मिथिला राज्य आन्दोलन आ शहीद रञ्जु झा
मिथिलाक जनमानसमे एकटा आस जागल छल जे यदि नेपालमे मिथिला राज्यक निर्माण होइत अछि तँ एकर प्रभाव भारतमे सेहो पड़त। एहि विषय पर अपन-अपन विचार आ प्रभावक बारे मे टीका-टिप्पणी भ रहल अछि । ज्ञातव्य अछि जे नेपाल मे मिथिला राज्यक विरुद्ध षडयंत्र कयला पर नेपालक मैथिल जनता एकर विरुद्ध अपन स्वर उठौलन्हि। हुनका लोकनिक पहिल डेग छल शान्तिपूर्ण ढंग सँ अपन गप्प सरकार ओ सांसद लोकनिक समक्ष राखब आ संगहि जनमानसमे एहि प्रति भावना जागरूक करब। हुनका सभक एहि प्रयासकेँ जनताक सकारात्मक सहयोग भेटब प्रारम्भ भेलासँ किछु स्वार्थी तत्त्वकेँ बहुत जोरसँ धक्का लगलनि आ तकरहि प्रतिक्रियामे विगत जानकी नवमी दिन चलि रहल शान्तिपूर्ण धरना कार्यक्रममे एक अतिवादी उग्रवादी संगठन द्वारा बम विस्फोट कएल गेल, जकर कतबो निन्दा कएल जाए, कमे होएत। हमरा जनैत ई कार्य मिथिला राज्य आन्दोलनकेँ शिथिल करबाक लेल कयल गेल छल । कारण मैथिलक विषय मे लोकक ई भावना छनि जे ओ जतेक बजैत छथि ओतेक कए नहि पबैत छथि, मुदा मिथिला राज्यक लेल चलि रहल आन्दोलनमध्य आन्दोलनी मैथिलक मानसिकता देखि स्वार्थी तत्त्वकेँ डर पैसि गेलनि, ओ सभ सोचबाक हेतु बाध्य भए गेलाह जे आइ धरि जे किछु सुनि रहल छलहुँ ओ हमरा लोकनिक भ्रम छल। हुनका सभकेँ एतबा डर पैसि गेलनि जे संघर्षक अन्तिम चरणमे पहुँचि मारि-काट पर उतरि गेलाह।
स्मरण अबैछ ओ क्षण, जखन हम बम विस्फोटक समाचार कान्तिपुर नेपाली दैनिक मे पढ़लहुँ, तँ रोइयाँ ठाढ़ भए गेल आ सोचबाक हेतु बाध्य भए गेलहुँ जे कि शान्तिपूर्ण आन्दोलनक ई गति उचित? सङहि स्मरण भए उठलाह मिथिला राज्य संघर्ष समितिक अध्यक्ष प्रा. परमेश्वर कापड़ि, जनिका फोन कए मात्र ई पूछलियैन्ह जे- ‘ई की?’ । एहनो विकट परिस्थितिमे हुनक धैर्य आ साहसपूर्ण शब्द सुनि हमर मोन किछु क्षणक लेल भावुक भए भेल, मुदा एकटा योद्धाकेँ समक्ष पएबाक गौरव बोध सेहो भेल। हुनक वक्तव्य छल- ‘ई मात्र धरना पर बैसल लोक पर कयल आक्रमण नहि छल, ई छल सम्पूर्ण मैथिल पर कयल आक्रमण। जेकर जवाब हमरा लोकनि अपन अधिकार लऽकऽ देखयबाक लेल संघर्षमे गति आनब।’ एहिना जखनि कान्तिपुर क संवाददाता आ नेपाली मैथिली साहित्यकार प्रा. श्याम सुन्दर शशि सँ, जनिका सङ हमर पारिवारिक संबंध अछि आ माँक आदेश पाबि हुनक खोज खबरि लेल, तँ ओ मात्र एतबे कहलनि- ‘जे एहि लेल शहादत दिअ पड़तैक बौआ’। एहि तरहक उक्ति सुनि हुनका लोकनिक प्रति श्रद्धा सँ माथ झुकि गेल।
