कथा किरणमे यथार्थवोध ओ नारी विमर्श
मैथिली साहित्यमे समग्र विधाक रचनाक आधारपर डाॅ. ब्रज-किशोर वर्मा मणिपद्मकेँ पहिल सम्पूर्ण साहित्यकार मानल जाइत अछि। मुदा जौं जन्म क्रमांकक आधारपर िनर्णए कएल जाए तँ काॅचीनाथ झा ‘किरण’ पहिल सम्पूर्ण साहित्यकार छथि। मणिपद्म जकाँ किरणजी सेहो साहित्यक समग्र विधा उपन्यास, वालकथा, एकांकी, नाटक, कविता संग्रह, महाकाव्य, िनबंध संग्रह आ कथा संग्रहक रचना कएलनि। पराशर महाकाव्य लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार आ ‘कथा किरण’ कथा संग्रहक लेल वैदेही सम्मानसँ सम्मानित कएल गेलनि।
मूलत: काव्यात्मक प्रवृति ओ अभिरूचि राखएबला ऐ साहित्यकारक पहिल कथा संग्रह ‘कथा किरण’ सन् 1988ईं.मे भाखा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित भेल। सन् 1989ईं.मे किरण जीक देहावसान भऽ गेलनि। सन् 1991-92 ईं.मे बिहार सरकार द्वारा मैथिलीकेँ बिहार लोक सेवा आयोगसँ निकालि देल गेल। जइसँ ऐ भाषाक वाचक ओ पाठक लोकनिक मध्य अस्तित्व डगमगाए लागल। फलस्वरूप महाविद्यालय स्तरपर मैथिली पढ़एबला छात्रक कमी भऽ गेल। जकर परिणाम ई भेल जे ऐ अवधिक किछु आगाँ-पाछाँ प्रकाशित रचनाक ओ महत्व नै भेटल जकर ओ अधिकारी छल।
’कथा किरण’ सम्बन्धत: ऐ अर्न्तद्वन्द्वक सभसँ बेशी शिकार भेल। किएक तँ हिनक ऐ संग्रहसँ पहिने प्रकाशित किछु रचनाकेँ छोड़ि समाजक विभिन्न ऊँच-नीच, सिनेह-द्वेष आ समन्वयवादकेँ स्पर्श करएबला कथा साहित्य मैथिलीमे नै लिखल गेल छल। जौं किछु कथाकार ऐ परिधिसँ ऊपर उठबाक प्रयासमे सफल भेलथि तँ मात्र किछुए कथामे। सम्पूर्ण समाजक जर्जर व्यवस्था दिस किनको नजरि पड़बो केलनि तँ कतौ-कतौ। सम्पूर्ण कथा संग्रहमे मानवीय मूल्यक अवलोकन कथा िकरणसँ पहिने हरिमोहन झाक चर्चरी, मनमोहन झाक अश्रुकण, ललितक प्रतिनिधि, रामदेव झाक एक खीरा तीन फाँक, रमानन्द रेणुक कचोट, रमेश नारायणक पाथरक नाव, धूमकेतुक अगुरवान, शेफालिका वर्माक अर्थयुग आदिमे भेटैत अछि परंच ऐ सभ कथा संग्रहक सभटा कथाकेँ ऐ दृष्टिसँ सेहो प्रासंगिक नै मानल जाए। प्रयोगवादी कथाकार राजकमल जीक िकछु कथा जेना ललका पाग, सॉझक गाछ, उपराजिता आदि मैथिली साहित्यमे अपन बेछप्प आधुनिक रूप नेने प्रवेश तँ कएलक मुदा हुनको किछु कथा मैथ्ज्ञिली साहित्यकेँ शिल्प आ प्रयोगवादक विश्लेषणक क्रममे अन्हार घर नेने चलि गेल।
कथा किरणमे 19 गोट कथा संकलित अछि, अलग-अलग कालमे िलखल गेल ऐ कथा सभकेँ शिवशंकर श्रीनिवासक प्रयाससँ 1988ईं.मे भाषा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित कएल गेल अछि। आमुख शिवशंकरजी लिखने छथि, जइमे एकटा चर्चित समीक्ष समीक्षक द्वारा आमुखसँ बेसी किरण जीक मनोदशा आ रचना प्रकाशन करएबाक क्रममे कथाकारपर श्री निवास जीक उपकार परिलक्षित भेल। वास्तवमे समीक्षा वा आमुख ऐ रूपेँ नै लिखबाक चाही। आमुखमे एकटा कमी आर देखएमे आएल जे श्रीनिवास लिखैत छथि- “किरण जीक प्रारंभिक कथा कथ्यक स्तरपर जतेक धारदार ओतेक सुन्दर शिल्प नहि।” मैथिली साहित्यक संग ई दुर्भाग्यपूर्ण विडंम्बना रहल जे मानसिक विलासिताकेँ स्पर्श करएबला कथाकारकेँ अइठाम शिल्पी मानल जाइत छन्हि। वास्तवमे कथाक दू गोट प्रमुख तत्व िथक- बिम्ब आ शिल्प। बिम्बक अर्थ कोनो घरक नेआें आ शिल्पक अर्थ ओकर चार, कोरो आ श्रंृगार- चून पालिश। जौं बिम्ब काल्पनिक तँ शिल्प कल्पनाशील अवश्य हएत। जखन कल्पने करबाक हएत तँ गामक खोपड़ीक कल्पना नै कऽ कऽ आगराक ताजमहलक कल्पना कएल जाए। किरणजी मात्र यएह अपराध कएने छथि जे आगराक ताज महलकेँ छोड़ि मिथिलाक गामक मचानपर अपन रचनोमे जीवंत रहलाह, तँए ‘शिल्पी’ नै छथि। साहित्यकार कल्पनाशील होइत छैक, मुदा जौं कखनो मोनकेँ धरातलपर आनि कऽ लिखैत अछि तँ यथार्थवोधक बिम्ब समाजक सत्यकेँ वृतिचित्रक रूपमे देखैत अछि। किरणजी संभवत: वएह श्रेणीक ययार्थवोधी कथाकार छथि।
