विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

नव-नियोजित शिक्षिका आओर शिक्षक: मिथिला मे बदलैत स्त्री आ पुरुख केर संबंध-जाल

शांतिलक्ष्मी चौधरी · 2011-09-15 · अंक 90

नव-नियोजित शिक्षिका आओर शिक्षक - मिथिला मे बदलैत स्त्री आ पुरुख केर संबंध-जाल
युनेस्को आ केन्द्र सरकार के सहयोग सँ बिहार राज्य मे चलायल जा रहल सर्वशिक्षा अभियान केर तहत नीतिश सरकार द्वारा शिक्षक नियोजन मे महिलाक लेल पचास प्रतिशत आरक्षणक बाद नारी सशक्तीकरण केर लक्ष्य पर ओकर नीक असर धरातल पर देखल जा सकैत छैक. आइ दूई-चारि साल सँ सुपौल आओर सहरसा शहर केर टेम्पू वा मेक्सी स्टैंड पर आठ सँ साढ़े नौ बजे धैरक बीच बेसी नवतुरीया आ किछु प्रोढ़ महिला लोकनि पर्स लटकौने, अपना केँ एकटा सुभ्यत शिक्षिकाक ‘लूक’ मे स्कूल पकड़वाक लेल अस्त-व्यस्त भेट जाइत छथि. आँखिक देखल तँ नहि अछि मुदा अंदाज करै छी जे कि मिथिला अंचलक कोनो आन शहर वा एकर कोनो पैघ गाम केर स्टैंडक स्थिति सेहो एकरा सँ भिन्न नहि हेतैक. शुरूआति मे तँ ई सभ शिक्षिका लोकनि अपन अपन वर, दिअर, भाइ, पिता, चाचा वा अपन कोनो निकटतम संबंधीक सँग पाछु लागल ओहिना लजैल-धखैल अपन गनतव्य स्कूल दिस मुँहयाल चलि जायल करैत छलिह. मुदा आइ स्थिति बदललैक. एक तँ हिनका सभ मे आब गाम-घर सँ असगर बहरैवाक आत्मविश्वास बढ़लैक आ तेँ हिनका सभक लजैल, धकैल आ डरैल चालि-ढालि मे सेहो परिवर्तन एलैक. दोसर जे एही शिक्षिका-वर्ग मध्य जाति-धरम सँ ऊपर उठि कय सहकर्मी संग बहिनपाक नव संबंधक विस्तार भेला उपरान्त घर सँ स्कूलक बीचक हिनकर वाट सेहो आब निरस नहि रहलैक. बहिनपाक ई संबंध बढ़ला सँ पहिने जे मैथिल स्त्रीगण मे स्व-गाम, सम-जाति, वा स्व-धरम केर पुरान सूत मे बुनल अपनत्वक जटिल जाल देखल जाइत रहैक, तकर गुत्थी मे फेर सँ, एकटा अलग नवका सूत जकाँ सहकर्मी बहिनपाक अपनत्व-संबंध जाल सेहो बेधल गेलैक. आई शहर वा गाम केर एहि स्टैंड पर ई सभ शिक्षिका बहिनपाक मध्य मुस्कियावैत वा हाथ हिलवैत अभिवादन, एक-दोसर लेल जगह राखैक व्यवहार, वा एक दोसरक लेल भाड़ा देवाक जिद्द भरल आग्रह, केर घटना आम रूपे देखल जाइत छैक, जकर की पहिने मिथिलाक गाम-शहर मे अभाव देखल जाइत रहैक. आब जेना लागैत छैक जे घर सँ बाहरो मैथिल स्त्रीगणक उपस्थिती छैक. टेम्पु आ मेक्सी वाला जे निछछ पुरूखे होइत अछि सेहो प्रायः एहि शिक्षिका लोकनि केँ आब नाम, मुहल्ला आ स्कुल सँ चिन्हैत छथिन. एहि पुरूखक लेल ’ऑफ़िस ऑवर’क ई समय सबसे बेसी व्यस्तम, चुटकी भरल, आ मधुरतम होवय लागल छैक जकर चर्चा मास्टरनी वर्गक लोक करैत रहैत छथि. मुदा आई घर सँ बाहर सड़क पर एहि मे सँ किओ महिला एसकर नहि छथि बल्कि हुनका संग हिनक एकटा सम्पूर्ण वर्ग अछि आ संजोगे सभ गोटय मास्टरीये पेशाधारी. तेँ हिनका सभ के आइ सड़क पर निधोख निकलवा मे आत्मविश्वास आ सुरक्षा-भाव बेसी छैन्हि.
