विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

सुमित आनन्द · 2012-02-15 · अंक 100

त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन
मिथिला आ मैथिलीक विकास क्यो रोकि नहि सकैत अछि। आवश्यकता अछि मिलि कए कार्य करबाक। जे मिथिला क्षेत्रमे रहैत छथि सभ मैथिल थिकाह। ई गप्प दिनांक 10-02-2012 के यू. जी. सी. प्रायोजित राष्ट्रीय सेमिनारक उद््घाटन करैत विधान परिषद्् अध्यक्ष पं. ताराकान्त झा बजलाह। अपन अध्यक्षीय भाषणमे ल.ना. मिथिला विश्वविद्यालय केर माननीय कुलपति डॉ. एस. पी. सिंह कहलनि जे ‘‘ एकैसम शताब्दीक पहिल दशकमे मैथिलीक स्थिति आ अपेक्षा विषयपर केंन्द्रित ई सेमिनार मैथिलीक विकासमे मीलक पाथर सिद्ध होयत। प्रति कुलपति डॉ. ध्रुव कुमार मैथिली भाषा एवं संस्कृतिक प्रशंसामे कहलनि जे एतयकेर लोक बहुत उदार होइत अछि। पूर्व विधान पार्षद डॉ. दिलीप कुमार चौधरी जोर दैत कहलनि जे मैथिली अनिवार्य विषय होअए आ बच्चासभक संग संवाद मैथिली माध्यमे होयबाक चाही। विशिष्ट अतिथि डॉ. वीणा ठाकुर कहलनि जे साहित्य एवं समाजक कल्याणक हेतु भाषा एवं साहित्यकँे बचायब आवश्यक अछि। मैथिलीक वरीष्ठ साहित्यकार डॉ. भीमनाथ झा कहलनि जे मैथिली साहित्यक प्रति उदासीनता जगजाहिर अछि। भाषणमे बहुत किछु कहल जाइत अछि मुदा प्रयोगमे नहि अबैत अछि। आइ.आइ.टी. मद्रासक अंग्रेजीक प्रोफेसर डॉ. श्रीश चौधरी सेहो अपन मंतव्य देलनि। कार्यक्रमक शुभारम्भ शिल्पा,निशा एवं भावनाक द्वारा ‘जय जय भैरवि’ गायनसँ भेल। स्वागत भाषण प्रधानाचार्य डॉ. आर. के. मिश्र कयलनि आ कार्यक्रमक रूपरेखा सेमिनारक सचिव डॉ. अशोक कुमार मेहता कयलनि। उद्घाटन सत्रक समाप्ति डॉ. दमन कुमार झाक घन्यवादज्ञापनसँ भेल।
एहि कार्यक्रममे तीनू दिन मिलाय चारिगोट अकादमिक सत्र चलल जाहिमे प्रमुख वक्ता लोकनि छलाह-डॉ. महेन्द्र झा-सहरसा, डॉ. केष्कर ठाकुर-भागलपुर, डॉ. ललितेश मिश्र-मधेपुरा, डॉ. फूलो पासवान- मधुबनी, डॉ. देवेन्द्र झा-मुजफफ्रपृुर, डॉ. कमला चौधरी- मुजफफरपुर, डॉ. रमण झा- दरभंगा, डॉ. विभूति चन्द्र झा- दरभंगा, डॉ. वासुकी नाथ झा- पटना, डॉ. नीता झा-दरभंगा, डॉ. सत्यनारायण मेहता-पटना, डॉ. राजाराम प्रसाद- सहरसा, एवं डॉ. दमन कुमार झा, मधुबनी।
एकर अतिरिक्त अनेक विश्वविद्यालयसँ आयल लगभग चारि दर्जनसँ अधिक शिक्षक, जे.आर.एफ.,एवं छात्र-छात्रा लोकनि एहि राष्ट्रीय पावनिमे अपन-अपन शोधपत्रक संग विचार रखलनि जाहिमे वि. मै. विभागक छात्र-छात्रा लोकनि सेहो छलथि। विचार व्यक्त कयनिहारमे छलाह- सोनू कुमार झा, शीतल कुमारी, सोनी कुमारी, पुड्ढलता झा, अरुणा चौधरी-पटना, डॉ. शिव प्रसाद यादब-भागलपुर, बिष्णु प्रसाद मंडल, अमृता चौधरी, अर्चना कुमारी, राधा कुमारी, राम नरेश राय, निक्की प्रियदर्शिनी-भागलपुर,भाग्य नारायण झा-मधेपुरा,सुरेन्द्र भारद्वाज, श्यामानन्द शाण्डिल्य एवं अन्य।