पहिलुक कथा ‘करूणा’ करूणाक नैहरमे स्वच्छन्द जीवनसँ प्रारंभ होइत ओइठाम तक पहुँच जाइत अछि जतए धरि साधारण शिल्पी नै पहुँच सकैत छथि। यामिनीकान्त बाबूक सुकन्या करूणाक विवाह सुन्दरबाबू सँ भेल। नैहरक भगजोगिनी कर्त्तव्य पथपर भाटक संग सासुरमे आगाँ बढ़ैत छलि, वृद्ध पितामही सासु आ मातृ पितृ विहीन जाउत नरेन्द्रक संग....। तीन मासक भीतर अजिया सासुक देहावसान आ ओकर दू मास बाद श्वसन ज्वरसँ पतिक देहान्तक पश्चात करूणा टूटि गेलीह। प्राचीन आर्य संस्कृति जकरा जनभाषामे सनातन कहल जाइछ, रूढ़िवादिताक आवरणसँ अखन धरि ओझराएल अछि। जे लोक समाजक मुख्य धारासँ कात लागल छथि, ओ ऐ कथा कथित सनातन संस्कृतिक आधारपर संस्कार तँ करैत छथि, मुदा ओइमे ओझराएल नै। ऐ दृष्टिसँ समाजक पछातिक लोककेँ बेसी विचारवान मानल जाए। अगिला लोकमे बाहरी आडंवरकेँ मनवाक क्रममे किछु कुव्यवस्था उत्पन्न भऽ गेल। संभवत: ई कथा सनातनधर्मी ब्राह्मण परिवारकेँ धियानमे राखि कऽ लिखल गेल। भऽ सकैछ कथाकारक र्इ कल्पना हुअनि, मुदा ऐ प्रकारक घटना वास्तवमे एखन धरि होइत अछि जे सवर्ण परिवारक वाल विधवा सुकन्याकेँ सेहो पुनर्विवाह करबाक समाजमे मान्यता नै गेल, जइ समैमे ई कथा लिखल गेल ओइ समैमे स्थिति तँ आर दयनीय छल।
‘करूणा’ कथा विषम पिरस्थितिमे आगाँ बढ़ैत अछि। एकटा वालिका नरेन्द्रकेँ तकैत करूणा घर पहुँचलि। नरेन्द्र अपन मातृकमे छल। करूणा एकसरि छली। वालिका चकित होइत प्रश्न कएलनि, ‘एकसरि डऽर नहि लगैत अछि। अपन जीवनकेँ जीवन्त लहासक रूपमे करूणा वाजलि- ककर डऽर वास्तवमे भूत-परेत एकटा भावनात्मक रूपसँ शून्य प्रणीक लेल डरक साधन नै बनि सकैछ। की छन्हि जे चोर आओत? मुदा बालिका प्रश्न कएल जे जौं अपने उठा लिए? ऐ प्रकारक प्रश्नसँ करूणा स्तब्ध भऽ गेली। एकटा नारीक मर्यादा समाजक दृष्टिमे जे महत्व राखए, मुदा ओकरा लेल सर्वोपरि। समाजक उदाहरण यएह लेल जे ऐ समाजक नीच लोकसँ लऽ कऽ विचारवान वर्गक किछु लोक सेहो अवलाक चरित्र हननसँ वाज नै आएल अछि। करूणा भविष्यक डरसँ काँपि अपन सुन्नर रूपकेँ भयावह बनएबाक लेल उद्धत भऽ गेली। परिस्थिति सेहो संग देलकनि जे बच्चाबाबूक माथ परक चाम उज्जर देख करण पुछलनि तँ पता चललनि जे सल्फ्यूरिक एसिड अर्थात् तेजाप प्रयोगशालामे पड़ि गेल।
बच्चाबाबूकेँ अपन घरसँ विदा करैत देरी तखापर राखल स्ल्फ्यूरिक एसिड अपन मुँहपर ठाढ़ि करूणा रूपवतीसँ जीवित पिचाशक रूपमे आबि गेलीह?
आब प्रश्न उठैत अछि जे करूणाकेँ एना कएलासँ की भेटल? भेटबाक प्रश्न तँ नै मुदा हुनक चरित्रहरणक आशंका हुनका मोने समाप्त भऽ गेल। जौं एकटा मातृ-पितृ विहीन बालकक दायित्व नै रहतनि तँ आत्महत्या सेहो कऽ सकैत छलीह। यएह थिक देवी भक्तिक केन्द्र मिथिलामे देवीक दशा। नारी िवमर्शक एकरूपक यथार्थचित्रण किरणजी कएलनि। कनेक कमी जे कथाक प्रारम्भ सरल शब्दमे सेहो कएल जा सकैत छल मुदा साहित्यक पुरा रूपक शब्दमे कथाकेँ प्रवेश करा कऽ किरणजी ओइ विचारवान समीक्षकक दृष्टिमे अपन स्थान बनएलनि जनिक मान्यता छन्हि जे भाषा उच्च कोटिक हुअए, जकर अर्थ सभ मैथिल नै लगा सकथि ओ वास्तविक रचना थिक। भऽ सकैत अछि जे कथाकार ऐ प्रकारक शब्द सभसँ कथाक सहज रूपेँ कएने होथि, वा मूलत: कवि रहनिहार किरण अपन काव्यात्मक प्रवृतिकेँ नै झाँपि कविताक बिम्बकेँ कथाक रूप दऽ देने होथि। जौं ई कथा काव्य रहितए तँ मैथिली साहित्यक लेल विस्मयकारी क्षण होइतए जखन करूणा.... महाकाव्यक नायिका बनि मिथिलाक मानस पटलपर विचरण करितथि। दोसर जे कनेक नकारात्मक विन्दु भेटल ओ अछि करूणाक अपन आभा नष्ट करबाक दृष्टिकोण। यथार्थबोधी कथाकारकेँ अइठाम क्रांतिवादी दृष्टिकोण स्पष्ट करबाक चाहियनि, मुदा किरणजी सन सिद्धहस्त रचनाकारक सोच सेहो समाजमे क्रांति नै सोचि सकल।
