विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका · VIDEHA · ISSN 2229-547X

मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी अन्तर्गत लोकनायक सलहेस: चर्चा-परिचर्चा

रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’ · 2012-07-15 · अंक 110

मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी अन्तरगत लोकनायक सलहेसःचर्चा–परिचर्चा
कार्यक्रम सम्पन्न
मिथिलाञ्चल नेपालक होइक वा भारतीय क्षेत्रक जं एक गोट लोकगाथाक महानायक ककरोे जीवन चरित्र बेसी लोकमुखी, जनजनबीच चर्चित, लोकप्रिय छैक त ओ थिके लोकनायक सलहेसक । सिराहा जिल्ला अन्तर्गत महिसौथामे जन्मल सलहेसक जीवन काफी आरोह–अवरोहसं भरल छैक । विभिन्न लोकगाथा गायकसभ कथानकक विभिन्न भेदके जनसमक्ष लाओल करैत अछि । तन्त्र मन्त्र आ सिद्धिक कथासभ एहिमो भरपूर देखल जाइछ । सुगा सलहेसक गुप्तचर होइछ जे मन्त्रीक रूपमे सेहो प्रतिष्ठित छैक । हाथीक नाउँ भौरानन्द राखल गेल छैक त स्वयं सलहेसके मानिक दहसं भँमरा बनाकए मालिनीसभ चोरा क ल जाइछ । सम्भवतः एहन प्रसङ्गसभ गाथा गायकसभक मुहसं थपैत आएल भ सकैछ । मुदा एकटा बातमे सब एकमत होइछ जे सलहेसक जन्म महिसौथा, राजा कुलेश्वरक दरबारमे पहरेदारी, चोरीक आरोप, जेलचलान आ अन्तमे मालिनीद्वारा मुक्ति ... ।
ओ देवताक रूपमे दुसाध जातिमे पूजित छथि । दलित उत्थानक निमित्त सयौं वर्षपूर्व सामन्तसँ (चुहड सामन्त !) लडि क अपने छुट्टे राज्यक स्थापना आ न्यायक लेल लोकप्रियताक चरममे पहुंचैत ‘देवता’क आस्पद प्राप्त क पूजित हएब स्वयं जयबद्र्धन सलहेसक जीवन गाथाक अत्यन्त रोचक पक्ष थिक । सलहेसगाथामे एक दिश प्रेम छैक त दोसर दिश तत्कालीन मिथिलाक्षेत्रमे उत्तरी आक्रमणकारीसभसं एकर रक्षाक चुनौती सेहो छैक । सामन्तसभसं समाजके जोगएबाक गहन जिम्मेबारी थिक त परनिर्भरतासं मुक्त भ अपन सैन्यशक्तिक विकास क अपन सत्ताक स्थापनाक गहन लक्ष्य सेहो । अदभूत पराक्रमी छलाह सलहेस । सब चुनौतीसभके सामना करैत अन्ततः अपन अभियानमे सफल भर महिसौथाके राजधानी बनौलनि ।
नेपाली भूमिक यी वीर लोकनायक, मुदा आइधरि शिष्ट साहित्यक संरक्षकसभद्वारा उपेक्षित रहैत आएल अछ् ि। किए एना भेल त , तकर एक्केटा कारण देखि पडैछ ,दुसाधसभक कुलदेवता प्रति किए अनावश्यक उत्सुकता ! अन्य जाति वा वर्गमे अस्तित्वे नहि रहल कविलोकनि, साहित्यकारसभक जथाभावी रचनासभ उत्खनन क क नयाँ–नयाँ इतिहास रचनिहारसभ सिराहा जिल्लाक चौहद्दीमे अजन सौर्यपूर्ण जीवन बितौनिहार महानायक सलहेस जानाजानी उपेक्षित कएल गेलाह आ परिणमतः आइ हुनका बारेमे लोककण्ठमे बाचल अबैत गाथासभ आ तकरा मञ्चमे प्रदर्शित करबला नाचसभ विलुप्त भ रहलैक अछि ।