सँबंधक ई नवका जालक ताना-बाना खाली महिला महिलाक बीच पसरलैक अछि सेहो बात नहि छैक. एकर पसार महिला आ पुरूखक मध्य सेहो भेलैक. अपन वर, दिअर, भाइ, पिता, चाचा वा अपन कोनो निकटतम संबंधीक उपस्थिति सँ स्वतंत्र भेला सँ एहि नवतूरिया शिक्षिका लोकनिक लाज-धाक सेहो टुटलैक. ताहि सँ मैथिल समाज मे परस्त्री आ परपुरूख वर्ग केर बीचक अनेर दूरी राखय वाला जे पुरानपंथी बन्हन रहैक सेहो ढ़ील होइत बुझाइत छैक. एके विभागक कर्मी होवाक चलिते शिक्षा विभागक कोनो नव वा प्रस्तावित नियम, शिक्षा अधिकारिक औचक निरीक्षण आ तकर वादक घटनाक्रम, वा एक-दोसरक स्कूलक रोचक घटना मे दिलचस्पी, एहि स्त्री आ पुरूख शिक्षका-शिक्षक केँ आपसी संबंधक जाल केँ पसारै मे महत्वपुर्ण कारक बनलैक. एक तँ मिथिला संस्कृति मे नारी केँ उचित सम्मान देवाक विचार आओर दोसर केर माय-बहीन केँ अपन माय-बहिन बुझबाक पुरातनी व्यवहार पुरूख वर्ग केँ टेम्पू/मैक्सी पर महिला लेल सीट छोड़वाक लेल आ महिला वर्ग केँ आभार करै लेल बरवेश रहैक. ओतही दोसर दिस, बिपरीत लिंगक प्रति स्वाभाविक मानवीय आकर्षन किछु रसगर शिक्षक लोकनि केँ महिला लोकनि केँ चहटगर गप्प-सप, किस्सा-पिहानी, चुटकुला-मनोरंजन सुना क’ वा कोनो आन तरहक सहयोग क’ क अपना दिस आकर्षित करवाक अवसर आनैत रहैत छैक. खास कय कोशी दियरा प्रदेश केर अनेक पंचायतक विद्यालय मे काज केनिहार शिक्षका/शिक्षक सभ जखन बलुआहा, महिषी, मैना आदि कोशी घाट वाट टपैय जाइत छथि तखन नाह पर चढवा काल जनि-जाति केँ पुरूख लोकनि केर सहयोगक बेसी जरुरति होइत छन्हि. जेना कि पानि मे ठार भय नाह पकड़नाय, नाह पर स्त्रीगण केँ बैसैक जगह देनाइ, आ सबसे बेसी महिला वृन्दक संग सहानुभुति आ सभ्यताक संग व्यवहार, जनि-जाति वर्ग के प्रभावित करवाक लेल बड्ड महत्वपूर्ण होइत छैक. जे अन्ततः एहि नव नियुक्त शिक्षक- शिक्षिकाक बीच मित्रताक संबंध केँ गाढ़ बना रहल छैक.
मानल जाइत अछि जे नवनियुक्त पखंड आ पंचायत शिक्षकगण मे बेसी गोटय समृद्ध घर के छथि. एहि लोकनि मे नौकरी सँ पहिने बेरोजगारी तँ छल मुदा हुनका सभ केँ खाइ-पिवाक वा ऐस-मोज करवा केर साधनक पहिनो कमी नय छल. गाम घर मे रहनिहार एहन लोकनि केँ जखन गामे-घरक आस-पास केर स्कूल मे नौकरी भेट गेलन्हि तँ ई बुझु जे हिनकर भाग्य फ़ुजि गेलन्हि. एक तँ घर सँ खाइते पीते रहथि, दोसर आब ई सभ अपन बूढ़ माय बाप केँ देख रेख केर अतिरिक्त अपन जमीन जथा केँ बटेदारी लगा केँ ओकर देख-रेख सेहो करै छथि, आ तेसर जे दरमाहा मे जे किछ पाँच छौ हजार महिना पाइ-कौड़ी होइत छनि ओ सभ बैंक खाता मे अक्षैत राखल रहैत छन्हि. ई सभ मास्टर साहैब लोकनि एकहक टा के मोटर-साईकिल ल’ लेने छथि आ अपन योवनक मस्ती मे जेना पहिया लगा लेने छथि. नाह मल्लाह वाला रस्ता मे यदपि तरदूत छैक मुदा एहि तरदूतक उपरान्तो गाड़ी रहला सँ मास्टर साहेव लोकनि केँ ई लाभ छन्हि जे कोशी दियरा प्रदेश सनक अबूहो जगह पर समय पर पहुँच जाइत छथि आओर दुर्गम प्रदेशक बच्चा लोकनि केँ दू अक्षरक बोध दैत देस निर्माण मे सहभागी बनल छथि. तखन कोनो मास्टर साहेबजी केँ जँ कहिओ साइत-संयोगें मनपसंद मास्टरनी साहेब केँ अपन गाड़ी पर बैसा केँ हुनका स्कुल तक छोड़वाक अवसर भेट जाइत छनि तेँ ओ, हमर एकटा संबंधक दियर मास्टर साहेबक शब्द मे, अपन जीवनक बड्ड अनमोल आ भावुक समय होइत छन्हि. हिनका शब्द मे, ओहि मे काम-वासनाक बोध तँ बहुतो कम छैक परंच ओही स बेशी एकटा महिला केँ सहयोग क’ क’ हुनका इम्प्रेस करैक आत्माभिमान केर मनोबोध बेसी प्रबल छैक. महिला पुरूखक मध्य मनोभावनात्मक संबंधक ई विस्तार वास्तव मे हिनका सभक मानसिकता मे छुपल प्रेम संबंध आ प्रेम विवाह केर संभावना आ सामर्थ्य केँ सेहो परिलक्षित करैत छैक.