हम सम मिथिलामे रहैत छी, एकटा उतर आधुनिक सोच की कहल जाए आधुनिक दृष्टिकोणसँ दूर मिथिला.... जइठाम एखनो विधवाकेँ पुनर्विवाह की कहल जाए कोनो आन कन्याक विवाह संस्कारक ऐहब नै बनाओल जाइत अछि। फ्रांसक राज्यक्रांति हुअए वा यूरोपक धर्म सुधार आन्दोलन सभमे साहित्यक अपन महत्व अछि, मुदा ई आर्यावर्त्त थिक अइठाम साहित्य मनोरंजन मात्रक साधन मानल जाइत अछि, प्रेरणाक स्रोत नै। वास्तविकता सेहो छैक जे साहित्यकारकेँ अपन लेखनीक दृष्टिकोणकेँ अपन जीवनमे सेहो जोड़ि देवाक चाही, नै तँ समाज मान्यता कोना देतनि वा ओ साहित्य प्रेरक कोना हएत? किरणजी करूणा सन दृष्टिकोण रखैत हेताह किएक तँ हुनकाे जन्म अही समाजमे तँए क्रांतिवादी नै बनि ‘करूणा’क नाश देखा देलनि। ओइ प्रकारक नाश जे जइसँ नीक मृत्यु। मुदा सम्यक सोचबला किरणजी केँ अइठाम कनेक क्रांतिवादी बनि करूणाक पुनर्विवाह देखएबाक चाहियनि। यथर्थादोषी साहित्यकारकेँ सेहो समाजमे विचार उत्पन्न करएबाक लेल क्रांतिवादी बनब साहित्यक लेल अनिवार्य नै तँ आडंवरकेँ समर्थन करएबला ऐ प्रकारक साहित्यकेँ पढ़निहार लोक दोष साहित्यकारेपर देत।
दोसर कथा ‘एहि चारि खूनक खोज केनिहार के?’ अर्थनीतिकेँ धियानमे राखि कऽ लिखल गेल। कथाक प्रारंभमे कथाकार ब्राह्मणवादी व्यवस्थापर कनेक कटाक्ष कएलनि, ‘पंडित जे कहथि से करी मुदा जे करथि से नहि करी’ अर्थात् अग्रसोची समाजक धर्मपालक जातिक कर्म आ कथनमे भिन्नता अछि। वास्तविकता सेहो अछि पंडित विद्याध्ययन आ नीति अध्ययनक आधारपर उचित वचन तँ अपन मुखसँ वजैत छथि, मुदा मात्र होसराक लेल अपन लेल नै।
एे कथामे सेहो एकटा सत्कर्मी परेमा अपन स्वाभिमानक संग जीवन तँ प्रांरभ कएलक मुदा सम्पतियासँ विवाहक वाद साधनहीन परेमाक स्वाभिमान परिस्थितिवश डगमगा गेल। अपन नेनाकेँ जीवित रखबाक लेल हलुआइक दोकानमे किछु भोजन सामग्री तकैत पकड़ल गेल। पुलिस अपन काज कएलक एकटा भोजन चोरि करबाक प्रयास करैबला चोरकेँ डकैत बना कऽ सातवर्ष कठोर कारावास दिआ देलक। न्यायालयमे परेमाकेँ न्याय नै भेटल किएक तँ ओकर गप्प सुनत के?
परेमा जहलसँ छूटल तँ अर्थहीन परिवारक सभ जन समाप्त......।
अर्थनीतिक ई कथा समाजक अंतिम व्यक्तिपर प्रारंभ भऽ ओकर अंतसँ समाप्त भेल। किरण जीक ई कथा यथार्थबोधी मानल जा सकैत अछि। अइमे क्रांतिक कोनो गुंजाइश नै किएक तँ शिक्षा आ भौतिक साधनसँ विहीन मानब सरकारी तंत्रक विरूद्धमे कोना आन्दोलन करए, वादमे परेमा कतए जाए किएक तँ ओ विक्षिप्त भऽ गेल।
‘काल ककरो छोड़त’ एकटा राजपरिवारक कथा थिक। महाराज दीर्घवाहु अपन मृत्युकालमे अपन राज्य आ अपन पाँच वर्षक वालक सुन्दर अपन छोट भाए वीरवाहुकेँ सौंपि ऐ संसारसँ विदा भेलनि। कालान्तरमे वीरवाहु अपने वास्तविक राजा कहएबाक लेल अपन भातिजकेँ मारि देलनि। ई दृश्य वीरवाहुक पुत्र शंकर देखलक आ पितृहन्ता बनि गेल। शंकरक स्त्री राधा दोसर पड़ोसी युवक रमेशसँ प्रेम करैत छलि, ओ सेहो ‘महाजनोयेन गत: स पंथा’क आधारपर शंकरक हत्या कऽ देलथिन। अंतमे कथाकार ई प्रश्न छोड़ि कथाक इतिश्री कएलनि- ‘काल की राधाकेँ छोड़तनि? वास्तवमे एकरा कथा नै मानल जाए ई थिक कथाकारक विराट जीवन दर्शन ओ शैक्षणिक योग्यताक एकटा चित्र। इतिहास साक्षी अछि धनलोलुपता ओ राजपदक आशमे कतेक शासक संबंधक मर्यादाकेँ िवसरि गेल छलथि। लोभ पापक कारण होइछ। लोभ माली अपन फूलवारीक फूलसँ सेहो करैत अछि, एकटा