ऐतिहासिक दिनः झिझिया नृत्य महोत्सव
२०६८ साल आसीन १४ गते , नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आ जनचेतना अभियान नेपालक संयुक्त अभियानमे झिझिया महोत्सव मनाओल गेल । एहि कार्यक्रमक सभापति रहथि श्री रामभरोस कापडि भ्रमर, उद्घाटक श्री विमलेन्द्र निधि, नेपाली कांग्रेसक केन्द्रिय सदस्य एवं सभासद आ मंच संचालक श्रीअशोक दत्त ।
उद्घाटन भाषण करैत प्रमुख अतिथि श्रीविमलेन्द्र निधि कहलनि जे डाइन जोगिन प्रथा पर आधारित झिझिया मुख्यत ः महिला लोकनिक थिक । मैथिली भाषा ओ साहित्यमे संस्कृतिक संरक्षण आवश्यक अछि । एहिसं सामाजिक समरसत्ता बढैत अछि । आइ जे झिझिया नृत्य संस्कृति विलुप्तक कगार पर अछि तकरा बचयबाक ओ अस्मिताके ई जगयबाक सार्थक प्रयास थिक । ओ एहि कार्यक्रमक उद्घाटन दीप प्रज्वलित क कयलनि ।
विषय प्रवर्तनक क्रममे स्वागत भाषण करैत श्रीराम भरोस कापडि भ्रमर , नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक परिषद सदस्य, प्राज्ञ कहलनि जे झिझिया नृत्य आइ सं बारह–तेरह सय वर्ष पहिने शुरु भेल होयत । डाइन जोगिनसं बच्चा बुतरुके बचयबाक हेतु मिथिलाक महिला लोकनि द्धारा ई नृत्य होइत छल । जेकि ई हमरा लोकनिक सभ्यता संस्कृतिक अंग थिक तें आइ एकरा बचयबाक बेगरता अछि । नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानद्धारा आयोजित ई कार्यक्रम वस्तुतः अपन संस्कृतिके बचयबाक ओरियाओन थिक । आई सात गोट टीम झिझिया नृत्य प्रस्तुत करत आ एहि सभ संस्थाके कोनो ने कोनो रुपमे प्रोत्साहित करबाक एवं सम्मानार्थ पुरस्कृत करबाक अछि । विभिन्न स्थानक पुरस्कार राशि भिन्न भिन्न अछि । अंक पत्रक आधार पर क्रमश ः प्रथम, द्धितीय ओ तृतीय श्रेणीक बिजेता टीम घोषीत कयल जायत । निर्णायक मण्डलमे तीन गोट व्यक्तित्वक चयन कयल अछि –सर्वश्री डा. प्रफुल्ल कुमारसिंह मौन, डा. रेवती रमणलाल आ अयोध्यानाथ चौधरी । अंक पत्रमे पचास अंक विभिन्न क्षेत्र–वेश–भुषा मौलिक नृत्य, मौलिक गीत, घैलक बनावटि आ समग्र । जनकपुरमे एहि तरहक आयोजन पहिल थिक । ओ नेपाल प्रज्ञा प्रष्ठिानद्धारा कयल गेल काजके सविस्तार उल्लेख कयलनि । डा. राजेन्द्र प्रसाद विमल जनाओल जे तन्त्र मन्त्रक परम्परा वैदिक कालसं अछि । ई झिझिया नृत्य वैदिक ऋचासं लेल गेल अछि । ई एकटा आनुष्ठानिक यज्ञ बुझी तं थिक । एक तरहे लोक जागरणक प्रभाव थिक । डाइनक विभिन्न मुद्रा आ क्रिया–कलाप होइत अछि । मुइल बच्चाके जिया क नंगटे नाचब, नगर कोतबालके देखब अर्थात तन्त्र मन्त्रक प्रभाव कोनो ने कोनो रुपमे पड्तिे अछि । एहिसं लोक मुक्ति चाहैत अछि । समष्टि चेतनाक अन्तर्गत व्यक्ति चेतना समाहित भ जाइत अछि । शिव स्वयं अनादिक देवता छथि । परम्पराक निरंतरता तंत्र थिक । पितृपक्षमे पितरक बौआइत आत्मा सभ अबैत रहैत छथि ताहि क्षुधित आत्माक तृप्ति एहि झिझिया नृत्यमे होइत अछि । वैदिक परम्पराक निरंतरता घट नृत्यमे होइत अछि । इन्द्रियक ओ भाग जे पकडमे नहि अबैक से चेतना आ चेतनाक ओ भाग जे पकड्मे नहि अबैक से देव आ एहि दुनुक मध्य थिक तन्त्र । चेतनाक उध्र्वीकरणक लेल समाजक आवश्यकता छैक । झिझिया नृत्य बुझी त वैदिक, तान्त्रिक आ लौकिक परम्पराक समन्वित रुप थिक । एहिमे समयक अनुकुल परिष्कार आ भविष्यके देखैत वर्तमान स्तर पर विकासक रुप देबाक थिक ।
