता! बाह रे श्रृंगार! बाह रे युवक आ युवतीक मध्य नैसर्गिक प्यार!
कबुई नागाक प्रत्येक घरमे पूर्वजक फोटो टांगल देखलहुँ। फोटोमे नागा जनजातिक लोकक पहाड़, या प्रकृतिसँ सम्बन्ध सेहो सम्मिलित रहैक। अपन घर आ दैनिक जीवनसँ सम्बन्धित उपयोगक तमाम वस्तुकेँ कलाकृतिसँ मण्डित कए जीबाक कला सीखबाक हो, स्वच्छ केना रही से जनबाक हो, पितृ केँ सदतिकाल केना याद रखी से शिक्षा लेबाक हो, गरीबी जीवनमे रहियो अपन मांटि-आ संस्कारसँ सिनेह देखबाक हो, सदतिकाल चौअन्नी मुस्कान बला चेहरा बनेवाक हो तँ कुनो नागा समाजमे जा कऽ किछु दिन रहू। पता लागि जाएत।
२