पति अपन पत्नीक सौन्दर्यसँ सेहो करैत अछि मुदा ओ िथक मर्यादापूर्ण अधिकारक लोभ। अमर्यादित ओ अवांछित लोभक परिस्थितिमे लोक अपने नाश करैत अछि। प्रलाप, समाजक चित्र, धर्मरत्नाकर, चनटा, जाति पाँतिक जाड़ू आदि कथा सेहो समाजक अग्रआसनपर बैसल लोकक समाजक अंतिम व्यक्तक प्रति दृष्टिकोणकेँ स्पष्ट करबैत अछि। ऐ प्रकारक कथा जइमे सम्पूर्ण समाजक स्थितिक चर्च हुअए ललित आ जगदीश प्रसाद मंडलकेँ छोड़ि किरण जकाँ केओ नै कएलक। मुदा सभटा कथा यथार्थचित्रण तँए श्रीनिवासजी हिनका शिल्पीक संज्ञा दइमे संकोच कएलनि। वास्तविकता अर्थात् इजोतसँ डर कल्पना अर्थात अन्हारसँ प्रेम मैथिली साहित्यक प्रवृति रहल छैक तँए किरणकेँ ओ स्थान नै भेटल जकर ओ अधिकारी छथि। ऐ संग्रहक सभसँ विलक्षण कथा थिक- मधुरमनि। अपन साहित्यक िकछु चर्चित कथामे एकर स्थान अछि। एकटा निम्नवर्गीय समाजक मुँहजोरि मुदा स्वस्थ आ कर्मशील नारी मधुरमनि अपन शरीरसँ असमर्थ पतिक प्रतिदायित्व रखैत अछि। मधुरमनिक कठोरवाणीसँ उद्विग्न भऽ ओकर पति मोचन घरसँ पड़ा गेल। मधुरमनि पोटि कऽ फेर ओकरा घरमे आनि लेलक। सतना माय जखन मोचनक आलोचना मधुरमनि लग करैत अछि तँ मधुरमनि सतना मायपर तीक्ष्ण शब्दवाण चला कऽ ओकरा चुप करा दैत अछि। ‘पिट्ठा पहलमान लऽ कऽ हम की करब जे भरि दिन डेङविते रहत।’ वास्तवमे सतना मायक शरीरसँ मजगूत पति खूब पिटाइ करैत छल। यएह थिक हमरा सबहक समाजक नारीक पतिक प्रति सिनेह ओ अपन पतिकेँ किछु कहि सकैत छथि, मुदा दोसर किए कहत? अइमे अधिकार आ सिनेह दुनू भेटैत अछि।
ऐ प्रकारे विहनि कथाक ऐ संग्रहकेँ युगान्तकारी तँ नै मानल जा सकैत अछि मुदा समाजक वास्तविक दशाक विवेचन आ तर्कपूर्ण शैलीसँ ई संग्रह अपन अलग स्थान रखैत अछि।
पोथीक नाअाें- कथा किरण
रचनाकार- डाॅ. कान्चीनाथ झा ‘किरण’
प्रकाशक- भाषा प्रकाषन पटना
वर्ष- 1988ईं.
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
१.बेचन ठाकुर- दूटा विहनि कथा २. किशन कारीगर- टाई माने रस्सी- एकटा हास्य कथा
१
बेचन ठाकुर
दूटा विहनि कथा
नोमीनेशन
रामपुर पंचायतमे मानटूनक नाम नवका सत्रमे सरकार दिससँ अत्यन्त पिछड़ी जातिक लेल महिला आरक्षणक तहत आरक्षित कऽ देल गेल। अइ आरक्षणसँ लाभ पबैक मादे अति प्रसन्न भऽ मानटून घरवाली रामबतीसँ पूछलक- “गै, हमर विचार अछि जे अइ बेर तँू मुखियामे ठाढ़ होइतें। ई मौकी नै छोड़ितें।”
रामबती खीसिया कऽ बाजलि- “र्इ बात बजैमे तोरा कनिको संकोच नै भेल।” हम आइ तक कोट-बेलौक नै गेलौं आ कोनो हाकिम-हुकुमसँ गप-सप्प नै केलौं। एत्ते तक जे कोनो बाहरी लोकक आगू मुँह नै उठौलौं। से जनानी जतऽ-ततऽ बौआइत! ई िकनो नै मानब।”
बेचारा मानटून गुम्म पड़ि गेल। फेर किछु कालक पछाति हिम्मत कऽ पुचकाइर कऽ कहलक- “तूँ ही कह, जखन सरकार अपना सभकेँ आगू बढ़ैक अधिकार देलक तँ ओइसँ फायदा किअए नै उठाबी। मुखियाक काज समाज सेवा छी। सौंसे पंचायत प्रतिष्ठा भेटतौ।”
ई बात सुनि बेचारी तत-मतमे पड़ि गेली। किछु काल पछाति बेचारी मुस्की दैत बाजलि- “तोहर कहल काटियो तँ नै सकै छी। चलऽ देखल जेतै, जे हेतै से हेतै। काल्हि नोमीनेशन कराए दए।”
छल-बल
मदनपुर पंचायतमे चुनावक सरगर्मी बड़ जोरपर छलै। मुस्की दैत मनोज बाजला- “मुनीलाल भाय, अपन समाजमे मुखिया पदक लेल अहीं जकाँ कर्मठ आ इमानदार लोकक खगता छै।”
अइपर खीसिया कऽ मुनीलाल बजला- “से किअए यौ? सभसँ बुरबक दीनेनाथ।” मनोज मुस्का देलनि आ बाजल- “खीसिया गेलौं भाय। सच्चो कहै छी। अपन पंचाइतमे अहाँसँ योग्य आर कियो लोक कहाँ छै। खाली गरीबेटा ने छी।”
मुनीलाल गिड़गिड़ा कऽ बजला- “भाय, अहीं ठाढ़ होउ। तन-मनसँ मदति करब। अहाँसँ बुजुर्ग अइ पंचायतमे आर के?”