अपन दिअर मास्टर साहेबक गप्प सुनि एकटा गप्प मोन मे आबैत अछि. मिथिलाक गाम-घर मे जँ श्रमिक वर्गक जनि-जाति केँ छोरि देल जाइ तँ कोनो भी जाति, धरमक कनियो टा सुभ्यस्त परिवार मे नवतूरे सँ स्त्रीगण केँ अँगना सँ बहरेवाक प्रचलन कम भ’ जाइत अछि आ ई व्यवहार ता बुढ़ापा चलैत रहैत अछि. हाँ, शहर मे ओ जे किछु करै छथि ओतय हुनका पर सामाजिक अंकुश कम होइत छन्हि. मुदा जा धरि ओ गाम घरक छहरदेवाली मे रहैत छथि ता धरि स्त्रीगण केँ अपना व्यवहार मे अपन यौन सदाचार आ परपुरुष सँ दुरी देखवैत रहय पड़ैत छैक. एकर अनदेखी भेला सँ समस्त पुरखा आ खानदान के नाक कटय लगैत छैक. तेँ गाम-घरक परिसीमा मे एखनहुँ प्रेम वा प्रेम विवाहक संभावना नगण्य रहैत छैक. मैथिल समाज मे प्रेम विवाह पर ई रोक खाली अपन स्त्रीगणेक आचरण पर अंकुस राखि नहि करैत अछि बल्कि अपन पुरूख पात्र द्वारा कोनो महिलाक संग कयल गेल छेड़खानी, वदतमीजी, वा घरढ़ुक्की केँ कुकर्मक श्रेणीक बुझैत छथि. पुरूखो पात्र द्वारा कयल गेल कोनो एहन अपराध समस्त पुरखा आ खानदानक पाग नीचा गिरावैत बुझल जाइत छैक. खास क क मैथिल ब्राह्मण आ करण कायस्थ समाज मे जा धरि पाँजि व्यवस्था प्रचलन मे रहलैक ता धरि तँ पुरुख पात्रक एहन सभ यौन अपराध समुचा खानदान केर पाँजि के पतीत करेवा मे महत्वपुर्ण रहलैक. मुदा पाँजि व्यवस्था कमजोर भेलाक बाद मैथिल समाज अपन पुरूख वर्गक एहन व्यवहार पर तँ बहुत ढ़ील द देल बुझाइत छथि मुदा अपन स्त्रीगणक सदाचारक व्यवहार पर बेसी दृढ़ आ शंकालु रहि गेलखिन. स्त्री आ पुरूख संग असमानताक ई व्यवहार केर चलितवे पुरूख लोकनि तँ समय अनुकूल आगु बढ़तै चलि गेलाह मुदा स्त्रीगण समय केर संग डेग नहि बढ़ा सकलीह. आइ जखन मास्टरी पेशा मे मैथिल स्त्रीगण केँ आरक्षण द क व्यापक संख्या मे गाम-घरक महिला वर्ग केँ घर सँ बाहर निकलवाक अवसर भेटलैक तँ हिनका लोकनि केर नीजी जीवन सेहो सर-संबंधीक पुरूख पात्र केर तीछ्ण नजरि सँ कनेकटा दूर भेलैक. जतय ओ पुरूख वर्गक संग बैस कय अन्य आधुनिक समाज जकाँ प्रेम, प्रेम विवाह, अन्तर्जातिय विवाह, पुरूखक शोषण, स्त्रीक दोयम दर्जा, आदि विषय पर खुलि कय बात कय सकैत छथि. एकर स्वीकृति हुनका पहिने घर-आँगन केर छहरदेवालीक अंदर नहिये केर बराबर छल. हमरा विचारे जे एतय ई ध्यान राखव जरूरी कि प्रखण्ड/पंचायत शिक्षिका मे बेसीतर वोएह महिला छथि जे वेसी काल गामे घर मे रहलीह आ आइयो तक गाम घरक सामाजिक जीवन सँ समायोजित भ’ रहल छथि. दोसर दिस स्त्री-पुरूखक भावनात्मक, कल्पनात्मक आ दैहिक संबंध केर अनुभवहीन युवक-पुरूख पात्र छथि जे मैथिल समाज मे स्त्री पर एहेन अंकुशक कारण आइ धरि अपन माय-बहिन, भगिनी-भतीजी, वा अन्य कोनो निकट संबंधी सँ वेसी दुर केर एहने अनुभवहीनता वाली स्त्रीगणक संपर्क मे नहि एलाह. एहन युवक युवतीक मन मे भावनात्मक