सम्पूर्ण घटना आ षडयंत्र पर विचार कएलाक पश्चात हमर धारणा इएह बनल जे ई सांस्कृतिक अस्मिता समाप्त करबाक षडयंत्र छल। जगत्जननी सीताक ई भूमि युग-युगसँ श्रेष्ठ सांस्कृतिक क्षेत्र रहल अछि, इएह श्रेष्ठता किछु गोटएकेँ सह्य नहि भए रहल छनि। ओसभ एहि क्षेत्रक विरुद्ध सामाजिक आ सांस्कृतिक रूप सँ किछु नहि क सकलाह, तखन क्षुद्र राजनीतिकेँ अपनएबाक विचार कए एहि तरहक घिनाएल कार्य कएलनि। एही क्रममे वृहत्त मधेशक सपना देखा मिथिलाक नाम मिटेबाक प्रयत्न कयल गेल। एहि प्रकारक राजनीतिक षडयंत्रक बीच मिथिला अपन अस्तित्वक लेल लड़ि रहल अछि, मुदा बाँचत कि नहि ओ हम नहि कहि सकैत छी। हमर एकटा मित्र छथि मणिपुरक डा. लोंगजम आनन्द सिंह, जखनि हुनका सँ मिथिला राज्य आ मैथिली भाषाक विषयमे चर्चा कएल तँ ओ कहलनि जे – अहाँक कहनाम आ वर्तमान अध्ययनक अनुसारे हम कहि सकैत छी जे मिथिला आ मैथिलीक संग ई दूर्भाग्य भ गेलैक जे ओ जाधरि अपन स्वतंत्रता अक्षुण्ण रखने रहल ताधरि कतेको प्रदेशक भाषा, साहित्य आ संस्कृतिकेँ प्रभावित करैत रहल, मुदा जहिया सँ ओकर राजनीतिक प्रभाव क्षीण होइत गेलैक, ओ एकटा वृहत्त संरचनाक माँझमे फँसैत गेल आ आइ अपन भाषा आ क्षेत्रक अस्मिता बचेबाक लेल लड़ैत देखल जा रहल अछि। एहि दुर्भाग्यकेँ समाप्त करबाक लेल सर्वप्रथम अपन राज्यक स्थापना दिस सम्पूर्ण मैथिल लोककेँ अग्रसर होएबाक चाही।- हुनक ई कथन हमरा नेपालमे मिथिला राज्यक लेल संघर्ष क रहल मैथिल जनताक सोच मे समानता देखौलक। कहि सकैत छी जे ओ लोकनि पुनः अपन अस्मिता आ पूर्वमे मिथिलाक संग कयल गेल व्यवहार प्रति सचेष्ट भए उठलाह अछि आ सद्य:घटल घटनासभसँ आओर बेसी उर्जा प्राप्त करताह।
आइ धरि हमरा जनैत राजा शिवसिंह आ हुनक मैथिल सिपाही केँ छोड़ि केओ मैथिल मिथिला राज्यक लेल शहीद भेलाह अछि से हमरा बुझल नहि अछि। मुदा एहि बेर मैथिल जनता अपन धरती पर डटि संघर्षक मार्ग धएलनि आ ओहि यज्ञ मे अपन प्राणक आहूति तक दए देलन्हि। हम प्रत्येक शहीदक प्रति नमन व्यक्त करैत छी, ओसभ अनचिन्हार होयतहुँ चिन्हार छलाह कारण ओ सभ मैथिल छलाह, मुदा ओहि प्राण आहुति देनिहारि एकटा शहीद, जनिका हम मात्र मैथिलक रूपमे नहि, एकटा संघर्षशील कलाकारक रूपमे जनैत छलहुँ, छलीह शहीद रञ्जु झा। जनकपुर मे रहबाक समय वा कालक्रममे कखनो जयबा