इएह कठिन अवस्थाके ध्यानमे राखि सलहेसक जीवनवृत्तमे केन्द्रित भए एकटा बृहत् गोष्ठी करबाक विचार आइसं तेरह्र महिना पहिने आएल आ नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठानक संस्कृति विभाग अन्तर्गत एकरा सामेल कएल गेल ।
हम एकर कार्ययोजना बनबैत काल भारतीय मर्मज्ञ विद्वान्सभके एउटा पैनल बनौलहँुँ, जे सभ सलहेसक सन्दर्भमे निरन्तर लिखैत आबि रहल छथि । नेपालक किछु विद्वानसभकें सेहो आग्रह कएल । अन्ततः नेपाल आ भारतसं चारि चारि गोट कार्यपत्र तय भेल आ पत्राचार÷सम्पर्क कएल गेल । एकर कार्यक्रम स्थल लहान (सिराहा) राखल गेल, जत्तसं सलहेसक क्रिडाभूमिसभ लगेमे अवस्थित छैक । समय २०६९ साल बैशाख २० आ २१ गते राखल गेल । सब तैयारीपूर्ण भ गेलाक बाद बैशाख १८ गते जनकपुरमे दुखद घटना भेल, बम बिस्फोटमे तत्काल चारगोटेक आ बादमे एक गोटेक मिला पाँच गोटेक मृत्यु भ गेल । सबदिश शोकक लहरि, आक्रोश देखल गेल । बन्द, हडताल सुरू भेल । परिणामतः कार्यक्रम अन्तिम क्षणमे स्थगित कर पडलैक ।
फेर दोसर तिथि २०६९ साल असार ४, ५ गते राखल गेल । देहकें डाहैत गर्मीमे भारतीय एक दर्जन विद्वत् वर्ग आ नेपालक तर्पmसं सेहो एक दर्जन विद्वत् वर्गसभक समुपस्थितिमे उक्त गोष्ठी लहानमे दश बुँदे लहान घोषणापत्र जारी करैत सम्पन्न भेल अछि । एहिगोष्ठीमे अपन आर्थिक सहयोग द्वारा वी.पी. कोइराला भारत–नेपाल प्रतिष्ठान पैघ काज कएलक जकर प्रशंशा समस्त उपस्थित सहभागी लोकनि कएलनि ।
अखाढ ४ गते सूचना तथा सञ्चार मन्त्री राजकिशोर यादव उद्घाटन कएलनि । हुनक हाथसं नेपाल प्रज्ञा–प्रतिष्ठान द्वारा प्रकाशित “आँगन” पत्रिकाक चारिम अंक सलहेस विशेषक आ रामभरोस कापडि ‘भ्रमर’क नवीनतम कृति ‘समय–सन्दर्भ’क विमोचन कएलनि । तहिना सलहेस लोकनाचकें मञ्चीय रूपमे जिवन्त राखमे सिराहाक शैनी पासवास आ सलहेस गायनकें अपन कण्ठमे बचा क रखनिहार मधुरी दासकें दोसल्ला आ प्रशंसा–पत्र पदान क सम्मान कएल गेल छल । कार्यक्रममे सभापतित्व करैत संयोजक ‘भ्रमर’ विषय–प्रवेशक क्रममे लोकनायक सलहेसक चित्र अंकित टिकट प्रकाशन करबाक आ चोहरबा चौकमे चूहड मलक प्रतिमा स्थापनाक माग कएलनि, जकरा मन्त्री यादव सहर्ष स्वीकार करैत नेपाल सरकारसं होबबला सम्पूर्ण सहयोग उपलब्ध करएबाक विश्वास सेहो दिऔलनि ।
