Maithili Word net: - आवश्यकता, कार्यान्वयन आओर तद्गत समस्याक समीक्षा।
मैथिली वर्डनेट बनेबाक उद्देश्य अछि एकटा एहेन Lexical Database तैयार करब जे चयनित मैथिली भाषा केर शब्द के अर्थ, आण्टोलोजी (हैरार्की), एहि संग समस्त (चयनित) भारतीय भाषा मे ओहि शब्दक अर्थ, पर्यायपदगण आदि सहजता सँऽ उपलब्ध करा सकय।
प्रश्न उठत एहि सँऽ लाभ की होयत? एहि सन्दर्भ कें विविध दृष्टि सँऽ देखल जा सकैत अछि –
१. जनसामान्य मैथिलीप्रेमी हेतु
२. संगणकीय भाषाविज्ञान हेतु
समस्त मैथिल प्रेमी एहि स्वतन्त्र साफ्टवेयर/विकसित टूल द्वारा मैथिली के कोनो शब्द के अर्थ संगहि ओकर विविध भाषा मे अर्थ ओकर आण्टोलोजी[1], विविध भाषा मे ओकर अर्थ विविधता आओर पर्यायपदसमूह सहजता सँऽ देखबा मे समर्थ हेताह।
संगणकीय भाषाविज्ञान हेतु ई विशेष उपादेय होयत कियाक तऽ मैथिली आ अन्य भारतीय भाषाक पारस्परिक यान्त्रिक अनुवाद मे ई सहयोग करत।
उक्त तीन बिन्दु पर चर्चा करबाक अनन्तर अखनि धरि जे किछु उपलब्ध श्रोत अछि ओकर समीक्षा करब उचित होयत-
१. कल्याणी कोश
२. विविध शोधपत्र/लेख
३. विदेहक आनलाइन शब्दकोश
४. विविध अन्तर्जाल, विशेष कर संस्कृत वर्डनेट
कल्याणी कोश केर उपलब्धता स्क्राइब पर नागेशजी केर सहयोग सँऽ भेटल। ई कोश एकटा मानक ग्रन्थ अछि। यद्यपि एहि शब्दकोश के अपन सीमा छैक, ई शब्दतन्त्र बनेबाक मार्ग मे विशेष उपादेय अछि।
विविध शोधपत्र गूगल आ आदरणीय श्री सदन झा द्वारा (एशियाटिक के किछु अंश pdf मे) प्राप्त भेल जे चिन्तन के नवीन दिशा देलक।
विदेह मैथिली शब्दकोश केर दिशा मे नीक कार्य अछि मुदा एकर अपन उद्देश्य आ सीमा छैक। ई सेहो एहि कार्य हेतु उपादेय अछि।
विविध अन्तर्जाल एहि कार्य के गति प्रदान केलक संगहि प्रस्तुतीकरण के दिशा देलक।
अखनिधरि की काज कयल गेल-
सम्प्रति डाटा संकलन केर कार्य चलि रहल अछि। संगहि तत्समकोश के प्रारूप आ अपन Ph. D. कार्य के अनुरूप मैथिली शब्दबन्ध/शब्दतन्त्र के संरचना केर प्रारूप बनाओल जा रहल अछि।
पाठक सँऽ सहयोगक अपेक्षा-
एहि तथ्य सँऽ अपने सभ परिचित होयब जे मैथिली केर क्षेत्र विविधता केर संग उच्चारण (टोन) विविधता विद्यमान अछि। एहि संग अहू तथ्य सँ परिचित होयब जे कारण जे हो एतय (मैथिली भाषी केर मध्य) दू प्रकारक पूर्वाग्रह विद्यमान अछि- पहिल मैथिली बजनाइ पिछडापन के प्रतीक अछि अस्तु बच्चा सभ के तथाकथित पिछडापन सँऽ बचबैत छथि। दोसर मैथिली के उत्थान केर हेतु योगदान करबाक क्रम मे ई बिसरि जाइ छथि जे भाषा केर अन्तर्सम्बन्ध बहुत महत्त्वपूर्ण होइत अछि कोनो भाषा कोनो अन्य भाषा के अहित नहिं करैत छैक।
एतय सभ सँऽ निवेदन जे उक्त दुनू पूर्वाग्रह सँऽ ऊपर उठि मैथिली के वास्तविक रूप मे अन्तर्जाल पर उपादेय बना एहि भाषा के सहज बनाबी आ एकर क्षेत्र के बृहत् करी न कि एकर क्षेत्र मे संकुचन आनी।
यदि अपने मैथिली वर्डनेट सन्दर्भ मे कोनो सुझाव/श्रोतकेर जानकारी/ अथवा कोनो टिप्पणी दिअ चाहैत छी तऽ kumarvipin.jha@gmail.com पर मेल करू अथवा +9757413505 पर काल करू, ताकि मैथिली वर्डनेट निर्विघ्न एवं परिष्कृत रूप मे यथाशीघ्र लोकार्पित भय सकय।