मनोज मुसकियो देलनि आ बजला- “हमरा सभकेँ आरक्षण नै अछि तँए। नै तँ िनश्चिते ठाढ़ होइतौं। मुनीलाल भाय, अहाँकेँ ठाढ़ निश्चित हेबाक अछि। तन-मन धनसँ मदति करब।”
किछु सोचि कऽ मुनीलाल बजला- “भाय, अपने गामक मालिक छिऐ। अपनेक कहल हमरा मानए पड़त, जौं अहाँ सहाय छी।”
ओही पंचायतक पाँच सए पोलबला सतना गामक प्रत्याशी मनोजक खानगी दोस सोमन आ एकटा आन प्रत्याशी सुकन चुनावसँ एक दिन पहिने रातिमे चोरा कऽ भरि पंचायतमे ख्ूब पाइ बँटलनि। चुनावक पछाति परिणाम आएल। सोमनकेँ दू हजार भोंट भेटलनि, मुनीलालकेँ दू सए आ सुकनकेँ उन्नैस सए।
विहान भने पंचायत भवनपर आयोजित सभागारमे िनर्वाचित मुखिया सोमन प्रसन्न मने कहलनि- “धनि बाइस सए पोलबला चन्दनपुर गाम आ मनोज मालिक जे आइ मुखिया बनलौं।”
अपन वार्ड सदस्य मोहितसँ ई बात सुनि घरपर मुनीलालकेँ बोम पाड़ि कना कऽ बजा गेलै- “बिना छल-बलक एलेक्शन जीतनाइ असंभव।”
२
किशन कारीगर
टाई माने रस्सी ।
एकटा हास्य कथा ।
ओना त रस्सी जीवन मे बड्ड उपयोगी होइत छैक। गरीब लोक लेल त आओर बेसी टाट फरक बन्है स लके घर छारै माल जाल बन्है स ले के खोपड़ी बन्है तक। मुदा जखन इह रस्सी गाराक फॉस भए जायत अछि तखने लोक बुझहैत अछि रस्सीक महिमा। जेकर गारा फॅसैत अछि वैह बैझहैत अछि जे कि भाव पड़ैत छैक। आई एहने चक्करफॉस मे फॅसल अधमरू भेल रंजन बजलाह। हम पुछलियैन जे कहू टाई माने कथी वो बजलाह रस्सी।
एक दिन भिंसरे भिसंरे रंजन फोन केलैन किशन अहॉ के त जे ने से रहता है । हम ओंघाएले रही मोन त भेल जे खूम जोर स गारि परही मुदा ज्येष्ट भ्राता के गारि कोना परिहतौ तहि दुआरे कुशल छेमक गप भेलाक बाद रंजन फेर बजलाह हमरा कहिया से सासुर जाइ लेल मोन छटपटा रहा है आ अहॉ कोनो ओरियान ने नहि करता है। हम बजलहूॅ भैया अहा मंगरौना आउ ने सब ओरियान एक्के मिनट मे हो जाएगा। ई सुनि ओ हरबराएल बजलाह अच्छा किशन हम एक हप्ता बाद गाम आबि रहा है। हम कहलियैन ठिक छैक आ फोन राखि के नित क्रिया मे लागि गेलहू।
हमरे पितियौत भाए छथि रंजन पूणे विश्वविद्यालय स इंजीनियरिंग केने रहैथ। परदेश मे जनम आ ओतए प्रारंभिक शिक्षा स उच्च शिक्षा धरि पढ़लाह। एकदम शहरी ठाठ बाठ मैथिलक कोनो दरश नहि हुनका अंग्रेजी मराठी बेसी बजैत छलाह। ओना त हमरो जनम परदेश मे भेल मुदा गाम आबि मैथिली सीखि गेलहु। हमरा जतबाक स्नेह अपना माटि पानि स रंजन के ततबेक बेसी अलगाव एहि सॅ। हमर कक्का बच्चा बाबू के केंद्रिय विद्यालय मे प्राचार्य रहैथ तहि दुआरे परदेश मे धिया पूता के पढौलैन। ओ मैथिली बजैत जहि स रंजनो कने मने मैथिली बुझहैत बाजल त तेरहे बाइस होइत रहैन। बच्चा बाबू के केंद्रिय विद्यालय मे नोकरी भेलैन त कहियो घूरि के मंगरौना नहि एलाह। एबो कोना करितैथ ओ सभ पूर्णिया मे जगह जमीन किनी बसि गेल रहैथ। हुनका घियो पूतो के गाम घर सॅ कोनेा मतलब नहि एकदम अनचिनहार रहैथ ओ सभ। रंजन कोनो अमेरिकी कंपनी मे सॉफटवेयर इंजीनियर रहैथ तहि दुआरे हमरा कक्का के मोन गद गद । संयोग स हुनकर बियाह दरभंगा जिलाक मब्बी गाम मे भेल। लड़की शिक्षामित्र के नोकरी मे रहथिहिन आ हमरा भैयाक ससुर सेहो प्रखणड कृषि पदाधिकारी रहैथ। तहि दुआरे मोन माफिक लेबो देबो भेलैक। लड़की वला सेहो एहि कुटमैति स खूम प्रसन्न रहैथ तहि दुआरे चैनो उड़ल पर दस लाख गनने रहैथ मुदा बियाहक बाद जमाई के सासुर बजौताह से बिसैर गेल रहैथ। एम्हर रंजन सासुर जाइ लेल छटपरटाइत रहैथ मुदा गाम घरक भंाज भुज हुनका एकदम नहि बुझहल तहि दुआरे ओ हमरा डेनवाह बनौलैन।