प्रो. परमेश्वर कापडिक कथन छल जे झिझिया मात्र नृत्येटामे नहि अछि आ ने गीत मे । ई जीवन सं जुडल बात थिक । तें मनुख्खक जीवन केन्द्रित ई नृत्य अक्षुण्ण रहबाक चाही ।
मंच संचालक अशोक दत्त जनाओल जे ई नृत्य महिला सशक्तिकरणक घोतक थिक । विशिष्ट अतिथि डा. प्रफुल्ल कुमारसिंह अपन आलेख प्रस्तुत करैत झिझिया नृत्यक परम्परा, विकास ओ सम्भावना पर अपन विचार प्रस्तुत करैत अतीतक कथा उदाहरणक रुपमे प्रकट कयलनि । ओ जनौलनि जे एहिमे दू तरहक भावना प्रकट होइत अछि – पहिल जे डानिके डानिपनक विरोधस्वरुप गारि पढब आ दोसर डाइनपनसं मुक्तिक बाट । सहस्र छेदबला घैलके लऽ कऽ नृत्य करव जाहिमे दीप बरैत होअय । ओ इहो स्पष्ट कयलनि जे बखरीक बकरियो डाइन होइत अछि । बाल रुच कथा ( चित्र सेन महाराजक भागिन ) माध्यमे ओ अपन बातके सिद्ध करैत एहि अनुष्ठानिक यज्ञके सामाजिक समरसताक आधार पर सिद्ध कयलनि । ओ व्यक्त कयलनि जे आलेखमे बहुत किछ झिझियाक विषयक विचारक उल्लेख अछि जे पढित भेला पर बहुत किछु शंकाक समाधान होयत ।
डा.रेवती रमणलाल जनाओल जे झिझिया नृत्य लोक पारम्परिक थिक । एहिमे महिला वर्गक सक्रियता होइत अछि । ई महिला जागरणक प्रतीक थिक आ संस्कृतिक आस्था पर्व ।
तदुपरान्त झिझिया नृत्य हेतु सात गोट टीमक प्रदर्शन भेल जाहिमे छल १. मां जानकी झिझिया टीम २. भैरव झिझिया टीम ३. जन चेतना अभियान झिझिया टीम ४.मिथिला मीडिया हाउस झिझिया टीम ५. नारी विकास केन्द्र झिझिया टीम ६.मां जानकी झिझिया टीम जानकी नगर ७. ज्वालामुखी झिझिया टीम सिनुरजोडा ।
निर्णायक मंडलद्धारा निर्णीत परिणामके घोषित कयलनि श्री रामभरोस कापडि भ्रमर सभापति जे प्रथम स्थान जन चेतना अभियान झिझिया टीम, द्धितीय भैरव झिझिया टीम आ तृतीय मिथिला मिडिया हाउस आ क्रमशः प्राप्त अंक छल १०१, ९९ एवं ९४ आ चारिटा टीमके सान्त्वना पुरस्कार सं पुरस्कृत कयल गेल । प्रथम पुरस्कार ३००० टाका, द्धितीय २००० टाका एवं तृतीय १००० टाका आ सान्त्वना पुरस्कार ५०० टाकाक छल ।
तदुपरान्त श्री रामभरोस कापडि भ्रमर लिखित भैया अएलै अपन सोराज नाटक जनचेतना अभियान मुजेलियाद्धारा मंचित भेल । एहिमे भाग लेलनि सर्वश्री राम विहारी राय–दीना, नरेश मण्डल– भद्री, सुनिल कुमार यादव–जोरावर सिंह, हरबाह–मिथुन यादव, रेविया–सुनिल राउत, लठैत–भोला मण्डल आ जयकरन, बुढी–पुष्पा यादव, कहार–सुरज मण्डल, महेश धनकार, पाश्र्व गायक–रामदेव सदा, बेचन सदा, भोला मण्डल, प्रकाश–नरेश मण्डल, ध्वनि विस्तार– संजय झा, रुप–सज्जा–भोला मण्डल, निर्देशक सुनिल कुमार यादव अछि ।