परिशिष्ट
इष्ट[2]>संज्ञा
1. ऐसे कर्म जो धर्म से संबंधित हों
§ सामाजिक कार्य (Social) ( SCL उदाहरण:- विवाह,यज्ञ,तर्पण इत्यादि )
§ कार्य (Action) ( ACT उदाहरण:- दौड़,पढ़ाई,चिंतन इत्यादि )
§ अमूर्त (Abstract) ( ABS उदाहरण:- मन,हवा,गुण इत्यादि )
§ निर्जीव (Inanimate) ( INANI उदाहरण:- पुस्तक,घर,धूप इत्यादि )
§ संज्ञा (Noun) ( N उदाहरण :- गाय,दूध,मिठाई इत्यादि )
2. वह जो सब बातों मे सहायक और शुभचिन्तक हो
§ संज्ञा (Noun) ( N उदाहरण :- गाय,दूध,मिठाई इत्यादि )
3. एक पौधा जिसके बीजों से तेल निकाला जाता है
§ वनस्पति (Flora) ( FLORA उदाहरण:- शैवाल,लता,वृक्ष इत्यादि )
§ सजीव (Animate) ( ANIMT उदाहरण:- मानव,जानवर,वृक्ष इत्यादि )
§ संज्ञा (Noun) ( N उदाहरण :- गाय,दूध,मिठाई इत्यादि )
4. वह विचार जिसे पूरा करने के लिए कोई काम किया जाए
§ अमूर्त (Abstract) ( ABS उदाहरण:- मन,हवा,गुण इत्यादि )
§ निर्जीव (Inanimate) ( INANI उदाहरण:- पुस्तक,घर,धूप इत्यादि )
§ संज्ञा (Noun) ( N उदाहरण :- गाय,दूध,मिठाई इत्यादि )
5. वह देवता जिसकी पूजा किसी कुल मे परंपरा से होती आई हो
§ पौराणिक जीव (Mythological Character) ( MYTHCHR उदाहरण:- बकासुर,पांडु,द्रौपदी इत्यादि )
§ जन्तु (Fauna) ( FAUNA उदाहरण:- गाय,मानव,सर्प इत्यादि )
§ सजीव (Animate) ( ANIMT उदाहरण:- मानव,जानवर,वृक्ष इत्यादि )
§ संज्ञा (Noun) ( N उदाहरण :- गाय,दूध,मिठाई इत्यादि )
6. ढला हुआ मिट्टी का विशेषकर चौकोर लम्बा टुकड़ा जिसे जोड़कर दीवार बनाई जाती है
§ मानवकृति (Artifact) ( ARTFCT उदाहरण:- पुस्तक,कुर्सी,नाव इत्यादि )
§ वस्तु (Object) ( OBJCT उदाहरण:- पुस्तक,छाता,पत्थर इत्यादि )
§ निर्जीव (Inanimate) ( INANI उदाहरण:- पुस्तक,घर,धूप इत्यादि )
§ संज्ञा (Noun) ( N उदाहरण :- गाय,दूध,मिठाई इत्यादि )
विशेषण
1. जिसकी इच्छा की गई हो
§ संबंधसूचक (Relational) ( REL उदाहरण :- चचेरा, मौसेरा, बनारसी इत्यादि )
§ विशेषण (Adjective) ( ADJ उदाहरण:- सुंदर,लिखित,अमर इत्यादि )
2. बहुत निकट का या बहुत करीबी
§ अवस्थासूचक (Stative) ( STE उदाहरण :- सूखा, तर, जवान इत्यादि )
§ विवरणात्मक (Descriptive) ( DES उदाहरण :- लाल, पाँच, सुंदर इत्यादि )
§ विशेषण (Adjective) ( ADJ उदाहरण:- सुंदर,लिखित,अमर इत्यादि )
[1] उदाहरण हेतु- परिशिष्ट देखू।
[2] Hindi word net IITB
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राजदेव मण्डल
उपन्यास- हमर टोल
गतांशसँ आगाँ…
स्वार्थक कारणे दुनू परानीमे झगड़ा भेनाय स्वभाविके अछि। झगड़ाक बाद देह आ मन अलग हेबे करतै। वएह सुआरथ फेर दुनूकेँ मिलन करबौतै। से बात साँचे किन्तु झूठे। जे हुए किन्तु झगड़ाक बाद मिलन एक तरहक नव संचार करैत छै, मोनमे। जेना लगैत रहै छै जे सभकिछो अभिनव भऽ गेल हुअए। दमित लीलसा सभ फन-फनाक ठाढ़ भऽ गेल हो। मनक फुलवाड़ीमे नव नव फूलक आगमन। भनभनाइत भ्रमर। आबि जाइ छै- अभिनव प्रीत!