ठीक सातम दिन सात बजे सांझ मे रंजन हमरा गाम मंगरौना अएलाह सूट बूट टाई पहिरने कियो हुनका चिनहैथ नहि। गामक कतेक लोक स पूछैत पूछैत ओ हमरा दरवज्जा पर अएलाह। एम्हर हम गाछि कात स धनरोपनी कए के आएल रहि कि हुनका देखैत मातर स्नेह बस भरि पाज के गारा मिलान केलौह मुदा रंजन रूष्ट होइत बजलाह अहा हमरा टाई मे मिट्टी लगा दिया आब हम सासुर कोना जाएगा। हुनका खिसियाअैत देखि हम बजलहु अहा चिन्ता किएक करता है हमरो लग टाई है ओहि स अहा के काम हो जाएगा। ई सुनि ओ खुशि स मोने मोन नाचए लगलाह जे टाई पहिर के जाएब त सासुर मे खूम मान दान होएत। कुशल छेमक गप भेलाक बाद दूनु गोठे हाथ मुह धो के बैसलहुॅ त माए हमर खाना परोसलीह। भोजन भात कए के राति मे विश्राम केलहु। दोसर दिन भिंसरे पहर फटफटीया पर बैसी क हम आ रंजन हुनकर सासुर मब्बी जाई लेल बिदा भेलहु। हम फटफटिया चलबै मे अपस्यात रहि मुदा रंजन टाई समहारै मे फिरिशान रहैथ। पछिया हबा खूम जोर स बहैत जहा बलुआहा बान्ह लक पहुचलहु की ठक्कन भेंट भए गेलाह आ रंजन के देखि बजलाह अहाक गारा महक रस्सी उधिया रहल अछि बान्हि लियअ नहि त उरिया जाएत। ई सुनि रंजन डरे टाई मे क्लीप लगा लेलैन आ किछू नहि बजलाह। ठक्कन हमरा पुछलैन यौ किशन इ अनठिया के छथि आ एतेक थाल खिचार मे कतए जा रहल छी। हम हुनका कहलियैन हिनका नहि चिन्हलियैन हमरे पूण्रिया वला पितिऔत भाए छथि। एखन हिनके सासुर मब्बी जा रहल छी। ठक्कन बजलाह से त ठीक मुदा कहू त गारा मे एतेक टा रस्सी बन्हबाक कोन काज ज कोनो खूरलूच्ची धिया पूता रस्सी बूझहि एकरा घिची देतै त लगले प्राण सेहो छुटि जेतैन। हम बजलहु यौ महराज इ टाई पहिरने छथि रस्सी नहि। ओ बजलाह धू जी महराज गाम घरक लोक त एहि टाई के रस्सीए बुझहत ने बेस जाउ सासुर अहू बुझिए जेबै जे टाई माने कथि हम बजलहु रस्सी।
ठीक 2 बजे दुपहर मे हम आ रंजन मब्बी पहुचलहु ओतए पहुचलाह पर आगत बात भेल मुदा सभ घुरि घुरि के हमरे दिस तकैत किएक त हम धोति कुर्ता पहिरने रहि कतेक के हम अनठिया लगियै किएक त पहिल बेर भैयाक सासुर मब्बी आएल रही। रंजनक बियाह मे हमर कक्का नहि बजौलैन त बियाह मे नहि आएल रहि। एकटा बुरहि दाए बजलीह इ के छेथहिन डेनवाह हम बजलहु सेह बुझियौअ। ताबैत मे रंजन के सारि नीलू अनिला सोन सभ गोटे हेंर बान्हि के हसि मजाक करै लेल एलीह। नीलू बजलीह डूल्हा की हाल चाल अछि त रंजन हसैत बजलाह हाल ठीक नहि है सौंसे देह मे खूम थाल लग गया। एतबाक मे अनिला टाई छुबि बजलीह यौ पाहुन इ कोन अंगरेजिया आंगि अछि। ओकरा हाथ मे माटि सेहो लागल रहै वैह कादो वला माटि टाई मे लागि गेलै। टाई मे माटि लागल देखि रंजन के मोन भिन्न भिना गेलैन आ तामसे अघोर भेल बजलाह हम अखने चलि जाएगा आब। नीलू बजलीह पाहुन अहा एतेक दिन बाद सासु अएलहु त अहा के आई रहैए परत। अहा नहि रहब त हम सौसे देह आ मुहे मे माटि लगा देगा। ई सुनि रंजन सकपक्का गेलाह हम चुपचाप सभठा गप सुनैत रही। खान पिअन भेलाक बाद राति मे ओतए रहलहु मुदा रंजन के आपिस पूर्णिया अबै के रहैन तहि दुआरे भिंसरे पहिर मब्बी स बिदा भेलहु। हम दलान पर सूतल रहि भिंसरे पहर मैदान दिस स आबि मुह हाथ धो के तैयार रहि। मुदा शहरी बाबू रंजन के नीन 7 बजे टूटलैन सेहो हम अंगना जा के हरबरौलियैन तखन उठलाह आ हरबड़ी मे ब्रश केलैन आ तकरा बाद दुनू गोटे जलखै कए बिदा भेलहु मेघौन सेहो लागल रहैक। रस्ता पेरा गुफ अनहार लगैत बरखा सेहो भेल रहैए थाल खिचार सेहो रहैए। सभ स बिदा लैत सासुर स बिदा भेले रही फटफटिया स्टार्ट केने रही रंजन बैसी गेलाह की ताबैत मे केम्हरो स रंजन के छोटकी सारि सोनम दौगल अएलीह यौ पाहुन अहा के एटाइची त छुटिए गेल। ओ बजैत आ दौगल अबैत रहै जहा गाड़ि लक पहुचल की धरफरी मे ओकर पाएर पिछैर गेलैए आ अछैर पिछैर के खसैए लगलै आ हरबरी मे टाई पकरा गेलैए। टाई ततेक जोर स घिचेलैए कि रंजन फटफटिया पर स धबाक दिस खसि परलाह ततेक जोर स पंजरा मे चोट लगलैन जे कुहैर उठलाह । एम्हर हमरा हसी स रहल ने गेल। रंजन कुहरैत बजलाह हमरा एतेक चोट लगा कि देह टूट गया आ अहॉ खाली हॅसने मे लगा है। अहा किछ करेगा की नहि। हम बजलहु करेगा त एक्के मिनट मे मुदा पहिले ई कहिए टाई माने कथि। रंजन कुहरैत बजलाह किशन अहा ठीके कहता था गाम घर मे टाई माने रस्सी।
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नवेंदु कुमार झा- रिपोर्ताज