आ कल्पनात्मक प्रेम केर ’इड’ दबि केँ रहि गेलैक. स्त्रीगण पर तँ बहुत बेसी सामाजिक दबाब रहलैक. मुदा पुरूख पात्र मे एहन लोक बेसी काल अपन विपरित लिंगी आकर्षन केर फ़्रसट्रेशन केँ कोनो असगरूआ पकड़ैल स्त्रीगण पर अस्लील फ़ब्ती कसि कसि क’ वितेलाह. तखन एहने वा कोनो नीको सदाचारी आ भावुक युवक मास्टर साहेव के आइ जखन कोनो मनपसंद मास्टरनी सँ सानिध्य भेटैत छैक, हुनका इम्प्रेस करैक मोका भेटैत छैक, हुनका सँग भावनात्मक लगावक गप्प होइत छैक, तँ हुनका सभ गोटय लेल ई क्षण अनमोल आ भावुक जरूर बुझेतैन्हि जाहि मे काम-वासनाक बोध कम छैक आ परस्त्री केँ सहयोग क’ हुनका इम्प्रेस करवाक आत्माभिमानक मनोबोध बेसी छैक. एक अर्थे ई मैथिल समाज लेल शुभक सूचक छियैक. अभिवावक गण ई बुझथु सँ पुरूष गण स्त्रीगणक प्रति हरदम आक्रमके नहि होइत छैक. नीक भवना, परस्त्रीक प्रति आदर भाव, स्त्रीक सहयोग केर मनोवृति सेहो पुरूष मानसिकताक एकटा अंश छियैक.
शिक्षक नियोजनक बाद शिक्षक आ शिक्षिकाक मध्य वैवाहिक संबंधक कैकटा उदाहरण हमहूँ देखलियैक. एहि मे सँ दूइ टा उदाहरण "Love Cum Arrange" विवाहक आ शेष सभटा पुर्ण रूपेन "Arrange" विवाहक छलैक. "Love Cum Arrange" विवाहक हमर मतलव अछि जे, विवाहक एहि प्रक्रिया मे सबसे पहिने दूई हृदयक मध्य प्रेम भेलैक आ तखन माता-पिता वियाहक तय-तपेसिया केलन्हि. जखन की "Arrange" विवाह मे माता-पिता ही परंपरागत ढ़ंग सँ विवाह तय केलखिन जाहि मे नवदम्पत्तिक कोनो महत्वपुर्ण भुमिका नय भेलैक. "Love marriage" अर्थात माता-पिताक बिना कोनो महत्वपूर्ण योगदान वाला प्रेमीगणक विवाह जँ कतहुँ भेलो हेतैक तँ ओ हमरा नजरि मे नहि छैक. उपर्युक्त दूनू तरहक वियाह मे हम एकटा नव गप्प ई देखलिये जे अधिकांश कथाक उत्थान मे पहिने लड़के वाला लड़की वालाक ओहि ठाम गुप्त रूप सँ संबंधक प्रस्ताव पठेलखिन. जखन लड़की वाला तैयार भ गेलाह तखन लड़की वाला अपना शर्त पर अन्य बातक निराकरण करवे मे सफल रहलाह. हमर कहैक मतलब ई जे शिक्षिकाक नौकरी भेटलाक बाद नौकरी-पेशा स्त्रीगणक सामाजिक स्थिती मे बड्ड बदलाव एलैक. एक दिस जतय ओकर आर्थिक आ सामाजिक महत्व वरक घर आ नैहरक घर मे समान्य रूप स बुझल गेलैक ओतही ओकर सामाजिक स्वतंत्रता, सामाजिक संबंध, आ सामाजिक सम्मान केँ सेहो बृद्धितर केलकैक.
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Suggested citation: शांतिलक्ष्मी चौधरी. “नव-नियोजित शिक्षिका आओर शिक्षक: मिथिला मे बदलैत स्त्री आ पुरुख केर संबंध-जाल.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 90, 2011-09-15. https://www.videha.co.in/research/2011/90/नव-नियोजित-शिक्षिका-आओर-शिक्षक-मिथिला-मे-बदलैत-स्त्री-आ-पुरु-2d7992da4c.htm

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