एकि कायक्रम पर टिप्पणी करैत राजेश्वर नेपाली कहलनि जे कार्यक्रमक जतेक प्रशंसा कयल जायत थोड होयत । ई बहुत पैघ काज भेल अछि । संस्कृतिके बचयबाक प्रयास भेल अछि । नाटकक सफल मंचन भेल अछि जे हृदयके छुलक अछि । सामाजिक जागरण होयत से विश्वास झलकैत अछि ।
समग्रतामे टिप्पणी करैत चन्द्रेश स्पष्ट कयल जे धर्म–अधर्म ओ अन्ध विश्वाससं जुडल तन्त्र मन्त्र पर आधारित ई झिझिया नृत्य महिला चेतनाक प्रतीक थिक । एहिमे शारीरिक ओ मानसिक स्तर पर विकास होइत अछि । ई गतिशील मुद्रामे होइत अछि । देहक नसमे शोणितक प्रवाह आ एकाग्रतामे ध्यान केन्द्रित कऽ ई नृत्य अवस्से मानसिक चेतनाके जगबैत अछि आ स्नायुतन्त्रके झंकृत कऽ स्वस्थ्य मानसिकताक विकास करैत अछि ।
ओ नाटक पर विचार केन्द्रित करैत जनाओल जे सामन्ती शोषणक विरोध स्वरुप ई नाटक सामाजिक–राजनैतिक चेतनाक संग लोक चेतनाके जगबैत अछि । वस्तुतः ई नाटक ओ लुत्ती थिक जकर पसाहीमे धु–धु जरैत सामन्ती मनोवृतिक नाश होयत आ नव उमंगमे लोक जीवनक नव संस्कार होयत । खासकऽ अभिनयकर्ता लोकनि अपन–अपन स्वभाविक ओ यथार्थ अभिनयमे रंगमंचक सार्थकता सिद्ध कयल अछि से एहि नाटकक सफलता ओ सबलता थिक । हमरा विशेषकऽ मिथुन यादव, हरबाहक अभिनय ततेक निक लागल अछि जे आनो आन कलाकार गणसं एहिसं सीखबाक थिक जे अभिनयक सजीवता मर्म स्थल धरि उतरि सकय । ओना कोनो पात्रक अभिनय ककरो सं कम नहि, सभ उपरा–उपरी । मुदा बुढी–पुष्पा यादवक अभिनयमे आरो निखार होयबाक थिक ।
श्री अयोध्यानाथ चौधरी कहलनि जे स्वाभाविकतामे पनुगैत ई नाटक वस्तुतः समाजमे लोकजागरण आनत । डा.रेवती रमणलाल एहि नाटकक भरपुर प्रशंसा कयलनि । ओ एहन–एहन नाटक खेलयबा पर जोड देलनि ।
डा. प्रफुल्ल कुमारसिंह मौन कहलनि जे भैया अएलै अपन सोराज नाटकक कथानक ओ उदेश्य पूर्णतः जीवन्त अछि । अभिनयकर्ताक अभिनयमे बुझायल जे सभ केओ स्वयं भोक्ता छथि । एहिमे सामन्तवादक प्रखर विरोध भेल अछि ।
डा. राजेन्द्र प्रसाद विमलक कथन जे ई नाटक दलित चेतनाक प्रतीक थिक । अन्र्राष्ट्रिय जगतमे एहन नाटकक मांग अछि तें एकरा अंग्रेजीमे अनुदित होयबाक चाही । संगहि ओ एहि नाटकके काठमाण्डुक गुरुकुलमे प्रदर्शन पर जोड देलनि । नाटकमे किछ एहन दृश्यक संयोजन अछि जे जीवन्तताक प्रतीक थिक आ हम ई नाटक देखि भाव विभोर भऽ गेलहु ।
अन्तमे सभापति भ्रमर जनाओल जे एहि कार्यक्रमके सम्पादित कऽ आ दर्शकक उत्साह देखि हम गौरवान्वित बोध करैत छी आ नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानसं आरो काज करबाक लेल हम संकल्पित छी ।
निष्कर्ष –
१. कार्यक्रम पूर्ण रुपेण सफल रहल ।
२.सयोसं बेसी महिलाक उपस्थिति दर्शक वृन्दमे महिला जागरणक प्रतीक बनि उभरिकऽ आयल ।
३. झिझिया नृत्यक संयोजन पहिल बेर जनकपुर की नेपाल परिसरमे भेल खासकऽ नृत्य प्रतिगागिताक रुपमे सम्पादित ।