१.अपन कूनबा बचबऽ लेल मैदान मे उतरलाह सुप्रीमो तीरक निषान पर अछि लालटेन।
छओ मासक मौनक बाद राष्ट्रीय जनता दलक अध्यक्ष लालू प्रसाद अपन दलक पदाधिकारी आ कार्यकर्ताक संग बैसक कऽ प्रदेष में सŸाारूढ़ नीतीष सरकारक विरूद्ध आंदोलन पर करबाक घोषणा कएलनि अछि। सŸाारूढ़ जदयू द्वारा राजदक सहयोगी लोक जनषक्ति पार्टी मे सेधमारी कएलाक बाद अपन दलक एकजूट करबाक लेल श्री प्रसाद क सक्रियता सँ प्रदेष राजनीतिक पारा चढ़बाक संकेत भेटि रहल अछि। दरअसल बिहार विधान परिषद् मे लोजपाक अस्तित्व समाप्त होएब आ बिहार विधान सभा मे लोजपाक अस्तित्व पर संकट के देखि लालू प्रसाद अपन कूनबा बचैबाक लेल डैमेज कंट्रोल अभियान प्रारंभ लऽ कएलनि मुदा हुनक एहि अभियान के हुनक विष्वसनीय दूटा सांसद डा0 रघुवंष प्रसाद सिंह आ जगदानंद हवा निकालि देलनि। दूनू सांसद एहि बैसक मे अनुपस्थित रहि ई संकेत देलनि जे दलक भीतर एखन सभ किछु ठीकठाक नहि अछि। जखन कि तेसर सांसद उमाषंकर सिंह एहि बैसक सूचना नहि होएबा बहाना बना दलक नेतृत्व क सोझा खुलल चुनौती देलनि अछि। लोकसभा चुनाव में राजदक खराब प्रदर्षनक बाद दलक कतेको वरिष्ठ नेताक दल छोड़बाक जे सिलसिला प्रारंभ भेल छल जे विधान सभा चुनाव सँ पहिने धरि चलैत रहल आ ई सिलसिला एखनो जारी अछि। हालहि मे लालूक विष्वसनीय बुझल जाए बाला दल महासचिव राम वचन राय आ प्रवक्ता शकील अहमद खानक राजद के छोड़बाक घटना सँ दलके नोकषान भेल अछि। एहि क्रम मे हुनक सहयोगी लोजपाक अस्तित्व पर आएल संकट के देखि स्थिति के भापि लालू प्रसाद अपन कूनबा के बचैबाक लेल अपन दिल्ली मोह के त्यागि बिहारक रूख कएलनि अछि।
श्राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद आ लोजपा अध्यक्ष राम विलास पासवानक दिल्ली प्रेम सँ दूनू दलक कार्यकर्ताक उत्साह ठंढा पड़ि गेल छल। एकर असरि विधान परिषद् मे लोजपाक जदयू मे विलयक रूप सोझा आएल। प्रदेष मे राजक कतको कार्यक्रम आ चर्चित फारबिसगंज काण्ड मे राजद सुप्रीमोक निष्क्रियता सँ सरकारक विरूद्ध राजदक हमला कमजोर पड़ल तऽ बियाडा जमीन आवंटन मामिला मे विपक्षक कड़गर रूखक बाद जदयू लोजपा आ झामुमो पर डोरा डालि विपक्षक हमलाबर धार के भोथर बना देलक अछि। राजदक वरिष्ठ नेता सभक मध्य बढ़ैत दूरी सँ दलक संकट गहिर भ्ऽ गेल अछि आ पटना मे भेल बैसक लालू प्रसाद स्वयं संकट मोचकक रूपम े उपस्थित भऽ दलके एकजूट करबाक प्रयास तेज कऽ देलनि अछि। केन्द्र मे मंत्री पदक कुर्सीक जोड़तोड़ मे लागल श्री प्रसाद आ श्री पासवानक स्थिति एखन ‘‘माया मिलि न राम ’’ बाला भऽ गेल अछि। दूनू नेता के कांग्रेस दिल्ली दरबार सँ रास्ता देखा देलक आ इम्हर प्रदेष मे दूनू दलक ऊपर संकटक मेघ घुमि रहल अछि। विधान परिषद् मे बग्ला उजरि गेल अछि तऽ विधानसभा मे जदयूक बिहारि सँ बंग्ला के बचैबाक प्रयास भऽ रहल अछि। दोसर दिस लालू प्रसाद अपन राजनीतिक कौषलक मटिया तेल सँ लालटेन क लौ के तेज करबाक प्रया समे मैदान मे उतरि गेल छथि।
श्राजदक आत्मचिंतन बैसक मे कार्यकर्ताक पैघ उपस्थितिक मध्य कतेको वरिष्ठ नेताक अनुपस्थिति सँ पहिल बेर राजद सुप्रीमो के खुलल चुनौती भेटल अछि। लालू प्रसादक परिवार पहिनहि छिरिया गेल अछि आ आब दल पर छिरियैबाक संकट आबि गेल अछि। लालू प्रसादक एहि सक्रियता सँ संभव अछि जे लालटेनक लौ किछु दिन धरि स्थिर रहए मुदा ई कखन मिझा जाएत से नहि कहल जा सकैत अछि। लालू प्रसाद आ राम विलास पासवानक नव दिल्ली मे कांग्रेस सँ दोस्ती बढ़ैबाक छोड़ मे प्रदेष ये दूनू दलक जड़ि हिलि गेल अछि। दूनू नेता अपन ढजनमनाएल घरके सम्हारऽ मे कतेक सफल भऽ सकताह से तऽ आबऽ बाला मे पता चलत।
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२.जदयूक वार सँ भोथर भेल विपक्षक धार