धर्मडीहीवाली आपस आबि गेल छै। जागेसर आब डरे किछो नै बजै छै। एक सए झंझटसँ एकेटा झंझट ठीक। ठीके कहै छलै उचितवक्ता- ‘मौगीसँ जे अराड़ि करबें तँ सभ नेबाबी भीतरी घोंसारि देतौ आ बोलती बन्न भऽ जेतौ।
धर्मडीहीवालीपर भनभनियाँ भूत सवार भऽ गेल छै। जखैन-तखैन भनभनाइते रहै छै। कोन ठेकान छै। ोग कने हटिए कऽ ओकरासँ गप्प करैत अछि।
धर्मडीहीवालीक मोनक बात के बूझत। जखैन ओ असगर होइत अछि तखैने ओकरा अगल-बगलमे सखी, सेहेली, भर-भौजाइ, अड़ोसी-पड़ोसी सभ ठाढ़ भऽ जाइत अछि। जहिना नैहरामे ठाढ़ होइत छलै, तहिना। ओकरा सभकेँ कियो नै देखै छलै। देखतै किएक। मोनक आँखिसँ देखै छलै मात्र धर्मडीहीवाली, आ गप्पो करै छलै।
“गे िनरमला, सन्तान कोन भारी चीज छै। चाहनेसँ कोन चीज नै होइ छै। कने दिमाग लड़ा सभ कुछो ठीक भऽ जेतौ। देखै छी दिदियाकेँ। ओकरो सासुरमे एहिना झगड़ा होइत छलै। बेटा जनमैते रानी बनि गेलै।”
“है शुरूमे तँ बहुतो हल्ला-फसाद भेलै। बदचलन छै। बेहया छै। किन्तु सभ किछो रसे-रसे दबि गेलै। के केकरा याइद रखै छै, कथी। फुरसैतमे दोसरोक गप्प मोन पड़ैत छै आ काजक बोझ जँ माथपर रहै तँ अपनो विषयमे बिसरि जाइत अछि।”
“ई तँ एहेन दुनियाँ अछि। जे जखैन ढोल पिटैक हएत तखैन केकरो सुगबुगाइतो नै देखबै। आ जँ चुप्पी साधि लेबाक बखत तँ बाघ जकाँ गर्जन करए लगत।”
“के कथी बजै छै से बात छोड़ू। अपना विषयमे सोचू। अहाँकेँ बच्चा चाही। ओकरा जन्म दिअ पड1त। डागदर-वैघ गहवर-भगत चाहे जतएसँ हुअए।”
धर्मडीहीवाली हँसैत अछि भनभनाइत....। फेर तमसा जाइत अछि। डरे खोलि कऽ नै बजैत अछि किन्तु पतिकेँ देखते ओर मान धिरनासँ डुबकि जाइत अछि। कोनो काज मोन लगा कऽ नै करैत अछि। जेना उड़ी-बिड़ी लगले रहैत अछि।
आब जागेसरो मनकेँ मारने रहैत अछि- डरे....। फेर ने पर-पंचैती बैस जाए। आ समाज थू-थू करए लगे।
समए आबि मुँह दाबि कऽ कखनहुँ काल कहि दैत अछि।
“ओहि दिन खेलावन भगतसँ झगड़ि गेलिये। कहू तँ ओकरासँ फेर देखा दी। नै तँ महतो बाबा लग डाली लगबा दी। विसवास नै होइत अछि तँ डागदर-वैध जइठाम चलब ततहि चलू।”
किन्तु धर्मडीहीवालीकेँ दिल-मोन तँ भरबे नै करै छै, ऐ गप्पसँ जेना। हरदम देहमे आगि लगले रहै छै। सुतैत-बैसैत बेचैन। सोचैत छै- जँ पति चाहैत अछि तँ आइ भगतसँ भेँट करबै।
कौआ, मैना, बगरा सभ एकेठाम खेलाइत छलै। चिल्हौड़क छाँह देखते सभटा एकेबेर फड़फड़ा कऽ उड़ि गेलै, अासमान दिस....।
खुला आकाशमे उड़ैत एक खुंडी मेघ। धर्मडीहीवालीक छाती धुकधुका उठल। नै जानि किएक....।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
अरविन्द ठाकुर