चिरबिर करैत उडि रहल चिडै
बुंद–बुंद टपकैत पानिसँ प्यासल पंक्षीकँे प्यास नहि बुझि सकैत अछि । हमरो तहिना भेल अछि । बहुत दिनसँ मैथिली किताब सभ पढबाक प्यास हमरा छल आ एखनो अछि मुदा बहुत कम किताब पढि पौने छी । ताहिसँ सुजीत कुमार झाक लिखित चिड़ै कथा संग्रहसँ मात्र सेहो हमर प्यास नहि बुझि सकैत अछि ।
मुदा पानिक ई ११ टा बुंद हमर करेजकेँ ठण्डक नहि द सकल लेकिन एकटा बात तऽ अवश्य भेल अछि कि एहि पानिक बुंदसँ हमर जीव आ कण्ठमे ठण्डक अवश्य प्राप्त भेल अछि । मैथिली साहित्यकँे कखरा तक नहि जानएवाला व्यक्ति ककरो कथा संग्रहक बारेमे किछु समीक्षा, समालोचना आ टिप्पणी कि करताह । मुदा सुजीत जी हमर मित्र भेलाक कारणे आ कथा संग्रह चिडैÞ कँे बारेमे अपन विचार लिख देबाक लेल कहलाक कारणे अहि कथा संग्रहक बारेमे हम किछु प्रस्तुत करबाक चेष्टा कऽ रहल छी ।
मैथिली भाषामे सुजीतक ई प्रथम कृति चिड़ै कथा संग्रह हमरा बड निक लागल । एकर मुख्य पृष्ठ आर्कषक अछि आ किताबक बाहर आ भितरकँे प्रिन्ट सेहो स्पष्ट अछि । ७८ पृष्ठमे समेटल गेल ११ टा कथाकेँ संग्रह अलमी पाठक एकहि बैठानमे पढि सकैत अछि तऽ बेफुसर्दी लोकसभ सेहो ११ बैठानमे तऽ अवश्य पढि लेताह । ताहि दृष्टि सँ सेहो निकेँ कह पड़त नहि बेसी पैघ आ नहि छोट ।
सुजीतक कथा संग्रह चिडैÞ कँे ११ टा कथामे सँ ९ टा कथाकँे प्रमुख पात्र महिला छथि । जाहिमे हमरा अहाँक समाजमे महिलाकँे विभिन्न चरित्र आ रुपकँे चर्चा कायल गेल अछि ।
महिलावादी
पहिल कथा “एकटा अधिकार”मे विमान दुर्घटना सँ सुरुवात कऽ एहिमे मृत भेल लोकसभकँे खोजबाक उपक्रमकेँ वर्णन करैत एकटा विवाहित महिला सँ एकटा नवयुवककेँ प्रेमक बारेमे जिज्ञासा आ उत्सुकता सँ भड़ल बातचीतकेँ प्रस्तुत कायल गेल अछि ।
जाहिमे महिलाक पतिसंग ओ अपरिचित युवक अपन प्रेमक बारेमे बखान करैत अछि आ ओकर प्रेमकँे देखि ओ महिलाक पति दुर्घटनामे मृत भेल अपन पत्नीकेँ दाहसंस्कारक जिम्मा ओहि नवयुवक प्रेमीकेँ दऽ दैत अछि ।
अहि कथामे महिलाक बारेमे मात्रे वार्तालाप भेलाक कारणे एकटा मृत महिला एकर प्रमुख भऽ गेली अछि । दोसर कथा “धधकैत आगि आ फुटैत कन्जोरि” मे सेहो एकटा नवयुवती बलत्कारक अनुभव पएबाक लेल कऽ रहल विभिन्न प्रयासक बारेमे लिखल गेल अछि तऽ तेसर कथा “भौजी”मे नन्द आ विधवा भौजीकेँ एकहिटा युवकसंगक प्रेम प्रसंगक बारेमे चर्चा कायल गेल अछि तऽ चारिम कथा “चिडैÞ” मे दू टा महिला पत्नी आ प्रेमिकाक बारेमे केन्द्रित अछि । अपन पत्नीसँ असन्तुष्ट एकटा पुरुष कोना दोसर महिलाप्रति आर्कषित होइत अछि आ महिलाकेँ कोन रुपमे उपयोग करैत छथि ताहिकँे वर्णन अछि ।
पाँचम कथा “प्रियन्का” मे एकटा एहन बचियाकँे बारेमे चर्चा कायल गेल अछि जे जीवनमे किछु विशेष करबाक लेल गामसँ भागि शहर जाइत छथि ओतए ओ अपन उद्देश्य प्राप्त करितो सभक खेलौना भऽ कऽ रहि जाइत छथि । ताहि प्रकारे सातम कथा “वंश” मे सेहो एकटा एहन बचियाकँे चर्चा अछि जे डाक्टर बनि अपन माई बाबुकेँ नाम मात्रे नहि रोशन करैत छथि कि लडकीसभक बारेमे समाजमे व्याप्त गलत धारणाकँे सेहो तोड़ि दैत अछि ।