बिहार विधान सभा मे लोक जनषक्ति पार्टीक अस्तित्व पर संकट बढ़ि गेल अछि। पार्टीक तीनटा सदस्य मे सँ टूटा सदस्य प्रमोद कुमार सिंह आ नौषाद आलम बिहार विधान सभाक अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी के चिट्ठी लिखि पार्टीक जदयू मे विलयक सूचना देलनि अछि। हालांकि नौषाद आलम पार्टी अध्यक्ष राम विलास पासवान सँ गपषप कएलाक बाद लोजपा मे अपन आस्था व्यक्त करैत विलयक अपन सूचना आपस लऽ लोजपा केऽ राहत देलनि अछि। विधान सभा अध्यक्ष एखन विदेषक यात्रा पर छथि। तेँ एहि पर एखन धरि कोनो निर्णय नहि भेल अछि मुदा राजनीतिक क्षेत्र मे चलि रहल चर्चाक अनुसार एकर संभावना एखनो बनल अछि जे विधानसभाध्यक्षक आपस अएलाक बाद विधान परिषद जका विधान सभा मे सेहो लोजपा क बंग्ला उजरि सकैत अछि। चर्चा तऽ इहो अछि जे आबऽ बाला समय मे राजदक संकट सेहो बढ़ि सकैत अछि। एकर संकेत सेहो भेटि रहल अछि। पछिला दिन नव दिल्ली मे बाबा रामदेव पर भेल पुलिसिया कार्रवाई पर राजद सुप्रीमो लालू प्रसादक स्टैण्डक विरोध मे राजदक विधान पार्षद नवल किषोर यादवक बयान एहि बाद क संकेत अछि जे दलक भीतर फुलि रहल। विद्रोहक बैलून कखनो फूटि सकैत अछि।
बियाडा जमीन आवंटन मामिला मे विपक्षक एकजूटताक बाद सक्रिय भेल जदयू नेतृत्व विपक्षक हवा निकालबाक जे रणनीति बनौलक ओकर परिणाम तत्काल सोझा आएल अछि। लोजपाक एकटा चक्का पम्चर (विधान परिषद् सँ सफाया) आ दोसर चक्काक हवा (विधानसभा मे संकट) निकलि गेल अछि जे कखनो पम्चर भऽ सकैत अछि तऽ राजदक लालटेन टिमटिमा रहल अछि। जदयूक विपक्षक सर्जरीक अभियान मे ज्यों कांग्रेसक सेहो ऑपरेषन भऽ गेल तऽ कोनो आष्चर्य नहि होएत।
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३.सरकारक राष्ट्रीय विरूद्ध आंदोलन करत राजद
प्रदेष मे राष्ट्रीय जनता दलक अस्तित्व बनाएल रखबाक लेल राजद अपन संगठन के मजगूत करबा अभियान मे लागि गेल अछि गोटेक छओ मासक मौनक बाद अपन चुप्पी तोड़ैत राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद नीतीष सरकारक विरूद्ध आंदोलनक कएलनि अछि। राजद एहि क्रम मे लोक नायक जय प्रकाषक जयंतीक अवसर पर 11 अक्टूबर के पटना मार्चक घोषणा कएलक अछि। एहि सँ पहिने 1 सँ 30 सितम्बर धरि सभ जिला आ प्रमंडल मुख्यालय मे कार्यकर्ता सम्मेलन होएत जाहि मे लालू प्रसाद सेहो उपस्थित रहताह। 1 अक्टूबर मास मे पार्टीक कार्यकर्ताक प्रषिक्षण षिविर बोध गया मे आयोजित कएल जाएत आ नवम्बर-दिसम्बर मास मे सभ प्रखण्ड मुख्यालय मे दू दिवसीय कार्यकर्ता षिविर आयोजित करबाक निर्णय सेहो लेल गेल अछि।
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४.डेयरी उद्योग मे रूचि देखौलक इंडियन पोटाष लिमिटड
इंडियन पोटाष लिमिटेड प्रदेष मे डेयरी उद्योग लगैबाक प्रति रूचि देखौलक अछि। कम्पनीक अध्यक्ष गोविंद नैयर मुख्यमंत्री नीतीष कुमार सँ भेट कऽ कम्पनी भावी योजना जनतब देलनि। श्री नैयर मुख्यमंत्री भेटक क्रम मे मुजफ्फरपुरक मोतीपुर चीनी मिलक पुर्न संरचना आ विस्तार क जनतब दैत जनौलनि जे एहि मिल मे बिजलीक सह उत्पादन आ बाटलिंगक संग डिस्टलरी प्लांट लगाओल जाएत। एहि पर 350 करोड़ टाकाक निवेष होएत। कम्पनी मुजफ्फरपुर मे अपन कारखानाक एकटा ईकाई केऽ सेहो पुनर्जीवित कएलक अछि जतए प्रतिदिन सय टन सिंगल सुपर फास्पेटक उत्पादन कएल जा रहल अछि। श्री नैयर भेटक दरमियान बिहार मे कम्पनीक डेयरी उद्योग लगैबाक प्रति सेहो रूचि देखौलनि।
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बिपिन झा
[एहि लेख केर लेखक बिपिन कुमार झा (Senior Research Fellow), IIT मुम्बई मे संगणकीय भाषाविज्ञान (संस्कृत) क्षेत्र मे शोध (Ph. D.) कय रहल छथि। मैथिली वर्डनेट समाजहितार्थ वैयक्तिक रूप सँ शुरू कयल गेल एकटा कार्य छन्हि जाहि मे समस्त मैथिलीप्रेमी केर सहयोग अपेक्षित अछि। प्रस्तुत लेख केर उद्देश्य अछि एक जनवरी २०१० अंक मे चर्चा कयल गेल मैथिली शब्द तन्त्र केर दिशा मे की प्रगति भेल एकर जानकारी देब आओर एहि कार्य के कोना आगू बढायल जाय एहि सन्दर्भ मेचर्चा करब।]