समापन सत्रक अध्यक्षता प्रधानाचार्य डॉ. आर. के. मिश्र कयलनि तथा विशिष्ट अतिथि ल.ना.मि.वि. केर कुलानुशासक डॉ. टी. एन. झा, क्रीडा पदाधिकारी डॉ. अजयनाथ झा छलाह। संचालन डॉ. अरुण कुमार सिंह कयलनि तथा धन्यवाद ज्ञापन एवं समदाउन गायन डॉ. अशोक कुमार मेहता द्वारा भावविह््वलताक संग कय संगोष्ठीक समापन भेल।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
राजदेव मण्‍डलक
उपन्‍यास
हमर टोल
गतांशसँ आगाँ...
राति‍ जमुन भारी सन लगै छै। खट-खट अन्‍हार छै।
एते लोक कतए जाइ छै हौ?
गोपी मड़रक दुआरि‍पर बहुते टोलबैया जमा छै। ठाढ़ भेलहा सभ गप-सप कऽ रहल छै आ बैसलाहा सभ फुसराहटि‍। लोकक बीचमे गोपी मड़रक जेठका बेटा मनमा बैसल छै। बैसल नै छै बल्‍कि‍ अधहा सुनल आ अधहा जगल दै। जेना नि‍शाँमे मातल हुअए। ओंघराए कऽ खसै ले करैत छै कि‍न्‍तु ओकर जुआन स्‍त्री पाछूसँ सम्‍हारने छै। ओकरा स्‍त्रीकेँ अपना देहक कोनो सोह-सुरता नै छै। फाटल वस्‍त्र रहलाक कारणे ओकर छाती कनेक उघाड़ छै। सबहक नजरि‍ पहि‍ने ओहि‍ उघड़ल अंगसँ टकरा जाइ छै।
आगूमे दू-तीन हाथ जगह खाली छै। जइठाम जरैत लालटेनक इजोत आ कुदैत-फानैत कीड़ा-फति‍ंगा। नीमक छोट-छोट ठज्ञढ़ि‍ आ पात राखल छै।
खेलावन भगत अपना चेला-चपाटीक संगे झाड़-ॅफूंकमे लागल अछि‍। गरजि‍ कऽ मंत्र जाप करैत नीमक ठाढ़ि‍सँ बीखकेँ झाड़ि‍ रहल अछि‍।
“एगारह हाथ काय चल
बरहम दोहाय चल
सातो पुरा नाग चल
हरो-हरो बि‍संभरो
दोहाय बि‍सहारा माताक छि‍अ।”
गोपी मड़र अखने भुटाय वैद्यकेँ सोर पाड़ए गेलै। ओकर छोटका बेटा घनमा नीमक ठाढ़ि‍-डारि‍ आ लगपाँचेक मॉंटि‍ लाबैक लेल गेल छै।
लोग आपसी फुसराहटि‍ कऽ रहल अछि‍। पाछूसँ केकरो जोरगर स्‍वर आएल- “की भेल छलै हौ?”
“दुनू परानी सुतल छलै। नि‍न्न टूटलापर चि‍चि‍या कऽ कहलकै- हमरा कि‍छु काटि‍ लेलकौ। दौग कऽ आबैह जा।”
“हँ, सुनैत छि‍ऐ जे परि‍वारमे कमाउ पुत वएह टा छै।”
“खेतपर सँ थाकल-ठेहि‍आएल। खेलाक बाद सुति‍ रहलै। खाट, चौकी तँ घरमे नै छै। सि‍मसल जमीनपर सुतै छलै। साँप काटि‍ लेने हेतै।”
“हँ हौ, घरक दशा नै देखैत छहक। एक दि‍स कूड़ा-करकटक ढेरी तँ एकदि‍स जंगल-झाड़। कतौ साफ-सुथरा देखै छहक। एनामे मनुख रहतै।”
“भुटाय वैद्य की कहै छै हौ?”
“कहै छै- असगुन भऽ गेलौ। सुनै छी ने नढ़ि‍या भूकि‍ रहल छौ। जान लेबा बेमारी छौ एकरा।”
ई सुनि‍ मनमाक स्‍त्री जोर-जोरसँ कानय लगली।
“फटृट चुप, कुलछनी। बाप-बाप चि‍चि‍या रहल छेँ। सतबरती रहि‍तें तँ एना हेबे नै करि‍तौ।”
गोपी मड़रकेँ ठोर सुखि‍ गेल छै। आँखि‍मे लोर नै छै तैयो गमछासँ पोछि‍ रहल अछि‍। मनमाक स्‍त्री ठोह पाड़ि‍ कऽ कानि‍ रहल छै। गोपी मड़रक छोटका बेटा घनमाकेँ आब दुख बरदाइशसँ बाहर भऽ रहल छै। ओ चि‍चि‍या कऽ कहै छै- “हौ भैयाकेँ कहुना बचा दहक हौ सर-समाज।”
मनमाक हालति नि‍रन्‍तर बेसी खराब भेल जा रहल छै। आब ऊ घररए लगलै।
“नै बचतै शाइत आब।”‍
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
अतुलेश्वर

Suggested citation: सुमित आनन्द. “त्रि-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 100, 2012-02-15. https://www.videha.co.in/research/2012/100/त्रि-दिवसीय-राष्ट्रीय-संगोष्ठी-सम्पन्न.htm

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