आठम कथा “बाबाजी” मे हमरा अहाँक समाजमे साउस ससुरके कोन प्रकारे पुतहुसभ दुख दैत अछि ताहिक वर्णन कायल गेल अछि । तहिना दशम कथा “ढोल” मे सेहो एकटा नवयुवतीकँे विवाहक बाद पुरुषकँे पत्नीक रुपमे नहि भऽ ढोलकँे रुपमे कोना भऽ जाइत अछि ताहि कँे देखाओल गेल अछि । तऽ अन्तिम कथा “शुन्यताक प्रवेश” मे सेहो एकटा महिला जे ककरो माइ छथि तऽ ककरो पत्नी ओकर पीडा देखाओल गेल अछि ।
एहि प्रकारे देखल जाइ तऽ ११ टा कथामे सँ ९ टा कथाक प्रमुख पात्र महिला छथि । ताहिसँ सुजीतक ई कथा संग्रह महिलावादी कथा संग्रहके रुपमे चित्रित कायल जा सकैत अछि ।
दोसर दिस सातम कथा वर्खीक भोजमे भिखमंगोसं बेसी दुर्दशा आ आर्थिक दरिद्रता मध्यम वर्गीय परिवारके व्यक्तिसभमे रहल बातके बहुत चतुराईपूर्ण ढंगसं प्रस्तुत कायल गेल अछि त ९ अम् कथा “बनैत बिगरैत” मे हमरा अहांक समाजमे भइयारीक अंश आ पुर्खाक सम्पति पर सन्तान सभक कुदृष्टिक बारेमे चर्चा अछि । ताहि सं महिलावादी कथा संग्रह भेलाक बावजूदो अहि कथामे समाजक जनजीवनके सूक्ष्म चर्चा सेहो अछि ।
जाहि कारणे समाजके दर्पणके रुपमे सेहो अहि कथा संग्रहके लेल जा सकैत अछि । त दोसर दिस कथा “धधकैत आगि आ फुटैत कनोजरि” मे एकटा एहन नवयुवती जे एकटा बलात्कारके अनभुव प्राप्त करबाक लेल स्वयंके बलात्कृत करबाक लेल सेहो तैयार छथि आ एहिके लेल बसक ड्राइभर खलासी, पुलिस आ विभिन्न युवकसभक बीचमे जाइ छथि ।
नव श्रृजना
परम्परागत कथासं हटि क ई एकटा अलग कथा अछि जाहिमे समाजक बहुत विषय वस्तुक बारेमे व्यक्तिक जिज्ञासा कोन प्रकारे उधेलित होइत अछि तकर वर्णन अछि । ताहिसं नवखोजी आ श्रृजक व्यक्तिके रुपमे सेहो लेखकके देखल जा सकैत अछि ।
एहि कथामे एतबहि मात्र नहि सपनाक बारेमे किछु दार्शनिक बातके चर्चा करबाक प्रयास सेहो कायल गेल अछि ताहिसं भविष्यमे जौं लेखक चिन्तन निरन्तर रखताह त ओ विशेष दर्शनयुक्त कथा सेहो लिखए सकैत अछि । ताहिके संकेत सेहो एहि कथा मादे प्रष्ट होइत अछि ।
विभेद पर प्रहार
तहिना भौजी कथामे प्रेमक द्वन्दबीच विधवा महिलाक प्रेम प्रस्तुतिसं लेखक समाजमे महिलाक अधिकारके लेल सेहो वकालत कयने अछि । जौ विदुर पुरुष दोसर विवाह कऽ सकैत अछि तऽ विधवा महिला किया नहि ?
तहिना प्रियन्कामे निक करबाक आ जीवनमे समाजक लेल किछु विशेष करबाक उत्साहसं आगू बढल बचियासभके कोन प्रकारे समाजक विकृतिके चक्र घेर लैत अछि ताहिके प्रस्तुत क हमरा आहांक समाज पर व्ययंग सेहो लेखक कथा मादे कयने छथि ।
बेटा मात्र नहि बेटियो मायबापके नामके रौशन कऽ सकैत अछि ताहि बातके वंश कथा मादे प्रस्तुत कऽ बेटा आ बेटी बीचक भेद हटेबाक लेल जोडदार ढंगसँ अपन बात के लेखक प्रस्तुत करबामे सक्षम भेल अछि ।
एहि प्रकारे देखल जाइ तऽ सुजीतक कथा संग्रह चिड़ै समाजक विभिन्न पक्षके वर्णन करएमे सर्मथ अछि आ ई चिड़ै समाजक विभिन्न पक्ष पर उड़ि रहल अछि ।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
विनीत उत्पल
१.कथा- बेसिक इंस्टिंक्ट (दोसर आ अंतिम भाग) २.