दू-पत्र : एक विश्लेषण
दू-पत्र वस्तुत: पत्रात्मक शैलीमे लिखल मैथिलीक पहिल उपन्यास थिक। मात्र दू गोट पत्रमे समाएल समग्र कथानक। मात्र दू गोट पत्रमे भारतीय नारीक निश्छल, िनर्मल, शालीन ओ प्रौढ़ चित्रांकन। पहिल पत्र अपन स्वामी सुरेन्द्रकेँ लिखने छथि श्रीमती इन्दू देवी आ दोसर पत्र एक अमेरिकन महिला जेसिका द्वारा अपन भारतीय मित्र रमेशक नामे लिखल गेल अछि। मात्र चारि गोट पात्रक प्रयोग ऐ उपन्यासक एक अलग विशेषता अछि। सुरेन्द्र िनर्विवाद रूपेँ ऐ उपन्यासक नायक छथि, आ नायिका भारतीय नारी श्रीमती इन्दू देवीकेँ सेहो कहि सकैत छी आ एक अमेरिकन महिला जेसिकाकेँ सेहो। रमेश छथि मुख्य सह-नायक। इन्दग देवीक दूर-दराजे सम्बन्धी भाए आ सुरेन्द्रक सार।
कथानक
दू गोट पत्रक माध्यमसँ जे मुख्य कथानक पाठकक मन:चेतनापर चित्र उकेरैत अछि से ई जे सुरेन्द्र अपन बाइसम वर्षक अवस्थामे पन्द्रह वर्षीय इन्दूसँ अपन पूर्ण सहमतिसँ विवाह कएने छथि, जकर माध्यस्थता आंशिक रूपेँ कएने छथि रमेश। रौराठ-सभासँ विआह निश्चित भेल छल। सुरेन्द्र इन्जीनियरिंगक चारिम वर्षक छात्र रहथि आ इन्दू नवम वर्गक छात्रा। ओना इन्दू दू वर्ष पहिनहि गामक स्त्रीगण समालक मध्य अजग्नि सन भऽ गेल रहथि मुदा ओइ सभामे दुनू भाँइ मीलि कथा स्थिर कऽ लेने रहथि। सुरेन्द्रक बिआह पूर्ण मैथिल रीतिऍं इन्दूसँ भेलनि।
इन्दू, माने श्रीमती इन्दू देवी, आब दू बच्चाक माए छथि आ सुरेन्द्र अमेरिकामे रमि गेल छथि। आब तँ नअ वर्षसँ कोनो सम्पर्क नै रहि गेल छन्हि, मात्र दू-आखर चिट्ठीक सम्पर्क छोड़ि कऽ। असह्य पीड़ासँ झामरि भऽ गेलीह अछि। बिआहक बाद दू-चारि वर्ष धरि तँ सुरेन्द्रकेँ इन्दूसँ दाम्पत्य प्रेम छलनि आ तकरहि परिणाम भेल रहनि दू गोट सखा-सन्तान मुदा तँए कि आब तँ अमेरिकाक एक गौरांगी रमणीक रंग तेनामे तेना ओझराएल छथि जे सम्बन्ध-विच्छेदक प्रस्ताव इन्दू देवीकेँ पठओने छथि। असलमे पहिल पत्र सुरेन्द्रक सम्बन्ध-विच्छेदक प्रस्तावक जबाब अछि। अपन लोक-वेद, घर आंगन, इष्ट-परिजनसँ निस्पृह भेल नअ वर्षसँ अमेरिकामे रहैत अपन जीवन, इच्छा-आकांक्षाक एकमात्र आधार, सोहाग-भागक अधिष्ठाता, सुख साम्राज्यक स्वामी, अग्नि-साक्षित पति सुरेन्द्रकेँ लिखल हुनक प्रत्यागमनक बाट तकैत, पलकक सेज सजौने, विरहाग्निमे तड़पैत श्रीमती इन्दू देवीक पत्र।
ओना जेसिका प्रभावित छथि सुरेन्द्रसँ। तहूसँ पहिने रमेशसं भेँट पहिने हुनका सुरेन्द्रसँ होइत छन्हि आ प्रभावित जे होइत छथि सेहो सुरेन्द्रहिसँ मुदा अचानक जे रमेश इण्डिया अबैत छथि तँ रमेशसँ सेाहे प्रभावित भऽ जाइत छथि। मुदा रमेशमे भारतीयता ततेक ने वेशी देखैत छथि जेसिका जे क्रमश: भारतीयतासँ प्रभावित होइत गेलीह आ रमेशसँ दूरी बनैत गेलनि। मुदा इन्द्र देवीकेँ विच्छेदक प्रस्ताव पठौलाक उपरान्त सुरेन्द्र जेसिकाक समक्ष अपन मोनक बात स्पष्ट कऽ देलनि। जेसिकासँ पहिल भेँट सुरेन्द्रकेँ जर्मन क्लासमे भेल रहनि। दुनूक आवासमे मात्र चारि ब्लाकक अन्तर रहनि। दुनू असगर रहथि। मोन मनएबाक हेतु एक-दोसराक घर आबए-जाए लागल रहथि। जेसिका सुरेन्द्रक ओहिठाम जाए भानस भात सेहो करथि, कारण, सुरेन्द्रकेँ तकर अवगति नै रहनि आ ऐ बातसँ जेसिका मिश्र रहथि। संग उठनाइ-बैसनाइ, पार्क घुमनाइ, सिनेमा देखनाइ आदि बात तँ सहजे होमए लगलनि। सुरेन्द्रक संग जीवन बितएबामे जेसिकाकेँ कोनो तरहक आपत्ति नै रहनि, से ओ मोने-मोन जनैत रहथि आ तँए जे सुरेन्द्र इन्दू देवीसँ विच्छेद आ हुनका संग सम्पर्कक प्रस्ताव स्पष्ट कऽ देने रहथिन आ संगहि हुनक सम्मति मंगने रहथिन से जेसिकाकेँ अस्वाभाविक नै लागल नहनि। जेसिका ई जनैत रहथि जे सुरेन्द्र पहिनौं भारतमे बिआह कएने छथि, संगहि सुरेन्द्रक ऐ तर्कसँ, जे आब विगत नअ वर्षसँ हुनका अपन पत्नीसँ कोनो संपर्क नै छन्हि सेहो सहमत रहथि आ सुरेन्द्रसँ सम्बन्ध स्थापित करबामे एकरा कोनोटा बाधा नै बुझैत रहथि, कारण अमेरिकी संस्कृतिमे एकर कोनो मूल्य नै छैक। मुदा रमेश जे अपन छोट-छीन पत्रक संग सुरेन्द्रक नामे लिखल इन्दू देवीक विस्तृत पत्रक अंग्रेजी अनुवाद जेसिकाकेँ पठओने रहथिन तकरा पढ़ि जेसिका किंकर्त्तव्यविमूढ़ रहथि। एखन इन्दू देवीक अंग्रेजी अनुवाद हाथमे अएलनि तँ भारतीयताक असली स्वरूपसँ अवगत भेलीह। ओहुना भारतीय आचार-बेवहार, रीति-रेवाज, धर्म-कर्म आदिसँ प्रभावित रहबे करथि।
क्रमश:
२.
डॉ॰ शशिधर कुमर “विदेह”