४.ई एतिहासिक महत्वक दिन कहल जायत जे अपन अस्मिता ओ संस्कृतिक उत्थानक लेल भेल ।
५. सात गोट झिझिया टीमक उपस्थितिबोध अवस्से महिला वर्गके पहिल खेप मंचपर आयब आ अपन नृत्य प्रस्तुत करब अबस्से महिला वर्गक प्रतिनिधित्वक सुूचक बनल । खासकऽ निम्नेतर महिला वर्गक प्रतिनिधित्व होयब समाजमे नारी जागरणक प्रतीक थिक ।
६. उद्योग वाणिज्य संघक हाँल खचाखच भरल रहल । झिझिया नृत्य आ नाटक होयबा धरि दर्शकगण नहि हिलल–डोलल ।
७. भैया अएलै अपन सोराजक प्रस्तुत कैक ठाम भेल अछि । मुदा एहि ठामक प्रस्तुतिमे सजीवता ओ जीवन्तता प्रदर्शित भेल ।
८. सभ वयसक लोकके ई कार्यक्रम प्रभावित कयलक ।
९. एहिमे निम्नेतर वर्गक प्रतिनिधित्व त भेवे कयल आ विशेष कऽ ओहि वर्गक लोकके अपन समारोह जे बुझायल से सभक मोनके जीति लेलक । खासकऽ बुढ पुराणक संगहि बूढि महिला सभ सेहो खुशीमे उठि बैसल ।
१०. नाटकमे किछु विसंगति अबस्से खटकल खासकऽ संगीत पक्षक क्रमबद्धतामे, मुदा अभिनय पक्ष ओ गीतक माधुर्यमे सभटा बिला गेल ।
११. अभिनयकर्ताके आरो अभिनयके उचाई पर कलात्मकतामे लऽ जायब आवश्यक । मुदा प्रस्तुतिक सफलता निस्सन्देह सफल थिक ।
१२. कार्यक्रम सुस्थिर, सुनियोजित आ व्यावहारिक रहल ।
१३. ई सत्य थिक जे एहि नाटकक गमैया परिवेशमे जे अभिनयकर्ताद्धारा सजीवता प्रस्तुत कयल गेल अछि से प्रशंसनीय थिक ।
१४. झिझिया नृत्यमे महिला वर्ग प्रदर्शित कऽ अपन उद्गार व्यक्त कयलनि से देखिते बनैत छल । कारण नृत्यकर्मी वर्गक मनुहार स्पष्ट झलकि उठल । खासकऽ पुरस्कृत होयबाक काल महिला वर्गक उत्साह देखवायोग्य छल ।
१५. जे महिला वर्ग भाग नहि लेलनि से अगिला महोत्सवमे भाग लेबाक हेतु उत्साहित भाव प्रकट कयलनि ।
१६. समग्रतामे लोक कल्याणपरक कार्यक्रम उध्र्वमुखी भेल आ अपन विशिष्टतामे अमिट तिथि साबित केलक ।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
जवाहर लाल कश्यप (१९८१- ), पिता श्री- हेमनारायण मिश्र , गाम फुलकाही- दरभंगा।
एक टा विहनि कथा
भगवानक भाग्य
हम आ हम्मर दोस्त चौक पर चाह पिबैत रही / बात पर बात चलैत रहै / कर्म आभाग्य पर बात चललै / कर्म प्रधान विश्व रचि राखा ,जो जस करहि सो तस फल चाखा /तुलसी दासक पंक्ति कहि एकटा बुढा कर्मक प्रशंसा केलथि /
हम्मर दोस्त कहलक -एकर मतलब अहां भाग्य के नहि मानैत छी ?
नहि / बुढा कह्लथि।
दोस्त कहलक - मानयौ बा नहि , भाग्य त भगवानो के होयत छैन्ह / अपनो गाम मेएकटा हनुमान जी छथि जे पाखैर गाछ केर नीचा मे वरखा मे भीजैत, जाड़मे ठिठुरैत आगर्मी मे अपस्यांत भेल रहैत छथि / चाउर मे दुटा दाना चिनी मिला भोग लगैत छन्हि /एकटा पटना मे हनुमानजी के मन्दिर अछि जिनका सवामन लड्डु एक दिन मे भोगलागैत छैन्ह /
हुनकर गप्प सुनि सब चुप भऽ गेलाह/
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
श्यामसुन्दर शशि,जनकपुरधाम