काल हुनका सँ भेंट निश्चय होइत छल मुदा बेसी परिचय नहि, कारण ओ एकटा नाट्यकर्मी छलीह आ हम छलहुँ एकटा शोधार्थी, जे अपन कम सँ कम शोधक समय अपन विषय सँ इत्तर जएबाक प्रयास नहि करैत रही, आर जे करैत होथु मुदा हम इएह करैत छलहुँ। मिनाप मे एकटा सशक्त महिला कलाकारक नाम छल रेखा कर्ण आ रेखा कर्णक पश्चात सभसँ लगनशील आ कर्मशील महिला कलाकार हमरा मिनाप मे देखाएल छलीह रञ्जु। हुनक विषय मे बहुत किछु एहि सँ पहिने पढ़ने छलहुँ आ सुनैत छलहुँ आ जहिया सँ शहीद भेलीह तँ आर बेशी हुनक विषय मे जानल । मुदा जखनि हम हुनक विषय मे पढ़ैत छलहुँ तँ हमर मोन मे अनायास एकटा भावना आयल छल जे एहि बेर जनकपुर जायब तँ निश्चय हुनका सँ भेंट करब, आ एकटा रंगकर्मीक जीवन पर उपन्यास लिखबाक प्रयास करब। कारण हमरा लोकनि बहुत किछु एहि दुआरे नहि क पबैत छी जे एहि लेल अर्थ चाही , व्यवस्था चाही, एहन परिस्थितिमे कोना होएत, मुदा रञ्जु मिथिला सन परम्परावादी सोचक तीर्थ स्थान मे अपन उद्देश्य आ लक्ष्य पूरा करैत रहलीह। एहि लेल हुनका कतहुँ भेटैत छलनि मान तँ कतहु अपमान। मुदा ओ एकटा उपन्यासक कथा नायिका जेकाँ डटल रहलीह, कतहु ओहि मे ब्रेक नहि, सहज-निर्मल धार जेकाँ बढ़ैत। हमरा सभक जीवनमे जखनि कठिनता अबैत अछि आ ओहि सँ लड़बामे अपनाकेँ सामर्थ्यहीन भपैत छी, तखनि एहन–एहन मैथिलक जीवनसँ ऊर्जा भेटैत अछि, ओहि समस्यासभसँ लड़बा लेल सशक्त मानसिकताक जन्म होइत अछि। जहिना सीताक चरित्र एखनहुँ हमरासभक लेल आदर्शतम रुपमे उपलब्ध अछि, ठीक तहिना रञ्जु सेहो सम्पूर्ण मिथिलाबासीक हृदयमे बसतीह। रञ्जु भौतिक रुपेँ अपन शरीरकेँ त्यागि देल, मुदा हुनक आत्मा मिथिलाक बसात, पानि, ओकर परिवेश आ लोकक आत्मा मे जीबैत रहत सदिखन। एतए डा. धीरेन्द्र क ओहि पाँतिक, जाहिमे नारीक आदर्शतम रुपकेँ प्रतिष्ठापित कएल गेल अछि, सङ शहीद रञ्जूक प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करैत छी-
नारी थिक आधार पुरुषकेर , जाहि रूपमे देखी,
जनना, भगिना, मित्र, पत्नी वा दुहिता लए पेखी।
नारी थिक पर्याय ममत्वक,सहनशीलता भारी
जते बतहपन पुरुष करैए, सहए सदासँ नारी।
सर्वंसही धरती थिक नारी, आर पुरुष आकाश,
जे वर्षण कए अपन मोनसँ उपजबैत अछि चास।
नारी पुरुषक कागज थिक जइ पर लिखइछ ओ कविता,
नारी शितल चन्द्र-ज्योत्सना रहओ ओना नर सविता।।
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