कार्यक्रममे कार्यपत्र आ टिप्पणीसब अतिरिक्त संयोजक ‘भ्रमर’द्वारा विद्वत्सभक बीच चारिबुँदे अवधारणापत्र प्रस्तुत कएल गेल छल, जाहिमे व्यापक छलफल आ निष्कर्षक लेल चारिगोट समूह बनाओल गेल । जे ५ गते स्थलगत स्थलसभक भ्रमण क समापन बैठकमे विभिन्न सुझावसभकसंग प्रस्तुत कएने छल । स्थलगत भ्रमणमे सलहेस पूmलबारीक विचित्र रचना प्रक्रियासं अवगत भेलाह त सलहेस गाथामे निके महत्वक साथ आएल कमल दहमे कमल लोप भ क सेहो पर्यटकीय आकर्षण यथावत रहेल बात सब विद्वान्सभ महसुस कएने छलाह ।
गोष्ठी कम कार्यशाला गोष्ठीमे अन्तमे दश बुँदे लहान घोषणा–पत्र जारी कएल गेल छल । घोषणापत्रमे जिल्ला अथवा अन्य भागमे रहल सलहेस मन्दिर (गहबर) सलहेस फुलबारी, मानिक दह, पकडिया गढ, कमल दह, उत्तरवाहिनी, कमला आ नन्द महिरी सन स्थलसभक संरक्षण, सम्बद्र्धन करब जरुरी अछि । सलहेस गाथामे वर्णित स्थलसभ नेपालेमे अवस्थित भेल हएबाक कारणे एकर संरक्षण–सम्बद्र्धनक दायित्व सरकारक अछि । एहना स्थलसभक विकासक पहल हएबाक चाही ! स्थलसभक उत्खनन हएबाक चाही । सलहेस पूmलबारीके विश्वसम्पदा सूचीमे सूचीकृत कएल जाए्, एकरा सिमसार क्षेत्रक रूपमे मान्यता देल जाए सन सन् मांग कएअ गेल अछि ।
अन्य मागमे सलहेस प्रतिष्ठानक गठन हाए, सलहेस अंकित डाक टिकटक प्रकाशन होए्, सलहेस गाथासँग जोडल ठामसभकें सम्पर्क मार्ग बनाओल जाए्, सलहेस पूmलबारी निकट राजमार्गमे सलहेसक मूर्ति आ भव्यद्वारक निर्माण होए्, सलहेसकें राष्ट्रिय विभूति घोषित कएल जाए आ संग्रहालयक स्थापना हाए ।
सलहेस सम्बन्धी एना कय वैज्ञानिक ढंगसं गोष्ठीक आयोजन प्रथम सुरुवात भेल हएबाक बात बथबैत उपस्थित नेपाल–भारतक विद्वतजनसभ अनुसन्धानक अभाव रहलाक कारणें एकरा निरन्तरता देल जएबाक चाहीे ।
दूदिना गोष्ठीमे भारतसं डा. रमानन्द झा ‘रमण’, डा. वुचरु पासवान, डा. कमलकान्त झा, डा. भुवनेश्वर गुरमैता, चन्द्रेश, डा. मोहित ठाकुर, पंचानन मिश्र आदि छलाह त नेपालक दिशसं डा. रामदयाल राकेश, पुरातत्वविद् तारानन्द मिश्र, प्राज्ञ रमेशरञ्जन झा, पूर्व सांसद नथुनी सिंह दनुवार, डा. पशुपतिनाथ झा, प्रा. परमेश्वर कापडि, डा. रेवतीरमण लाल,गोपाल झा आदि विद्वानसभक सहभागिता छल ।
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
अतुलेश्‍वर

Suggested citation: रामभरोस कापड़ि ‘भ्रमर’. “मैथिली लोक संस्कृति संगोष्ठी अन्तर्गत लोकनायक सलहेस: चर्चा-परिचर्चा.” Videha — First Maithili Fortnightly eJournal, issue 110, 2012-07-15. https://www.videha.co.in/research/2012/110/मैथिली-लोक-संस्कृति-संगोष्ठी-अन्तर्गत-लोकनायक-सलहेस-चर्चा-21b80f86c3.htm

मूल विदेह अंक / Original issue